बिहार में राज्यसभा चुनाव में हार का मुंह देख चुके तेजस्वी यादव के लिए ये खबर अच्छी तो कतई नहीं कही जा सकती। बिहार विधानपरिषद के चुनाव में वो एक ही नेता को ऊपरी सदन में भेज सकते हैं। लेकिन अब असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ने उनसे राज्यसभा में समर्थन का ‘अहसान’ चुकाने को कहा है।
राज्यसभा के बदले विधानपरिषद: AIMIM
ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के बिहार प्रदेश अध्यक्ष और अमौर विधायक अख्तरुल ईमान से NBT बिहार के संवाददाता ने बात की। फोन पर बातचीत में NBT संवाददाता ने पूछा कि क्या अख्तरुल ईमान विधानपरिषद चुनाव में राजद के साथ जाएंगे, जैसे उन्होंने राज्यसभा में समर्थन दिया था। इस पर अख्तरुल ईमान ने बड़ी बात कही। उन्होंने कहा कि ‘हमने राज्यसभा चुनाव में बतौर विपक्ष तेजस्वी यादव के उम्मीदवार का समर्थन किया था, ऐसे में अब विधानपरिषद में उन्हें AIMIM का समर्थन करना चाहिए।’
तेजस्वी यादव के जवाब का इंतजार: अख्तरुल ईमान
अख्तरुल ईमान के मुताबिक ‘ये नैतिक जवाबदेही ही नहीं बल्कि एक जिम्मेदारी भी है, जिसके राजद को निभाना चाहिए। जब उन्हें राज्यसभा में जरूरत थी तो हमने उन्हें समर्थन दिया था। हमारे 5 विधायक चट्टान की तरह राजद उम्मीदवार अमरेंद्र धारी सिंह के साथ खड़े रहे। अब विधानपरिषद में तेजस्वी यादव को हमारा समर्थन करना चाहिए। हमें उनके जवाब का इंतजार है।’ इस तरह से अख्तरुल ईमान ने साफ-साफ कह दिया है कि इस बार विधानपरिषद में विपक्ष की एकमात्र सीट का उम्मीदवार AIMIM से होना चाहिए।
समर्थन नहीं किया तो अपना उम्मीदवार उतारेंगे- AIMIM
NBT संवाददाता ने जब अख्तरुल ईमान से ये सवाल पूछा कि अगर तेजस्वी यादव उनका समर्थन नहीं करते हैं तब वो क्या करेंगे। इस पर अख्तरुल ईमान ने कहा कि ऐसा होने की सूरत में AIMIM बिहार विधानपरिषद चुनाव में अपना उम्मीदवार भी उतार सकती है। हालांकि अभी वो तेजस्वी यादव के जवाब का इंतजार करेंगे, फिर जवाब के हिसाब से पार्टी के नेता मिल बैठकर इसका फैसला करेंगे कि आगे क्या करना है।
समझिए बिहार विधानपरिषद चुनाव का समीकरण
सीटों के समीकरण को समझें तो विधानपरिषद की 9 सीटों पर चुनाव होने हैं। इस लिहाज के एक सीट के लिए 25 वोटों की जरूरत होगी। किसे कितने वोट चाहिए होंगे और किसकी कितनी सीटों पर जीत तय है, ये आप नीचे दिए गए टेबल से समझिए।
| दल | विधायक | गुणा भाग | सीटें (जो जीती जा सकती हैं) |
| NDA | 202 | 202 /25 | 8 सीटों पर जीत तय (2 सीटें फिर भी ज्यादा ही हैं।) |
| महागठबंधन (RJD के 25 मिलाकर ) | 35 | 35 / 25 | एक सीट पर जीत तय (10 सीटें ज्यादा ही हैं।) |
ऐसे बिगड़ सकता है तेजस्वी यादव का समीकरण
इस लिहाज से बिहार विधान परिषद चुनाव में अगर AIMIM ने अपना कैंडिडेट खड़ा कर दिया तो भी तेजस्वी यादव और बाकी विपक्ष के पास 36 वोट (बसपा के एक MLA को मिलाकर) रहेंगे। लेकिन सूरत अगर राज्यसभा चुनाव की तरह रही तो तेजस्वी यादव के पास 36 माइनस 4 यानी 32 वोट ही बचेंगे। अगर कांग्रेस के 3 और राजद के 1 यानी ढाका MLA फैसल रहमान (राज्यसभा चुनाव में इन 4 ने वोट नहीं डाला था) के अलावा और विधायक खेल कर गए तो राजद उम्मीदवार (संभावित) नहीं जीत पाएंगे। दूसरी वरीयता के वोटों से भी फर्क पड़ेगा, क्योंकि राज्यसभा में भी यही हुआ था। RJD उम्मीदवार को NDA से पहली वरीयता में ज्यादा वोट मिले थे, लेकिन दूसरी वरीयता की गिनती में वो हार गए। ऐसे में तेजस्वी यादव को अगर AIMIM को ना कहना होगा तो उन्हें जीत के लिए अपनी किलेबंदी अभेद बनानी होगी।







