बिहार विधानसभा चुनाव में फर्स्ट फेज की 121 सीटों पर 6 नवंबर को वोटिंग होनी है। इस दौरान मिथिलांचल, कोसी और मगध की 58 सीटों पर वोटिंग होगी। इन सीटों में अलीनगर से BJP की स्टार कैंडिडेट मैथिली ठाकुर और मोरवा से जन सुराज के टिकट पर कर्पूरी ठाकुर की पोती जागृति ठाकुर मैदान में हैं।
इसके अलावा बाहुबली अनंत सिंह की सीट मोकामा, रीतलाल यादव और रामकृपाल सिंह की कड़ी टक्कर वाली दानापुर सीट भी शामिल हैं। CM नीतीश कुमार का गढ़ मानी जाने वाली हरनौत सीट भी दांव पर है।
खास बातें: 1. 2020 विधानसभा चुनाव में मुकेश सहनी की VIP, NDA का हिस्सा थी। 2. चिराग पासवान की पार्टी LJP ने अकेले चुनाव लड़ा और सिर्फ मटिहानी सीट जीती थी। उसके विधायक राजकुमार सिंह बाद में JDU में चले गए थे। 3. बरबीघा से JDU से विधायक रहे सुदर्शन सिंह इस बार निर्दलीय मैदान में हैं।
खास बातें:
1. दरभंगा के कुशेश्वर स्थान सीट से गणेश भारती सदा ने VIP के अलावा निर्दलीय कैंडिडेट के तौर पर भी पर्चा भरा था। फॉर्म पर VIP के राष्ट्रीय अध्यक्ष का सिग्नेचर न होने से पार्टी वाला पर्चा कैंसिल हो गया। अब वे निर्दलीय लड़ रहें है, उन्हें महागठबंधन का समर्थन है।
2. इन 58 सीटों पर महागठबंधन के 61 प्रत्याशी चुनाव लड़ रहे है। दरभंगा जिले की गौरा बौराम सीट से VIP के संतोष सहनी और RJD के अफजल अली खां चुनाव लड़ रहे है। बेगूसराय के बछवाड़ा से कांग्रेस के शिवप्रकाश और CPI के अवधेश कुमार राय मैदान में हैं। बिहार शरीफ में कांग्रेस से उमैर खां और CPI से शिवकुमार चुनाव लड़ रहे हैं।
क्या हैं इस बार के रुझान 1. फर्स्ट फेज में मिथिलांचल-कोसी और मगध की 58 सीटों में NDA को 38-39 सीटों पर बढ़त दिख रही है। BJP को 5 सीट पर और JDU को 2 सीटों पर फायदा होता दिख रहा है। चिराग की LJP-R सिर्फ एक सीट पर आगे नजर आ रही है।
2. महागठबंधन को 18-19 पर बढ़त दिख रही है। 2020 में महागठबंधन को यहां 21 सीटें मिली थाीं। यहां 5 से 6 सीटों तक नुकसान हो सकता है। इनमें से RJD को 4, कांग्रेस को 1 और CPI-ML को एक सीट का नुकसान नजर आ रहा है।
एक्सपर्ट्स क्या कह रहे…
1. चिराग और उपेंद्र कुशवाहा ने NDA मजबूत किया सीनियर जर्नलिस्ट अरुण पांडे के मुताबिक, NDA को उपेंद्र कुशवाहा और चिराग के साथ आने का फायदा हो रहा है। इन दोनों ने पिछले चुनाव में 42 सीटों पर नुकसान किया था।
ANI के बिहार ब्यूरो चीफ मुकेश सिंह कहते हैं, ‘चिराग पासवान के आने से NDA को फायदा होगा। पासवान वोट बैंक वे जिधर जाएंगे, ले जाएंगे। मुकेश सहनी का वोट बहुत हद तक पहले से NDA में शिफ्ट हो चुका है। मिथिलांचल में निषाद NDA को वोट कर रहे हैं।’
2. नीतीश के खिलाफ एंटी इनकम्बेंसी नहीं पटना यूनिवर्सिटी के पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन विभाग की डायरेक्टर प्रो. शेफाली रॉय NDA को मजबूत स्थिति में मानती हैं। शेफाली के मुताबिक, इस बार बिहार में BJP की लहर है। नीतीश कुमार का चेहरा और चिराग का साथ आना NDA को आगे रख रहा है।
अंग्रेजी अखबार ‘द हिंदू’ के सीनियर जर्नलिस्ट अमरनाथ तिवारी बताते हैं, ‘नीतीश कुमार अब भी काफी लोकप्रिय हैं, खासकर महिलाओं के बीच। पुरुष वोटर्स में कुछ शिकायतें हैं कि नीतीश कुमार की सेहत ठीक नहीं है, लेकिन महिलाएं उन्हें पसंद करती हैं। उन्होंने नीतीश की स्कीम को 10 हजारिया नाम दिया है।’
3. कांग्रेस और VIP ने महागठबंधन को कमजोर किया ग्राउंड इनपुट और रुझानों के मुताबिक, कांग्रेस, VIP और CPI-ML का प्रदर्शन इस बार खराब रह सकता है। इन 58 सीटों में से 13 पर कांग्रेस चुनाव लड़ रही है, लेकिन सिर्फ एक बेनीपुर सीट पर आगे नजर आ रही है। उधर, VIP 4 सीट पर चुनाव लड़ रही है, लेकिन किसी पर आगे नहीं है।
इसके अलावा CPI-ML 6 सीटों पर चुनाव मैदान में है और सिर्फ पटना की पालीगंज सीट पर आगे नजर आ रही है। प्रो. शेफाली रॉय महागठबंधन के खराब परफॉर्मेंस का जिम्मेदार कांग्रेस की जिद को मानती हैं।
4. मोदी अब भी बिहार में लोकप्रिय, प्रशांत किशोर का असर नहीं अंग्रेजी अखबार द हिंदू के सीनियर जर्नलिस्ट अमरनाथ तिवारी बताते हैं, ‘नरेंद्र मोदी अब भी बिहार में सबसे लोकप्रिय हैं। उनकी मजबूत छवि का नैरेटिव चल रहा है, जो किसी खास जाति से नहीं जुड़ा है।’
‘प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी खुद को तीसरे विकल्प के रूप में प्रोजेक्ट कर रही है, लेकिन ग्राउंड पर इसका असर नहीं दिखा। सोशल मीडिया पर जरूर चर्चा है, खासकर पत्रकारों और बाहर रहने वाले बिहारियों में, लेकिन मैदान में कुछ नहीं। उन्होंने 243 में से 3 सीटों पर उम्मीदवार वापस ले लिए हैं और 240 सीटों में से किसी एक पर भी जीत की संभावना नहीं लगती।’
किन मुद्दों पर वोट करने का सोच रहे लोग
1. पसंदीदा पार्टी और वोटर की कास्ट का समीकरण इन 58 सीटों पर महागठबंधन और NDA लगभग पिछला ही रिजल्ट रिपीट करते नजर आ रहे हैं। लोग पसंदीदा पार्टी और अपनी कास्ट के कैंडिडेट के समीकरण को सबसे ज्यादा पसंद कर रहे हैं। कास्ट वोटिंग डिसाइड करने का बड़ा फैक्टर बना हुआ है।
वोट वाइब के फाउंडर और सेफोलॉजिस्ट अमिताभ तिवारी के मुताबिक, अजीम प्रेमजी यूनिवर्सिटी की एक स्टडी है कि 55% वोट भारतीय अपनी जाति के कैंडिडेट को चुनते हैं। बिहार में ये 57% है। लोग ये मानने से इनकार करते हैं कि वे जाति पर वोट करते हैं, लेकिन बिहार में ये बड़ा फैक्टर है।
अमिताभ तिवारी आगे कहते हैं, ‘इस बार भी मुस्लिम-यादव समाज महागठबंधन को वोट देगा। अपर कास्ट में NDA थोड़ा नुकसान है, ये वोट जन सुराज को जा सकते हैं। दलितों में पासवान और मांझी NDA को, जबकि रविदास समुदाय BSP-कांग्रेस को वोट देते रहे हैं।’
‘नॉन यादव OBC कुर्मी-बनिया NDA को वोट देते हैं। कुशवाहा वोट बंट सकता है, क्योंकि दोनों गठबंधनों ने 23–23 कुशवाहा कैंडिडेट उतारे हैं। मल्लाह समाज वाली सीटों पर वोट NDA से महागठबंधन पर शिफ्ट होता दिख रहा है।
2. नीतीश की योजनाओं से लोग खुश नीतीश कुमार की सरकार को 20 साल हो गए हैं, लेकिन उनके खिलाफ एंटी इनकम्बेंसी नहीं है। सीनियर जर्नलिस्ट अरुण पांडे के मुताबिक, चुनाव से दो महीने पहले की गई घोषणाओं का असर ग्राउंड पर है। खासकर जीविका योजना के तहत महिलाओं के खाते में 10-10 हजार रुपए भेजे गए हैं।
फ्री बिजली के अलावा सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना के तहत मिलने वाली पेंशन 400 से बढ़ाकर 1100 रुपए की गई है, इसका भी ग्राउंड पर असर है।
ANI के बिहार ब्यूरो चीफ मुकेश सिंह भी नीतीश कुमार की योजनाओं के असर को NDA के आगे होने का कारण मानते हैं। वे कहते हैं, ‘इसमें दो राय नहीं कि इससे कहीं न कहीं वोटर प्रभावित हुए हैं। उनके मन में डर भी है कि नीतीश या NDA की सरकार नहीं आई, तो 10 हजार रुपए आना बंद हो जाएंगे।’
3. महिला वोट नीतीश के साथ इंडियन एक्सप्रेस के सीनियर जर्नलिस्ट संतोष सिंह मानते हैं कि जमीन पर नीतीश कुमार का असर है। BJP का संगठन उसकी ताकत है और महिला वोट NDA के साथ है।
वहीं, सेफोलॉजिस्ट अमिताभ तिवारी के मुताबिक, नीतीश सरकार ने 1.21 करोड़ महिलाओं को 10 हजार रुपए डिस्ट्रीब्यूट किए हैं। ये कुल महिला वोटर का 35% हैं। भारत में एक परिवार में तीन वोटर माने जाते हैं। 1.21 करोड़ महिलाओं के हिसाब से देखें तो ये योजना 3.63 करोड़ वोटर्स पर असर करेगी। बिहार में कुल 7.4 करोड़ वोटर हैं, यानी ये स्कीम आधे वोटर बेस को इंपैक्ट करती है।
4. RJD की पुरानी इमेज अब भी मुद्दा पटना यूनिवर्सिटी की प्रो. शेफाली रॉय बताती हैं कि तेजस्वी पिता लालू प्रसाद यादव के समय में बनी जंगलराज वाली इमेज से बाहर नहीं आ पाए हैं। इसे ऐसे भी कह सकते हैं कि उस इमेज को लगातार जिंदा रखा जा रहा है और वोटर्स को याद दिलाया जा रहा है। कारण जो भी हो, लोगों के जेहन में आज भी 2005 से पहले का बिहार ताजा है।
बड़ी सीटें
1. मोरवा में इस बार भी RJD आगे
मोरवा इस बार जन सुराज की उम्मीदवार और कर्पूरी ठाकुर की पोती जागृति ठाकुर की वजह से चर्चा में है। ये सीट समस्तीपुर जिले में आती है। यहां से RJD के रणविजय साहू विधायक हैं। ग्राउंड से मिले इनपुट के मुताबिक रणविजय साहू बढ़त बनाए हुए हैं।
वजह:
1. मोरवा के कुल वोटर्स में करीब 30% यादव और मुस्लिम हैं। यहां RJD का MY समीकरण मजबूत है। 2. मुकेश सहनी की VIP के साथ होने से महागठबंधन के पक्ष में जातीय समीकरण और मजबूत हुआ है। 3. जागृति ठाकुर की वजह से NDA के कोर-वोटर अत्यंत पिछड़ा वर्ग में बिखराव हो रहा है। 4. RJD के उम्मीदवार रणविजय साहू की इमेज अच्छी है, उनका ग्राउंड कनेक्ट बाकी उम्मीदवारों से बेहतर है।
पिछला हिसाब-किताब 2020 के विधानसभा चुनाव में रणविजय साहू ने JDU के विद्यासागर निषाद को हराया था। ये सीट 2008 के परिसीमन के बाद बनी है। 2010 में पहली बार चुनाव हुआ, जिसमें JDU के वैद्यनाथ सहनी ने RJD के अशोक सिंह को हराया था। 2015 में JDU के विद्यासागर निषाद जीते थे, तब JDU महागठबंधन का हिस्सा थी। विद्यासागर निषाद ने BJP के सुरेश राय को हराया था।
2. मोकामा में अनंत मजबूत, लेकिन वीणा देवी बिगाड़ सकती हैं खेल
मोकामा सीट इस बार भी JDU के कैंडिडेट बाहुबली अनंत सिंह की वजह से चर्चा में है। अनंत सिंह का मुकाबला बाहुबली सूरजभान सिंह की पत्नी वीणा देवी से है। ग्राउंड इनपुट के मुताबिक वीणा देवी कड़ी टक्कर दे रही हैं, लेकिन फिलहाल रुझानों में अनंत सिंह आगे हैं।
वजह:
1. अनंत सिंह 4 बार विधायक रह चुके हैं। उन्होंने 2022 में यहां से पत्नी को जितवाया था। 2. अनंत सिंह की इलाके में रॉबिनहुड वाली इमेज है। सभी जाति के लोग उन्हें वोट करते हैं, लेकिन भूमिहार और बाकी सवर्ण जातियां उन्हें संगठित वोट करती हैं। उधर, वीणा देवी का RJD के भीतर ही विरोध हो रहा है। 3. हालांकि सीनियर जर्नलिस्ट अरुण पांडे कहते हैं, ‘मोकामा भूमिहार बहुल इलाका है। अनंत सिंह और वीणा सिंह के बीच कांटे की लड़ाई है। सामाजिक समीकरण सूरजभान सिंह की पत्नी वीणा सिंह के साथ हैं। पिछड़ों के वोट मिले और भूमिहार वोट बंटे, तो नया इतिहास बन सकता है।’
पिछला हिसाब-किताब मोकामा अनंत सिंह का गढ़ रहा है। 2005 और 2010 के विधानसभा चुनाव में वे JDU की टिकट पर जीते थे। 2015 में निर्दलीय चुनाव जीते। 2020 में RJD में शामिल हुए और मोकामा से फिर जीत हासिल की। 2022 में एक आपराधिक मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद अनंत सिंह को अयोग्य घोषित कर दिया गया। बाद में उनकी पत्नी नीलम देवी ने उपचुनाव में जीत हासिल की।
3. सिमरी बख्तियारपुर में चिराग के कैंडिडेट पीछे
यहां से RJD ने मौजूदा विधायक युसूफ सलाहुद्दीन को दोबारा टिकट दिया हैं। ग्राउंड से मिले इनपुट के मुताबिक, RJD कैंडिडेट आगे हैं।
वजह: 1. इस सीट पर RJD के कोर वोट बैंक और MY समीकरण काफी मजबूत हैं। 2. NDA ने LJP-R के संजय कुमार सिंह को टिकट दिया है। संजय का शहरी वर्ग में वोटबैंक है, लेकिन ग्रामीण इलाकों से वोट मिलने की संभावना कम है। 3. ये कांग्रेस की परंपरागत सीट रही है। हालांकि, उसका मुस्लिम वोटबैंक RJD में शिफ्ट हो गया।
पिछला हिसाब-किताब इस सीट पर साल 2000 से पहले कांग्रेस मजबूत मानी जाती थी। 2010 और 2015 के चुनाव में ये सीट JDU के खाते में चली गई। 2020 के चुनाव में RJD के यूसुफ सलाहुद्दीन ने यहां VIP के चीफ मुकेश सहनी को हराया था।
4. क्या मैथिली ठाकुर की गलती से अलीनगर हाथ से निकल रही
ये सीट इस बार सिंगर से नेता बनीं मैथिली ठाकुर को लेकर चर्चा में है। अलीनगर सीट दरभंगा जिले में आती है। कैंडिडेट बनाए जाने के बाद मैथिली यहां से आगे नजर आ रही थीं। हालांकि मैथिली के ‘पाग’ विवाद के बाद मुकाबला टक्कर का माना जा रहा है। विवाद के बाद मैथिली, केतकी सिंह और BJP के बिहार प्रभारी धर्मेंद्र प्रधान ने माफी मांगी है।
वजह: 1. मैथिली फेमस सिंगर हैं। मैथिल पहचान को आगे बढ़ा रही हैं। यूथ में लोकप्रिय हैं। उनके साथ सहानुभूति वोट हैं और BJP ने इलाके के बागियों को शांत करा दिया है। इससे मैथिली आगे बनी हुई हैं। 2. RJD कैंडिडेट बिनोद मिश्रा को मैथिली ठाकुर के नए विवाद के बाद बढ़त मिली है। वे स्थानीय और ब्राह्मण कम्युनिटी से हैं। महागठबंधन का वोट बैंक उनके साथ है। वे पिछली बार VIP के कैंडिडेट से हारे थे। इस बार VIP का वोट भी गठबंधन के साथ है। 3. सीनियर जर्नलिस्ट अरुण पांडे मानते हैं मैथिली का फेमस होना, उनका सबसे बड़ा प्लस पॉइंट साबित होने वाला है। बिनोद मिश्रा के पास इसकी काट नजर नहीं आ रही।
पिछला हिसाब-किताब 2020 के चुनाव में अलीनगर सीट पर VIP के मिश्री लाल ने RJD के बिनोद मिश्रा को करीब तीन हजार वोट से हराया था। 2010 और 2015 में यहां से RJD के अब्दुल बारी सिद्दीकी जीते थे।
5. ब्रह्मपुर में फंसते दिख रहे बाहुबली हुलास पांडे
बक्सर जिले की इस सीट पर बाहुबली हुलास पांडे और RJD के शंभू नाथ यादव का मुकाबला है। शंभू नाथ यादव दो बार से विधायक हैं। हुलास पांडे चिराग पासवान की पार्टी LJP (R) के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं। फिलहाल यहां शंभू नाथ यादव को बढ़त मिलती दिख रही है।
वजह: 1. इस सीट पर करीब 26% यादव वोटर हैं, जो RJD के कोर वोटर माने जाते हैं। 2. ब्राह्मण वोट कांग्रेस और मल्लाह वोट VIP को मिलते रहे हैं, इनका फायदा शंभू नाथ यादव को मिलेगा। 3. ब्रह्मपुर RJD के लिए सेफ सीट रही है। इसकी वजह लालू प्रसाद यादव का MY (मुस्लिम-यादव) समीकरण है। यहां दोनों के कुल वोट करीब 30% हैं।
पिछला हिसाब-किताब 2020 में भी शंभू नाथ यादव और हुलास पांडे आमने-सामने थे। शंभू नाथ ने हुलास पांडे को 51,141 वोट से हराया था। तब LJP ने NDA से अलग चुनाव लड़ा था। NDA ने यह सीट मुकेश सहनी की पार्टी VIP को दी थी। शंभू नाथ यादव को 90,176, हुलास पांडेय को 39,035 और VIP के जयराज चौधरी को 30,482 वोट मिले थे।
6. दानापुर में रीतलाल यादव के सामने रामकृपाल यादव की चुनौती
इस सीट से विधायक रीतलाल यादव जेल से चुनाव लड़ रहे हैं। उनके सामने BJP के रामकृपाल यादव हैं। रीतलाल का क्रिमिनल रिकॉर्ड है, लेकिन वे जमीनी पकड़ वाले नेता हैं। हालांकि इस बार पूर्व सांसद और केंद्रीय मंत्री रह चुके रामकृपाल यादव मजबूत लग रहे हैं।
वजह: 1. दानापुर पटना महानगरीय क्षेत्र का हिस्सा है, यहां BJP की शहरी वोट बैंक पर अच्छी पकड़ है। 2. इस सीट पर 22% आबादी यादवों की है, RJD से तीन बार सांसद रहे रामकृपाल इसमें सेंध लगा सकते हैं। 3. रीतलाल यादव जेल में होने की वजह से प्रचार नहीं कर रहे हैं। शहरी वोटर्स में उनके लिए नाराजगी है।
पिछला हिसाब-किताब BJP ने 2005 से 2015 तक लगातार 4 बार ये सीट जीती है। तब आशा सिन्हा विधायक चुनी जाती रहीं। 2020 में रीतलाल ने उन्हें 15,924 वोट से हरा दिया था। रीतलाल को 89,895 वोट मिले थे।
7. हरनौत में कांग्रेस की कमजोर दावेदारी, JDU के हरिनारायण मजबूत
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के गृह जिले नालंदा में आने वाली इस सीट पर 25 साल से JDU का कब्जा है। मौजूदा विधायक हरिनारायण सिंह लगातार तीन बार से जीत रहे हैं। इस बार भी पार्टी ने उन्हें टिकट दिया है। उनके सामने कांग्रेस कैंडिडेट अरुण बिंद हैं, लेकिन हरिनारायण की स्थिति मजबूत दिख रही है।
वजह:
1. हरिनारायण सिंह 9 बार विधायक रह चुके हैं, उनके खिलाफ एंटी इनकम्बेंसी नहीं दिख रही है। 2. नीतीश कुमार का गृह क्षेत्र होने का उन्हें सीधा फायदा मिलता दिख रहा है। 3. कांग्रेस कैंडिडेट अरुण बिंद एक्टिव नहीं हैं। वे लोगों के बीच कम रहते हैं।
पिछला हिसाब-किताब हरनौत विधानसभा सीट JDU का गढ़ मानी जाती है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पॉलिटिकल करियर की शुरुआत यहीं से की थी। 2020 के चुनाव में हरिनारायण सिंह ने 27,241 वोट से जीत हासिल की थी। उन्होंने LJP की ममता देवी को हराया था।







