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राहुल-तेजस्वी साथ-साथ या होंगे जुदा-जुदा ?

UB India News by UB India News
September 23, 2025
in पटना, बिहार
0
बिहार चुनाव 2025: राहुल-तेजस्वी की बैठक में सीट बंटवारे पर हो सकती है चर्चा

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24 सितंबर को कांग्रेस नेता राहुल गांधी, सोनिया गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे बिहार आ रहे हैं. आरजेडी के साथ सीट शेयरिंग, सीएम और डिप्टी सीएम पद को लेकर महागठबंधन में बवाल मचा हुआ है. आरजेडी तेजस्वी यादव को सीएम फेस घोषित कर बिहार चुनाव में उतरने का दवाब बना रही है. लेकिन कांग्रेस को यह मंजूर नहीं है. ऐसे में बड़ा सवाल यह कि वोटर अधिकार यात्रा में जो राहुल गांधी और तेजस्वी यादव साथ-साथ नजर आए थे, क्या बिहार चुनाव में दोनों के रास्ते जुदा-जुदा हो जाएंगे? क्या 24 सितंबर को तय हो जाएगा कि बिहार में कांग्रेस आरजेडी के साथ लड़ेगी ा अकेले या किसी दूसरे गठबंधन के साथ मैदान में उतरेगी?

बिहार विधानसभा चुनाव से पहले महागठबंधन में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है. कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम क्यों कह रहे हैं कि पटना की धरती से ‘आजादी की दूसरी लड़ाई’ शुरू होगी. क्या सीटों को लेकर कुछ बड़ा होने वाला है? क्या आरजेडी और कांग्रेस का साथ छूटने वाला है? एक तरफ राहुल गांधी और तेजस्वी यादव की ‘दो लड़कों की जोड़ी’ सार्वजनिक मंचों पर साथ-साथ नजर आ रही है, वहीं दूसरी तरफ सीटों के बंटवारे और मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री के पद को लेकर खींचतान चल रही है. ऐसे में सदाकत आश्रम में एक बड़ी बैठक बुलाई है, जिसमें सोनिया गांधी, मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी जैसे दिग्गज मिलकर बड़ा फैसला लेंगे.
राहुल-तेजस्वी की केमिस्ट्री और सीटों का गणित
पिछले दिनों राहुल गांधी और तेजस्वी यादव ‘वोटर परिवर्तन यात्रा’ में साथ-साथ नजर आए थे. दोनों नेताओं के बीच की केमिस्ट्री भी लोगों को पसंद आई थी. लेकिन, यह यात्रा खत्म होते ही सीटों के बंटवारे को लेकर महागठबंधन में बवाल मच गया है. कांग्रेस इस बार 2020 के मुकाबले यानी 70 सीट से भी अधिक सीटों की मांग कर रही है. वहीं, तेजस्वी यादव इस बार किसी भी हालत में 50 से ज्यादा सीटें कांग्रेस को देने के पक्ष में नहीं हैं. तेजस्वी यादव इस बार हर हालत में 150-160 सीटों पर आरजेडी कैंडिडेट्स उतारने का ऐलान कर चुके हैं. तकरीबन 10 सीटों में कांग्रेस, वीआईपी, लेफ्ट के लिए सीट छोड़ेंगे. इसी कारण महागठबंधन में बात नहीं बन रही है. क्योंकि वीआईपी भी 60 सीटों पर अपना प्रत्याशी उतारने का एक बार नहीं कई बार कर चुके हैं.
क्या होगी कांग्रेस की रणनीति?

कांग्रेस पार्टी का मानना है कि वोटर अधिकार यात्रा में राहुल गांधी की मिली लोकप्रियता के मुकाबले कम सीट देना पार्टी को मान्य नहीं होगा. कांग्रेस पार्टी को प्रदर्शन और राहुल गांधी की लोकप्रियता को देखते हुए ज्यादा सीटें मिलनी चाहिए. वहीं आरजेडी अपने ‘बड़े भाई’ की भूमिका को छोड़ने के लिए तैयार नहीं है. तेजस्वी यादव का मानना है कि पार्टी के जनाधार और उनके नेतृत्व को देखते हुए उन्हें ही ज्यादा सीटें मिलनी चाहिए.
24 सितंबर की बैठक में कांग्रेस की रणनीति का खुलासा हो सकता है. कांग्रेस बिहार में डिप्टी सीएम पद की मांग कर सकती है. अगर आरजेडी इसके लिए तैयार नहीं होती है, तो यह गठबंधन टूट भी सकता है. अगर कांग्रेस को लगता है कि उसे पर्याप्त सीटें नहीं मिल रही हैं, तो वह अकेले चुनाव लड़ने का फैसला भी ले सकती है, जैसा कि उन्होंने कुछ राज्यों में किया है. कांग्रेस के लिए सदाकत आश्रम में यह बैठक बहुत अहम है. क्योंकि, यह न सिर्फ बिहार चुनाव की दिशा तय करेगी, बल्कि यह भी तय करेगी कि कांग्रेस आने वाले समय में आरजेडी के साथ किस तरह का संबंध रखना चाहती है.
24 सितंबर को कांग्रेस नेता राहुल गांधी, सोनिया गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे बिहार आ रहे हैं. आरजेडी के साथ सीट शेयरिंग, सीएम और डिप्टी सीएम पद को लेकर महागठबंधन में बवाल मचा हुआ है. आरजेडी तेजस्वी यादव को सीएम फेस घोषित कर बिहार चुनाव में उतरने का दवाब बना रही है. लेकिन कांग्रेस को यह मंजूर नहीं है. ऐसे में बड़ा सवाल यह कि वोटर अधिकार यात्रा में जो राहुल गांधी और तेजस्वी यादव साथ-साथ नजर आए थे, क्या बिहार चुनाव में दोनों के रास्ते जुदा-जुदा हो जाएंगे? क्या 24 सितंबर को तय हो जाएगा कि बिहार में कांग्रेस आरजेडी के साथ लड़ेगी ा अकेले या किसी दूसरे गठबंधन के साथ मैदान में उतरेगी?

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राहुल-तेजस्वी की केमिस्ट्री और सीटों का गणित
पिछले दिनों राहुल गांधी और तेजस्वी यादव ‘वोटर परिवर्तन यात्रा’ में साथ-साथ नजर आए थे. दोनों नेताओं के बीच की केमिस्ट्री भी लोगों को पसंद आई थी. लेकिन, यह यात्रा खत्म होते ही सीटों के बंटवारे को लेकर महागठबंधन में बवाल मच गया है. कांग्रेस इस बार 2020 के मुकाबले यानी 70 सीट से भी अधिक सीटों की मांग कर रही है. वहीं, तेजस्वी यादव इस बार किसी भी हालत में 50 से ज्यादा सीटें कांग्रेस को देने के पक्ष में नहीं हैं. तेजस्वी यादव इस बार हर हालत में 150-160 सीटों पर आरजेडी कैंडिडेट्स उतारने का ऐलान कर चुके हैं. तकरीबन 10 सीटों में कांग्रेस, वीआईपी, लेफ्ट के लिए सीट छोड़ेंगे. इसी कारण महागठबंधन में बात नहीं बन रही है. क्योंकि वीआईपी भी 60 सीटों पर अपना प्रत्याशी उतारने का एक बार नहीं कई बार कर चुके हैं.
क्या होगी कांग्रेस की रणनीति?

कांग्रेस पार्टी का मानना है कि वोटर अधिकार यात्रा में राहुल गांधी की मिली लोकप्रियता के मुकाबले कम सीट देना पार्टी को मान्य नहीं होगा. कांग्रेस पार्टी को प्रदर्शन और राहुल गांधी की लोकप्रियता को देखते हुए ज्यादा सीटें मिलनी चाहिए. वहीं आरजेडी अपने ‘बड़े भाई’ की भूमिका को छोड़ने के लिए तैयार नहीं है. तेजस्वी यादव का मानना है कि पार्टी के जनाधार और उनके नेतृत्व को देखते हुए उन्हें ही ज्यादा सीटें मिलनी चाहिए.
24 सितंबर की बैठक में कांग्रेस की रणनीति का खुलासा हो सकता है. कांग्रेस बिहार में डिप्टी सीएम पद की मांग कर सकती है. अगर आरजेडी इसके लिए तैयार नहीं होती है, तो यह गठबंधन टूट भी सकता है. अगर कांग्रेस को लगता है कि उसे पर्याप्त सीटें नहीं मिल रही हैं, तो वह अकेले चुनाव लड़ने का फैसला भी ले सकती है, जैसा कि उन्होंने कुछ राज्यों में किया है. कांग्रेस के लिए सदाकत आश्रम में यह बैठक बहुत अहम है. क्योंकि, यह न सिर्फ बिहार चुनाव की दिशा तय करेगी, बल्कि यह भी तय करेगी कि कांग्रेस आने वाले समय में आरजेडी के साथ किस तरह का संबंध रखना चाहती है.
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