बिहार के भागलपुर में मंगलवार को हुए सनसनीखेज नगर परिषद शूटआउट मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। इस जघन्य हत्याकांड का मास्टरमाइंड और नगर परिषद उपाध्यक्ष नीलम देवी का पति रामधीन यादव बुधवार सुबह पुलिस मुठभेड़ में मारा गया। घटना उस वक्त हुई जब पुलिस उसे वारदात में इस्तेमाल हथियारों की बरामदगी के लिए ले गई थी। वहां छिपे अपराधियों और रामधीन ने पुलिस टीम को देखते ही गोलियां बरसानी शुरू कर दीं। आत्मरक्षार्थ की गई जवाबी फायरिंग में मुख्य आरोपी ढेर हो गया। इस खूनी मुठभेड़ में तीन पुलिस पदाधिकारी भी जख्मी हुए हैं, जिन्हें इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
भागलपुर ऑफिस शूटआउट का हिसाब
एसएसपी प्रमोद कुमार यादव के अनुसार पुलिस की एक विशेष टीम मुख्य रामधीन यादव को लेकर उन ठिकानों पर पहुंची थी, जहां उसने हत्या में इस्तेमाल हथियार और दूसरे सामान छिपाई थी। इसी दौरान, वहां पहले से घात लगाए कुछ अज्ञात अपराधियों ने पुलिस टीम पर फायरिंग कर दी। रामधीन ने भी भागने की कोशिश करते हुए पुलिस पर हमला किया। जवाबी फायरिंग में वो गंभीर रूप से घायल हो गया। उसे तुरंत मायागंज अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। एसएसपी ने कहा है कि कानून हाथ में लेने वाले अपराधियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा और अन्य फरार हमलावरों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी लगातार जारी है।
अफसर के चैंबर कर दी गई हत्या
मंगलवार शाम सुल्तानगंज नगर परिषद कार्यालय में हुई इस वारदात ने पूरे बिहार को हिला दिया था। लुंगी में आए अपराधियों ने झोले से हथियार निकालकर चैंबर में घुसकर अंधाधुंध गोलियां चलाई थीं, जिसमें कार्यपालक पदाधिकारी (EO) कृष्ण भूषण कुमार की मौके पर ही मौत हो गई। वहीं, सभापति राजकुमार उर्फ गुड्डू गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें प्राथमिक उपचार के बाद बेहतर इलाज के लिए पटना रेफर किया गया है, जहां उनकी स्थिति फिलहाल नाजुक बनी हुई है।
‘हमारा ही वर्चस्व रहेगा’ चिल्लाते हुए ईओ को मारी थी गोली
दर्सल, भागलपुर के सुल्तानगंज नगर परिषद में मंगलवार शाम करीब चार बजे बदमाशों ने खूनी तांडव मचाया। सभापति के चैंबर में विकास योजनाओं की फाइलों पर हस्ताक्षर चल रहे थे, तभी झोले में हथियार छिपाए तीन नकाबपोश अपराधी दाखिल हुए। चश्मदीद पार्षद संजय चौधरी के अनुसार, हमलावर चिल्ला रहे थे कि ‘नगर परिषद में सिर्फ हमारा वर्चस्व रहेगा।’ अपराधियों ने सभापति राजकुमार गुड्डू को निशाना बनाते हुए फायरिंग की। उन्हें बचाने दौड़े जांबाज ईओ कृष्ण भूषण कुमार के सिर में बदमाशों ने तीन गोलियां उतार दीं, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। गंभीर रूप से घायल सभापति को पटना रेफर किया गया है। यह पूरी वारदात सीसीटीवी में कैद हो गई है।
कौन था रामधनी यादव?
रामधनी यादव इलाके के लिए महज एक नाम नहीं, बल्कि दहशत का दूसरा नाम था. वह सुल्तानगंज नगर परिषद की उपसभापति नीलम देवी का पति था, लेकिन उसकी पहचान उसके जघन्य अपराधों से ज्यादा थी. रामधनी के खौफ का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि एक बार वह एक व्यक्ति का कटा हुआ सिर हाथ में लेकर सीधे थाने पहुंच गया था. इस घटना के बाद से ही उसका नाम पूरे भागलपुर और आसपास के जिलों में गूंजने लगा था. वर्चस्व की लड़ाई और आपराधिक वारदातों में संलिप्तता के कारण उस पर कई मुकदमे दर्ज थे.
पुलिस ने रात 2:30 बजे किया ढेर
हत्याकांड के बाद भागलपुर पुलिस की साख दांव पर थी. एसपी प्रमोद यादव के नेतृत्व में बनी टीम ने सीसीटीवी फुटेज के आधार पर तुरंत रामधनी की पहचान की और उसे दबोच लिया. पुलिस उसे लेकर देर रात करीब 2:30 बजे हथियार बरामदगी के लिए जा रही थी, तभी रामधनी के साथियों ने पुलिस टीम पर ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी. इसी अफरा-तफरी का फायदा उठाकर रामधनी ने भी भागने की कोशिश की. जवाबी कार्रवाई में पुलिस ने भी गोलियां चलाईं, जिसमें एक गोली रामधनी के पेट में लगी. उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया. इस मुठभेड़ में डीएसपी नवीन और दो इंस्पेक्टर भी जख्मी हुए हैं.
आखिर रामधनी ने इस हत्याकांड को अंजाम क्यों दिया? पुलिस की शुरुआती जांच के मुताबिक, सारा विवाद नगर परिषद के टेंडर को लेकर था. रामधनी चाहता था कि मलाईदार टेंडर उसके हिसाब से बांटे जाएं, लेकिन सभापति राजकुमार साह उसका विरोध कर रहे थे. इसी रंजिश में रामधनी ने उन्हें खत्म करने की प्लानिंग की थी. इस वारदात में शहीद हुए ईओ कृष्णा भूषण का कोई कसूर नहीं था, उन्होंने बस अपना फर्ज निभाया और अपराधियों के सामने झुकने से इनकार कर दिया. बता दें कि कृष्णा भूषण की पत्नी उत्तर प्रदेश में एडीएम (ADM) के पद पर तैनात हैं.
रामधनी और राजकुमार साह के बीच दुश्मनी की जड़ें काफी गहरी थीं. फरवरी 2023 में रामधनी पर भी जानलेवा हमला हुआ था. तब दो शूटरों ने उसके घर के पास उसे सीने में गोली मार दी थी, लेकिन वह बाल-बाल बच गया था. उस समय पकड़े गए शूटरों ने खुलासा किया था कि रामधनी को मारने के लिए 5 लाख रुपये की सुपारी दी गई थी. उस वक्त की मीडिया रिपोर्ट्स में इस हमले के पीछे सभापति राजकुमार साह का नाम भी उछला था. माना जा रहा है कि उसी पुरानी दुश्मनी और ताजा टेंडर विवाद ने इस बड़े हत्याकांड और फिर एनकाउंटर की पटकथा लिख दी.






