बिहार में वोटर लिस्ट रिवीजन पर विवाद गहराता जा रहा है. TMC सांसद महुआ मोइत्रा ने चुनाव आयोग के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. महुआ मोइत्रा ने ECI के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें बिहार में मतदाता सूची की Special Intensive Revision यानी विशेष पुनरीक्षण की बात कही गई है. याचिका में मांग की गई है कि— सुप्रीम कोर्ट इस आदेश पर तत्काल रोक लगाए, और ECI को निर्देश दे कि वो देश के बाकी राज्यों में भी ऐसा कोई आदेश ना जारी करें. महुआ मोइत्रा का आरोप है कि- यह आदेश मनमाना, असंवैधानिक और गरीबों, महिलाओं और प्रवासी मतदाताओं को वोटिंग प्रक्रिया से बाहर करने वाला है. इसके अलावा योगेंद्र यादव ने भी सुप्रीम कोर्ट में वोटर लिस्ट रिवीजन के संबंध में याचिका दाखिल की है.
ADR ने फैसले के खिलाफ दायर की याचिका
इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है। एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) ने इस फैसले को चुनौती दी है। एक अखबार के अनुसार एडीआर का कहना है कि इससे लाखों लोग मताधिकार से वंचित हो जाएंगे। याचिका में कहा गया है कि चुनाव आयोग का फैसला स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव के खिलाफ है। एडीआर ने सुप्रीम कोर्ट से इस मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की है। एडीआर का कहना है कि एसआईआर की प्रक्रिया में कई खामियां हैं।
ऐसे में कई लोग मताधिकार से वंचित हो जाएंगे- ADR
एडीआर ने अपनी याचिका में नागरिकता दस्तावेज की आवश्यकता पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि इससे मुसलमानों, अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और प्रवासी श्रमिकों सहित हाशिए पर रहने वाले समुदायों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। इन समुदायों के पास अक्सर आवश्यक दस्तावेज नहीं होते हैं। एडीआर का कहना है कि चुनाव आयोग ने मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने की जिम्मेदारी नागरिकों पर डाल दी है। एडीआर के अनुसार, एसआईआर प्रक्रिया के तहत घोषणापत्र की आवश्यकता अनुच्छेद 326 का उल्लंघन करती है।
3 करोड़ मतदाता वोटर लिस्ट से हो सकते हैं बाहर?
एडीआर का कहना है कि बिहार में गरीबी और पलायन की दर बहुत अधिक है। कई लोगों के पास जन्म प्रमाण पत्र या माता-पिता के रिकॉर्ड जैसे दस्तावेज नहीं हैं। अनुमान के अनुसार, 3 करोड़ से अधिक मतदाता एसआईआर आदेश में उल्लिखित कठोर आवश्यकताओं के कारण मतदान से बाहर हो सकते हैं। रिपोर्टों से पता चलता है कि गांवों और हाशिए पर रहने वाले समुदायों के लाखों मतदाताओं के पास मांगे गए दस्तावेज नहीं हैं। एडीआर ने सुप्रीम कोर्ट से इस मामले में जल्द सुनवाई करने की मांग की है।





