सिवान विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र बिहार के 243 विधानसभा सीटों में से एक है। यह विधानसभा सीट एक सामान्य श्रेणी की विधानसभा सीट है। यह विधानसभा सीट सिवान जिले में स्थित है और सिवान संसदीय सीट के 6 विधानसभा सीटों में से एक है।
रौंदा विधानसभा चुनाव 2025 बिहार के सीवान जिले की एक महत्वपूर्ण और प्रतिस्पर्धात्मक विधानसभा सीट पर होने वाला चुनाव है। दरौंदा विधानसभा सीट में कुल मतदाता आधार ग्रामीण है, जिसमें अनुसूचित जाति और मुस्लिम मतदाताओं की संख्या लगभग समान है (लगभग 11.7% प्रत्येक)। इस क्षेत्र का राजनीतिक इतिहास विविध रहा है, जहां जनता दल (यूनाइटेड) की मुख्यमंत्री जगमतो देवी ने 2010 में जीत दर्ज की थी, और इसके बाद उनकी बहू कविता सिंह ने 2011 और 2015 में लगातार जीत हासिल की।
2019 के लोकसभा चुनाव में कविता सिंह के जीतने के बाद यहां उपचुनाव हुआ, जिसमें स्वतंत्र प्रत्याशी करणजीत सिंह ने बड़ी जीत दर्ज की। बाद में करणजीत सिंह भाजपा में शामिल हो गए। 2020 के विधानसभा चुनाव में करणजीत सिंह (भाजपा) ने कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) (माले) के अमरनाथ यादव को 11,320 वोटों के अंतर से हराया था।
दरौंदा विधानसभा क्षेत्र में जातीय समीकरण में भूमिहार, यादव, कुर्मी, मुसलमान, और दलित महत्वपूर्ण वोटर समुदाय हैं। यहां के स्थानीय मुद्दों में रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाएं, सड़क, और पलायन जैसे विषय अहम भूमिका निभाते हैं। 2024 के लोकसभा चुनाव में जेडीयू की विजयलक्ष्मी देवी ने इस क्षेत्र में बड़ी बढ़त बनाई है, जिससे एनडीए के लिए यह सीट महागठबंधन से छीनना चुनौतीपूर्ण बना है।
2025 के चुनाव में भाजपा, जदयू, आरजेडी, कांग्रेस और अन्य गठबंधन दलों के बीच कड़ा मुकाबला देखा जाएगा। भाजपा को अपने शासनकाल का हिसाब देना होगा, जबकि विपक्षी दल स्थानीय विकास और रोजगार जैसे मुद्दों पर जोर देंगे।
संक्षेप में, दरौंदा विधानसभा चुनाव 2025 एक ज़ोरदार मुकाबले वाला चुनाव होगा, जिसमें भाजपा के करणजीत सिंह और विपक्षी दलों के उम्मीदवारों के बीच कड़ी टक्कर की संभावना है। जातीय समीकरण, स्थानीय विकास, और रोजगार के मुद्दे इस चुनाव की दिशा तय करेंगे। युवाओं में पलायन और मतदाता जागरूकता भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।
यह चुनाव दरौंदा की राजनीतिक विरासत, बगावत और बदलाव के सफर को आगे बढ़ाएगा, जहां पारिवारिक राजनीति के साथ-साथ नए राजनीतिक एजेंडे भी महत्वपूर्ण हो रहे हैं।
चुनाव का समय और पृष्ठभूमि
-
2025 में बिहार में विधानसभा चुनाव अक्टूबर–नवंबर के बीच आयोजित होने की संभावना है, चुनाव आयोग सितंबर में तारीखों की घोषणा कर सकता है।
-
मतदाता सूची का पुनरीक्षण पूरा हो चुका है और अंतिम सूची जनवरी 2025 तक जारी की गई है।
मुख्य गठबंधन और दल
NDA (राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन)
-
मुख्य घटक: BJP, JD(U), LJP (रामविलास), HAM, RLM
-
‘मिशन 225’ के तहत यह गठबंधन 225 सीटें जीतने का लक्ष्य रखता है।
-
सरकार की प्राथमिक ताकत: नीतीश कुमार का प्रशासनिक अनुभव और BJP की संगठन शक्ति एवं पीएम मोदी की लोकप्रियता। चुनौती: लगातार गठबंधन बदलने की छवि गतिशीलता पैदा कर रही है।
महागठबंधन (INDIA ब्लॉक)
-
प्रमुख घटक: RJD, कांग्रेस, वाम दल
-
RJD की युवा नेतृत्व—तेजस्वी यादव, MY (मुस्लिम–यादव) वोट बैंक पर दृढ़ आधारित, युवा और बेरोजगारी जैसे मुद्दों पर जोर।
-
चुनौती: गठबंधन के भीतर समन्वय की कमी और कांग्रेस की सीमित संगठनात्मक क्षमता।
अन्य अहम खिलाड़ी
-
जन सुराज पार्टी (प्रशांत किशोर की): जमीनी स्तर पर गठबंधन के बाहर एक विकल्प के रूप में उभर रही है और जाति-मुक्त रणनीतियों से चिंतनशील मतदाताओं को आकर्षित कर सकती है।
-
SBSP (ओम प्रकाश राजभर): हिंदू OBC समूहों में पकड़ बनाने की कोशिश में एक संभावित तीसरा मोर्चा बना सकता है, जिससे मुख्य दलों के वोट बैंक विभाजित हो सकते हैं।
-
तेजप्रताप यादव: खुद का गठबंधन बनाकर RJD के वोट बैंक में हल्का प्रभाव डाल सकते हैं।
जातिगत समीकरण और महत्वपूर्ण आधार
-
जातिगत वितरण (2023 की जनगणना अनुसार):
-
EBC ~ 36%, OBC ~ 27%, SC ~ 20%, Sवर्ण ~ 15%
-
-
मुस्लिम मतदाता (~17%) भी निर्णायक हो सकते हैं—RJD–महागठबंधन इनमें पारंपरिक रूप से मजबूत रहे।
पक्ष–प्रतिपक्ष की रणनीतियाँ:
-
BJP: OBC, सवर्ण, SC पर फोकस—जन कल्याण योजनाएँ, राष्ट्रवाद, विकास एजेंडा।
-
RJD: MY समीकरण को मजबूत रखते हुए बेरोजगारी, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं पर जोर।
-
JDU: नीतीश मॉडल—गांवों में आधारभूत ढांचा, महिला वोटर, EBC ध्यान केंद्रित।
-
LJP: दलितों और महा‑दलित वर्गों के लिए कल्याणकारी वादे।
-
कांग्रेस: RJD के साथ गठबंधन मजबूत बनाना, सांप्रदायिकता विरोधी ढंग से उम्मीदवार मैदान में उतारना।
युवाओं, सीमांचल और मतदान प्रक्रिया
-
युवा मतदाता (35 वर्ष से कम): रोजगार, कौशल विकास, और डिजिटल योजनाओं का प्रभाव बड़ा — दोनों मुख्य गठबंधन इसे भूले नहीं हैं।
-
सीमांचल क्षेत्र: मतदाता सूची से बड़ी संख्या में नाम हटना (7.62 लाख) विवादित हुआ—ध्रुवीकरण और चुनाव पर असर की संभावनाएँ बनी हुई हैं।
-
इलेक्ट्रोनीक तैयारियाँ: मतदान केंद्रों में सुधार—मतदाता प्रति बूथ सीमा घटाना, जन जागरूकता सर्वे, डिजिटल टूल्स का इस्तेमाल।
रणनीतिक रुझान और लोकप्रियता
-
हालिया सर्वेक्षणों में तेजस्वी यादव को मुख्यमंत्री पद के लिए सबसे ज्यादा पसंदीदा माना गया; प्रशांत किशोर की लोकप्रियता भी बढ़ रही है; नीतीश कुमार को तीसरा स्थान मिला।
-
NDA को चुनाव में भारी बढ़त की उम्मीद जताई जा रही है, खासकर महिला और वरिष्ठ नागरिक मतदाताओं के समर्थन से।
-
विकास बनाम जातिगत मुद्दे, और युवा प्रेरणा के संतुलन पर चुनाव टिका रहेगा।
जनता का मताधिकार किन मुद्दों पर केंद्रित है
जनता का मताधिकार मुख्य रूप से निम्नलिखित मुद्दों पर केंद्रित होता है:
-
सरकार चुनने का अधिकार: संविधान द्वारा हर वयस्क नागरिक को बिना किसी भेदभाव के अपने प्रतिनिधि को चुनने का अधिकार मिलता है, जो लोकतंत्र की नींव है।
-
समानता और निष्पक्षता: मताधिकार जाति, धर्म, रंग, लिंग, आर्थिक स्थिति आदि से स्वतंत्र होता है और सभी को समान अवसर प्रदान करता है।
-
लोकतांत्रिक भागीदारी: मताधिकार से जनता सक्रिय रूप से शासन में भाग लेती है और सरकार की जवाबदेही सुनिश्चित करती है।
-
स्थानीय और राष्ट्रीय विकास: मतदाताओं की इच्छाओं और जरूरतों के आधार पर सरकार स्थानीय विकास, रोजगार, सामाजिक न्याय जैसे मुद्दों पर नीति बनाती है।
-
सामाजिक बदलाव: मतदान व्यवहार जाति, धर्म और क्षेत्रीय आधार पर प्रभावित होता है, लेकिन आर्थिक और स्थानीय जरूरतें भी महत्वपूर्ण हैं।
-
शिक्षा और जागरूकता: बेहतर मतदान व्यवहार और लोकतंत्र के लिए मतदाता जागरूकता और शिक्षा जरूरी है ताकि वे सही निर्णय ले सकें।
संक्षेप में, जनता का मताधिकार अपनी सरकार चुनने, समान और निष्पक्ष मतदान के सिद्धांतों, सामाजिक-आर्थिक विकास, और लोकतंत्र की स्थिरता में सक्रिय भागीदारी पर केंद्रित रहता है।






