30 जुलाई यानी आज देश की तीन विधानसभा सीटों पर उपचुनाव होने हैं, जिसमें बिहार की हाई-प्रोफाइल सीट बांकीपुर, गुजरात की मंजलपुर सीट और मध्य प्रदेश की सबसे चर्चित दतिया विधानसभा सीट शामिल है. बांकीपुर विधानसभा सीट बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद नितिन नबीन के इस्तीफे के बाद खाली हुई है.
पिछले तीन दशक से यह सीट बीजेपी के पास है. साल 1995 में इस सीट पर नवीन किशोर सिन्हा ने पहली बार जीत दर्ज की थी. इसके बाद बीजेपी को यहां कभी हार नहीं मिली है. नवीन किशोर सिन्हा लगातार चार बार यहां से विधायक रहे थे. दिसंबर 2005 में उनके निधन के बाद अप्रैल 2006 में हुए उपचुनाव में उनके बेटे नितिन नबीन इस सीट से जीत दर्ज कर पहली बार विधानसभा पहुंचे थे. इसके बाद से लगातार यहां से नितिन नबीन जीतते रहे हैं. साल 2025 के चुनाव में भी उन्होंने जीत दर्ज की थी और नीतीश कैबिनेट में पहली बार मंत्री भी बने. बीजेपी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद नितिन नबीन राज्यसभा के सांसद भी बन गए. उसके बाद उनके इस्तीफे से खाली हुई इस सीट पर हो रहे उपचुनाव में मुकाबला बेहद दिलचस्प दिख रहा है.
बीजेपी ने इस सीट से पहले अभिषेक कुमार बंटी को अपना उम्मीदवार घोषित किया था, लेकिन अभिषेक बंटी के पारिवारिक बैकग्राउंड के दागदार होने का खुलासा होने के बाद बीजेपी ने अपना उम्मीदवार बदल दिया और नीरज सिन्हा को अपना उम्मीदवार बनाया. साल 2025 के चुनाव में बीजेपी के नितिन नबीन को बांकीपुर में कुल 98,299 वोट मिले थे, जबकि राजद उम्मीदवार रेखा गुप्ता को 46,363 मत मिले थे.
बांकीपुर से जीतने वाले 2 विधायक रहे हैं बिहार के CM
इस सीट की पृष्ठभूमि की बात करें तो यह बहुत ही ऐतिहासिक रही है. यहां से जीतने वाले दो विधायक बिहार के मुख्यमंत्री भी बने हैं. तब इसका नाम पटना पश्चिम हुआ करता था. साल 1962 के विधानसभा चुनाव में यहां से कांग्रेस के कृष्ण बल्लभ सहाय को जीत मिली थी, जो बिहार के चौथे मुख्यमंत्री बने थे. फिर 1967 के विधानसभा चुनाव में जन क्रांति दल के महामाया प्रसाद सिन्हा ने केबी सहाय को पराजित कर दिया था. केवल 13 विधायकों वाली पार्टी के विधायक रहते हुए महामाया प्रसाद सिन्हा ने कर्पूरी ठाकुर जैसे CM उम्मीदवार को पीछे छोड़ते हुए बिहार के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी. साल 2008 में हुए परिसीमन के बाद पटना पश्चिम का नाम बदलकर बांकीपुर कर दिया गया था.
मंजलपुर सीट पर बीजेपी-कांग्रेस में टक्कर
बीजेपी विधायक योगेश पटेल के निधन के बाद गुजरात की मंजलपुर सीट खाली हो गई थी, जिसकी वजह से यहां उपचुनाव कराया जा रहा है. बीजेपी ने सतीश पटेल को यहां से अपना उम्मीदवार बनाया है, जबकि कांग्रेस ने पूर्व मंत्री भीखाभाई रबारी को मैदान में उतारा है. दरअसल, मंजलपुर वडोदरा जिले का हिस्सा है और यह 2008 के परिसीमन के बाद अस्तित्व में आया था. यहां मतदाताओं की संख्या 2 लाख 60 हजार से अधिक है. साल 2022 में हुए गुजरात विधानसभा चुनाव में इस सीट से बीजेपी के योगेश पटेल ने जीत दर्ज की थी. उन्होंने 1 लाख 20 हजार से अधिक वोट हासिल किया था.
दतिया सीट पर क्यों हो रहा उपचुनाव?
मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट कांग्रेस के राजेंद्र भारती की सदस्यता अप्रैल महीने में खत्म होने के बाद खाली हो गई थी. इस सीट पर भी बीजेपी और कांग्रेस के बीच कड़ा मुकाबला है. बीजेपी ने आशुतोष तिवारी को यहां से अपना प्रत्याशी बनाया है, जबकि कांग्रेस की ओर से घनश्याम सिंह चुनावी मैदान में हैं.
दरअसल, दिल्ली की एक अदालत ने धोखाधड़ी के एक मामले में राजेंद्र भारती को 3 साल की सजा सुनाई थी, जिसके बाद उनकी विधानसभा सदस्यता खत्म कर दी गई थी. दिलचस्प बात ये है कि मध्यप्रदेश में 2023 में हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के राजेंद्र भारती ने उम्मीदवार के तौर पर बीजेपी के कद्दावर नेता नरोत्तम मिश्रा को 7500 से अधिक वोटों से हराया था.







