रीगा विधानसभा सीट बिहार के सीतामढ़ी जिले की महत्वपूर्ण सीटों में है, जहां मुख्य मुकाबला भारतीय जनता पार्टी (BJP) और कांग्रेस (INC) के बीच होता रहा है। हाल के चुनावों के आंकड़ों और राजनीतिक समीकरणों के आधार पर यहां फिर से बीजेपी को मजबूत दावेदार माना जा रहा है, लेकिन कांग्रेस भी टक्कर देती रही है. रीगा विधानसभा सीट बिहार की महत्वपूर्ण सीटों में से एक है जहां 2025 विधानसभा चुनाव में भाजपा और कांग्रेस के बीच पुरानी और कड़ी टक्कर देखने को मिलेगी। जातीय समीकरण, विकास कार्यों और स्थानीय मुद्दों के आधार पर ही अंततः इस सीट का नतीजा तय होगा।
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क्षेत्र का परिचय:
रीगा विधानसभा क्षेत्र बिहार के सीतामढ़ी जिले में स्थित है और यह शिवहर लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आता है। रीगा विधानसभा क्षेत्र में रीगा, सुप्पी और बैरगनिया प्रखंड आते हैं। यह क्षेत्र 2010 में परिसीमन के बाद अस्तित्व में आया है। -
चुनावी इतिहास:
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2010 में इस सीट पर पहली बार चुनाव हुआ, जिसमें भाजपा के मोती लाल प्रसाद ने जीत हासिल की थी।
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2015 में कांग्रेस के अमित कुमार ने मोदी लाल प्रसाद को 20,856 वोटों से हराकर जीत हासिल की।
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2020 में भाजपा के मोती लाल प्रसाद ने फिर से मसरा संभाला, उन्होंने कांग्रेस के अमित कुमार को 32,495 वोटों के बड़े अंतर से हराया। साल 2020 में मोती लाल को 95,226 वोट मिले और अमित कुमार को 62,731 वोट।
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जातीय समीकरण और राजनीतिक गणित:
रीगा क्षेत्र में यादव, राजपूत, ब्राह्मण और कोइरी जाति के वोटर सबसे अधिक हैं। भाजपा को इन जातियों का समर्थन अधिक मिलता रहा है, वहीं कांग्रेस और अन्य दल भी यहाँ अपनी पकड़ बनाने की कोशिश कर रहे हैं। स्थानीय मुद्दों जैसे बिजली, शिक्षा और किसानों के सवाल भी चुनाव में अहम भूमिका निभाते हैं। -
2025 चुनाव की भूमिका:
2025 में भाजपा के मोती लाल प्रसाद फिर से चुनावी मैदान में हैं, जबकि कांग्रेस से अमित कुमार मुकाबला कर रहे हैं। दोनों उम्मीदवारों के बीच पुरानी टक्कर जारी रहने की संभावनाएं हैं। मुकाबला कड़ा होने की वजह से चुनाव परिणाम अभी तक अनिश्चित है।
सीट का चुनावी इतिहास
| साल | विजेता (पार्टी) | वोट | उपविजेता (पार्टी) | वोट | जीत का अंतर |
|---|---|---|---|---|---|
| 2020 | मोती लाल प्रसाद (BJP) | 95,226 | अमित कुमार (INC) | 62,731 | 32,495 |
| 2015 | अमित कुमार (INC) | 79,217 | मोतीलाल प्रसाद (BJP) | 58,361 | 20,856 |
| 2010 | मोतीलाल प्रसाद (BJP) | 48,633 | अमित कुमार (INC) | 26,306 | 22,327 |
| 2005 | रामसेवक सिंह (JDU) | 30,748 | बाबुद्दीन खान (INC) | 23,135 | 7,613 |
| 2000 | प्रभुदयाल सिंह (SAP) | 49,084 | अब्दुल समाद (IND) | 24,596 | 24,488 |
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पहली बार 2010 में रीगा सीट अस्तित्व में आई थी और उसी वर्ष बीजेपी ने जीत दर्ज की थी।
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2015 में कांग्रेस ने यह सीट बीजेपी से छीन ली, लेकिन 2020 में फिर बीजेपी ने बड़ी जीत हासिल की।
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पारम्परिक तौर पर यहां भाजपा और कांग्रेस का सीधा मुकाबला रहता है, हालांकि क्षेत्रीय दल भी मैदान में रहते हैं.
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2020 में 53% वोट शेयर के साथ मोती लाल प्रसाद ने अपनी पकड़ मजबूत की थी.
कौन जीत सकता है?
2025 के चुनाव में फिर भाजपा के मोती लाल प्रसाद और कांग्रेस के अमित कुमार के बीच सीधा मुकाबला होने की संभावना है। मतदाता समीकरण, स्थानीय मुद्दे (बिजली, शिक्षा, किसान), और उम्मीदवार की छवि चुनाव परिणाम को प्रभावित कर सकते हैं। पिछली जीत के आधार पर बीजेपी को फ़िलहाल बढ़त मिलती दिख रही है, लेकिन कांग्रेस के अमित कुमार भी ज़ोरदार टक्कर देने की स्थिति में हैं.
2025 की स्थिति: संभावित उम्मीदवार और राजनीतिक परिदृश्य
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प्रत्यक्ष उम्मीदवारों की आधिकारिक घोषणा अभी नहीं हुई है। Wikipedia या चुनाव आयोग पर 2025 के रिगा उम्मीदवारों की ताजी जानकारी नहीं है।
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संभावित मुकाबला:
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2025 में संभवतः फिर से मोतीलाल प्रसाद (BJP) और अमित कुमार (INC) आमने-सामने हो सकते हैं—जो 2020 जैसा मुकाबला दिखा सकते हैं।
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BJP और JDU गठबंधन पिछली बार लाभकारी साबित हुआ था—यदि यही गठबंधन बना रहता है, तो मोतीलाल प्रसाद को फिर से जीत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
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मंत्री पद और राजनीतिक अनुपात:
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फरवरी 2025 में, मोतीलाल प्रसाद को नीतीश कैबिनेट में कला, संस्कृति और युवा मंत्री बनाया गया—इससे उनकी स्थिति और प्रभाव बढ़ा है।
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जातीय और विकास संबंधी समीकरण:
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क्षेत्र में यादव, राजपूत, ब्राह्मण और कोइरी जैसी जातियों का अच्छा प्रभाव है। BJP-JDU गठबंधन को यह समीकरण सियासी फायदा दे सकता है।
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हाल ही में रीगा चीनी मिल के दोबारा संचालन और रोजगार सृजन (करीब 2,400 नौकरियां) ने BJP के पक्ष में स्थानीय समर्थन बढ़ा सकता है।
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स्थानीय राजनीति में हलचल:
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पार्टी रणनीतिकार प्रशांत किशोर की “बदलाव यात्रा” में रीगा में उन्होंने लालू-नीतीश शासन से लोगों की उदासी और बदलाव की मांग की ओर संकेत किया।
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