तिरंगा यात्रा पर इस बार राजनीति का रंग कुछ गहरा होकर पूरे देशभक्ति माहौल को फीका कर गया। बिहार के उप मुख्यमंत्री नंबर एक विजय चौधरी और उप मुख्यमंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव दोनों ने ही ‘तिरंगा यात्रा’ से दूरी बनाकर तिरंगा यात्रा को फीका कर गया। हालांकि कहने को लेकर यह भले कहा जा रहा है कि उप-मुख्यमंत्री नंबर वन पटना से कहीं बाहर हैं। उप-मुख्यमंत्री नंबर 2 विजेंद्र यादव स्वास्थ्य कारणों से तिरंगा यात्रा दूर रहे। पर इधर से लगातार सक्रिय रहे दोनों मंत्रियों की सफाई एक तरह से पेच वर्क ज्यादा लग रहा है।
तिरंगा यात्रा बीजेपी की नहीं, सरकारी थी
ऐसा नहीं कि यह तिरंगा यात्रा बीजेपी कोई निजी स्तर पर मना रही थी। यह पूरी तरह से राज्य सरकार का काम था, वजाफते केंद्रीय मंत्रिपरिषद से ‘तिरंगा यात्रा’ को सरकारी अमलीजामा पहनाते हुए पास कराया गया था। बिहार कैबिनेट ने ‘हर घर तिरंगा अभियान 2026’ के सफल आयोजन के लिए 6 करोड़ 12 लाख रुपये के व्यय को मंजूरी दी थी। कार्यक्रम यह बना कि पटना समेत पूरे राज्य में भव्य तिरंगा यात्रा और रैलियां निकाली जाएगी।
कला संस्कृति विभाग का था कार्यक्रम
इस कार्यक्रम का पूरा इंतजाम और कैसे निकाली जाएगी तिरंगा यात्रा? उसका पूरा खाका तैयार किया गया था। यह कार्य कला एवं संस्कृति विभाग की ओर से किया गया था। विभाग ने 10 अगस्त 2026 को राजधानी पटना में एक भव्य तिरंगा यात्रा भी निकाली। इस यात्रा का नेतृत्व मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने की। जे.पी. गोलंबर (गांधी मैदान के पास) से निकल कर यह कारगिल चौक तक गया।
गठबंधन की खुली पोल?
अब अंदरूनी वजह क्या रही जो ‘तिरंगा यात्रा’ में जदयू खास कर उप-मुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी और उप-मुख्यमंत्री बिजेंद्र यादव तिरंगा यात्रा की शोभा बढ़ाने नहीं आए। यह सवाल तो है? मंच पर उनके नाम के नेम प्लेट लगे हुए थे, यानि स्वीकृति मिली होगी। पर बीजेपी की फजीहत यह हुई कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के सामने से दोनों ही अनुपस्थित उप-मुख्यमंत्रियों के नाम की नेम प्लेट भी हटानी पड़ी। जदयू नेताओं की दूरी के कारण विपक्ष का शिकार होना पड़ा।
वर्ष 2025 तिरंगा यात्रा बीजेपी ने निकाली थी
यही एक साल पहले वर्ष 2025 में भी तिरंगा यात्रा निकाली गई। पर यह विशुद्ध बीजेपी कार्यकर्ताओं की ओर से निकाली गई थी। तब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार थे और उप-मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और विजय कुमार सिन्हा थे। बीजेपी सूत्रों की माने तो उस साल भी बीजेपी ‘तिरंगा यात्रा’ के लिए फंड चाहती थी। बीजेपी के शीर्ष नेताओं ने तत्कालीन उप-मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से इस यात्रा के लिए कुछ पैसों की डिमांड की थी, लेकिन तब सरकारी खर्च से ‘तिरंगा यात्रा’ निकालने की इजाजत नहीं मिली थी। इसके बाद बीजेपी ने अपने स्तर से ‘तिरंगा यात्रा’ की तैयारी की थी और फिर तिरंगा यात्रा निकाली गई।
जदयू का चरित्र सेक्युलर: अश्क
जेडीयू, बीजेपी के साथ सरकार में वर्षों से है। पर जहां कहीं भी उसके सेक्युलर छवि को नुकसान होते दिखेगा, वैसे कार्यक्रमों से जदयू अपनी दूरी बना कर रखती है। पिछले साल बीजेपी ने स्वयं इस यात्रा को निकाला था। ऐसा नहीं कि पिछली बार भी सरकारी खर्च से निकालने की कोशिश भाजपा ने नहीं की होगी। पर तब स्थितियां कुछ अलग होगी। और तब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार होंगे तो बीजेपी के प्रदेश नेताओं ने या तो चर्चा की होगी या चर्चा ही नहीं की होगी। तब बात उप मुख्यमंत्री तक ही रह गई होगी। नतीजतन इसे भाजपा ने अपने तक ही रहने दिया और अपने दल के स्तर पर भी ‘तिरंगा यात्रा’ निकली होगी।







