शिवहर विधानसभा सीट बिहार के सबसे चर्चा में रहने वाले क्षेत्रों में है। यहां मुख्य मुकाबला हाल के वर्षों में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) और जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के बीच रहा है। 2020 में राजद के चेतन आनंद ने जीत हासिल की थी। इससे पहले जदयू के शर्फुद्दीन लगातार दो बार विधायक रहे थे। सीट का जातीय समीकरण और बाहुबली नेताओं का प्रभाव यहां का चुनावी रंग-रूप तय करते हैं .शिवहर विधानसभा सीट बिहार की राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण और संभावित बदलावों से भरी हुई सीट है, जहां 2025 के चुनावों में उत्साहजनक मुकाबला देखने को मिलेगा।
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क्षेत्रीय परिचय:
शिवहर विधानसभा सीट बिहार के शियोहर जिले में है। यह सामान्य वर्ग की सीट है जो शिवहर लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है। इस क्षेत्र में शिवहर, पिपराही, डुमरी कटसरी, और पुरनहिया प्रखंड आते हैं। -
चुनावी इतिहास:
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रघुनाथ झा इस क्षेत्र के सबसे प्रमुख नेता रहे, जिन्होंने 1972 से 1995 तक अलग-अलग पार्टियों (कांग्रेस, जनता पार्टी, जनता दल) से 6 बार विधायक पद हासिल किया। वे बिहार सरकार के मंत्री भी रहे।
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1998 में राजद के ठाकुर रत्नाक ने उपचुनाव जीता।
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2005 में राजद के अजीत कुमार झा ने जेडीयू के ठाकुर रत्नाकार को हाराया।
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2010 और 2015 में जेडीयू के मोहम्मद शरफुद्दीन ने जीत दर्ज की, मगर 2020 में राजद के चेतन आनंद ने बड़े अंतर से (36,686 वोट) जीत हासिल की।
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2020 में कुल मतदाता करीब 3.03 लाख थे और मतदान प्रतिशत लगभग 58.5% था।
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चुनावी समीकरण 2025 में:
2025 चुनाव में यह सीट बेहद प्रतिस्पर्धात्मक बनी हुई है। मुख्य मुकाबला राष्ट्रीय जनता दल (राजद), जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू), भाजपा और कांग्रेस के बीच माना जा रहा है। राजद के चेतन आनंद अभी मौजूदा विधायक हैं और अपनी लोकप्रियता के बल पर सीट को फिर से जीतने की कोशिश करेंगे। वहीं नतीजे जातीय समीकरण, गठबंधनों और स्थानीय मुद्दों पर निर्भर होंगे। वैश्य, राजपूत, मुस्लिम, ब्राह्मण और भूमिहार समुदाय यहां प्रमुख हैं, जिनका वोट महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
शिवहर सीट का चुनावी इतिहास
| साल | विजेता | पार्टी | वोट | जीत का अंतर |
|---|---|---|---|---|
| 2020 | चेतन आनंद | राजद | 73,143 | 36,686 |
| शर्फुद्दीन | जदयू | 36,457 | ||
| 2015 | शर्फुद्दीन | जदयू | – | 461 |
| 2010 | शर्फुद्दीन | जदयू | – | 1,631 |
| 2005 | अजीत कुमार झा | राजद | – | 205 |
| 2000 | रत्नाकर ठाकुर | राजद | – | – |
| 1995 | रघुनाथ झा | जनता दल | – | – |
| 1985 | रघुनाथ झा | जनता पार्टी | – | – |
| 1980 | रघुनाथ झा | कांग्रेस इंदिरा | – | – |
| 1977 | रघुनाथ झा | कांग्रेस | – | – |
| 1972 | रघुनाथ झा | कांग्रेस | – | 9,420 |
| 1969 | ठाकुर गिरजानंदन सिंह | भारतीय क्रांति दल | – | 3,613 |
| 1967 | ठाकुर गिरजानंदन सिंह | निर्दलीय | – | 1,841 |
| 1962 | चितरंजन सिंह | कांग्रेस | – | 2,234 |
| 1957 | गिरजानंदन सिंह | निर्दलीय | – | – |
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रघुनाथ झा यहां के सबसे चर्चित चेहरा रहे, जिन्होंने अलग-अलग पार्टियों की तरफ से 27 साल तक विधायक रहे.
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2010 से जदयू, उसके बाद 2020 में राजद ने किला फतह किया है.
वैश्य और राजपूत वोट का शिवहर विधानसभा चुनावों में प्रभाव और नतीजों में महत्व
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वैश्य वोट का प्रभाव:
शिवहर विधानसभा क्षेत्र में वैश्य समुदाय के मतदाता सबसे अधिक संख्या में हैं। यह समुदाय पारंपरिक रूप से भाजपा को वोट करता रहा है और मतदान में निर्णायक भूमिका निभाता है। वैश्य वोटरों का लगभग 15% हिस्सा माना जाता है, जो चुनाव के नतीजों को काफी प्रभावित करता है। यदि वैश्य वोट एकजुट होकर किसी उम्मीदवार का समर्थन करता है, तो वह उम्मीदवार को भारी लाभ पहुंचता है। हालांकि कभी-कभी वैश्य वोट में भी मतभेद देखने को मिले हैं, पर अधिकतर भाजपा और उसके गठबंधन का साथ रहा है। -
राजपूत वोट का महत्व:
राजपूत समुदाय यहाँ चुनावी समीकरणों में भी अहम भूमिका निभाता है। राजपूत वोटेडर संख्यात्मक दृष्टि से वैश्य से कम हो सकते हैं, पर प्रभाव के लिहाज से यह वोट बहुत प्रभावशाली है क्योंकि राजपूत समाज में नेतृत्व का एक बड़ा प्रभाव होता है और वे कई अन्य छोटे वोटरों को प्रभावित करते हैं।
परंपरागत रूप से राजपूत वोट भाजपा-जेडीयू गठबंधन और राजद के बीच बंटा रहता है। हाल के चुनावों में राजपूतों के बीच राजद के प्रति झुकाव भी बढ़ा है, खासकर लालू यादव के प्रभाव की वजह से। भाजपा ने भी इस वोट बैंक को आकर्षित करने के लिए रणनीतिक प्रयास किए हैं, जिसमें शीर्ष नेताओं की सक्रियता शामिल है। -
चुनावी परिणामों को तय करने में दोनों वोटों का सामूहिक महत्व:
शिवहर विधानसभा में वैश्य और राजपूत वोट दोनों मिलकर चुनावी नतीजे तय करते हैं। जो भी उम्मीदवार इन दोनों समुदायों का समर्थन पाने में सफल होता है, वह चुनाव जीतने के करीब होता है। इसके साथ ही मुस्लिम, ब्राह्मण, भूमिहार और अन्य समुदायों के वोट भी निर्णायक भूमिका निभाते हैं। कुल मिलाकर, वैश्य वोट मुख्य रूप से भाजपा गठबंधन के पक्ष में जाते हैं, जबकि राजपूत वोट दोनों मुख्य दलों के बीच बंटे रहते हैं, जिससे चुनाव कभी भी अप्रत्याशित परिणाम दे सकता है।
संक्षेप में:
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वैश्य वोटिंग ज्यादातर बीजेपी गठबंधन के पक्ष में जाती है और यह नींव की तरह काम करता है।
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राजपूत वोट दोनों प्रमुख दलों (राजद और बीजेपी-जेडीयू) के बीच बंटा रहता है और इसका प्रभाव क्षेत्र व्यापक है।
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इन दोनों वोटों के समर्थन पर चुनाव नतीजे बहुत हद तक निर्भर करते हैं, साथ ही अन्य जातीय समूहों के वोट भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
यह जातीय समीकरण शिवहर विधानसभा क्षेत्र के चुनावों को हमेशा रोमांचक और प्रतिस्पर्धात्मक बनाए रखता है।
कौन जीत सकता है?
2025 में मुख्य मुकाबला राजद के चेतन आनंद और जदयू/एनडीए उम्मीदवार के बीच रहने की संभावना है। चेतन आनंद बाहुबली नेता आनंद मोहन सिंह के पुत्र हैं, जिनकी क्षेत्र में लोकप्रियता बढ़ रही है। जदयू का पिछला आधार, परिसीमन के बाद बदलता जातीय समीकरण और बाढ़ संबंधी स्थानीय मुद्दे चुनाव को रोचक बना सकते हैं। भाजपा या लोजपा भी गठबंधन के तहत मुकाबले में रह सकती है.
फिलहाल, चेतन आनंद सबसे प्रमुख दावेदार माने जा रहे हैं, लेकिन अंतिम परिणाम चुनावी रणनीति, वोटिंग प्रतिशत और पार्टी गठजोड़ पर निर्भर करेगा।






