टेंडर घोटाला मामले में विशेष निगरानी इकाई (SVU) की कार्रवाई के बीच फरार चल रहे पूर्व IAS संजीव हंस ने SVU को चार पन्नों का लेटर लिखा है। ADG पंकज दराद को लेटर लिखकर उन्होंने अपने खिलाफ दर्ज प्राथमिकी पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
बता दें कि पिछले बुधवार से SVU उनकी तलाश कर रही है। दो DSP समेत पांच सदस्यीय टीम लगातार दो दिनों तक उनके आवास पर पहुंची, लेकिन वे नहीं मिले। इसी बीच लेटर में संजीव हंस ने दावा किया है कि उन्हें बिना सबूत और जांच के आरोपी बनाया गया है।
उनके खिलाफ दर्ज SVU थाना कांड संख्या 05/2025 उन्हीं तथ्यों पर आधारित है, जिनसे जुड़े रूपसपुर थाना कांड संख्या 18/2023 को पटना हाईकोर्ट पहले ही रद्द कर चुका है। बाद में इस मामले से संबंधित अपील को भी सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया था।
पुराने आरोपों को दोहराकर दर्ज कर दी गई नई FIR
पत्र में संजीव हंस ने कहा है कि हाईकोर्ट द्वारा पुराना मामला रद्द किए जाने के बाद ED ने SVU को सूचना भेजी, जिसके आधार पर नई FIR दर्ज की गई। उनका आरोप है कि नई प्राथमिकी में पुराने तथ्यों को ही दोहराया गया और सिर्फ यह जोड़ा गया कि जल संसाधन विभाग में उनके कार्यकाल के दौरान एक कंपनी को काम मिला था।
टेंडर का फैसला समिति करती है, सचिव अकेले नहीं
संजीव हंस ने अपने बचाव में बिहार लोक निर्माण विभाग संहिता का हवाला देते हुए कहा कि
350 लाख रुपये से अधिक की निविदाओं पर फैसला विभागीय निविदा समिति करती है। सचिव केवल समिति के अध्यक्ष होते हैं और निर्णय सामूहिक रूप से लिया जाता है।
उन्होंने कहा कि बीरपुर स्थित फिजिकल मॉडलिंग सेंटर परियोजना विश्व बैंक पोषित योजना का हिस्सा थी और इसका टेंडर निर्धारित प्रक्रिया, तकनीकी मूल्यांकन तथा विश्व बैंक की मंजूरी के बाद दिया गया था।
कई स्तरों पर हुई थी समीक्षा
संजीव हंस के अनुसार संबंधित परियोजना की प्रशासनिक स्वीकृति विकास आयुक्त की अध्यक्षता वाली समिति ने दी थी। तकनीकी समिति ने निविदा का मूल्यांकन किया, विभागीय निविदा समिति ने विचार किया और हर महत्वपूर्ण चरण पर विश्व बैंक की सहमति ली गई।
उन्होंने कहा कि वित्तीय बोली की समीक्षा के बाद मामला फिर विश्व बैंक और अन्य सक्षम समितियों के पास गया। पूरी प्रक्रिया में कई अधिकारी और समितियां शामिल थीं। ऐसे में किसी एक अधिकारी को व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है।
रिशु श्री की कंपनी को मेरे कार्यकाल में टेंडर नहीं मिला
पत्र में संजीव हंस ने रिशु श्री और उससे जुड़ी कंपनियों के साथ अपने किसी भी संबंध से इनकार किया है। उन्होंने कहा कि प्राथमिकी में जिस 20 लाख रुपए के ट्रांजेक्शन का जिक्र किया गया है, वह फरवरी 2022 का है, जबकि उस समय वे जल संसाधन विभाग में कार्यरत नहीं थे।
दो निजी कंपनियों के लेन-देन से मेरा कोई सरोकार नहीं
संजीव हंस ने कहा कि प्राथमिकी में जिन कंपनियों के बीच पैसों के लेन-देन का उल्लेख है, उससे उनका कोई संबंध नहीं है। उन्होंने कहा कि यह दो निजी पक्षों के बीच का मामला है और इसमें उनकी किसी भूमिका का कोई साक्ष्य नहीं है।
उन्होंने सवाल उठाया कि जब ED द्वारा भेजी गई सूचना में भी उनके खिलाफ कोई प्रत्यक्ष प्रमाण नहीं है, तो उन्हें किस आधार पर आरोपी बनाया गया।
निष्पक्ष जांच की मांग
पत्र के अंत में संजीव हंस ने SVU से निष्पक्ष जांच की मांग की है। उन्होंने कहा है कि सरकारी अभिलेखों और वास्तविक तथ्यों के आधार पर मामले की जांच की जाए। साथ ही उन्होंने भरोसा दिलाया कि वे जांच में पूरा सहयोग करेंगे।
टेंडर घोटाला मामले में SVU लगातार संजीव हंस की तलाश कर रही है। इस मामले में पहले ही कई गिरफ्तारियां हो चुकी हैं और जांच एजेंसी आगे की कार्रवाई में जुटी हुई है।







