बिहार विधानसभा में बुधवार को तब हंगामा हुआ जब विपक्षी सदस्यों के कानून–व्यवस्था‚ सांप्रदायिकता और बाढ को लेकर व्यवधान करने पर एआईएमआईएम विधायक अख्तरुल ईमान को मार्शलों द्वारा बाहर निकाला गया। विधानसभा की कार्यवाही सुबह ११ बजे शुरू होने पर इन सदस्यों द्वारा उनके कार्य स्थगन प्रस्तावों को तुरंत लिये जाने की मांग की गयी। उन्होंने अन्य बातों के अलावा पटना के दानापुर में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जदयू के एक नेता की हत्या की सीबीआई से जांच और भोजपुर जिले में १८५७ के विद्रोह के नायक वीर कुंवर सिंह के वंशज की रहस्यमयी मौत की न्यायिक जांच की मांग को लेकर कार्य स्थगन प्रस्ताव पेश किए थे। सिंह के परिवार के सदस्यों ने मशहूर शासक के ऐतिहासिक किले की देखरेख करने वाले सुरक्षाकर्मियों पर ‘पिटाई’ करने का आरोप लगाया है। हालांकि विधानसभाध्यक्ष विजय कुमार सिन्हा ने सदस्यों से उचित समय पर मामले को उठाने कहा। प्रश्नकाल के बाद इन विपक्षी सदस्यों के कार्य स्थगन प्रस्तावों को ठुकरा दिये जाने पर सदन में हंगामा शुरू हो गया। इन सदस्यों के आसन के पास आ जाने पर अध्यक्ष ने नाराजगी व्यक्त की और उनसे अपनी सीटों पर लौटने और संक्षेप में अपनी बात रखने के लिए कहा। भाकपा माले के महबूब आलम‚ कांग्रेस के अरुण शंकर सिंह और राजद के मुकेश रौशन ने उपरोक्त हत्या के मामलों की ओर सदन का ध्यान आकर्षित करते हुए आरोप लगाते हुए कहा कि ये वारदातें राज्य में खराब कानून व्यवस्था को दर्शातीं हैं जहां मुख्यमंत्री भी सुरक्षित नहीं हैं। विपक्षी सदस्यों ने गिरिराज सिंह के ‘द्वेषपूर्ण बयान’ पर भी चिंता व्यक्त की जो अपने लोकसभा क्षेत्र बेगूसराय में बार–बार ‘हिंदुओं के उत्पीड़़न’ और स्थानीय प्रशासन पर ‘तुष्टिकरण की राजनीति’ में शामिल होने का आरोप लगाते रहे हैं। हंगामे के बीच अध्यक्ष ने एआईएमआईएम विधायक अख्तरुल ईमान को बार–बार आसन के पास आने के लिए फटकार लगाई और अनियंत्रित सदस्य को ले जाने के लिए मार्शलों को बुलाया। बाद में अध्यक्ष ने राजद के मुख्य सचेतक ललित यादव द्वारा असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी के विधायक की ओर से खेद व्यक्त करने के बाद बुधवार के बाकी समय के लिए ईमान को निलंबित करने के अपने आदेश को रद्द कर दिया। अध्यक्ष ने कहा कि ईमान भोजनावकाश के बाद के सत्र में सदन में शामिल हो सकते हैं। इस बीच एआईएमआईएम की बिहार इकाई के प्रमुख ईमान अपनी पार्टी के अन्य विधायकों के साथ विरोधस्वरूप सदन परिसर में धरने पर बैठ गए। उन्होंने पत्रकारों से कहा‚‘मैंने उन मुद्दों पर कार्य स्थगन प्रस्ताव पेश किया था जो विशेष रूप से मेरे बाढ़ प्रभावित सीमांचल क्षेत्र को प्रभावित करते हैं। मैं चाहता था मेरी आवाज सुनी जाए क्योंकि अब सत्र समाप्त होने वाला है। मैं इस बात से दुखी हूं कि मेरे साथ ऐसा व्यवहार किया गया‚ हालांकि सदस्यों का आसन के पास जाना कोई नई बात नहीं है।’
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