UGC की नई नियमावली ने देश सहित बिहार की राजनीति में उबाल ला दिया है। अपर कास्ट के बढ़ते आक्रोश के बीच मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी JDU ने अपना स्टैंड क्लीयर किया है। पार्टी प्रवक्ता नीरज कुमार ने दो टूक कहा कि लोकतंत्र में किसी भी तबके की उपेक्षा शुभ नहीं है और अब इस मामले में सुप्रीम कोर्ट का निर्णय ही अंतिम होगा। दूसरी ओर, आलोचनाओं के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने मंगलवार को आश्वासन दिया कि किसी के साथ कोई भेदभाव नहीं किया जाएगा और विनियमों का दुरुपयोग नहीं होने दिया जाएगा। वहीं, हाजीपुर के कौनहारा घाट पर आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान जब केंद्रीय गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय से इस बाबत सवाल किए गए, तो उन्होंने सवालों का जवाब देने के बजाय धार्मिक हर हर महादेव का जयघोष शुरू कर दिए।
‘संविधान और न्यायपालिका ही सर्वोपरि’
जेडीयू एमएलसी नीरज कुमार ने कहा कि डॉ. आंबेडकर के संविधान में सबको अपनी बात रखने का हक है। उन्होंने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को ‘न्याय के साथ विकास’ का रोल मॉडल बताते हुए कहा कि समाज के किसी भी वर्ग में नाराजगी लोकतंत्र के लिए चिंताजनक है। चूंकि मामला अब सुप्रीम कोर्ट की दहलीज पर है, इसलिए न्यायपालिका का सम्मान करते हुए उसके फैसले का इंतजार करना चाहिए।
पार्टी के प्रवक्ता और एमलसी नीरज कुमार ने कहा कि डॉक्टर भीमराव आंबेडकर ने इस देश के अंदर संविधान बनाया है. संविधान में सबको अपनी बात कहने का अधिकार है. ऐसी स्थिति में समाज के किसी भी तबके में कोई उपेक्षा या नाराजगी का भाव लोकतंत्र के लिए शुभ नहीं है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार न्याय के साथ सबका विकास और सबका सम्मान के रोल मॉडल हैं. यूजीसी का जो नया रेगुलेशन आया है, उस संबंध में तरह-तरह की टिप्पणियां की जा रही हैं. अब इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई है. न्यायपालिका का सम्मान तो सब करते हैं तो अब न्यायपालिका का फैसला ही सबके लिए महत्वपूर्ण होगा.
यूजीसी की नई गाइडलाइंस का क्यों हो रहा है विरोध
- UGC Equity Regulations 2026 इसी महीने लागू हुआ है
- OBC वर्ग को जातिगत भेदभाव की परिभाषा में शामिल किया गया
- झूठी या दुर्भावनापूर्ण शिकायतों पर जुर्माना या निलंबन जैसे प्रावधान हटे
- सामान्य वर्ग के मुताबिक, कानून का दुरुपयोग उन्हें निशाना बनाने के लिए किया जा सकता है
- दावा है कि गलत शिकायत दर्ज कराने वाले को किसी दंड का डर नहीं होगा
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यीजूसी कानून के विरोध की वजह
UGC रेगुलेशन 2026 के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर इसके ‘गैर-समावेशी’ होने का आरोप लगाया गया है। विरोध की मुख्य वजह जातिगत भेदभाव की नई परिभाषा है, जिसमें ओबीसी वर्ग को शामिल किया गया है, लेकिन सामान्य वर्ग को लगता है कि झूठी शिकायतों पर दंड का प्रावधान हटने से इस कानून का दुरुपयोग उन्हें निशाना बनाने के लिए हो सकता है। याचिका में मांग की गई है कि नियमों को ‘जाति-तटस्थ’ बनाया जाए।
सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल
यूजीसी की नई गाडलाइंस ने यूपी का सियासी पारा बढ़ा दिया है. बीजेपी के कई पदाधिकारियों ने इसको लेकर इस्तीफा तक दे दिया. इसको लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है. याचिका में आरोप लगाया गया कि जाति आधारित भेदभाव की गैर-समावेशी परिभाषा अपनाई गई है और संस्थागत सुरक्षा से कुछ श्रेणियों को बाहर कर दिया गया है.
कोर्ट से रोक लगाने की मांग
सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया गया है कि इसके मौजूदा स्वरूप में लागू करने से रोका जाए और जाति-आधारित भेदभाव को ‘जाति-तटस्थ और संविधान अनुरूप’ तरीके से फिर से परिभाषित किया जाए. इसमें कहा गया है, “जाति के आधार पर भेदभाव को इस तरह से परिभाषित किया जाना चाहिए कि जाति के आधार पर भेदभाव का शिकार होने वाले सभी लोगों को सुरक्षा मिले, चाहे उनकी जाति की पहचान कुछ भी हो.” याचिका में केंद्र सरकार और यूजीसी को अंतरिम निर्देश देने की मांग की गई है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि इन नियमों के तहत बनाए गए ‘समान अवसर केंद्र’ और ‘समानता हेल्पलाइन’ आदि को बिना किसी भेदभाव के उपलब्ध कराया जाए.
नित्यानंद राय ने नारों से टाला सवाल
यूजीसी विवाद पर पत्रकारों के तीखे सवालों ने केंद्रीय गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय को असहज कर दिया। कौनहारा घाट पर जब उनसे नए नियमों और सवर्णों के विरोध पर पूछा गया, तो वे जवाब देने से भागते दिखे। बार-बार सवाल दोहराने पर उन्होंने ‘हर-हर महादेव’ और ‘भगवान विष्णु’ के जयकारे लगाने शुरू कर दिए।





