लोकसभा में लंबी चर्चा के बाद एंटी पेपर लीक बिल को पास कर दिया गया है. दरअसल दो दिन तक लोकसभा में इस बिल पर चर्चा हुई. चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ही ओर से अपने-अपने तर्क दिए गए. जहां विपक्ष ने इस बिल पर चर्चा के दौरान कई सवाल खड़े किए तो वहीं सत्ता पक्ष ने इन सवालों का जवाब देकर चर्चा को पूरा किया. वहीं लोकसभा स्पीकर ने दोपहर 3 बजे बाद इस बिल पर चर्चा पूरी होने के बाद वोटिंग करवाई. वोटिंग के बाद इस बिल को सर्वसम्मति से लोकसभा में पास किया गया.
इस बिल का उद्देश्य प्रश्नपत्र लीक, संगठित नकल, परीक्षा माफिया और भर्ती/प्रवेश परीक्षाओं में होने वाली धांधली पर पहले से अधिक कठोर कार्रवाई करना है। यह विधेयक 2024 के कानून को और सख्त बनाता है।
देश में पिछले कुछ वर्षों के दौरान प्रतियोगी परीक्षाओं में प्रश्नपत्र लीक, संगठित नकल और भर्ती परीक्षाओं में धांधली के मामलों ने लाखों युवाओं का भविष्य प्रभावित किया है। विशेषकर NEET सहित कई परीक्षाओं में सामने आए विवादों के बाद परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्न उठे। इसी पृष्ठभूमि में केंद्र सरकार ने The Public Examinations (Prevention of Unfair Means) Amendment Bill, 2026 लोकसभा में प्रस्तुत किया है, जिसका उद्देश्य परीक्षा माफिया पर कठोर कार्रवाई कर युवाओं का विश्वास पुनः स्थापित करना है।
प्रस्तावित संशोधन के तहत परीक्षा में अनुचित साधनों का उपयोग करने या प्रश्नपत्र लीक जैसे अपराधों में शामिल व्यक्तियों के लिए सजा को पहले की तुलना में काफी कठोर बनाया गया है। अब दोषी पाए जाने पर 5 से 10 वर्ष तक की कैद और 50 लाख रुपये तक जुर्माने का प्रावधान प्रस्तावित है। यदि किसी संगठित गिरोह या परीक्षा माफिया की संलिप्तता पाई जाती है, तो उसके लिए 7 से 10 वर्ष की जेल तथा कम से कम 10 करोड़ रुपये के जुर्माने का प्रावधान किया गया है।
विधेयक की एक महत्वपूर्ण विशेषता परीक्षा संचालन से जुड़ी एजेंसियों और सेवा प्रदाता कंपनियों की जवाबदेही तय करना भी है। यदि कोई सेवा प्रदाता संस्था प्रश्नपत्र लीक या अन्य अनियमितताओं में दोषी पाई जाती है, तो उस पर 5 करोड़ रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकेगा तथा उसे 8 वर्षों तक सार्वजनिक परीक्षाओं से संबंधित कार्यों से प्रतिबंधित किया जा सकेगा। यह प्रावधान स्पष्ट संदेश देता है कि परीक्षा प्रक्रिया में शामिल प्रत्येक संस्था को अपनी जिम्मेदारी गंभीरता से निभानी होगी।
केवल कठोर दंड ही नहीं, बल्कि त्वरित न्याय सुनिश्चित करने पर भी इस संशोधन में विशेष बल दिया गया है। सरकार को स्पेशल टास्क फोर्स (STF) गठित करने का अधिकार दिया गया है, जो परीक्षा संबंधी अपराधों की जांच करेगी। साथ ही, जांच 60 दिनों के भीतर पूरी करने, राज्यों में विशेष फास्ट ट्रैक अदालतें स्थापित करने, आरोपपत्र दाखिल होने के बाद शीघ्र सुनवाई कराने तथा विशेष लोक अभियोजकों की नियुक्ति का भी प्रावधान किया गया है। इन उपायों का उद्देश्य वर्षों तक लंबित रहने वाले मामलों का शीघ्र निपटारा सुनिश्चित करना है।
हालांकि, केवल कानून को कठोर बनाना पर्याप्त नहीं होगा। परीक्षा प्रणाली की सुरक्षा के लिए डिजिटल निगरानी, प्रश्नपत्रों की सुरक्षित वितरण व्यवस्था, साइबर सुरक्षा, परीक्षा केंद्रों की जवाबदेही और तकनीकी सुधार भी समान रूप से आवश्यक हैं। यदि इन सुधारों को प्रभावी ढंग से लागू किया जाता है, तो परीक्षा माफिया की गतिविधियों पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सकता है।
कुल मिलाकर, The Public Examinations (Prevention of Unfair Means) Amendment Bill, 2026 देश की सार्वजनिक परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी, निष्पक्ष और विश्वसनीय बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। अब इसकी वास्तविक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि कानून का क्रियान्वयन कितना प्रभावी और निष्पक्ष होता है। यदि प्रस्तावित प्रावधान सख्ती से लागू किए गए, तो करोड़ों युवाओं के भविष्य की सुरक्षा और योग्यता आधारित चयन प्रणाली को मजबूती मिल सकती है।
प्रमुख प्रावधान (Key Highlights)
1. नकल या पेपर लीक करने वाले व्यक्ति पर कड़ी सजा
- पहले: 3–5 वर्ष की जेल और ₹10 लाख तक जुर्माना।
- अब प्रस्ताव: 5–10 वर्ष की जेल और ₹50 लाख तक जुर्माना।
2. परीक्षा कराने वाली कंपनियों (Service Providers) पर बड़ी कार्रवाई
- जुर्माना ₹1 करोड़ से बढ़ाकर ₹5 करोड़ तक।
- दोषी पाए जाने पर 8 वर्ष तक किसी भी सार्वजनिक परीक्षा से प्रतिबंध (पहले 4 वर्ष)।
3. परीक्षा माफिया / संगठित अपराध पर और कठोर दंड
- न्यूनतम 7 वर्ष तथा अधिकतम 10 वर्ष की जेल।
- कम से कम ₹10 करोड़ का जुर्माना।
4. विशेष जांच दल (Special Task Force)
- केंद्र सरकार को Special Task Force (STF) बनाने का अधिकार होगा, जो पेपर लीक और अन्य परीक्षा अपराधों की जांच करेगी।
5. 60 दिनों में जांच पूरी करना अनिवार्य
- जांच एजेंसियों को दो महीने (60 दिन) के भीतर जांच पूरी करनी होगी।
6. फास्ट ट्रैक कोर्ट
- प्रत्येक राज्य और केंद्रशासित प्रदेश में Special Fast Track Court नामित की जाएगी।
- उद्देश्य है कि ऐसे मामलों का शीघ्र निपटारा हो।
7. विशेष लोक अभियोजक (Special Public Prosecutor)
- हर राज्य/केंद्रशासित प्रदेश को इन मामलों के लिए विशेष लोक अभियोजक नियुक्त करना होगा।
यह कानून किन परीक्षाओं पर लागू होगा?
2024 के कानून के तहत यह केंद्रीय सार्वजनिक परीक्षाओं पर लागू था, जैसे:
- UPSC
- SSC
- Railway Recruitment Board (RRB)
- IBPS
- NTA (NEET, CUET आदि)
- केंद्र सरकार की अन्य अधिसूचित परीक्षाएँ
कुछ समाचार रिपोर्टों के अनुसार, संशोधन के माध्यम से इसके दायरे को और व्यापक बनाने का भी प्रस्ताव है ताकि सार्वजनिक परीक्षाओं में पेपर लीक और संगठित नकल पर अधिक प्रभावी नियंत्रण हो सके।
सरकार का उद्देश्य
सरकार का कहना है कि इस संशोधन का मकसद:
- पेपर लीक पर सख्त रोक,
- परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता,
- छात्रों का विश्वास बहाल करना,
- समयबद्ध जांच और त्वरित न्याय सुनिश्चित करना है।





