इंडिया गठबंधन में सीट बंटवारे को लेकर खींचतान जारी है। कांग्रेस के 70, वीआईपी के 50 सीटों के डिमांड के बाद अब वामदल ने अपनी तीनों पार्टियों को मिलाकर 75 सीटों की डिमांड कर दी है। पिछले विधानसभा चुनाव (2020) में 29 सीटों पर चुनाव लड़कर सबसे बेहतर स्ट्राइक रेट लाने वाले वाम दल ने सीटों की सूची तेजस्वी यादव को सौंप भी दी है। सूत्रों की मानें तो भाकपा माले 40, सीपीआई 24, सीपीआई (एम) 11 सीटों के साथ इस बार चुनावी मैदान में उतरना चाह रही है। इंडिया गठबंधन में सीट बंटवारे के मुद्दे पर क्या चल रहा? किस पार्टी का क्या कहना है? एक्सपर्ट का क्या मानना है?
जानिए, वामदल वालों का क्या कहना है
भाकपा माले के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने स्पष्ट कहा कि हमलोगों का प्रदर्शन पिछली बार काफी अच्छा रहा था। पहली प्राथमिकता अधिक सीटों पर चुनाव लड़ने की है। गठबंधन में सीट बंटवारे को लेकर बातचीत चल रही है। इसके बाद सारी बातें साफ हो पाएगा। फिलहाल हमलोग 40 सीटों की तैयारी कर रहे हैं। वहीं सीपीआई की ओर से कहा गया है कि 2020 के विधानसभा चुनाव में महज छह सीटें हमलोगों को मिली थी। यह सम्मानजनक नहीं था। बिहार के सभी जिलों में हमारा संगठन है। इसलिए इस बार हमलोग 24 सीटों की मांग कर रहे। वहीं पिछले चुनाव में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) छह सीटों पर चुनाड़ लड़ी थी। इसमें से दो सीटों पर जीत मिली थी। भाकपा माले ने 19 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे। इसमें से 12 सीटों पर जीत मिली थी। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी चार सीटों पर चुनाव लड़ी थी। इसमें दो सीटों पर जीत मिली थी।
कांग्रेस का तेवर इस बार अलग
इधर, कांग्रेस 70 विधानसभा सीटों की मांग पर अड़ा है। कांग्रेस की प्रदेश चुनाव समिति ने तो 70 सीटों पर उम्मीदवारों की लिस्ट केंद्रीय चुनाव समिति को सौंप दी है। हालांकि कांग्रेस के तेवर इस बार अलग हैं। बिहार कांग्रेस के प्रभारी कृष्णा अल्लावरू पहले ही कह चुके हैं कि सीटों के बंटवारे में अच्छी और बुरी सीटों के बीच का संतुलन होना ही चाहिए। ऐसा नहीं हो कि कांग्रेस के खाते में केवल वही सीट आए जो सामाजिक समीकरण के हिसाब से इंडिया गठबंधन के पक्ष में नहीं जाता हो। वहीं 2020 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने 70 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे। इसमें से 19 पर ही जीत मिली थी।







