ADVERTISEMENT
Friday, July 31, 2026
No Result
View All Result
  • Login
  • Register
No Result
View All Result
UB INDIA NEWS
No Result
View All Result

ओपेक में दरार: भारत जैसी अर्थव्यवस्थाओं के लिए नए दरवाजे खोल सकती है ‘तेल की धार’

UB India News by UB India News
May 1, 2026
in अन्तर्राष्ट्रीय, कारोबार
0
ओपेक में दरार: भारत जैसी अर्थव्यवस्थाओं के लिए नए दरवाजे खोल सकती है ‘तेल की धार’
  • Facebook
  • X
  • WhatsApp
  • Telegram
  • Email
  • Print
  • Copy Link

ऐसे वक्त में, जब भू-राजनीतिक तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य पर अनिश्चितता पहले से ही तेल बाजार को अस्थिर बनाए हुए है, तब यूएई का ओपेक से बाहर निकलने का निर्णय वैश्विक ऊर्जा राजनीति में एक अहम मोड़ है। लेकिन यह स्थिति भारत जैसी अर्थव्यवस्थाओं के लिए नए दरवाजे खोल सकती है।

संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) का खाड़ी के तेल उत्पादक देशों के संगठन ओपेक और व्यापक ओपेक समूह से अलग होने का निर्णय सिर्फ एक सदस्य देश का प्रस्थान नहीं, बल्कि वैश्विक ऊर्जा राजनीति में एक अहम मोड़ है। यह उस तेल-व्यवस्था में आ रही दरारों का भी संकेत है, जो दशकों से दुनिया में कच्चे तेल की कीमतों को नियंत्रित करने में केंद्रीय भूमिका निभाती आ रही है। यह फैसला ऐसे समय आया है, जब पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव, होर्मुज जलडमरूमध्य पर अनिश्चितता और वैश्विक मुद्रास्फीति पहले से ही तेल बाजार को अस्थिर बनाए हुए है। जाहिर है कि इससे वैश्विक तेल कीमतों, ऊर्जा सुरक्षा और आयातक देशों की अर्थव्यवस्थाओं पर असर से जुड़े कई सवाल उठ रहे हैं।

RELATED POSTS

कैसे बिहार में बर्बाद हुए उद्योग, सरकार का नया प्लान क्या बदल पाएगा प्रदेश की तस्वीर?

बियाडा-उद्योग विभाग के समन्वय से प्रोजेक्ट पूरा होगा : सीएम

दरअसल, यूएई लंबे समय से ओपेक की उत्पादन-सीमा नीति से असहज था। उसने पिछले कुछ वर्षों में अपने तेल उत्पादन ढांचे में भारी निवेश किया है, लेकिन ओपेक की उत्पादन सीमा नीति के चलते वह अपनी पूरी क्षमता का उपयोग नहीं कर पा रहा था और यही असंतोष उसके अलग राह चुनने का कारण माना जा रहा है। ओपेक से बाहर होने पर अब वह इसकी शर्तों से मुक्त होकर खुद ही यह तय कर सकता है कि उसे कब, किसे और कितना तेल बेचना है।

चूंकि, यूएई ओपेक का तीसरा सबसे बड़ा उत्पादक सदस्य देश था और समूह के उत्पादन में करीब 12 फीसदी का योगदान करता था, ऐसे में, उसका बाहर निकलना ओपेक की आपूर्ति क्षमता को प्रभावित जरूर करेगा। लेकिन इसका एक दूसरा पहलू भी है। अगर ओपेक की शर्तों से मुक्त यूएई वैश्विक तेल बाजार को अतिरिक्त आपूर्ति करता है, तो इससे तेल की कीमतों में कमी आ सकती है। यह स्थिति भारत जैसे उन देशों के लिए विशेष तौर पर फायदेमंद है, जो ऊर्जा के आयात पर निर्भर हैं।

गौरतलब है कि भारत अपने ऊर्जा सुरक्षा संबंधी लक्ष्यों से निपटने के लिए लंबे समय से ओपेक देशों से तेल के उत्पादन में बढ़ोतरी करने की मांग करता रहा है। इसकी कुल तेल जरूरतों का तकरीबन 40 फीसदी हिस्सा ओपेक देशों पर निर्भर है और कुल तेल आयात का करीब दसवां हिस्सा यूएई से होता है। ऐसे में, अगर ओपेक की पकड़ ढीली होने से वैश्विक तेल बाजार अधिक प्रतिस्पर्धी बनता है, तो भारत को भी अपना आयात बिल घटाने, चालू खाते पर दबाव कम करने और महंगाई को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, यह देखते हुए कि वैश्विक ऊर्जा बाजार कभी भी स्थिर नहीं रहता, वह निरंतर भू-राजनीतिक, आर्थिक और पर्यावरणीय बदलावों से प्रभावित होता रहता है, बेहतर होगा कि भारत समेत सभी आयातक देश इस अवसर का उपयोग अपनी ऊर्जा निर्भरता को कम करने में करें।

 

  • Facebook
  • X
  • WhatsApp
  • Telegram
  • Email
  • Print
  • Copy Link
UB India News

UB India News

Related Posts

कैसे बिहार में बर्बाद हुए उद्योग, सरकार का नया प्लान क्या बदल पाएगा प्रदेश की तस्वीर?

कैसे बिहार में बर्बाद हुए उद्योग, सरकार का नया प्लान क्या बदल पाएगा प्रदेश की तस्वीर?

by UB India News
July 31, 2026
0

कभी बिहार की पहचान उसकी चीनी और पेपर मिलों से होती थी. इन फैक्ट्रियों की चिमनियों से उठता धुआं सिर्फ...

बियाडा-उद्योग विभाग के समन्वय से प्रोजेक्ट पूरा होगा : सीएम

बियाडा-उद्योग विभाग के समन्वय से प्रोजेक्ट पूरा होगा : सीएम

by UB India News
July 31, 2026
0

बिहार को बड़ा औद्योगिक केंद्र बनाने की दिशा में राज्य सरकार गुरुवार को एक कदम और आगे बढ़ी। मुख्यमंत्री सम्राट...

अमेरिका का ईरान के 10 से ज्यादा शहरों पर हमला……….

अमेरिका का ईरान के 10 से ज्यादा शहरों पर हमला……….

by UB India News
July 31, 2026
0

जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य अड्डे पर ईरानी मिसाइल हमले के एक दिन बाद अमेरिका ने ईरान पर बड़े पैमाने पर...

मनमोहन सिंह को उनके निधन के 19 महीने बाद क्लीन चिट मिली है, वह क्या था?

मनमोहन सिंह को उनके निधन के 19 महीने बाद क्लीन चिट मिली है, वह क्या था?

by UB India News
July 30, 2026
0

सुप्रीम कोर्ट ने 2005 के चर्चित कथित कोल ब्लॉक आवंटन मामले में पूर्व प्रधानमंत्री दिवंगत डॉ. मनमोहन सिंह को बड़ी...

ट्रंप के लिए गले की हड्डी बना ईरान युद्ध- नाटो ने छोड़ा साथ और अमेरिका में जनता खफा !

ट्रेड डील के बीच क्यों बौराये डोनाल्ड ट्रंप?

by UB India News
July 29, 2026
0

भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील को लेकर बातचीत चल रही है. कुछ मुद्दों पर सहमति न बन पाने...

Next Post
कल है अंतिम चरण का मतदान , ममता बनर्जी की सरकार होगी धराशायी या बीजेपी फहराएगी विजय पताका !

पांच राज्यों में किसकी बन रही सरकार? बंगाल में पहली बार बीजेपी की सरकार !

बिहार में मंत्रिमंडल विस्तार की अटकलें तेज..

सम्राट कैबिनेट की बैठक में 64 एजेंडों पर लगी मुहर, कांग्रेस के जमाने में बने दो संस्थानों का बदला नाम ...

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

  • front
  • Home
Contect Us - ubindianews@gmail.com

© 2020 ubindianews.com - All Rights Reserved ||

Welcome Back!

Login to your account below

Forgotten Password? Sign Up

Create New Account!

Fill the forms below to register

All fields are required. Log In

Retrieve your password

Please enter your username or email address to reset your password.

Log In
No Result
View All Result
  • front
  • Home

© 2020 ubindianews.com - All Rights Reserved ||

Send this to a friend