क्या मृत्युंजय तिवारी उन्हीं तत्वों से परेशान थे, जिससे कभी तेज प्रताप यादव और रोहिणी आचार्य परेशान रहे। मृत्युंजय तिवारी आरजेडी के लंबे समय तक वफादार कार्यकर्ता और प्रवक्ता रहे। पार्टी के एक मात्र ब्राह्मण चेहरा भी रहे। लेकिन अचानक उन्होंने कहा कि तेजस्वी के करीबी नेताओं ने पार्टी को दीमक की तरह चाटकर बर्बाद कर दिया है। उनका पार्टी में रहना उचित नहीं है। बिहार की सियासत के जाने- पहचाने चेहरे मृत्युंजय तिवारी ने संकट काल में भी आरजेडी नहीं छोड़ा। लालू यादव के सच्चे सिपाही बनकर अपना काम करते रहे।
मृत्युंजय तिवारी के इस्तीफे का सच?
तेजस्वी यादव के कुछ खास करीबियों की वजह से मृत्युंजय तिवारी ही बगावत पर मजबूर हुए। परिवार के कुछ लोग भी बगावत के रास्ते पर चले। उन लोगों ने तेज प्रताप यादव और लालू यादव की बेटी रोहिणी आचार्य को अलग होने पर मजबूर किया। रोहिणी आचार्य और तेज प्रताप भी तेजस्वी के करीबी लोगों पर सवाल उठाते रहे हैं। मृत्युंजय तिवारी ने लालू यादव के परिवार के लोगों की तर्ज पर ही कहा कि उन्हें इन सात आठ महीनों में कई बार अपमानित किया गया।
कौन- कौन लोग हैं तेजस्वी यादव के खास करीबी?
तेजस्वी यादव के खास करीबी में राज्यसभा सांसद संजय यादव और उनके राजनीतिक सलाहकार रमीज नेमत खान हैं।
तेजस्वी यादव की कोर टीम में ये दोनों नाम शामिल हैं, जिनसे लोगों को समस्या हो रही है और इस्तीफे हो रहे हैं।
तेजस्वी यादव की कोर टीम में मुख्य प्रवक्ता शक्ति सिंह यादव, मनोज झा और सुनील सिंह शामिल हैं।
तेज प्रताप यादव हमेशा इन पांच नेताओं को अपने निशाने पर लेते थे। रोहिणी भी हमला करती थीं।
रोहिणा आचार्य और तेज प्रताप जिस अहंकार और दीवार के खिलाफ लड़ रहे थे, उसी के शिकार मृत्युंजय हुए।
तेजस्वी के करीबी से परेशान हुए तिवारी!
सूत्रों की मानें, तो पार्टी के अंदर तेजस्वी के करीबी खुद को इतना ऊपर समझते हैं कि वे लालू यादव और राबड़ी देवी तक को नहीं मानते। जानकार मानते हैं कि मृत्युंजय तिवारी की शिकायत नई नहीं है। इससे पूर्व रोहिणी आचार्य और तेज प्रताप यादव ने यही बातें कही थी। रोहिणी ने तेजस्वी के करीबियों के चलते पार्टी को अलविदा कहा था। कुल मिलाकर अब पार्टी के अंदर कुछ बचा नहीं है। लालू यादव बहुत कुछ कर नहीं पा रहे हैं।
पहले रोहिणी और तेज प्रताप रहे हैं परेशान
रोहिणी आचार्य और तेज प्रताप यादव ने तेजस्वी यादव के सलाहकारों जिसमें संजय यादव और रमीज खान शामिल हैं। उन पर सीधा निशाना साधा था। रोहिणी का आरोप था कि ये लोग तेजस्वी को जमीन के साथ परिवार से भी काटने में लगे हैं। मनमर्जी से पार्टी को चला रहे हैं। तेज प्रताप यादव खुले रूप से अपनी नाराजगी पहले ही जाहिर कर चुके हैं। उन्होंने कई बार कहा है कि कुछ तत्व तेजस्वी के आस- पास घेरा लगाकर बैठे हुए हैं। कुल मिलाकर मृत्युंजय तिवारी का दर्द वहीं लोग हैं, जो तेज प्रताप और रोहिणी आचार्य के थे।







