पटना के कोचिंग हब मुसल्लहपुर हाट में खान सर के ‘खान ग्लोबल स्टडीज’ पर हुए पथराव और तोड़फोड़ ने बिहार की अरबों रुपये की कोचिंग इंडस्ट्री के सबसे स्याह चेहरे को बेनकाब कर दिया है। खान सर का दावा है कि उनका बेहद कम फीस पर पढ़ाना ही इस हमले की मुख्य वजह है, जिसने पास के ही ‘ज्ञान बिंदु कोचिंग’ के सिंडिकेट को हिलाकर रख दिया था। लेकिन FIR और पुलिस की तफ्तीश की सुई ‘सिपाही भर्ती रिजल्ट’ के बाद भड़के पोस्टर और क्रेडिट वॉर की तरफ इशारा कर रही है।
शिक्षा के मंदिर में चल रहे इस ‘गैंगवार’ और खान सर के बार-बार बदलते बयानों के पीछे की पूरी इनसाइड स्टोरी,
खान सर की कोचिंग पर हमले का पूरा मामला क्या है?
2 जून 2026 की रात करीब 10:10 बजे 15 से 20 असामाजिक तत्वों और छात्रों के एक गुट ने खान सर के कोचिंग सेंटर पर हमला किया। हमलावरों ने कोचिंग दफ्तर में जमकर तोड़फोड़ की। होर्डिंग्स, पोस्टर फाड़े और पथराव किया।
इस दौरान कोचिंग के सुरक्षा गार्ड चुनचुन को बेरहमी से पीटा गया, जिससे उसका सिर फट गया और उसे PMCH अस्पताल में भर्ती कराया गया।
घटना की सूचना मिलते ही पटना पुलिस (SSP और सिटी एसपी) मौके पर पहुंची। इस मामले में कन्हैया सिंह की शिकायत पर 4 नामजद और 15-20 अज्ञात लोगों के खिलाफ FIR की गई है।
पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए ज्ञान बिंदु कोचिंग के डायरेक्टर रौशन आनंद और उनके दो सहयोगी अभिषेक और गौरव को गिरफ्तार कर लिया है।
हमले के तुरंत बाद खान सर ने आरोप लगाया कि कम फीस लेकर पढ़ाने और बड़ी संख्या में रिजल्ट देने से पास की कोचिंग ‘ज्ञान बिंदु कोचिंग सेंटर’ के लोग नाखुश थे। उन्होंने ही हमला किया है। हमारे सामने 8-10 राउंड गोली चली है। हालांकि, सुबह होते ही खान सर ने गोली चलने के दावों से इनकार कर दिया।
रौशन आनंद बोले- मेरे कोचिंग को बर्बाद करने की साजिश
ज्ञान बिंदु कोचिंग के डायरेक्टर रौशन आनंद ने खान सर पर गंभीर आरोप लगाए।
उन्होंने कहा, ‘बिहार पुलिस के रिजल्ट की वजह से खान ये सब करवा रहा है। ये सब उसकी साजिश है। मुझे फंसाने और ज्ञान बिंदु कोचिंग को बर्बाद करने के लिए पूरी साजिश रची गई है।’
ज्ञान बिंदु कोचिंग के डायरेक्टर के मुताबिक, कल रात कोई गोली नहीं चली, लेकिन यह बताया गया कि हमारे लोगों की ओर से फायरिंग की गई है।
खान सर ने दावा किया है कि हम कम फीस पर पढ़ाते हैं, इससे नाखुश कोचिंग वाले ने हमला किया है। सच्चाई क्या है?
पुलिस की अब तक की जांच के मुताबिक, हमला कम फीस की वजह से नहीं हुआ, बल्कि इसका तात्कालिक कारण पोस्टर फाड़ना और बिहार पुलिस सिपाही भर्ती परीक्षा के रिजल्ट का क्रेडिट लेना था।
हमले का आरोपी ज्ञान बिंदु कोचिंग सेंटर मुख्य रूप से सिपाही और दरोगा भर्ती की तैयारी के लिए जाना जाता है। खान सर की कोचिंग खान ग्लोबल स्टडीज भी इस एग्जाम की तैयारी कराती है। दोनों कोचिंग एक ही गली में हैं।
हाल में 19,838 पदों के लिए हुई बिहार पुलिस सिपाही भर्ती परीक्षा का रिजल्ट आया है। इसमें दोनों कोचिंग संस्थानों ने बढ़चढ़कर दावा किया। खान ग्लोबल स्टडीज ने 12,000 अभ्यर्थियों के सेलेक्ट होने का दावा किया।
ज्ञान बिंदु कोचिंग ने भी 10,000 से ज्यादा अभ्यर्थियों के सेलेक्ट होने का दावा किया। दोनों कोचिंग वालों ने सम्मान समारोह का आयोजन किया। अपने-अपने दावों का बड़ा-बड़ा पोस्टर/होर्डिंग लगवाया।
बताया जा रहा है कि जगह-जगह ज्ञान बिंदु कोचिंग के पोस्टर के ऊपर खान ग्लोबल स्टडीज का पोस्टर लगा दिया गया। इसी पोस्टर को फाड़ने के लिए ज्ञान बिंदु कोचिंग से जुड़े उपद्रवी तत्वों ने खान सर के दफ्तर पर हमला किया, जिसके बाद पुलिस ने ज्ञान बिंदु के डायरेक्टर रौशन आनंद को गिरफ्तार भी किया। कोचिंग की गली से आई फोटो में साफ दिख रहा है कि ज्ञान बिंदु कोचिंग के बैनर के ऊपर खान ग्लोबल स्टडीज का पोस्टर चस्पा किया गया था। उसे फाड़ा गया है।
रात में गोली चलने की बात, सुबह हमले की बात। खान सर ने बयान क्यों बदला?
जून की रात घटना के तुरंत बाद मीडिया के सामने खान सर और उनके स्टाफ ने आरोप लगाया था कि हमलावरों ने न केवल तोड़फोड़ की बल्कि हवाई फायरिंग भी की और संस्थान को बम से उड़ाने की धमकी दी।
घटना के बाद रात करीब 2:50 बजे पटना पुलिस ने बयान जारी कर और 3 जून की सुबह CCTV फुटेज खंगालने के बाद स्पष्ट किया कि वहां केवल ईंट-पत्थरबाजी और मारपीट हुई थी। फायरिंग का कोई सबूत नहीं मिला है।
पुलिस जांच के बाद खान सर ने अपने बयान को बदल दिया। उन्होंने कहा कि जांच अभी जारी है और हम पूरी तरह स्पष्ट नहीं हैं कि वहां असल में क्या-क्या हुआ था। गंभीर रूप से घायल गार्ड ने अफरातफरी और डर के माहौल में शुरुआत में जो बताया, उसी के आधार पर रात में फायरिंग का दावा कर दिया था।
गुरु रहमान कहते हैं, ‘दोनों कोचिंग वाले के बीच सालों से लड़ाई चल रही है। दोनों शिक्षक नहीं है। नौटंकीबाज हैं। खान सर नौटंकी कर रहे हैं। उनको रौशन आनंद की तरह गिरफ्तार करना चाहिए।’
वह कहते हैं, ‘खान सर झूठ बोलकर बच्चे को भ्रमित कर रहे हैं। उनको भड़काकर सड़क पर खड़ा करवा कर इंकलाब जिंदाबाद के नारे लगवा रहे हैं। एक जगह पर 5000 लड़कों का जमावड़ा किया। अगर भगदड़ हो जाती है तो इसका जिम्मेदार कौन होगा?’
डॉ. आनंद प्रकाश शुक्ल कहते हैं, ‘खान सर जैसे बड़े पब्लिक फिगर (जिनके करोड़ों फॉलोअर्स और लाखों छात्र हैं) ने बिना पुष्टि के ‘फायरिंग और बमबाजी’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया। इससे स्थिति तनावपूर्ण हो गई। उनको पहले घटना की जानकारी लेनी चाहिए थी। इस तरह के बयानों से हंगामा बढ़ सकता था।’
क्या यह हमला कोचिंग इंडस्ट्री के अंदर के वर्चस्व की जंग का नतीजा है?
हां। पटना का मुसल्लहपुर हाट और नया टोला इलाका कहने को तो ‘शिक्षा का केंद्र’ है, लेकिन असलियत में यह अरबों रुपये की एक ऐसी कमर्शियल मंडी बन चुका है जहां वर्चस्व के लिए किसी भी हद तक जाया जाता है।
इस मामले में पुलिस ने ‘ज्ञान बिंदु कोचिंग’ के डायरेक्टर रौशन आनंद समेत तीन लोगों को गिरफ्तार कर यह साबित कर दिया है कि यहां कलम चलाने वाले हाथ अब पत्थर और लाठियां चलाने की साजिश रच रहे हैं।यह कोई पहली घटना नहीं है। पटना की कोचिंग इंडस्ट्री में ‘माफिया राज’ और हिंसा का एक लंबा और खूनी इतिहास रहा है। पिछली 3 घटनाएं…
1. कोचिंग में घूसकर मारपीट
2022-23 में पटना के बोरिंग रोड इलाके में दो बड़ी कोचिंग संस्थाओं के बीच छात्रों को अपनी तरफ खींचने और ‘टीचरों को तोड़ने’ को लेकर भयानक विवाद हुआ था।
एक संस्थान के बाउंसरों और लड़कों ने दूसरी कोचिंग के दफ्तर में घुसकर न केवल मारपीट की थी, बल्कि सड़क पर छात्रों के सामने खुलेआम लाठियां चली थीं। इस घटना ने पहली बार दिखाया था कि पटना की कोचिंगें अब कॉर्पोरेट बाहुबलियों की तरह ‘प्राइवेट बाउंसर’ पालने लगी हैं।
2. पटना के नया टोला में ‘पोस्टर वॉर’ और फायरिंग
2018-19 में पटना में मेडिकल (NEET) और इंजीनियरिंग (JEE) की तैयारी कराने वाले संस्थानों के बीच पोस्टर फाड़ने को लेकर खूनी संघर्ष हुआ था।
रिजल्ट आने के बाद एक कोचिंग ने दूसरी कोचिंग के विज्ञापनों के ऊपर अपने पोस्टर चिपका दिए थे। इसके प्रतिशोध में रात के अंधेरे में दर्जनों लड़कों ने आकर कोचिंग के स्टाफ पर हमला किया और मुसल्लहपुर इलाके में दहशत फैलाने के लिए हवाई फायरिंग की गई थी।
3. RRB-NTPC छात्र आंदोलन की आड़ में राजनीति
2022 में जब रेलवे परीक्षा के नतीजों को लेकर पटना के राजेंद्र नगर टर्मिनल पर छात्रों ने उग्र प्रदर्शन किया और ट्रेन में आग लगाई, तो पुलिस जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ था।
पुलिस ने पटना के आधा दर्जन बड़े कोचिंग संचालकों पर छात्रों को भड़काने के आरोप में FIR की थी। जांच में सामने आया कि कुछ कोचिंग संचालक अपने व्यावसायिक और राजनीतिक फायदे के लिए निर्दोष छात्रों को ढाल बनाकर कानून-व्यवस्था से खिलवाड़ करते हैं।
कोचिंग वालों की क्रेडिट लेने की होड़ को रोकने के लिए कोई नियम है?
बिल्कुल। केंद्र सरकार और बिहार सरकार दोनों के पास इसके लिए सख्त कानून और नीतियां हैं। समस्या नियमों की कमी नहीं, बल्कि उसके कड़ाई से पालन नहीं कराने की है।
कोई भी कोचिंग संस्थान 100% सिलेक्शन, गारंटीड रैंक या निश्चित सरकारी नौकरी का दावा अपने विज्ञापन या पोस्टर में नहीं कर सकता।
यदि कोई कोचिंग संस्थान किसी सफल छात्र की फोटो लगाता है, तो उसे फोटो के साथ साफ-साफ लिखना होगा कि उस छात्र ने कौन सा कोर्स लिया था (जैसे: वह फुल-टाइम क्लासरूम स्टूडेंट था, केवल टेस्ट सीरीज का हिस्सा था, या सिर्फ फ्री इंटरव्यू गाइडेंस में आया था)।
स्टूडेंट की सफलता के बाद ही उसकी लिखित सहमति लेकर उसका पोस्टर लगाया जा सकता है, पहले से कोई बॉन्ड साइन नहीं कराया जा सकता।
इसी नियम के तहत, CCPA ने अब तक भ्रामक विज्ञापन छापने और छात्रों के कोर्स की सही जानकारी छिपाने के लिए देश के 31 से अधिक नामी कोचिंग संस्थानों पर 1.46 करोड़ से अधिक का जुर्माना लगाया है। जांच में पाया गया था कि जिन टॉप रैंकर्स का वे दावा कर रहे थे, वे उनके फुल-टाइम छात्र नहीं थे, बल्कि सिर्फ कुछ घंटों के फ्री इंटरव्यू प्रोग्राम में आए थे।
इसके अलावा केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने ‘Guidelines for Regulation of Coaching Center 2024′ जारी की है, जिसके तहत 16 साल से कम उम्र के बच्चों के एडमिशन पर रोक और भ्रामक वादे करने पर रजिस्ट्रेशन रद्द करने का प्रावधान है।
बिहार पहला राज्य जहां कोचिंगों को कंट्रोल करने के लिए नियम
बिहार देश का पहला ऐसा राज्य था जिसने कोचिंगों की गुंडागर्दी और धोखाधड़ी को रोकने के लिए 2010 में ही विधानसभा से कानून पास कर दिया था, जिसे The Bihar Coaching Institute (Control & Regulation) Act, 2010 कहा जाता है।
बिहार में किसी भी कोचिंग संस्थान को चलाने के लिए DM की अध्यक्षता वाली समिति से रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य है।
हर कोचिंग को अपनी फीस, शिक्षकों की योग्यता और कोर्स स्ट्रक्चर का विवरण लिखित में देना होता है।
कानून के तहत यदि कोई कोचिंग नियमों का उल्लंघन करती है या भ्रामक प्रचार करती है तो उसका रजिस्ट्रेशन रद्द करने और भारी जुर्माना लगाने का अधिकार DM और SDO को है।
जब नियम है तो पटना में ’12 हजार सिलेक्शन’ वाले भ्रामक पोस्टर कैसे लगे?
यह सीधा-सीधा स्थानीय प्रशासन की नाकामी को दर्शाता है। कानून कागज पर तो बेहद मजबूत हैं, लेकिन जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग तब जागता जब सड़कों पर पत्थर चल जाएं या किसी का सिर फूट जाए। कोचिंग संस्थान खुलेआम विज्ञापनों में नियमों की धज्जियां उड़ाते हैं, लेकिन समय रहते इन पोस्टरों की सत्यता की जांच करने वाला कोई नहीं है।
बिहार की राजधानी पटना में खान सर के कोचिंग कैंपस पर मंगलवार की रात हमला हुआ था। पुलिस इस मामले की जांच कर रही है। इस बीच कोचिंग शिक्षक गुरु रहमान ने खान सर पर कई गंभीर आरोप लगाते हुए कोचिंग पर हमले की वजह बताई। गुरु रहमान ने कहा कि इस बार जब सिपाही भर्ती परीक्षा का परिणाम आया, तो खान सर और एक अन्य कोचिंग संस्थान ने छात्रों की खूब खरीद-फरोख्त की। परिणाम के बाद आयोजित कार्यक्रम में जब एक कोचिंग के छात्र दूसरे कोचिंग संस्थान के कार्यक्रम में पहुंच गए, तो इसी वजह से विवाद पैदा हुआ।
गोली चलने की बात पूरी तरह गलत, झड़प जरूर हुई: गुरु रहमान
उन्होंने कहा कि खान सर की आदत है कि जब उनकी सच्चाई सामने आने लगती है, तो वे लोगों का ध्यान भटकाने की कोशिश करते हैं। सिपाही भर्ती में कुल 19838 अभ्यर्थियों का चयन हुआ है, तो फिर उनके कार्यक्रम में 22 हजार लोग कैसे पहुंच गए? जब यह दावा सवालों के घेरे में आया, तो अफवाहें फैलाई गईं। गोली चलने की बात पूरी तरह गलत है। झड़प जरूर हुई थी, लेकिन वह दावे के साथ कह सकते हैं कि गोली नहीं चली।
कोचिंग में वर्चस्व की लड़ाई, दोनों पक्ष राजनीति कर रहे: गुरु रहमान
गुरु रहमान ने कहा कि कहा कि अगर इसी तरह मनमानी और छात्रों के खरीद-फरोख्त का सिलसिला चलता रहा, तो आने वाली पीढ़ी के संस्कार प्रभावित होंगे। यह कोचिंग में वर्चस्व की लड़ाई है और दोनों पक्ष इसमें राजनीति कर रहे हैं।







