दिल्ली पुलिस ने जंतर मंतर हिंसा में पैलेट गन के इस्तेमाल से इनकार किया है. पुलिस के मुताबिक, डीसीपी ने पैलेट गन का आदेश नहीं दिया और न ही आरएएफ ने इनका प्रयोग किया. पुलिस ने प्रदर्शन के आयोजकों पर भीड़ नियंत्रण में लापरवाही और निर्धारित क्षमता से अधिक भीड़ जुटाने का आरोप लगाया है. विपक्ष इस मुद्दे पर सरकार से जवाब मांग रहा है.
जंतर मंतर हिंसा से जुड़ी एक बड़ी अपडेट सामने आई है. दिल्ली पुलिस के मुताबिक, पैलेट गन का आदेश नई दिल्ली के डीसीपी सचिन शर्मा ने नहीं दिया, न ही इनके साथ जो RAF की कंपनी थी, उन्होंने पैलेट गन चलाई. दिल्ली पुलिस के मुतबिक, एक फॉर्मेट होता है जब ऐसे कॉल होते हैं तो संबंधित कंपनी आउटसोर्स फोर्स इलाके के डीसीपी के पास आती है.
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उन्होंने कहा कि इस तरह के डिसीजन या तो ऐसी सिचुएशन से पहले या बाद में लिए जाते हैं. सिचुएशन के हिसाब से सडन फैसले फील्ड में लिए जाते हैं, बाद में पेपर वर्क देखते हैं. पहले डीसीपी ब्रीफ करते हैं. ऐसा आंदोलन है. ऐसी मार्च कॉल है. जरूरत पड़ने पर क्या-क्या एक्शन लेने हैं, उसपर साइन कराते हैं, जैसे टियर गैस के लिए अलग ऑप्शन, लाठी, बेरिगेट्स उनपर क्लिक करना होता है.
‘डीसीपी ने जिस पर साइन किए वो नॉर्मल फॉर्मेट थे’
हालांकि, डीसीपी ने जिन फॉर्मेट पर साइन किए वो नॉर्मल फॉर्मेट थे. पैलेट गन का नहीं था. साथ ही डीसीपी का कहना है क्या ऑर्गेनाइजर की कोई जिम्मेदारी नहीं बनती? अभिजीत के बिहाफ पर सौरभ दास ने परमिशन ली. उन्हें बताया गया आपके वॉलिंटियर्स चाहिए, उन्हें बार बार कहा गया कोई जवाब नहीं आया. इसके अलावा क्राउड कंट्रोल करने के लिए क्या किसी स्पीकर की व्यवस्था सीजेपी ने की?
क्राउड कंट्रोल के लिए आखिरकार पुलिस ने ही अपने वॉलेंटियर्स आंदोलनकारियों के बीच भेजे, जो रिकवेस्ट करते थे कि आप पब्लिक बवाल न करे. ये जगह इतने लोगों के लिए थी ही नहीं. 1000 लोगों की कैपेसिटी है, 5000 से ज्यादा लोग जब आए इनको रामलीला मैदान जाने के लिए कहा गया पर नहीं माने. दिल्ली पुलिस के सूत्रों के मुताबिक, ऑर्गेनाइजर की तरफ से तमाम लापरवाही हुई है.
प्रोटेस्ट में पैलेट गन से आठ गोलियां चलाने का दावा
इससे पहले एक खबर आई थी, जिसमें ये दावा किया जा रहा था कि आरएएफ ने 20 जुलाई के प्रदर्शन के दौरान पैलेट गन से आठ गोलियां चलाई थीं. मगर दिल्ली पुलिस ने आधिकारिक तौर पर कहा है कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पैलेट गन के इस्तेमाल के दावे पूरी तरह झूठे और भ्रामक हैं. सीआरपीएफ और आरएएफ ने अब तक इस मुद्दे पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है. बता दें कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पैलेट गन के इस्तेमाल को लेकर विवाद खड़ा हो गया है. विपक्ष इस मुद्दे पर सरकार को घेर रहा है और संसद में गृह मंत्री अमित शाह से बयान देने की मांग कर रहा है.







