ADVERTISEMENT
UB India News
Wednesday, June 10, 2026
  • Login
  • Register
No Result
View All Result
No Result
View All Result
UB INDIA NEWS
No Result
View All Result

आरजेडी में राजनीतिक फैसलों का केंद्र कहां?

UB India News by UB India News
June 9, 2026
in पटना, बिहार, राजद
0
आरजेडी में राजनीतिक फैसलों का केंद्र कहां?

RELATED POSTS

विप चुनाव: नामांकन करने वाले सभी 10 प्रत्याशियों की जीत पक्की

शिवचंद्र राम के इस्तीफे पर RJD में बवाल!

  • Facebook
  • X
  • WhatsApp
  • Telegram
  • Email
  • Print
  • Copy Link
बिहार विधान परिषद चुनाव के लिए राजद ने जब डॉ. सुनील कुमार सिंह को उम्मीदवार बनाया, तब इसे एक सामान्य राजनीतिक और रणनीतिक फैसला माना गया. लेकिन कुछ ही घंटों में यह निर्णय पार्टी और लालू परिवार के भीतर चर्चा का विषय बन गया. परिवार के भीतर से असहमति की आवाज सामने आईं, सोशल मीडिया पर नाराजगी दिखी, लेकिन इसके बावजूद उम्मीदवार नहीं बदला गया. यहीं से एक बड़ा राजनीतिक सवाल खड़ा हुआ कि आखिर इस पूरे घटनाक्रम का असली संदेश क्या है?
दरअसल, चर्चा सिर्फ इस बात की नहीं है कि सुनील सिंह को टिकट क्यों मिला. राजनीतिक हलकों में इससे भी बड़ी चर्चा इस बात की है कि इस फैसले ने राजद के भीतर बदलते शक्ति संतुलन की ओर इशारा किया है. यही वजह है कि इस चुनाव से ज्यादा चर्चा उस संदेश की हो रही है, जो इस फैसले के जरिए गया है. क्या यह संकेत है कि अब पार्टी में राजनीतिक फैसलों का केंद्र पूरी तरह तेजस्वी यादव बन चुके हैं?

सुनील सिंह की उम्मीदवारी पर इतना शोर क्यों?

बता दें कि सुनील कुमार सिंह राजद के पुराने और भरोसेमंद नेताओं में गिने जाते हैं. वे लंबे समय से पार्टी के साथ जुड़े रहे हैं और लालू परिवार के करीबी माने जाते हैं. राबड़ी देवी के मुंहबोले भाई के रूप में भी उनकी पहचान रही है. राजनीतिक संकट के कई मौकों पर वे पार्टी के लिए मुखरता से खड़े दिखे हैं. ऐसे नेता को टिकट मिलना सामान्य बात हो सकती थी, लेकिन मामला तब चर्चा में आ गया जब लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्य ने सार्वजनिक तौर पर नाराजगी जाहिर की. उनके सोशल मीडिया पोस्ट को सीधे तौर पर इसी फैसले से जोड़कर देखा गया. इसके बाद पार्टी के भीतर और बाहर दोनों जगह चर्चा शुरू हो गई.

विरोध दिखा, लेकिन फैसला नहीं बदला

राजद की राजनीति में लंबे समय तक यह धारणा रही है कि परिवार की राय और लालू प्रसाद यादव की इच्छा का विशेष महत्व होता है. ऐसे में जब परिवार के भीतर से असहमति की झलक सामने आई तो राजनीति के जानकारों को भी लगा कि शायद फैसले पर पुनर्विचार की गुंजाइश हो. लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ. उम्मीदवार वही रहे और नामंकन भी हो गया. खास बात यह कि पार्टी नेतृत्व की ओर से भी किसी तरह की नरमी नहीं दिखाई गई.
RJD internal conflict Zoom
RJD का नया पावर सेंटर: सुनील सिंह के टिकट पर रोहिणी की बगावत के क्या हैं मायने?

क्या बदल चुका है राजद का शक्ति केंद्र?

यहीं से इस पूरे घटनाक्रम का सबसे महत्वपूर्ण राजनीतिक पहलू भी सामने आया है. दरअसल, राजद की स्थापना से लेकर अब तक पार्टी का चेहरा और अंतिम निर्णय लेने वाला केंद्र लालू प्रसाद यादव को माना जाता रहा है. टिकट वितरण हो, संगठनात्मक नियुक्तियां हों या बड़े राजनीतिक फैसले, अंतिम मुहर लालू यादव की समझी जाती थी. लेकिन पिछले कुछ वर्षों में परिस्थितियां बदली हैं. चुनावी अभियान से लेकर विधानसभा में विपक्ष की राजनीति तक, पार्टी का चेहरा तेजस्वी यादव बन चुके हैं.

तेज प्रताप और रोहिणी को क्या संदेश गया?

वरिष्ठ पत्रकार अशोक कुमार शर्मा कहते हैं कि बीते वर्षों में संगठन के भीतर भी तेजस्वी यादव की भूमिका लगातार मजबूत हुई है. अब तो वह कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और खुद लालू यादव ने ही उन्हें अपनी विरासत सौंपी है. ऐसे में सुनील सिंह की उम्मीदवारी को इसी बदलाव की एक और कड़ी कहा जा सकता है. इस फैसले का एक संदेश परिवार के भीतर भी देखा जा रहा है. रोहिणी आचार्य की सार्वजनिक नाराजगी और बदली राजनीतिक और पारिवारिक परिस्थितियों में तेज प्रताप यादव की सीमित भूमिका के बीच लिया गया यह निर्णय बताता है कि राजनीतिक फैसले अब पारिवारिक पसंद-नापसंद के आधार पर नहीं चलेंगे. अशोक कुमार शर्मा का मानना है कि इस घटनाक्रम ने परिवार के अन्य सदस्यों को भी यह संदेश दिया है कि संगठनात्मक निर्णयों में अंतिम अधिकार किसके पास है.
RJDZoom
सुनील सिंह को टिकट और राजद में बदलते सत्ता समीकरण, क्या तेजस्वी ने दे दिया बड़ा राजनीतिक संदेश?

राजपूत राजनीति का भी जुड़ा है समीकरण

वहीं, अशोक कुमार शर्मा इस फैसले के पीछे एक चुनावी पहलू भी देखते हैं. दरअसल, भाजपा ने पवन सिंह जैसे चर्चित सवर्ण (राजपूत) चेहरे को विधान परिषद भेजने का फैसला किया है. ऐसे में राजद के सामने भी इस समाज को संदेश देने की चुनौती थी. सुनील सिंह राजपूत समुदाय से आते हैं और लंबे समय से पार्टी में सक्रिय हैं. इसलिए उनकी उम्मीदवारी को राजपूत समाज तक पहुंच बनाने की रणनीति के तौर पर भी देखा जा रहा है. इससे राजद ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि पार्टी केवल अपने पारंपरिक सामाजिक आधार तक सीमित नहीं रहना चाहती.

सबसे बड़ा संदेश क्या है?

अशोक कुमार शर्मा कहते हैं कि सुनील सिंह की उम्मीदवारी से कई संदेश निकले हैं. पुराने और भरोसेमंद नेताओं को सम्मान देने का संदेश, राजपूत समाज को साधने का संदेश और संगठनात्मक अनुशासन का संदेश. लेकिन इन सबके बीच जो संदेश सबसे ज्यादा चर्चा में है, वह राजद के भीतर नेतृत्व को लेकर है. यही कारण है कि इस पूरे घटनाक्रम को राजनीतिक गलियारों में इसे उस खास संकेत के तौर पर पढ़ा जा रहा है, जिसमें यह धारणा और मजबूत हुई है कि राजद में अब राजनीतिक फैसलों की धुरी तेजस्वी यादव हैं.
  • Facebook
  • X
  • WhatsApp
  • Telegram
  • Email
  • Print
  • Copy Link
UB India News

UB India News

Related Posts

विप चुनाव: नामांकन करने वाले सभी 10 प्रत्याशियों की जीत पक्की

विप चुनाव: नामांकन करने वाले सभी 10 प्रत्याशियों की जीत पक्की

by UB India News
June 9, 2026
0

विप चुनाव की 10 सीटों के लिए नामांकन के अंतिम दिन सोमवार को 10 उम्मीदवारों ने नामांकन किया। कोई अतिरिक्त...

शिवचंद्र राम के इस्तीफे पर RJD में बवाल!

शिवचंद्र राम के इस्तीफे पर RJD में बवाल!

by UB India News
June 9, 2026
0

बिहार विधान परिषद चुनाव से पहले राष्ट्रीय जनता दल (RJD) में अंदरूनी असंतोष खुलकर सामने आ गया है। पूर्व मंत्री...

बेटे को मंत्री बनाने पर बवाल !

दीपक प्रकाश के मंत्री पद पर लटकी तलवार………..

by UB India News
June 9, 2026
0

बिहार सरकार में मंत्री दीपक प्रकाश को एमएलसी (विधान परिषद) का टिकट नहीं मिला है। इसके बाद राजनीतिक गलियारों में...

IRCTC घोटाला: राबड़ी देवी की याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट का नोटिस, CBI से मांगा जवाब

IRCTC टेंडर घोटाला मामले में आज अहम फैसला…

by UB India News
June 9, 2026
0

आईआरसीटीसी होटल टेंडर घोटाला और उससे जुड़े कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में दिल्ली की राऊज एवेन्यू कोर्ट सोमवार को अहम...

इतने मौके मिलने के बाद भी क्यों फेल हुए उपेंद्र कुशवाहा?

इतने मौके मिलने के बाद भी क्यों फेल हुए उपेंद्र कुशवाहा?

by UB India News
June 9, 2026
0

एक कहावत है एक मयान में दो तलवार नहीं रखे जाते। बिहार की सियासी राजनीति में इन दिनों राज्य के...

Next Post
इतने मौके मिलने के बाद भी क्यों फेल हुए उपेंद्र कुशवाहा?

इतने मौके मिलने के बाद भी क्यों फेल हुए उपेंद्र कुशवाहा?

IRCTC घोटाला: राबड़ी देवी की याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट का नोटिस, CBI से मांगा जवाब

IRCTC टेंडर घोटाला मामले में आज अहम फैसला...

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

  • front
  • Home
Contect Us - ubindianews@gmail.com

© 2020 ubindianews.com - All Rights Reserved ||

Welcome Back!

Login to your account below

Forgotten Password? Sign Up

Create New Account!

Fill the forms below to register

All fields are required. Log In

Retrieve your password

Please enter your username or email address to reset your password.

Log In
No Result
View All Result
  • front
  • Home

© 2020 ubindianews.com - All Rights Reserved ||

Send this to a friend