भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील को लेकर बातचीत चल रही है. कुछ मुद्दों पर सहमति न बन पाने की वजह से अभी समझौता सिरे नहीं चढ़ पाया है. इसी बीच अब अमेरिकी सीनेट के एक नए कदम से इस डील पर ग्रहण लगता नजर आ रहा है. अमेरिकी सीनेट ने रूस के एनर्जी सेक्टर पर कड़े प्रतिबंध लगाने वाले विधेयक को आगे बढ़ाया है. अगर यह विधेयक पास हो जाता है तो राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को भारत और चीन जैसे देशों पर 100% तक टैरिफ लगाने का अधिकार मिल जाएगा. इस बिल की रूपरेखा दिवंगत सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने तैयार की थी.
बहुत से लोगों का मानना है कि ट्रंप भारत सहित कुछ देशों के साथ अपनी शर्तों पर ट्रेड डील करना चाहते हैं. इसीलिए वह टैरिफ के इस हथकंडे को दबाव बनाने के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं. और यह पहली बार नहीं है. भारत अमेरिका के बीच ट्रेड डील वार्ता शुरू होने के बाद ट्रंप कई बार इस हथियार को आजमा चुके हैं. लेकिन, भारत ऐसी किसी भी डील पर साइन करने से साफ मना कर चुका है, जो उसके हितों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले. यही वजह है कि डोनाल्ड ट्रंप बौराये हुए हैं टैरिफ लगाने की धमकियां दे रहे हैं.
कब-कब मिली टैरिफ लगाने की धमकियां
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपने आक्रामक टैरिफ कार्ड का इस्तेमाल कर भारत पर दबाव बनाने की कोशिश पिछले साल से करते आ रहे हैं. फरवरी 2025 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अमेरिका यात्रा के दौरान दोनों देश ट्रेड डील पर वार्ता आगे बढ़ाने को सहमत हुए थे. भारत जल्दबाजी में डील करने के मूड में नहीं है. इसी से ट्रंप चिढ़े हए हैं.
- 2 अप्रैल 2025 को पहला झटका: पिछले साल दो अप्रैल को ट्रंप ने अपने तथाकथित “Liberation Day” टैरिफ की घोषणा की. उन्होंने भारत पर 27% रेसिप्रोकल (Reciprocal) टैरिफ लगाने का ऐलान किया. हालांकि, बातचीत की गुंजाइश बनाए रखने के लिए बाद में इस फैसले को 90 दिनों के लिए टाल दिया गया.
- 30 जुलाई 2025: ट्रेड डील पर भारत के सख्त रुख के बाद ट्रंप ने फिर आक्रामक रुख अपनाया. उन्होंने ऐलान किया कि 1 अगस्त 2025 से भारत पर 25% टैरिफ लागू कर दिया जाएगा. इतना ही नहीं, उन्होंने रूस से तेल और रक्षा उपकरणों की खरीद जारी रखने पर भारत पर अतिरिक्त पेनल्टी लगाने की धमकी दी.
- जुलाई 2026: एक तरफ जहां ट्रेड डील पर बातचीत की मेज सजी रही, वहीं दूसरी तरफ ट्रंप प्रशासन ने दबाव की रणनीति जारी रखते हुए भारत समेत कई देशों पर नए टैरिफ की घोषणा की. भारत पर 10 फीसदी टैरिफ लगाया गया.
अब 100 फीसदी टैरिफ का खतरा
रशियन एनर्जी पर नकेल कसने को लिंडसे ग्राहम द्वारा तैयार किए गए इस विधेयक को अमेरिकी सीनेट में जोरदार समर्थन मिला है. सीनेट में इस विधेयक के पक्ष में 86 सांसदों ने वोट दिया, जबकि सिर्फ 12 ने इसका विरोध किया. इस प्रस्तावित कानून का मुख्य उद्देश्य रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच रूस की अर्थव्यवस्था और उसके ऊर्जा क्षेत्र की कमर तोड़ना है. इस विधेयक के पास होने पर ट्रंप को भारत, चीन और यूरोपीय संघ के उन देशों पर 100% तक टैरिफ थोप सके जो रूस से कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस खरीद रहे हैं.
जहां एक तरफ भारत एक संतुलित ट्रेड डील के जरिए द्विपक्षीय व्यापार को नई गति देने की कोशिश कर रहा है, वहीं ट्रंप द्वारा इस विधेयक को खुला समर्थन देना उनकी पुरानी ‘टैरिफ कूटनीति’ का हिस्सा माना जा रहा है. लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या यह 100% टैरिफ वाकई रूस पर नकेल कसने के लिए है या सिर्फ भारत और चीन पर दबाव बनाकर ट्रेड डील करने की एक चाल है.
अमेरिकी भी चिंतित
इस विधेयक को अंतिम कानून बनने से पहले अभी कई चरणों से गुजरना होगा. सीनेट में अंतिम वोटिंग के बाद इसे सितंबर में हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में पेश किया जाएगा. इस बिल का अमेरिका में भी विरोध हो रहा है. हाउस फॉरेन अफेयर्स कमेटी के डेमोक्रेटिक सदस्य ग्रेगरी मीक्स ने कहा कि यदि भारत और यूरोपीय सहयोगियों पर 100% टैरिफ लगाया गया, तो अमेरिका में आयातित सामान अत्यधिक महंगे हो जाएंगे और इसका सीधा वित्तीय बोझ अमेरिकी परिवारों व उपभोक्ताओं पर ही पड़ेगा.







