चिरैया विधानसभा सीट बिहार के पूर्वी चंपारण जिले में है, जो 2008 के परिसीमन के बाद अस्तित्व में आई। पिछले तीन चुनावों (2010, 2015, 2020) में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने यहां लगातार जीत हासिल की है। 2020 में बीजेपी के लाल बाबू प्रसाद गुप्ता ने राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के अच्छेलाल यादव को 16,874 मतों के बड़े अंतर से हराया था। इस सीट पर प्रमुख मुकाबला आम तौर पर बीजेपी और राजद के बीच रहता है।
चिरैया विधानसभा क्षेत्र 2025: विस्तार से जानकारी
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क्षेत्रीय स्थिति:
चिरैया विधानसभा क्षेत्र बिहार के पूर्वी चंपारण जिले में स्थित है। इसमें चिरैया और पतही प्रखंड आते हैं। यह विधानसभा क्षेत्र 2008 के परिसीमन के बाद अस्तित्व में आया है। यह क्षेत्र शिवहर लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा भी है। -
राजनीतिक इतिहास और चुनाव परिणाम:
चिरैया विधानसभा क्षेत्र में अब तक तीन विधानसभा चुनाव हो चुके हैं (2010, 2015, 2020), जिनमें सभी बार भाजपा ने जीत हासिल की है।-
2010 में अवनीश कुमार सिंह (भाजपा) ने जीत दर्ज की।
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2015 में लाल बाबू प्रसाद गुप्ता (भाजपा) ने चुनाव जीता।
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2020 में भी लाल बाबू प्रसाद गुप्ता ही विजेता रहे, जिन्होंने राष्ट्रीय जनता दल के अच्छेलाल यादव को 16,874 वोटों से हराया।
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वोटर डालना और वोट शेयर:
2020 के चुनाव में कुल मतदाताओं की संख्या लगभग 2.78 लाख थी, जिसमें वोट डालने का प्रतिशत लगभग 59.5% था। लाल बाबू प्रसाद गुप्ता को 62,904 वोट मिले जबकि अच्छेलाल यादव को 46,030 वोट। -
2025 चुनाव का अनुमानित सियासी परिदृश्य:
2025 में इस सीट पर भाजपा, जेडीयू, एलजेपी, राजद, कांग्रेस सहित अन्य दलों के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिलेगी। क्षेत्र में यादव, भूमिहार, राजपूत, मुस्लिम और अन्य OBC समुदायों के मतदाता महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। चुनावी मुकाबला खासा दिलचस्प और कड़ा रहने की उम्मीद है। -
चिरैया विधानसभा क्षेत्र की विशेषता:
यह सीट पूर्वी चंपारण की राजनीतिक रूप से संवेदनशील और प्रमुख सीट मानी जाती है। यहां के मतदाता बहुत जागरूक हैं और हर चुनाव में सियासी समीकरण समय-समय पर बदलते रहते हैं।
सीट का चुनावी इतिहास
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1957: निर्दलीय (रूपलाल राय) विजेता रहे।
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1962: कांग्रेस विजेता रही।
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CPI ने तीन बार लगातार जीत दर्ज की (1977, 1990, 1995)।
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1985 में जनता पार्टी की जीत।
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1990, 1995: जनता दल और 2000 में राजद ने जीत दर्ज की।
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2010: जदयू विजेता (शिवजी राय)।
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2015, 2020: बीजेपी (राणा रणधीर सिंह) विजेता रहे। 2020 में राणा रणधीर सिंह (बीजेपी) ने मदन प्रसाद सिंह (राजद) को 5,878 वोटों के अंतर से हराया था।
| साल | विजेता | पार्टी | वोट प्राप्त | अंतर |
|---|---|---|---|---|
| 2020 | राणा रणधीर सिंह | बीजेपी | 73,179 | 5,878 |
| 2015 | राणा रणधीर | बीजेपी | 61,054 | 16,222 |
| 2010 | शिवजी राय | जदयू | 40,478 | 10,122 |
| 2005 | राजेश कुमार रौशन | राजद | 31,090 | 13,804 |
| 2000 | ओबैदुल्लाह | एसएपी | 46,743 | 29,319 |
| 1995 | यमुना यादव | सीपीआई | 52,003 | 25,204 |
| 1990 | यमुना यादव | सीपीआई | 40,216 | 19,766 |
| 1985 | राय हरिशंकर शर्मा | कांग्रेस | 31,452 | 6,638 |
| 1977 | पिताम्बर सिंह | सीपीआई | 30,560 | 6,382 |
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इस सीट पर जातीय समीकरण महत्वपूर्ण है – मुस्लिम, ब्राह्मण, राजपूत, कुशवाहा और रविदास जाति के वोटरों की संख्या निर्णायक मानी जाती है।
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2008 के परिसीमन के बाद यह सामान्य वर्ग की सीट है।
कौन जीत सकता है?
फिलहाल, बीजेपी के पास लगातार दो बार की जीत का फायदा है और राणा रणधीर सिंह का कद मजबूत है, लेकिन मुस्लिम मतदाताओं की संख्या ज्यादा होने से राजद और अन्य विपक्षी दल भी चुनौती देने की स्थिति में हैं। मुकाबला कड़ा रहने के आसार हैं और परिणाम के लिए जनता के वोटिंग बिहेवियर और प्रत्याशियों के चुनावी रणनीति पर निर्भर करेगा।
वर्तमान स्थिति (2025 चुनाव तक)
प्रत्याशियों और पार्टी समीकरण
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अभी तक 2025 के लिए अधिकृत प्रत्याशी तिथियां घोषित नहीं हुई हैं।
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राजनीतिक परिदृश्य: BJP की चिरैया में मजबूत पकड़ रही है लेकिन RJD हर बार कड़ी टक्कर देती है; सीट राजनीतिक नजरिए से ‘काँटे की टक्कर’ वाली मानी जाती है—यहाँ हर चुनाव परिणाम निर्णायक रहा है।
सियासी हलचले और संभावित गठजोड़
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केंद्र में सक्रिय नेता चिराग पासवान ने चुनाव लड़ने का संकेत दिए हैं—लेकिन अभी तक यह स्पष्ट नहीं कि वह किस सीट से जाएंगे; यह रणनीतिक दांव भी हो सकता है।
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कांग्रेस नेता कन्हैया कुमार ने भी चुनाव लड़ने के इच्छुक होने की बात कही है, यदि पार्टी उनसे कहे तो।
2020 के मुकाबले 2025 में चिरैया विधानसभा क्षेत्र में उम्मीदवारों की संख्या बढ़ी है, और मुख्य विपक्षी दलों ने नए मजबूत उम्मीदवार उतारे हैं, जबकि भाजपा ने मौजूदा विजेता लाल बाबू प्रसाद गुप्ता को पुनः मैदान में रखा है। इससे चुनावी परिदृश्य ज्यादा चुनौतीपूर्ण और अनिश्चित हो गया है।चिरैया विधानसभा क्षेत्र के 2020 और 2025 के चुनावों में उम्मीदवारों की तुलना में मुख्य बदलाव यह हैं:
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2020 में प्रमुख मुकाबला भाजपा के लाल बाबू प्रसाद गुप्ता और राजद के अच्छेलाल यादव के बीच था। भाजपा ने लाल बाबू प्रसाद गुप्ता के साथ जीत हासिल की थी।
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2025 में भाजपा ने फिर से लाल बाबू प्रसाद गुप्ता को उम्मीदवार बनाया है, लेकिन विपक्षी दलों जैसे राजद, जेडीयू, एलजेपी और कांग्रेस ने नए उम्मीदवार उतारे हैं।
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2025 में उम्मीदवारों की संख्या बढ़ी है और बहुकोणीय मुकाबला बनने की संभावना है, जो 2020 के मुकाबले अधिक प्रतिस्पर्धी और जटिल सियासी परिदृश्य दर्शाता है।
इससे स्पष्ट है कि 2025 में विपक्षी दलों ने अधिक उम्मीदवार मैदान में उतार कर मुकाबला सशक्त बनाने की कोशिश की है, जबकि भाजपा ने 2020 के जीतने वाले उम्मीदवार पर भरोसा रखा है।
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संक्षेप में:
चिरैया विधानसभा क्षेत्र पूर्वी चंपारण जिले का एक महत्वपूर्ण विधानसभा क्षेत्र है जहां 2025 में भी भाजपा व विपक्षी दलों के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिलेगा। पिछले चुनावों में भाजपा की पकड़ मजबूत रही है, लेकिन गठबंधन समीकरण और मतदाता का मूड इस बार चुनाव परिणाम को प्रभावित करेगा।
कौन जीत सकता है?
2025 के चुनाव में भी बीजेपी और राजद मुख्य मुकाबले में हैं। बीजेपी के लाल बाबू प्रसाद गुप्ता की इस क्षेत्र में मजबूत पकड़ है। पिछली तीन बार की जीत और बढ़ते वोट अंतर को ध्यान में रखते हुए बीजेपी फ़िलहाल प्रबल दावेदार मानी जा रही है, लेकिन राजद और अन्य विपक्षी दल मजबूत टक्कर दे सकते हैं। वोटरों का मूड समय के साथ बदलता रहता है, इसलिए अंतिम परिणाम वोटिंग के दिन के भाव और पार्टियों की रणनीति पर निर्भर करेगा।





