बिहार की राजनीति में सियासी घरानों से जुड़ी आधी आबादी को आसानी से अवसर मिल रहे हैं। प्राय: सभी दलों में राजनीतिक घरानों की महिलाओं को ही अधिक मौके मिल रहे हैं। पार्टी में संघर्ष कर आगे आने वाली महिलाओं की संख्या कम है। इस बार भी राजनीतिक घरानों से जुड़ी महिलाओं का ही बोलबाला है। दोनों प्रमुख गठबंधन एनडीए और इंडिया ने 65 महिलाओं को टिकट दिया है। इसमें 22 महिलाएं ही अपने दम पर राजनीति में सक्रिय हैं। 43 महिलाओं का नाता राजनीतिक परिवारों से है। एनडीए ने 34 महिलाओं को टिकट दिया है। इसमें 14 सामान्य कार्यकर्ता हैं। महागठबंधन ने 31 महिलाओं को चुनावी मैदान में उतारा है। इसमें से 23 महिलाओं का नाता राजनीतिक घरानों से है।
राजद में 18 महिला उम्मीदवारों का नाता राजनीतिक घरानों से
महिलाओं को टिकट देने में राजद आगे है। 143 सीटों पर चुनाव लड़ रही पार्टी ने 24 महिलाओं को टिकट दिया था। मोहनियां (सु) से श्वेता सुमन का नामांकन रद्द होने से अब 23 महिलाएं मैदान में हैं। इन महिलाओं में अधिकतर का रिश्ता राजनीतिक घरानों से हैं। छह महिलाएं ही संघर्ष के बल पर मैदान में हैं। बिहारीगंज से चुनाव लड़ रहीं रेणु कुशवाहा पूर्व मंत्री हैं। वारसलीगंज से चुनाव लड़ रहीं अनिता देवी महतो बाहुबली अशोक महतो की पत्नी हैं। हसनपुर से चुनाव लड़ रही माला पुष्पम पूर्व विधायक सुनील पुष्पम की पत्नी हैं। मधुबनी से चुनाव लड़ रहीं संध्या रानी कुशवाहा जिला परिषद की सदस्य रही हैं। जबकि इमामगंज (सु) से चुनाव लड़ रहीं रितु प्रिया चौधरी लंबे समय से पार्टी में सक्रिय हैं। बाराचट्टी (सु) से चुनाव लड़ रहीं तनुश्री मांझी पूर्व सांसद भगवतिया देवी की नातिन और पूर्व विधायक समता देवी की बेटी हैं। बनियापुर से चुनाव लड़ रहीं चांदनी सिंह पूर्व विधायक अशोक सिंह की पत्नी हैं। अतरी से चुनाव लड़ रहीं वैजयंती देवी पूर्व विधायक हैं। रजौली (सु) से चुनाव लड़ रहीं पिंकी चौधरी संगठन में सक्रिय हैं।
पूर्व सीएम दारोगा राय की पोती भी चुनावी मैदान में :
लालगंज की उम्मीदवार शिवानी शुक्ला पूर्व विधायक मुन्ना शुक्ला और अनु शुक्ला की बेटी हैं। परसा की उम्मीदवार डॉ. करिश्मा राय पूर्व सीएम दारोगा राय की पोती हैं। पातेपुर (सु) की प्रेमा चौधरी पूर्व विधायक हैं। मोकामा की उम्मीदवार वीणा देवी पूर्व सांसद सूरजभान सिंह की पत्नी हैं। मोहिउद्दीननगर की उम्मीदवार डॉ. एज्या यादव के ससुर राजेन्द्र राय लालू राज में मंत्री थे। मसौढ़ी से चुनाव लड़ रहीं मौजूदा विधायक रेखा पासवान की अपनी पहचान है। बांकीपुर की रेखा गुप्ता संगठन में सक्रिय हैं जबकि गोविन्दपुर की उम्मीदवार पूर्णिमा देवी खुद विधायक रही हैं। पति पूर्व विधायक कौशल यादव हैं। परिहार से चुनाव लड़ रहीं स्मिता पूर्वे गुप्ता पूर्व मंत्री डॉ. रामचंद्र पूर्वे की बहू हैं। रूपौली की उम्मीदवार बीमा भारती नीतीश सरकार में मंत्री थीं। प्राणपुर की इशरत परवीन पार्टी में सक्रिय हैं। कटोरिया (सु) की उम्मीदवार स्वीटी सीमा हेम्ब्रम पूर्व विधायक हैं। नोखा से चुनाव लड़ रहीं अनिता देवी नोनिया पूर्व मंत्री रह चुकी हैं। इनके ससुर जंगी प्रसाद चौधरी मंत्री थे। चकाई की उम्मीदवार सावित्री देवी के पति फाल्गुनी यादव विधायक रह चुके हैं।
वामदल और वीआईपी से एक-एक महिलाएं :
वीआईपी ने दो महिलाओं को टिकट दिया था पर बाबूबरही की उम्मीदवार बिंदु गुलाब यादव ने नाम वापस ले लिया। बिहपुर से चुनाव लड़ रहीं अर्पणा मंडल जदयू सांसद अजय मंडल की भतीजी हैं। माले ने दीघा से दिव्या गौतम को उम्मीदवार बनाया है। दिव्या ने राजनीति में पहचान बनाने की कोशिश कर रही हैं। दिवंगत अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की चचेरी बहन दिव्या छात्र राजनीति से ही सक्रिय हैं। आईपीपी ने बेलदौर से तनीशा चौहान को उम्मीदवार बनाया है जो पार्टी में लंबे समय से संघर्ष कर रही हैं।
भाजपा ने 13 महिलाओं को इस बार चुनाव में टिकट दिया है। बेतिया से रेणु देवी, परिहार से गायत्री देवी, प्राणपुर से निशा सिंह, कोढ़ा से कविता देवी, वारसलीगंज से अरुणा देवी, जमुई से श्रेयसी सिंह, मोहनियां से संगीता देवी पहले ही सदन पहुंच चुकी हैं। नरपतगंज से देवंती यादव पहले विधायक रह चुकी हैं।
मुजफ्फरपुर की औराई से पार्टी उम्मीदवार रमा निषाद पूर्व केन्द्रीय मंत्री कैप्टेन जयनारायण निषाद की बहू और पूर्व सांसद अजय निषाद की पत्नी हैं। छपरा से छोटी कुमारी राजनीतिक कार्यकर्ता हैं। वे छपरा जिप की अध्यक्ष रही हैं। किशनगंज से स्वीटी सिंह राजनीतिक परिवार से हैं। अलीनगर से मैथिली ठाकुर की राजनीति में पहली बार इंट्री हुई है। उधर, कोचाधामन से पार्टी उम्मीदवार वीणा देवी की भी कोई बड़ी राजनीतिक पृष्ठभूमि नहीं है।
कांग्रेस ने 61 में से पांच महिलाओं को टिकट दिया है। राजापाकड़ से विधायक प्रतिमा कुमारी दास और हिसुआ विधायक नीतू कुमारी को पार्टी ने इस बार भी आजमाया है। नीतू सिंह को राजनीति विरासत में मिली है। ससुर आदित्य सिंह मंत्री रह चुके हैं। वह जिला परिषद अध्यक्ष रह चुकी हैं। प्रतिमा दास ने मेहनत के दम पर मुकाम पाया है। कोढ़ा से पूर्व विधायक पूनम पासवान और बेगूसराय से पूर्व विधायक अमिता भूषण को दोबारा टिकट दिया है। सोनबरसा उम्मीदवार सरिता देवी 2020 चुनाव में लोजपा से खड़ी थीं। इस बार कांग्रेस के टिकट पर मैदान में हैं।
जदयू ने 13 महिलाओं को टिकट दिया
जदयू ने 13 महिलाओं को टिकट दिया है। इनमें से कई की राजनीतिक पृष्ठभूमि रही है तो कुछ को पहली बार अवसर मिला है। इनमें से कुछ ने कार्यकर्ता के रूप में अपना राजनीतिक सफर शुरू किया था। धमदाहा की उम्मीदवार लेशी सिंह, फुलपरास की शीला मंडल, समस्तीपुर की अश्वमेघ देवी, बेलागंज की मनोरमा देवी, नवादा की विभा देवी व बाबूबरही की मीना कामत के साथ-साथ केसरिया की शालिनी मिश्रा पहले से सदन की यात्रा कर चुकी हैं। मधेपुरा से मैदान में उतरी कविता साहा ने पंचायती राज प्रतिनिधि के रूप में राजनीतिक सफर प्रारंभ किया। गायघाट से पार्टी उम्मीदवार कोमल सिंह राजनीतिक परिवार से आती हैं। उनकी माता वीणा सिंह लोजपा (रा) की सांसद हैं, जबकि उनके पिता दिनेश सिंह जदयू विधान पार्षद। विभूतिपुर की उम्मीदवार रवीना कुशवाहा पूर्व विधायक रामबालक सिंह की पत्नी हैं, जबकि, त्रिवेणीगंज की सोनम रानी सरदार स्थानीय रूप से सक्रिय राजनीतिज्ञ हैं। अररिया की शगुफ्ता अजीम पहले चुनाव लड़ चुकी हैं। शिवहर की श्वेता गुप्ता भी स्थानीय स्तर पर राजनीति में सक्रिय रही हैं।
हम (सेक्युलर) से दो महिला उम्मीदवार चुनावी मैदान में
हम (सेक्युलर) से दो महिला उम्मीदवार चुनावी मैदान में हैं। इनमें बाराचट्टी (सु) से ज्योति देवी और इमामगंज (सु) से दीपा कुमारी हैं। ज्योति देवी बीते दो टर्म से बाराचट्टी की विधायक हैं, जबकि दीपा कुमारी ने जीतन राम मांझी के सांसद बनने के बाद इमामगंज से पिछला उपचुनाव जीता था। ज्योति देवी जीतन राम मांझी की समधन तो दीपा कुमारी उनकी बहू हैं। छह सीटों पर चुनाव लड़ रहे रालोमो ने एक महिला स्नेहलता कुशवाहा को चुनावी मैदान में उतारा है। पार्टी सुप्रीमो उपेन्द्र कुशवाहा की वह पत्नी हैं।
बिहार की राजनीति में सियासी घरानों से जुड़ी आधी आबादी को आसानी से अवसर मिल रहे हैं। प्राय: सभी दलों में राजनीतिक घरानों की महिलाओं को ही अधिक मौके मिल रहे हैं। पार्टी में संघर्ष कर आगे आने वाली महिलाओं की संख्या कम है। इस बार भी राजनीतिक घरानों से जुड़ी महिलाओं का ही बोलबाला है। दोनों प्रमुख गठबंधन एनडीए और इंडिया ने 65 महिलाओं को टिकट दिया है। इसमें 22 महिलाएं ही अपने दम पर राजनीति में सक्रिय हैं। 43 महिलाओं का नाता राजनीतिक परिवारों से है। एनडीए ने 34 महिलाओं को टिकट दिया है। इसमें 14 सामान्य कार्यकर्ता हैं। महागठबंधन ने 31 महिलाओं को चुनावी मैदान में उतारा है। इसमें से 23 महिलाओं का नाता राजनीतिक घरानों से है।
राजद में 18 महिला उम्मीदवारों का नाता राजनीतिक घरानों से
महिलाओं को टिकट देने में राजद आगे है। 143 सीटों पर चुनाव लड़ रही पार्टी ने 24 महिलाओं को टिकट दिया था। मोहनियां (सु) से श्वेता सुमन का नामांकन रद्द होने से अब 23 महिलाएं मैदान में हैं। इन महिलाओं में अधिकतर का रिश्ता राजनीतिक घरानों से हैं। छह महिलाएं ही संघर्ष के बल पर मैदान में हैं। बिहारीगंज से चुनाव लड़ रहीं रेणु कुशवाहा पूर्व मंत्री हैं। वारसलीगंज से चुनाव लड़ रहीं अनिता देवी महतो बाहुबली अशोक महतो की पत्नी हैं। हसनपुर से चुनाव लड़ रही माला पुष्पम पूर्व विधायक सुनील पुष्पम की पत्नी हैं। मधुबनी से चुनाव लड़ रहीं संध्या रानी कुशवाहा जिला परिषद की सदस्य रही हैं। जबकि इमामगंज (सु) से चुनाव लड़ रहीं रितु प्रिया चौधरी लंबे समय से पार्टी में सक्रिय हैं। बाराचट्टी (सु) से चुनाव लड़ रहीं तनुश्री मांझी पूर्व सांसद भगवतिया देवी की नातिन और पूर्व विधायक समता देवी की बेटी हैं। बनियापुर से चुनाव लड़ रहीं चांदनी सिंह पूर्व विधायक अशोक सिंह की पत्नी हैं। अतरी से चुनाव लड़ रहीं वैजयंती देवी पूर्व विधायक हैं। रजौली (सु) से चुनाव लड़ रहीं पिंकी चौधरी संगठन में सक्रिय हैं।
पूर्व सीएम दारोगा राय की पोती भी चुनावी मैदान में :
लालगंज की उम्मीदवार शिवानी शुक्ला पूर्व विधायक मुन्ना शुक्ला और अनु शुक्ला की बेटी हैं। परसा की उम्मीदवार डॉ. करिश्मा राय पूर्व सीएम दारोगा राय की पोती हैं। पातेपुर (सु) की प्रेमा चौधरी पूर्व विधायक हैं। मोकामा की उम्मीदवार वीणा देवी पूर्व सांसद सूरजभान सिंह की पत्नी हैं। मोहिउद्दीननगर की उम्मीदवार डॉ. एज्या यादव के ससुर राजेन्द्र राय लालू राज में मंत्री थे। मसौढ़ी से चुनाव लड़ रहीं मौजूदा विधायक रेखा पासवान की अपनी पहचान है। बांकीपुर की रेखा गुप्ता संगठन में सक्रिय हैं जबकि गोविन्दपुर की उम्मीदवार पूर्णिमा देवी खुद विधायक रही हैं। पति पूर्व विधायक कौशल यादव हैं। परिहार से चुनाव लड़ रहीं स्मिता पूर्वे गुप्ता पूर्व मंत्री डॉ. रामचंद्र पूर्वे की बहू हैं। रूपौली की उम्मीदवार बीमा भारती नीतीश सरकार में मंत्री थीं। प्राणपुर की इशरत परवीन पार्टी में सक्रिय हैं। कटोरिया (सु) की उम्मीदवार स्वीटी सीमा हेम्ब्रम पूर्व विधायक हैं। नोखा से चुनाव लड़ रहीं अनिता देवी नोनिया पूर्व मंत्री रह चुकी हैं। इनके ससुर जंगी प्रसाद चौधरी मंत्री थे। चकाई की उम्मीदवार सावित्री देवी के पति फाल्गुनी यादव विधायक रह चुके हैं।
वामदल और वीआईपी से एक-एक महिलाएं :
वीआईपी ने दो महिलाओं को टिकट दिया था पर बाबूबरही की उम्मीदवार बिंदु गुलाब यादव ने नाम वापस ले लिया। बिहपुर से चुनाव लड़ रहीं अर्पणा मंडल जदयू सांसद अजय मंडल की भतीजी हैं। माले ने दीघा से दिव्या गौतम को उम्मीदवार बनाया है। दिव्या ने राजनीति में पहचान बनाने की कोशिश कर रही हैं। दिवंगत अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की चचेरी बहन दिव्या छात्र राजनीति से ही सक्रिय हैं। आईपीपी ने बेलदौर से तनीशा चौहान को उम्मीदवार बनाया है जो पार्टी में लंबे समय से संघर्ष कर रही हैं।
भाजपा ने 13 महिलाओं को इस बार चुनाव में टिकट दिया है। बेतिया से रेणु देवी, परिहार से गायत्री देवी, प्राणपुर से निशा सिंह, कोढ़ा से कविता देवी, वारसलीगंज से अरुणा देवी, जमुई से श्रेयसी सिंह, मोहनियां से संगीता देवी पहले ही सदन पहुंच चुकी हैं। नरपतगंज से देवंती यादव पहले विधायक रह चुकी हैं।
मुजफ्फरपुर की औराई से पार्टी उम्मीदवार रमा निषाद पूर्व केन्द्रीय मंत्री कैप्टेन जयनारायण निषाद की बहू और पूर्व सांसद अजय निषाद की पत्नी हैं। छपरा से छोटी कुमारी राजनीतिक कार्यकर्ता हैं। वे छपरा जिप की अध्यक्ष रही हैं। किशनगंज से स्वीटी सिंह राजनीतिक परिवार से हैं। अलीनगर से मैथिली ठाकुर की राजनीति में पहली बार इंट्री हुई है। उधर, कोचाधामन से पार्टी उम्मीदवार वीणा देवी की भी कोई बड़ी राजनीतिक पृष्ठभूमि नहीं है।
कांग्रेस ने 61 में से पांच महिलाओं को टिकट दिया है। राजापाकड़ से विधायक प्रतिमा कुमारी दास और हिसुआ विधायक नीतू कुमारी को पार्टी ने इस बार भी आजमाया है। नीतू सिंह को राजनीति विरासत में मिली है। ससुर आदित्य सिंह मंत्री रह चुके हैं। वह जिला परिषद अध्यक्ष रह चुकी हैं। प्रतिमा दास ने मेहनत के दम पर मुकाम पाया है। कोढ़ा से पूर्व विधायक पूनम पासवान और बेगूसराय से पूर्व विधायक अमिता भूषण को दोबारा टिकट दिया है। सोनबरसा उम्मीदवार सरिता देवी 2020 चुनाव में लोजपा से खड़ी थीं। इस बार कांग्रेस के टिकट पर मैदान में हैं।
जदयू ने 13 महिलाओं को टिकट दिया
जदयू ने 13 महिलाओं को टिकट दिया है। इनमें से कई की राजनीतिक पृष्ठभूमि रही है तो कुछ को पहली बार अवसर मिला है। इनमें से कुछ ने कार्यकर्ता के रूप में अपना राजनीतिक सफर शुरू किया था। धमदाहा की उम्मीदवार लेशी सिंह, फुलपरास की शीला मंडल, समस्तीपुर की अश्वमेघ देवी, बेलागंज की मनोरमा देवी, नवादा की विभा देवी व बाबूबरही की मीना कामत के साथ-साथ केसरिया की शालिनी मिश्रा पहले से सदन की यात्रा कर चुकी हैं। मधेपुरा से मैदान में उतरी कविता साहा ने पंचायती राज प्रतिनिधि के रूप में राजनीतिक सफर प्रारंभ किया। गायघाट से पार्टी उम्मीदवार कोमल सिंह राजनीतिक परिवार से आती हैं। उनकी माता वीणा सिंह लोजपा (रा) की सांसद हैं, जबकि उनके पिता दिनेश सिंह जदयू विधान पार्षद। विभूतिपुर की उम्मीदवार रवीना कुशवाहा पूर्व विधायक रामबालक सिंह की पत्नी हैं, जबकि, त्रिवेणीगंज की सोनम रानी सरदार स्थानीय रूप से सक्रिय राजनीतिज्ञ हैं। अररिया की शगुफ्ता अजीम पहले चुनाव लड़ चुकी हैं। शिवहर की श्वेता गुप्ता भी स्थानीय स्तर पर राजनीति में सक्रिय रही हैं।
हम (सेक्युलर) से दो महिला उम्मीदवार चुनावी मैदान में
हम (सेक्युलर) से दो महिला उम्मीदवार चुनावी मैदान में हैं। इनमें बाराचट्टी (सु) से ज्योति देवी और इमामगंज (सु) से दीपा कुमारी हैं। ज्योति देवी बीते दो टर्म से बाराचट्टी की विधायक हैं, जबकि दीपा कुमारी ने जीतन राम मांझी के सांसद बनने के बाद इमामगंज से पिछला उपचुनाव जीता था। ज्योति देवी जीतन राम मांझी की समधन तो दीपा कुमारी उनकी बहू हैं। छह सीटों पर चुनाव लड़ रहे रालोमो ने एक महिला स्नेहलता कुशवाहा को चुनावी मैदान में उतारा है। पार्टी सुप्रीमो उपेन्द्र कुशवाहा की वह पत्नी हैं।







