बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव हर दिन एक नई चुनौती लेकर आने लगा है। हाल के दिनों की बात करें तो कुछ सवाल ऐसे उठने लगे हैं जो जातीय ताकत को चुनौती देते नजर आ रहे हैं। और यह एक ऐसा खतरा है जो बीजेपी के कोरे वोटरों को नाराज करते दिख रहा है बीजेपी की सूत्रों की माने तो ऐसे कई मुद्दे है जिसे लेकर बांकीपुर के सवर्ण सवाल उठाने लगे हैं। आइए जानते हैं ऐसे कौन से मुद्दे है जो परेशानी का कारण बनते जा रहे हैं।
भरत तिवारी एनकाउंटर
भरत तिवारी एनकाउंटर मामला पर ब्राह्मण और भूमिहार पुलिस प्रशासन से काफी नाराज हैं। उनका मानना है कि भरत तिवारी का एनकाउंटर को टाला जा सकता था। उसे गिरफ्तार कर उनके कृत्य के लिए न्यायालय भेजा जा सकता है। पर बीजेपी पर पिछड़ी जाति की राजनीति करने के आरोप लगाते यह कहा जा रहा है कि भरत तिवारी को मौत के घाट उतार दिया गया। इसकी खौफ का ही असर है कि केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह, केंद्रीय मंत्री सतीश चंद्र दुबे, पूर्व केंद्रीय मंत्री अश्वनी चौबे, मंत्री विजय कुमार सिन्हा और मंत्री मिथिलेश तिवारी तक को चुनावी जंग में उतारा गया।
भूमिहार ब्राह्मण की नाराजगी को इस बात से ही समझा जा सकता है कि कल होटल मौर्या में इस समाज के दिग्गज लोगों का जमावड़ा हुआ। इस समाज का नेतृत्व मशहूर चिकित्सक व पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. सीपी ठाकुर कर रहे थे। इस आयोजन की जिम्मेदारी नवादा के सांसद विवेक ठाकुर कर रहे थे। इस बैठक में करीब दो सौ से ज्यादा इस समाज के नामवर पहुंचे। इन नामवरों को बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव की पूरी जिम्मेदारी सौंपते यह कहा गया है कि इस वोट में बिखराव न आने पाए।
भरत तिवारी एनकाउंटर का साइड इफेक्ट!
| बांकीपुर उपचुनाव में बीजेपी को सवर्णों की नाराजगी का डर सता रहा है। बीजेपी को लग रहा है कि सवर्ण भरत तिवारी प्रकरण के बाद से नाराज चल रहे हैं। इस बार वे बीजेपी को वोट नहीं भी दे सकते हैं। |
| बांकीपुर उपचुनाव की बात करें, तो इस सीट पर केवल कायस्थ ही नहीं- भूमिहार, ब्राह्मण और वैश्य के अलावा कई जातियां हैं। छोटू सिंह प्रकरण का असर भी माना जा रहा है कि चुनाव पर पड़ेगा। |
| बांकीपुर उपचुनाव को लेकर बिहार के बड़े भूमिहार नेताओं की एक बैठक का आयोजन हुआ। उसमें तय किया गया है कि बीजेपी के पक्ष में वोटों को एकजुट रखने का प्रयास किया जाना चाहिए। |
| प्रशांत किशोर को बीजेपी गंभीरता से ले रही है। ऐसा न हो कि प्रशांत किशोर आगे निकल जाएं और बीजेपी ताकते रह जाए। हालांकि, जानकार मानते हैं कि बीजेपी के अंदर भी गुटबाजी तेज है। |
| सियासी जानकारों की मानें, तो कुछ लोग मानते हैं कि सम्राट चौधरी के लिए ये चुनाव जनमत संग्रह की तरह है। उनके सरकार के कार्यकाल का फैसला इस चुनाव के रिजल्ट से होगा। |
छोटू सिंह का भी असर
ऐन चुनाव के मौके पर जदयू ने अरविंद सिंह उर्फ छोटू सिंह को पार्टी से निकालकर बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में बीजेपीकी मुश्किलें बढ़ा दी हैं। मीडिया में छोटू सिंह के समर्थक ने साफ- साफ कहा कि वे बीजेपी उम्मीदवार को वोट करने नहीं जा रहे हैं। इसके साथ- साथ छोटू सिंह के समर्थकों ने मीडिया के सामने यह डिमांड भी रख दी कि छोटू सिंह को पार्टी से छः साल के लिए निष्कासित करने वाला निर्देश वापस नहीं होगा, बीजेपी उम्मीदवार को वोट नहीं करेंगे।
नितिन नवीन लौटे
बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव को बीजेपी के लिए आसान समझने वाले इस बात से उन मुश्किलों को जान जाए। स्थिति पहले की तरह अच्छी नहीं है। प्रशांत किशोर ने गंभीर चुनौती पेश की है। यही वजह कम नहीं है कि एक दिवसीय यात्रा पर आए बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन को एक बार फिर पटना आने का प्रोग्राम बनाना पड़ा। और उनके लिए आनन- फानन में बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र में कार्यक्रम तैयार कर डैमेज कंट्रोल करने का पुख्ता इंतजाम भी किया गया।







