अमेरिका और ईरान के बीच जंग जारी है. रविवार (19 जुलाई) तड़के अमेरिका ने लगातार 8वीं रात ईरान पर हवाई हमले किए. जिसमें ईरान को भी भारी नुकसान हुआ है. इन हमलों के बाद ईरान ने भी जवाब कार्रवाई की और कुवैत में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर ताबड़तोड़ हमले कर दिए. इन हमलों की शुरुआत जुलाई के दूसरे सप्ताह में हुई.
उसके बाद से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान को लगातार धमकी दे रहे हैं. बीते सप्ताह ट्रंप ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़े पिकैक्स माउंटेन नामक स्थल पर हमला करने की धमकी दी है. यह स्थल तेहरान के प्रमुख परमाणु स्थलों में से एक के पास जमीन के काफी नीचे स्थित एक मजबूत किलेबंद सुविधा केंद्र है.
पिकैक्स माउंटेन को तबाह करने की ट्रंप ने दी धमकी
दरअसल, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 13 जुलाई को ह्यू हेविट शो में दिए एक इंटरव्यू के दौरान कहा, “हम पिकैक्स माउंटेन को तबाह कर देंगे. ईरानियों को तैयार रहने के लिए कह दो.” ट्रंप की इस धमकी ने खाड़ी में तेहरान और वाशिंगटन के बीच बढ़ते तनाव का दर्शाया कि दोनों देशों के बीच अब शांति समझौते की संभावना शायद ही बची है. ऐसे में जानते हैं आखिर पिकैक्स माउंटेन है क्या जो ईरान के लिए काफी महत्वपूर्ण है. जिसे अमेरिका हर हाल में तबाह करना चाहता है.
कहां है पिकैक्स माउंटेन?
बता दें कि पिकैक्स माउंटेन ईरान की राजधानी तेहरान से 220 किमी (140 मील) दक्षिण में और नतांज परमाणु परिसर से 2 किमी (1.2 मील) दूर स्थित है. नतांज स्थल में ही ईरान के दो यूरेनियम संवर्धन संयंत्र स्थित थे, लेकिन 28 फरवरी 2026 को संयुक्त राज्य अमेरिका और इजरायल द्वारा किए गए संयुक्त हमले में और पिछले साल के 12 दिनों तक चले युद्ध के दौरान इस स्थल पर जमकर बमबारी की गई.
- परमाणु अप्रसार पर केंद्रित अमेरिका स्थित थिंक-टैंक, इंस्टीट्यूट फॉर साइंस एंड इंटरनेशनल सिक्योरिटी (ISIS) के अनुसार, पिकैक्स माउंटेन पर निर्माणाधीन सुरंग सुविधा को उन दोनों युद्धों में से किसी में भी निशाना नहीं बनाया गया था. यह चोटी समुद्र तल से लगभग 1,600 मीटर ऊपर है.
- जंग से पहले नतांज में दो संवर्धन संयंत्र कार्यरत थे- एक जमीन के ऊपर और एक जमीन के नीचे. अमेरिका के परमाणु निगरानी निकाय ने कहा है कि हमलों के दौरान जमीन के ऊपर वाला संयंत्र नष्ट हो गया था. दूसरा, जमीन के नीचे वाला संयंत्र संभवतः बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया था.
जानें क्या है नतांज का इतिहास?
बता दें कि नतांज ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़ा है, जिसके कारण पश्चिम और ईरान के बीच लंबे समय से तनाव बना हुआ है. ईरान परमाणु बम बनाने की कोशिश से इनकार करता है. आईएसआईएस के अनुसार, पिकैक्स माउंटेन पर सुविधा का निर्माण 2020 में शुरू हुआ था, जब ईरानी अधिकारियों ने उस समय नतांज सुविधा में तोड़फोड़ के कारण हुए विस्फोट की सूचना दी थी. ईरान ने उस समय कहा था कि नतांज में हुए विध्वंस से काफी नुकसान हुआ है जिससे उन्नत यूरेनियम संवर्धन सेंट्रीफ्यूज के विकास में बाधा आ सकती है.
- उसी वर्ष सितंबर में, ईरान के तत्कालीन परमाणु प्रमुख अली अकबर सालेही ने कहा कि ईरान ने उन्नत सेंट्रीफ्यूज बनाने के लिए नतांज के पास पहाड़ के मध्य में “एक अधिक आधुनिक, विशाल और हर मायने में अधिक व्यापक हॉल” का निर्माण शुरू कर दिया है.
- संयुक्त राष्ट्र के परमाणु निगरानी निकाय के प्रमुख राफेल ग्रॉसी ने मार्च में पीबीएस फ्रंटलाइन को दिए एक इंटरव्यू में बताया था कि ईरान ने पहले ही पिकैक्स माउंटेन पर परमाणु गतिविधि करने की अपनी मंशा की घोषणा कर दी थी. उन्होंने कहा, “यह उनकी सबसे संवेदनशील सुविधाओं को भूमिगत करने की सुनियोजित योजना का हिस्सा था.”
ईरान ने नतांज में क्या बनाया?
आईएसआईएस ने स्थल की उपग्रह तस्वीरों का विश्लेषण किया है. उसके आधार पर बताया गया कि इसमें प्रवेश के दो जोड़े हैं, जिनके बारे में माना जाता है कि वे एक ऐसी सुविधा की ओर ले जाते हैं जो पहाड़ के कम से कम 100 मीटर नीचे स्थित है. आईएसआईएस ने 14 जुलाई की एक रिपोर्ट में कहा कि भौतिक सुरक्षा उपायों में मुख्य रूप से एक बड़ा सुरक्षा घेरा और सुरंग के प्रवेश द्वारों को व्यापक रूप से मजबूत करना शामिल है.
- आईएसआईएस की रिपोर्ट में कहा गया है कि पूर्वी सुरंग के प्रवेश द्वारों को युद्धों के बाद से आंशिक रूप से मिट्टी से भर दिया गया है ताकि जमीनी वाहनों की आवाजाही बाधित हो सके, लेकिन उन्हें पूरी तरह से सील नहीं किया गया है.
- फॉरेन पॉलिसी रिसर्च इंस्टीट्यूट के फेलो सैम लेयर, जिन्होंने स्थल की हालिया उपग्रह तस्वीरों की भी समीक्षा की. उन्होंने बताया कि सुरंग के प्रवेश द्वारों को मजबूत करने से “बंकर बस्टर जैसे भेदक गोला-बारूद से निशाना बनाना” मुश्किल हो जाएगा.
क्या अभी भी कार्यरत है ये स्थल?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 13 जुलाई को अपने बयान में कहा कि वाशिंगटन पिकैक्स माउंटेन पर कड़ी नजर रख रहा है. उन्होंने कहा, “हमें वहां कोई गतिविधि नजर नहीं आ रही है. उनकी परमाणु स्थिति ठीक नहीं है. जब भी हमें इसके बारे में पता चलता है, हम उसे उड़ा देते हैं. इसलिए वे इस बारे में बात करना पसंद नहीं करते. लेकिन हम शायद जल्द ही पिकैक्स पर हमला करेंगे.”
- आईएसआईएस ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि उनका आकलन है कि ठसुविधा अभी चालू नहीं है, लेकिन निर्माण कार्य जारी है”, और केवल सेटेलाइट तस्वीरों के आधार पर यह स्पष्ट नहीं है कि यह कब चालू हो पाएगी. रिपोर्ट में कहा गया, “यह भी स्पष्ट नहीं है कि ईरान अभी भी एक बड़े पैमाने पर असेंबली सुविधा स्थापित करने की योजना बना रहा है या नहीं, क्योंकि ईरान का सेंट्रीफ्यूज कार्यक्रम नष्ट हो चुका है, जिसमें असेंबली प्लांट के लिए आवश्यक सेंट्रीफ्यूज पुर्जे बनाने की ईरान की क्षमता भी शामिल है.”
- आईएसआईएस ने आगे कहा, “फिर भी, अगर ईरान अपनी सेंट्रीफ्यूज निर्माण क्षमता का पुनर्निर्माण शुरू करता है, तो वह पिकैक्स माउंटेन में एक छोटी सेंट्रीफ्यूज असेंबली सुविधा स्थापित करने की योजना बना सकता है जो परमाणु हथियार कार्यक्रम के लिए उपयोगी हो.”
अमेरिका कैसा कर सकता है यहां हमला?
विशेषज्ञों का आकलन है कि जमीन के बेहद नीचे स्थित यह परिसर अमेरिकी शस्त्रागार में मौजूद सबसे शक्तिशाली बंकर भेदने वाले बमों की पहुंच से बाहर है. आईएसआईएस ने कहा कि यह स्थल “जमीनी बलों द्वारा हमले या तोड़फोड़ के लिए अधिक उपयुक्त होगा.” उन्होंने आगे कहा, “हालांकि, ऐसी कमज़ोरियां भी मौजूद हो सकती हैं जिनका फायदा हवाई हमलों के जरिए जमीन में गहराई तक घुसने वाले हथियारों से उठाया जा सकता है.”
- लैर ने कहा, “हम यह अनुमान लगा सकते हैं कि पिकैक्स माउंटेन पर गतिविधियां जारी हैं जिन्हें ईरानी जारी रखना चाहते हैं, लेकिन संभावित हमले को लेकर वे इतने चिंतित हैं कि अपनी सुरक्षा को मजबूत करने के लिए कदम उठा रहे हैं.”







