उपेंद्र कुशवाहा का ‘ऑपरेशन बेटा’ सफल रहा।दिल्ली से पटना तक मंत्री बेटे दीपक के लिए उपेंद्र कुशवाहा ने ऐसी सियासी बिसात बिछाई कि कुर्सी बचा ले गए। इसके साथ ही कुशवाहा फैमिली में सबकी ‘सियासी रोजगार’ की गोटियां सेट हो गई। उपेंद्र कुशवाहा खुद सांसद हैं। उनकी पत्नी स्नेहलता कुशवाहा विधायक हैं। अब मंत्री बेटा दीपक प्रकाश एमएलसी होगा। बहू साक्षी मिश्रा को भी बिहार राज्य नागरिक परिषद में एडजस्ट करने की चर्चाएं चलती रहती है।
दरअसल, बिहार के पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश को एमएलसी बनाने के लिए भाजपा के विधान पार्षद देवेश कुमार ने शुक्रवार को रिजाइन कर दिया। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष संजय सरावगी के साथ देवेश विधान परिषद पहुंचे, जहां उन्होंने सभापति अवधेश नारायण सिंह को अपना इस्तीफा सौंप दिया। देवेश का मनोनयन राज्यपाल कोटे से 17 मार्च 2021 को हुआ था। उनका कार्यकाल 16 मार्च 2027 तक का था। इसी बची हुई अवधि का कार्यकाल पंचायती राज मंत्री का होगा।
सियासी उठापटक पर सब बोलने से बच रहे
इस पॉलिटिकल अपडेट पर न तो भाजपा और न ही रालोमो के किसी नेता की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने आया। मीडियाकर्मियों के सवाल पर देवेश ने भी कुछ कहने से इनकार कर दिया। दरभंगा में मंत्री दीपक प्रकाश ने सुप्रीम कोर्ट से जुड़े मामले पर किसी तरह का टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। देवेश कुमार के इस्तीफे पर कुछ बोलने से बचते रहे। उन्होंने (देवेश कुमार) किस कारण से इस्तीफा दिया है, मुझे जानकारी नहीं। मुझे इस पर कुछ नहीं बोलना है। -दीपक प्रकाश, पंचायती राज मंत्री, बिहार
दरअसल, दीपक प्रकाश अभी किसी भी सदन के सदस्य नहीं हैं। सदन का सदस्य रहे बगैर अधिकतम कोई व्यक्ति छह माह ही मंत्री रह सकता है। रालोमो प्रमुख उपेंद्रकुशवाहा के बेटे दीपक पहली बार 20 नवम्बर 2025 को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के मंत्रिमंडल में शामिल हुए थे। 14 अप्रैल 2026 को नीतीश कुमार ने त्यागपत्र दे दिया और मंत्रिपरिषद भंग हो गई। जब सम्राट चौधरी ने बिहार की कमान संभाली तो 7 मई 2026 को हुए मंत्रिमंडल विस्तार में दीपक फिर मंत्री बनाए गए।
दिल्ली से पटना तक गुपचुप सेट हुआ मामला
जब बीजेपी एमएलसी देवेश कुमार का इस्तीफा हुआ, तब दीपक प्रकाश दरभंगा में थे। उनके पिता उपेंद्रकुशवाहा संसद का सत्र चलने की वजह से दिल्ली में थे। दिल्ली में रहने के दौरान ही दीपक के मंत्री बने रहने पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी आई, जिसके बाद उपेंद्रकुशवाहा ऐक्टिव हुए। दिल्ली स्तर पर बात हुई और जब सहमति बन गई तो देवेश कुमार से इस्तीफा दिलवाया गया।
दिल्ली से पटना लौटते ही उपेंद्रकुशवाहा सीधे सीएम सम्राट चौधरी से मिलने के लिए एक अणे मार्ग (सीएम आवास) पहुंचे। इससे पहले एयरपोर्ट पर पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने बिहार और दिल्ली की सरकार की तारीफ की। अब राजनीतिक हलकों में कई तरह की चर्चाएं चल ही रही थी कि देवेश कुमार को लेकर संजय सरावगी इस्तीफ दिलाने बिहार विधान परिषद पहुंच गए। सीएम सम्राट चौधरी और दिल्ली में बीजेपी की लीडरशिप से उपेंद्र कुशवाहा की क्या बात हुई, ये अभी सामने आना बाकी है। लेकिन, साफ है कि उपेंद्र कुशवाहा की गुहार NDA में सुनी गई है और दीपक प्रकाश परिवार के तीसरे व्यक्ति होंगे, जो सदन का सदस्य होंगे।
सुप्रीम कोर्ट ने मांगा था बिहार सरकार से जवाब
बिना सदन के सदस्य रहे दीपक प्रकाश को दुबारा मंत्री बनाए जाने पर सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई है। याचिकाकर्ता का कहना है कि सदन के सदस्य रहे बगैर कोई छह महीने तक ही मंत्री रह सकता है। जबकि, दीपक इससे अधिक समय (नवम्बर 2025 से ही) से मंत्री हैं। सुप्रीम कोर्ट ने इस पर कड़ी टिप्पणी करते हुए बिहार सरकार से जवाब मांगा है। 27 अगस्त को इस पर सुनवाई होनी है।
हालांकि, इसके पहले ही सरकार ने दीपक को एमएलसी बनाने का इंतजाम कर दिया। जल्द ही देवेश का इस्तीफा स्वीकार करते हुए इस सीट की रिक्ति की सूचना लोकभवन को दी जाएगी। इसके बाद राज्यपाल की ओर से दीपक को मनोनीत किया जाएगा।







