बिहार की राजधानी पटना को भविष्य की जरूरतों के मुताबिक ढालने के लिए सम्राट सरकार ने एक बेहद महत्वाकांक्षी योजना को धरातल पर उतारने की तैयारी पूरी कर ली है. नगर विकास एवं आवास विभाग ने ‘पाटलिपुत्र सैटेलाइट टाउनशिप मास्टर प्लान -2047’ आधिकारिक तौर पर जारी कर दिया है. इस मास्टर प्लान के तहत वर्तमान में ग्रामीण दिखने वाले इस बड़े इलाके को पूरी तरह अत्याधुनिक और पर्यावरण के अनुकूल यानी स्पंज सिटी के रूप में परिवर्तित किया जाएगा. करीब 81 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैली इस टाउनशिप में 9 नगर निकायों और 9 प्रखंडों के 273 गांवों को शामिल किया गया है. इस महायोजना में 90 मीटर चौड़ी सड़कों से लेकर 25 बिलियन लीटर क्षमता वाले विशाल जलाशय और पटना-गया रैपिड रेल कॉरिडोर जैसी अत्याधुनिक बुनियादी सुविधाओं का पूरा खाका तैयार किया गया है. हालांकि, आम लोगों से 60 दिनों के भीतर इस मसौदे पर आपत्तियां और सुझाव भी मांगे गए हैं.
टाउनशिप में सवा किमी लंबा और इतना ही चौड़ा एक सेक्टर होगा। सबसे पहले कोर क्षेत्र और उसके बाद अन्य क्षेत्रों का विकास होगा। मास्टर प्लान 2047 की आबादी को ध्यान में रखते हुए बनाया गया है। तब अनुमानित आबादी 66.10 लाख होगी। प्रति हेक्टेयर 200 लोग निवास करेंगे। विकास आयुक्त की अध्यक्षता में शहरी आयोजना बोर्ड की बैठक में पाटलिपुत्र टाउनशिप विकास योजना-2047 को मंजूरी दी गई। फिर नगर विकास विभाग ने अधिसूचना जारी की।
तीन चरणों में होगा विकास
- फेज 1- कोर क्षेत्र का विकास, सेंट्रल बिजनेस डिस्ट्रिक्ट, आवासीय क्षेत्र, फिनटेक सिटी, लॉजिस्टिक पार्क, सड़क नेटवर्क, अन्य आधारभूत संरचनाएं।
- फेज 2- आवासीय क्षेत्र का विस्तार, शैक्षणिक, वित्तीय संस्थन, स्पोर्ट्स सिटी, औद्योगिक क्षेत्र और लॉजिस्टिक पार्क, छोटी सड़कों का विकास।
- फेज 3- टाउनशिप इलाके में शेष क्षेत्रों का विकास, पार्क और मनोरंजन केंद्र, छोटे बाजार, अन्य संसाधन।
90 मीटर चौड़ी होगी मेन रोड
पाटलिपुत्र सेटेललाइट टाउनशिप के बीचोबीच 90 मीटर चौड़ी सड़क गुजरेगी। ये उत्तर से दक्षिण और पूरब से पश्चिम चारों दिशाओं में जाएगी। इसे लगी हुई सड़क रिंग रोड कही जाएगी, जो 60 मीटर चौड़ी होगी। नगर विकास विभाग की ओर से शनिवार को टाउनशिप के मास्टर प्लान के प्रारूप की अधिसूचना जारी की गई। पाटलिपुत्र सेटेलाइट टाउनशिप के मास्टर प्लान का प्रारूप (मास्टर प्लान) जारी होते ही दूसरे दस टाउनशिप के मास्टर प्लान का काम भी तेज कर दिया गया है।
शानदार सड़कों का जाल और रैपिड रेल कॉरिडोर
25 बिलियन लीटर का जलाशय और स्पंज सिटी मॉडल
कैसा होगा भूमि उपयोग का ढांचा?
- आवासीय क्षेत्र: 35.18% प्रतिशत (मकानों और सोसायटियों के लिए).
- शहरी कृषि (अर्बन एग्रीकल्चर): 21.57% प्रतिशत (हरियाली और पर्यावरण संतुलन के लिए).
- परिवहन और संचार: 7.64% प्रतिशत (सड़कों और स्टेशनों के लिए).
- मनोरंजन क्षेत्र: 5.85% प्रतिशत (पार्क, थिएटर और खेल के मैदानों के लिए).
- औद्योगिक क्षेत्र: 5.70% प्रतिशत (रोजगार और उद्योगों के लिए).
मास्टरप्लान में सर्वसमावेशी मापदंड अपनाया जाएगा
अखबार में प्रकाशित जानकारी के अनुसार, मास्टर प्लान लागू होने के बाद सार्वजनिक उपयोग के लिए चिन्हित भूमि सरकार को देनी होगी. साथ ही जिन क्षेत्रों को सार्वजनिक उपयोग के लिए आरक्षित किया जाएगा, वहां जमीन की खरीद-बिक्री पर रोक रहेगी और आवास बोर्ड भी आवेदन स्वीकार नहीं करेगा.







