“25 जुलाई 2026 को बिहार बंद के दौरान मेरी ड्यूटी जेपी चौक पर थी। गांधी मैदान की ओर से हजारों छात्रों की भीड़ पहुंची। जान-माल के खतरे को देखते हुए भीड़ को तितर-बितर करने के लिए मेरे साथ प्रतिनियुक्त सिपाही अभिषेक ने चार राउंड हवाई फायरिंग की।”
सीवान में AK-47 से छात्रों पर हुई फायरिंग के बाद सब-इंस्पेक्टर प्रशांत कुमार ने नगर थाना में यह आवेदन दिया।
जबकि घटना के दो दिन बाद मंगलवार को एसपी ने इस मामले पर बयान जारी कर कहा कि “घटना के दिन सिपाही अभिषेक DIU टीम के साथ एक केस की जांच के लिए जा रहे थे। छात्रों के प्रदर्शन के बीच टीम जेपी चौक पर फंस गई थी, इसलिए टीम की सुरक्षा के लिए अभिषेक ने AK-47 से फायरिंग की।
दोनों बयानों में सिपाही अभिषेक की ड्यूटी अलग-अलग बताई जा रही है।
सिपाही अभिषेक की ड्यूटी को लेकर विरोधाभास क्यों है? आखिर उनकी ड्यूटी कहां थी? क्या एसपी के कहने पर उन्होंने AK-47 से फायरिंग की, डीएम ने क्या कहा? मामले में अब तक क्या-क्या हुआ?
कैसे बढ़ा विवाद, कब चली AK-47
25 जुलाई की सुबह बिहार बंद को देखते हुए सीवान में प्रशासन पूरी तरह अलर्ट था। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, सुबह एसपी और डीएम की हाईलेवल बैठक हुई, जिसमें 40 से अधिक अधिकारियों को जोड़ा गया।
शहर के 20 से ज्यादा संवेदनशील इलाकों में पुलिस बल तैनात करने, जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त फोर्स भेजने और हालात बिगड़ने पर हवाई फायरिंग की अनुमति देने पर सहमति बनी।
सुबह 9 बजे से गांधी मैदान में छात्रों का जुटना शुरू हुआ। आइसा और आरवाईए के नेताओं ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन का भरोसा दिया था, लेकिन 11 बजे तक ढाई हजार से ज्यादा छात्र मैदान में पहुंच गए, जबकि मौके पर केवल 30-40 पुलिसकर्मी थे।
हालात बिगड़ते देख एसपी खुद गांधी मैदान पहुंचे। दोपहर करीब 12 बजे मैदान खाली कराने की कार्रवाई शुरू हुई और छात्रों को वहां से हटा दिया गया।
गांधी मैदान से निकले छात्र अलग-अलग रास्तों से शहर के कई चौराहों पर पहुंच गए। इधर, शहर के अलग अलग जगहों पर काफी देर से कोई हलचल नहीं होने के कारण वहां तैनात पुलिसकर्मी अपनी-अपनी पोजिशन से हट चुके थे।
दोपहर करीब 2 बजे जेपी चौक पर अचानक बड़ी भीड़ जमा हो गई और पथराव शुरू हो गया। सूचना मिलने पर एसपी अपनी टीम के साथ वहां पहुंचे। पुलिस का दावा है कि हालात तेजी से नियंत्रण से बाहर हो रहे थे।
सूत्रों के अनुसार, इसी दौरान एसपी ने हालात काबू करने को कहा, जिसके बाद पुलिसकर्मी छात्रों की ओर बढ़े और सबसे आगे चल रहे सिपाही अभिषेक ने अपनी AK-47 से फायरिंग कर दी। घटना का वीडियो भी सामने आया, जिसमें वह छात्रों की दिशा में गोली चलाते नजर आते हैं।
फायरिंग के बाद अफरा-तफरी मच गई। कई वीडियो सामने आए, जिनमें घायल छात्र अस्पताल की ओर भागते दिखाई दिए। कुछ छात्रों ने दावा किया कि उन्हें हाफीज चौक पर गोली मारी गई।
सब इंस्पेक्टर के आवदेन में क्या है
मैं नगर थाना में सब-इंस्पेक्टर के पद पर तैनात हूं। 25 जुलाई 2026 को बिहार बंद के दौरान मेरी ड्यूटी जेपी चौक पर लगाई गई थी। मैं सुबह 8 बजे थाना से निकलकर जेपी चौक पहुंचा और वहां कानून-व्यवस्था बनाए रखने की ड्यूटी कर रहा था।
इसी दौरान प्रदर्शनकारी जेपी चौक से गांधी मैदान की ओर चले गए। करीब साढ़े 12 बजे गांधी मैदान की तरफ से हजारों की संख्या में प्रदर्शनकारी वापस जेपी चौक पहुंचे। वे पुलिस-प्रशासन और सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए तोड़फोड़ करने लगे।
उनके तेवर काफी उग्र थे। छात्रों ने पुलिस पर फायरिंग और पत्थरबाजी शुरू कर दी। पुलिस ने उन्हें कई बार समझाने की कोशिश की, लेकिन वे नहीं माने। इस दौरान कई पुलिसकर्मी घायल हो गए। हालात काबू करने के लिए आंसू गैस के गोले भी छोड़े गए, लेकिन इसके बावजूद पत्थरबाजी और तोड़फोड़ जारी रही।
मुझे लगा कि हिंसक भीड़ मेरे साथ मौजूद पुलिसकर्मियों और अधिकारियों की जान-माल को गंभीर नुकसान पहुंचा सकती है। इसलिए भीड़ को तितर-बितर करने और स्थिति पर काबू पाने के लिए मेरे साथ तैनात सिपाही अभिषेक कुमार ने नियंत्रित तरीके से हवा में चार राउंड फायरिंग की। इसके बाद भीड़ वहां से हट गई।
बयानों की 4 समान बातें
बयानों में कई बातें एक जैसी हैं। दोनों के अनुसार AK-47 से फायरिंग सिपाही अभिषेक ने की, घटना जेपी चौक पर छात्रों के प्रदर्शन के दौरान हुई और फायरिंग को सुरक्षा के लिए उठाया गया कदम बताया गया है। साथ ही दोनों बयानों में यह भी स्वीकार किया गया है कि पूरी घटना छात्रों के प्रदर्शन के बीच हुई।
बयानों के 3 विरोधाभास
दोनों बयानों में कई बड़े विरोधाभास भी हैं। सबसे बड़ा विरोधाभास सिपाही अभिषेक की ड्यूटी को लेकर है। एक बयान में उन्हें सब-इंस्पेक्टर प्रशांत कुमार के साथ प्रतिनियुक्त बताया गया है, जबकि दूसरे में उन्हें DIU टीम का सदस्य बताया गया है।
दूसरा विरोधाभास फायरिंग की वजह को लेकर है। एक बयान में भीड़ को तितर-बितर करने के लिए फायरिंग की बात है, जबकि दूसरे में पुलिस टीम की सुरक्षा के लिए फायरिंग का दावा किया गया है।
तीसरा विरोधाभास घटना की परिस्थितियों को लेकर है। एक बयान में हिंसक भीड़ के हमले का खतरा बताया गया है, जबकि दूसरे में केवल DIU टीम के प्रदर्शन के बीच फंसने की बात कही गई है।
वीडियो फुटेज से सरकारी दावों पर सवाल
सीवान के एक रिटायर्ड पुलिस अधिकारी का कहना है कि उपलब्ध वीडियो सरकारी दावों से गलत ठहराते हैं। वीडियो में सिपाही अभिषेक कुमार पुलिस की वर्दी, हेलमेट और बॉडी प्रोटेक्टर पहने अन्य पुलिसकर्मियों के साथ मोर्चा संभाले नजर आते हैं।
कहीं भी ऐसा नहीं दिखता कि वह अकेले भीड़ में फंस गए हों। वीडियो में फायरिंग भी एक ही जगह नहीं, बल्कि आगे बढ़ते हुए कई स्थानों पर होती दिखती है।
रिटायर्ड अधिकारी के मुताबिक, अगर अभिषेक वास्तव में DIU टीम में थे और किसी दूसरे केस की जांच पर जा रहे थे, तो उनका दंगा-रोधी वर्दी, हेलमेट और बॉडी प्रोटेक्टर में होना कई सवाल खड़े करता है। उनका कहना है कि इससे सरकारी दावे और वीडियो के बीच अंतर दिखाई देता है।
अधिकारी ने बताया कि इतने बड़े प्रदर्शन में आमतौर पर डीएम और एसपी संयुक्त प्रतिनियुक्ति आदेश जारी करते हैं और पर्याप्त दंगा-नियंत्रण संसाधन उपलब्ध रहते हैं। लेकिन वीडियो में माइक से चेतावनी, वॉटर कैनन या पर्याप्त दंगा-रोधी व्यवस्था स्पष्ट नहीं दिखती। इससे मानक प्रक्रिया (SOP) के पालन पर भी सवाल उठते हैं।
डीएम बोले- छात्रों ने घेरा, इसलिए की फायरिंग
पूरे मामले पर डीएम विवेक ने कहा कि AK-47 से फायरिंग नहीं होनी चाहिए थी और इसके लिए कोई आदेश भी नहीं दिया गया था।
उन्होंने कहा कि पुलिस टीम जांच के लिए जा रही थी, तभी छात्र प्रदर्शनकारियों ने उन्हें घेर लिया, जिसके कारण ऐसी स्थिति बनी।







