पटना के मुसल्लहपुर हाट में 2 जून की रात जो कुछ भी हुआ, क्या वह वाकई फैजल खान उर्फ खान सर पर एकतरफा हमला था या फिर कहानी के पीछे कोई और ही कहानी की पटकथा लिख गई थी? खान सर के गार्ड का गोली चलाते वीडियो आने के बाद सवाल उठ रहा है कि इस पूरे बवंडर के पीछे कहीं असली बिसात खान सर की तो नहीं थी? यह सवाल इसलिए भी मौजूं है क्योंकि ‘ज्ञान बिंदु कोचिंग’ का बिखरना सीधे खान सर के लिए ‘लॉटरी’ साबित हो सकता है।
अब तक की पुलिस जांच में यह बात सामने आई है कि खान सर की ‘खान ग्लोबल स्टडीज’ और रौशन आनंद की ‘ज्ञान बिंदु’ कोचिंग के बीच का यह विवाद रिजल्ट का क्रेडिट वॉर था। असल में यह दोनों के बिहार के कोचिंग बाजार पर कब्जे और अपने वर्चस्व को स्थापित करने की लड़ाई है।
सूत्रों के मुताबिक, विवाद की शुरुआत फैजल खान उर्फ खान सर ने की थी। उनके कर्मचारियों ने जानबूझकर विवाद खड़ा करने के लिए 31 मई ज्ञान बिंदु कोचिंग के बोर्ड पर खान ग्लोबल स्टडीज का बोर्ड लगाया। उसके पोस्टर-बैनर को फाड़ा। इससे संबंधित CCTV फुटेज भी सामने आ गया है। खान समर्थक जानते थे कि ऐसा करने पर रिएक्शन होगा। वह रिएक्शन पथराव के रूप में हुआ।
सूत्रों के मुताबिक, मीडिया के सामने फायरिंग का दावा करना खान सर की स्ट्रेटजी का हिस्सा था। वह जानते थे कि जैसे ही यह बात सामने आएगी पुलिस दबाव में आएगी और आरोपी को तुरंत गिरफ्तार कर लेगी। और ऐसा ही हुआ।
चूंकि 5 साल पहले भी खान सर ने रौशन आनंद पर मारपीट की FIR की थी, लेकिन गिरफ्तारी नहीं हुई थी। इस बार खान सर गिरफ्तारी चाहते थे। क्योंकि रौशन आनंद के जेल जाने से खान सर को काफी फायदे का अनुमान था।
सबसे पहले, बिहार की कोचिंग इंडस्ट्री की ताकत समझिए…
- 2023 की शिक्षा विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक, राज्यभर में 12,736 प्राइवेट कोचिंग संस्थाओं में 10 लाख से अधिक स्टूडेंट पढ़ रहे थे। उसके बाद से यह आंकड़ा बढ़ा ही है।
- मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, बिहार में कोचिंग का करीब 15,000 करोड़ रुपए का सालाना कारोबार है। पटना में हर साल राज्य और देश के अन्य हिस्सों से करीब 5 लाख स्टूडेंट्स आते हैं। एक छात्र का कोचिंग, लॉज, खाने और किताबों को मिलाकर सालाना खर्च करीब सवा लाख रुपए है।
रौशन आनंद के जेल जाने से खान सर को 4 बड़े फायदे
सूत्रों के मुताबिक, खान सर को पता था कि रौशन आनंद के जेल जाने के बाद ‘ज्ञान बिंदु कोचिंग’ पर संकट गहरा जाएगा। जिसका आगे चलकर फायदा उठाया जा सकता है। 4 बड़े फायदे जानिए…
1. बिहार दरोगा और पुलिस भर्ती के ‘कोर मार्केट’ पर एकाधिकार
बिहार में सबसे ज्यादा भीड़ दरोगा, सिपाही, BSSC और GS की तैयारी करने वालों स्टूडेंट्स की होती है। इनकी तैयारी कराने वालों में दो बड़े प्लेयर हैं- खान ग्लोबल स्टडीज और ज्ञान बिंदु कोचिंग। बाकी कोचिंग वाले भी हैं, जैसे गुरु रहमान।
हालांकि, ज्ञान बिंदु कोचिंग खान सर की खान ग्लोबल को नेट टू नेट टक्कर देती है। ज्ञान बिंदु के मुसल्लहपुर हाट वाले ऑफलाइन सेंटर पर एक बैच में 1,500 से 2,500 स्टूडेंट्स एक साथ बैठते हैं। रोजाना चलने वाले अलग-अलग बैचों को मिलाकर ऑफलाइन छात्रों की एक्टिव संख्या करीब 20,000 है।
- बिहार पुलिस और दरोगा के मामले में ज्ञान बिंदु का ऑनलाइन बेस भी काफी बड़ा है। ऐप पर लाइव और रिकॉर्डेड कोर्स देखने वाले एक्टिव छात्रों की संख्या 80,000 से 1,00,000 के बीच है। आंकड़ों के मुताबिक, लगभग 1 लाख से सवा लाख छात्र हर साल इनसे ऑफलाइन या ऑनलाइन रूप से जुड़ते हैं।
- स्टूडेंट्स के पास ज्ञान बिंदु के बाद कोई तीसरा बड़ा विकल्प पटना में फिलहाल नहीं है। इसलिए उसके बंद या बिखरने से उसके अधिकांश स्टूडेंट्स (विशेषकर बिहार दरोगा और सिपाही भर्ती वाले) सीधे खान सर के पास शिफ्ट हो जाएंगे। इससे खान सर के रेवेन्यू और छात्र संख्या में 20% से 30% की तत्काल बढ़ोतरी होगी।
- जानकारों की मानें तो बिहार की लोकल नौकरियों (दरोगा, पुलिस भर्ती) में छात्र रौशन आनंद की पढ़ाई और टेस्ट सीरीज पर ज्यादा भरोसा करते थे। ज्ञान बिंदु कोचिंग के हटने से खान सर बिहार की इस सबसे बड़ी भर्तियों के एकमात्र ‘लार्जर-दैन-लाइफ’ ब्रांड बन जाएंगे।
2. ‘क्रेडिट वॉर’ परमानेंट खत्म हो जाएगा
इस पूरे विवाद की जड़ बिहार पुलिस भर्ती परीक्षा के रिजल्ट का श्रेय लेना ही था। दोनों कोचिंग्स दावा कर रही थीं कि सबसे ज्यादा सिलेक्शन उनके यहां से हुए हैं। रौशन आनंद के कानून के शिकंजे में फंसने के बाद भविष्य की परीक्षाओं में ‘मैक्सिमम सिलेक्शन’ का दावा करने वाला सबसे बड़ा स्थानीय प्रतिद्वंदी रास्ते से हट गया है।
अब खान सर बिना किसी कड़े विरोध के रिजल्ट्स का पूरा क्रेडिट ले सकेंगे, जो किसी भी कोचिंग की ब्रांड वैल्यू के लिए सबसे बड़ा ‘ऑक्सीजन’ होता है।
3. ‘लो-फीस कॉरपोरेट मॉडल’ की बाजार पर बढ़ेगा कब्जा
- ज्ञान बिंदु कोचिंग की फीस आमतौर पर खान सर के मॉडल से अधिक थी। खान सर का पूरा बिजनेस मॉडल बहुत कम फीस पर लाखों छात्रों को पढ़ाने पर आधारित है। अभी तक ज्ञान बिंदु 3,000 से 5,000 की फीस के बावजूद अपनी क्वालिटी के दम पर खान सर के 500 रुपए वाले मॉडल को कड़ी टक्कर दे रहा था।
- ज्ञान बिंदु कोचिंग के बिखरने से प्रतियोगिता खत्म होने के बाद बाजार में खान सर के ‘मास वॉल्यूम’ मॉडल की मोनोपॉली हो जाएगी। जब कोई बड़ा प्रतिस्पर्धी ही नहीं बचेगा, तो खान सर पूरे बिहार के एडु-मार्केट की दिशा और दशा अकेले तय करेंगे।
4. नेशनल नैरेटिव में ‘विक्टिम’ और ‘हीरो’ कार्ड का फायदा
इस हमले को खान सर ने कम फीस से जोड़ दिया। उन्होंने ऐसा जानबूझकर किया। ताकि उनकी छवि राष्ट्रीय स्तर पर एक ऐसे ‘ईमानदार शिक्षक’ की बने, जिसे सस्ती शिक्षा देने के कारण माफिया निशाना बना रहे हैं। यह छवि उनकी ऑनलाइन रीच (यूट्यूब और ऐप सब्सक्राइबर्स) को करोड़ों में बढ़ाएगी।







