राज्यसभा में वंदेमातरम बिल पास हो गया है. बता दें कि इस बिल को 24 जुलाई को केंद्रीय गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय ने सदन में पेश किया था. राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम संशोधन बिल 2026 के रूप में इसे पेश किया गया था. इस ऐतिहासिक फैसले का उद्देश्य राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम को भी वही कानूनी सुरक्षा मुहैया कराना है जो मौजूदा समय में राष्ट्रीय ध्वज और राष्ट्रीय गान यानी जन गण मन को मिली हुई है.
बिल पास होने के बाद क्या होगा?
राज्यसभा में बिल के पास कर दिया गया है. अब इसे राष्ट्रपति के पास भेजा जाएगा जहां से पास होने के बाद ये कानून बन जाएगा. बता दें कि इस विधेयक के कानून बनने के बाद जानबूझकर ‘वंदे मातरम’ के गायन में बाधा डालना, उसे रोकना या कार्यक्रम में व्यवधान पैदा करना कानून के तहत अपराध माना जाएगा. यही नहीं सरकार का कहना है कि यह कदम राष्ट्रीय सम्मान और देश की सांस्कृतिक विरासत की रक्षा के लिए उठाया गया है.
हालांकि, किसी भी मामले में कार्रवाई के लिए यह देखना जरूरी होगा कि बाधा जानबूझकर डाली गई थी या नहीं. प्रस्तावित प्रावधान का उद्देश्य राष्ट्रीय गीत के गायन के दौरान व्यवधान पैदा करने वाली गतिविधियों को रोकना और उसके सम्मान को सुनिश्चित करना बताया जा रहा है.
मौजूदा कानून में क्या है व्यवस्था?
वर्तमान में राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम अधिनियम के तहत राष्ट्रीय ध्वज और राष्ट्रगान के अपमान को दंडनीय अपराध माना गया है. इस कानून का उद्देश्य देश के राष्ट्रीय प्रतीकों की गरिमा और सम्मान बनाए रखना है.
संशोधन के बाद राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ को भी इसी कानूनी दायरे में शामिल किया जाएगा. इससे राष्ट्रीय गीत के सम्मान से जुड़े मामलों में स्पष्ट कानूनी प्रावधान तैयार हो सकता है.
तीन साल तक की सजा का प्रस्ताव
विधेयक में दोषी पाए जाने वाले व्यक्ति के लिए अधिकतम तीन साल की जेल, जुर्माना या दोनों की सजा का प्रावधान प्रस्तावित किया गया है. कानून का रूप लेने के बाद ये सजा मान्य होगी. हालांकि इसका रास्ता लगभग खुल चुका है. राज्यसभा में खुल चुका है.




