राबड़ी देवी के बंगले पर सत्ता पक्ष और विपक्ष में घमासान मचा हुआ है। पूर्व CM राबड़ी देवी 10, सर्कुलर रोड वाला बंगला खाली नहीं करना चाहती और सरकार कह रही है कि खाली करना ही होगा। बिहार में यह पहली घटना नहीं है, जिसमें नेता बंगले को लेकर भिड़े हों।
सम्राट चौधरी सरकार ने ये बंगला राज्य के नए डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन मंत्री नंद किशोर राम को आवंटित किया है। राबड़ी देवी द्वारा आवास खाली न करने पर मंत्री नंद किशोर राम ने भावुक बयान देते हुए कहा था कि उनका ‘दलित’ होना ही शायद उनके लिए अभिशाप बन गया है। इस बयान के बाद राजद और भाजपा के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्या ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर एक लंबा पोस्ट लिखकर सरकार और मंत्री पर करारा हमला बोला है।
बीजेपी की सोच ही दलित विरोधी: रोहिणी आचार्य
रोहिणी आचार्य ने भाजपा पर तीखा हमला बोलते हुए उसे मूल रूप से दलित विरोधी बताया है। उन्होंने सोशल मीडिया एक्स पर लंबा-चौड़ा पोस्ट किया। जिसमें उन्होंने लिखा, ‘दलित विरोध तो भाजपा की उत्पत्ति के मूल में है..दलित विरोध , दलितों के प्रति घृणा, द्वेष, भेदभाव वाली विचारधारा- सोच तो भाजपा की उत्पत्ति के मूल में ही है, भाजपा के लोगों के द्वारा दिए गए सैंकड़ों दलित विरोधी घटिया बयानों और भाजपा शासित प्रदेशों में निरंतर बढ़ती दलित उत्पीड़न एवं अत्याचार की घटनाओं से ये साबित भी होता है, पिछले ही वर्ष (2025) के अक्टूबर महीने में मध्य प्रदेश के भिंड में भाजपाई गुंडों के द्वारा ड्राइवर का काम करने वाले एक दलित युवक को निर्ममता से पीटे जाने के पश्चात् जबरन पेशाब पिलाए जाने की मानवता को शर्मसार करने वाली घटना को देश अभी भूला नहीं है।’
बिहार में सरकारी आवास को लेकर जारी सियासत के बीच शिवसेना (यूबीटी) के प्रवक्ता आनंद दुबे ने स्पष्ट कहा है कि पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी और मुख्यमंत्री पद छोड़ चुके नीतीश कुमार, दोनों को ही अपनी पात्रता के अनुरूप सरकारी आवास खाली कर देना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकारी बंगलों का रखरखाव जनता के पैसे से होता है, इसलिए किसी भी व्यक्ति को पद छोड़ने के बाद नियमों के अनुसार ही आवास का उपयोग करना चाहिए।
नंद किशोर राम जी .. राबड़ी देवी जी पर बंगला खाली करने का गैरवाजिब दबाब इसीलिए ही तो बना रही है भाजपाई सम्राट सरकार क्यूंकि वो दलितों-वंचितों की हक की लड़ाई लड़ती हैं। उनके लिए आवाज उठाती हैं और राबड़ी देवी जी एवं लालू जी भाजपा के दलित विरोधी नापाक मंसूबों को कामयाब नहीं होने देने की राह में सबसे बड़ी बाधा हैं।’
ये मुद्दा नहीं कि पहले आवास कौन खाली करे: शिवसेना (UBT)
दरअसल, जनशक्ति जनता दल के संस्थापक तेज प्रताप यादव द्वारा राज्यसभा सदस्य नीतीश कुमार को लेकर दिए गए बयान और पटना के 10 सर्कुलर रोड स्थित सरकारी बंगले को लेकर उठे विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए आनंद दुबे ने कहा कि यह कोई मुद्दा नहीं होना चाहिए कि पहले कौन आवास खाली करे।नीतीश-राब
ड़ी दोनों नियमों के हिसाब से चलें: शिवसेना (UBT)
शिवसेना प्रवक्ता आनंद दुबे ने कहा कि ‘अब नीतीश कुमार मुख्यमंत्री हैं और न ही राबड़ी देवी, इसलिए दोनों को ही अपने पद और पात्रता के अनुसार आवास लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि एक बेटा होने के नाते तेज प्रताप यादव का अपनी मां के समर्थन में आना स्वाभाविक है लेकिन लोकतंत्र और प्रशासनिक व्यवस्था के हित में दोनों नेताओं को सरकारी बंगला खाली कर देना चाहिए।’
CM सम्राट का बंगला तो PM मोदी के आवास से भी बड़ा- राजद
राजद कार्यालय में पार्टी के प्रधान महासचिव अब्दुल बारी सिद्दीकी ने कहा कि देश के सबसे गरीब राज्य के मुख्यमंत्री का बंगला भारत के सबसे आलीशान, भव्य और सात सितारा बंगले जैसा है। सीएम सम्राट चौधरी का बंगला प्रधानमंत्री के बंगले से भी बड़ा है। मुख्यमंत्री ने पूर्व में उपमुख्यमंत्री के नाम आवंटित 5, देशरत्न मार्ग को भी मुख्यमंत्री निवास में मिला लिया है। सम्राट चौधरी ने दिल्ली में बिहार निवास और बिहार भवन के बजाय टाइप-8 बंगला भी लिया है। मुख्यमंत्री ने अपना निवास लगभग 15 एकड़ से भी अधिक में कर लिया है।
उन्होंने कहा कि बिहार में अभी तक उपमुख्यमंत्री के लिए दो आवास आवंटित थे, लेकिन सम्राट चौधरी ने पक्षपात करके उपमुख्यमंत्री के नाम के आवास को भी अपने निवास में समाहित कर लिया। उन्होंने सवालिया लहजे में कहा कि सीएम सम्राट चौधरी इतने ही नियम और कानून के पाबंद हैं तो फिर उपमुख्यमंत्री विजय चौधरी और विजेंद्र यादव को पूर्व से क्रमांकित उपमुख्यमंत्री आवास में उन्हें शिफ्ट क्यों नहीं कर रहे हैं?
जब बंगले के लिए राबड़ी देवी ने कानून बनाया
2000 में 7 दिन के लिए पहली बार नीतीश कुमार मुख्यमंत्री बने। उनके हटने के बाद राबड़ी देवी फिर से मुख्यमंत्री बन गईं।
- अधिनियम में आवास और सुरक्षा की सुविधा उन पूर्व मुख्यमंत्रियों को देने की बातें थी, जिन्होंने लगातार पांच साल का कार्यकाल पूरा किया हो।
- 5 साल के कंडिशन के कारण तब (2000 में) यह सुविधा सिर्फ लालू यादव को ही मिल सकती थी। क्योंकि तब नीतीश कुमार सिर्फ 7 दिन CM रहे थे। 3 बार मुख्यमंत्री बनने के बाद भी जगन्नाथ मिश्र ने लगातार 5 साल का कार्यकाल पूरा नहीं किया था।
- उस वक्त इस बिल पर काफी विवाद हुआ। तत्कालीन राज्यपाल विनोद चंद्र पांडेय ने वापस कर दिया।
- राज्यपाल की आपत्ति सुरक्षा को लेकर थी। विधेयक में प्रावधान था कि पूर्व मुख्यमंत्री देश के किसी हिस्से में जाएंगे, उनकी सुरक्षा के लिए बिहार पुलिस जाएगी।
- राज्यपाल के एतराज के बाद इस प्रावधान को हटाया गया और इस अधिनियम को लागू कर दिया गया।
हालांकि, नवंबर 2005 में जब नीतीश कुमार सत्ता में आए तो उन्होंने इस कानून को खत्म नहीं किया। 2010 में नीतीश कुमार ने इस विधेयक में संशोधन किया।
- उन्होंने लगातार 5 साल के कार्यकाल की कंडिशन को खत्म कर दिया। एक नया अध्याय जोड़ा कि परिवार के दो सदस्य यदि पूर्व मुख्यमंत्री हैं तो आवासीय सुविधा एक ही मिलेगी।
- नीतीश कुमार के संशोधन के बाद लालू-राबड़ी देवी को 10 सर्कुलर रोड वाला एक ही आवास मिला।
- हालांकि, फरवरी 2019 में पटना हाईकोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्रियों वाले आवास के अलॉटमेंट को भी खत्म कर दिया। अब यह कानून लागू नहीं है।

हारने के बाद CM हाउस खाली नहीं कर रहे थे लालू-राबड़ी
- यह पहली बार नहीं है, जब बंगला खाली करने को लेकर लालू फैमिली और सरकार आमने-सामने है। 2005 नवंबर-दिसंबर में भी मुख्यमंत्री आवास को खाली करने को लेकर टकराव हुआ था।
- दरअसल, नवंबर 2005 में विधानसभा चुनाव हारने के बाद राबड़ी देवी की सरकार चली गई थी। नीतीश कुमार मुख्यमंत्री बन गए थे। राबड़ी देवी को मुख्यमंत्री आवास (1, अणे मार्ग) खाली करने का नोटिस दिया गया।
- तब लालू यादव ने CM हाउस खाली करने से इनकार कर दिया था। BBC की रिपोर्ट के मुताबिक, लालू प्रसाद यादव ने यह कहते हुए मुख्यमंत्री आवास छोड़ने से मना कर दिया था कि उनकी पत्नी और पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी को उचित आवास नहीं दिया गया है।
- दो महीने तक चले टकराव के बाद 2 फरवरी 2006 को लालू फैमिली ने CM हाउस खाली किया था।
कहानी-2ः नीतीश ने भव्य आवास के लिए दो बंगला और एक पार्क मिलाया
24 नवंबर 2005 को नीतीश कुमार मुख्यमंत्री बने। हालांकि, वह मुख्यमंत्री आवास में मई-जून 2006 में शिफ्ट हुए। धीरे-धीरे नीतीश कुमार ने इस आवास को भव्य बनाना शुरू किया। मेन बिल्डिंग में 6 बड़े कमरे हैं, जिनमें VIP सुइट्स, रहने के कमरे और ऑफिस बनाए गए।
नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री बनने के समय तक CM हाउस के पास छोटा सा डनबर पार्क था। इसी के पास मुख्य सचिव का भी आवास था। इन दोनों जगहों को नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री आवास में शामिल कर दिया। इससे मुख्यमंत्री आवास का कैंपस 10 एकड़ से ज्यादा का हो गया।
डनबर पार्क वाले स्थान पर ही नीतीश कुमार जनता दरबार लगाते थे। जिस आवास में पहले राधानंदन झा और बाद में आरसीपी सिंह रहते थे, उसे मुख्यमंत्री आवास में मिलाया गया। आज वही CMO है। यहां कई कक्ष भी हैं, जिनमें एक संवाद है। यहां नीतीश कुमार बैठकें करते थे और बड़े फैसले लेते थे।
कहानी-3ः आम-लीची की रखवाली के लिए सिपाही तैनात
20 फरवरी 2015 को जीतन राम मांझी ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दिया। उसके बाद उन्होंने CM हाउस खाली करने से इनकार कर दिया।
मांझी का तर्क था कि जब नीतीश कुमार मुख्यमंत्री पद से हटे थे, तब उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री के तौर पर ‘7, सर्कुलर रोड’ वाले आलीशान बंगले को अपने नाम अलॉट करवा लिया था और उस पर करोड़ों रुपए खर्च किए थे।
मांझी का कहना था कि नीतीश कुमार पहले ‘7, सर्कुलर रोड’ वाला बंगला खाली करें (क्योंकि वह पूर्व मुख्यमंत्री का बंगला है), तभी वह मुख्यमंत्री आवास खाली करेंगे।
लगभग 4 महीने तक चले टकराव के बीच 2 रोचक घटनाएं हुईं…
1. पेड़ों की रखवाली के लिए 24 पुलिसकर्मियों की ड्यूटी लगी
BBC और टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, मांझी जब बंगले में रह रहे थे, तब नीतीश सरकार ने आम, लीची और कटहल के पेड़ों की रखवाली के लिए 8 सब-इंस्पेक्टर और 16 कांस्टेबलों (कुल 24 पुलिसकर्मी) की ड्यूटी लगाई थी। पुलिसकर्मियों को निर्देश थे कि वे किसी को पेड़ से फल न तोड़ने दें, यहां तक कि जमीन पर गिरे फल भी उठाने न दें।
‘द हिंदू’ अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक, तब जीतन राम मांझी ने कहा था, ‘एक माली को सिर्फ इसलिए सस्पेंड कर दिया गया क्योंकि उसने मांझी के परिवार के लिए कुछ लीची तोड़ लिया था।’
- जब नीतीश कुमार से इस बारे में पत्रकारों ने पूछा था, तो उन्होंने हंसते हुए इस मामले की जानकारी से इनकार किया था।
- उन्होंने कहा था, ‘यह बहुत छोटा मुद्दा है। जब मैं ‘आम आवाम’ (जनता) की चिंता कर रहा हूं, तो कुछ लोग सिर्फ ‘आम’ (फल) के बारे में सोच रहे हैं।’
- उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा था कि अगर मांझी को फल इतने ही पसंद हैं, तो वे सारे फल तुड़वाकर उनके पास भिजवा देंगे।
2. टेलीफोन कनेक्शन काट दिया
जीतन राम मांझी ने नीतीश सरकार पर आरोप लगाया था कि उनके बंगले के टेलीफोन कनेक्शन काट दिए गए हैं और वहां आने-जाने वाले मेहमानों पर खुफिया नजर रखी जा रही है। हालांकि, सरकार ने इन आरोपों को खारिज कर दिया था। लंबी खींचतान के बाद जून 2015 में मांझी ने CM हाउस को खाली कर दिया।

कहानी-4ः बंगला बचाने के लिए हाईकोर्ट गए तेजस्वी
बात 2017 की है। उस वक्त तेजस्वी यादव को बतौर डिप्टी CM 5 देशरत्न मार्ग स्थित आवास अलॉट हुआ था। जुलाई 2017 में नीतीश कुमार ने RJD का साथ छोड़कर वापस BJP के साथ मिलकर सरकार बनाई। तेजस्वी यादव की डिप्टी CM वाली कुर्सी चली गई।
- तब उस आवास को तत्कालीन डिप्टी CM सुशील कुमार मोदी को अलॉट कर दिया गया। तेजस्वी यादव ने आवास खाली नहीं किया और पटना हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
- पटना हाईकोर्ट के सिंगल बेंच ने तेजस्वी की याचिका को खारिज कर दिया और आवास खाली करने का आदेश दिया।
- इसके बाद तेजस्वी ने डबल बेंच में याचिका लगाई। तत्कालीन चीफ जस्टिस एपी शाही और जस्टिस अंजना मिश्रा की बेंच ने सुनावाई की। तेजस्वी की याचिका फिर खारिज हो गई। आखिर में तेजस्वी को बंगला खाली करना पड़ा।
तेजस्वी ने मन मुताबिक बनवाया था ‘शीश महल’
दरअसल, 2015 में तेजस्वी यादव जब डिप्टी CM बन थे तो उन्होंने इस बंगले में काफी काम कराया था। इसे मन मुताबिक बनवाया था। तब भाजपा नेता सुशील कुमार मोदी ने इस पर होने वाले खर्च को लेकर सवाल उठाए थे।
उन्होंने आरोप लगाया था कि बंगले पर करोड़ों रुपए खर्च कर 5-स्टार होटल जैसी सुविधाएं विकसित की गई हैं।
- बंगले में स्पेन से आयातित ग्रेनाइट, जयपुर के झूमर और बेहतरीन लकड़ी के काम (वूडन फ्लोरिंग) का इस्तेमाल किया गया है।
- मोदी ने आरोप लगाया था कि कैंपस में 44 से अधिक एसी (AC) लगाए गए थे, यहां तक कि कुछ बाथरूम में भी एयर कंडीशनिंग की सुविधा थी।
- महंगे लेदर से बने 35 सोफा, 464 फैंसी एलईडी लाइट, 108 पंखे, दीवारों पर वुडेन पैनल, वुडेन फ्लोर लगाया गया।
- मकराना के संगमरमर, इटालियन टाइल्स, बाथरूम में अत्याधुनिक झरने, कीमती फर्नीचर, स्वचालित आरामदायक सोफे, बिलियर्ड रूम जैसी सुविधाएं हैं।

विधायक-मंत्री को आवास कौन अलॉट करता है?
बिहार सरकार के गजट के मुताबिक, विधायक, मंत्री और मुख्यमंत्री को रहने के लिए घर देने की व्यवस्था है। सरकार का भवन निर्माण विभाग आवास अलॉट करता है। राबड़ी देवी इस वक्त MLC हैं और विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष की भूमिका में हैं।
नेता प्रतिपक्ष को कैबिनेट मंत्री का दर्जा रहता है। ऐसे में उनकों मंत्री वाली सारी सुख-सुविधा दी जाती है।
- कैबिनेट सचिवालय के मुताबिक, मंत्री को राजधानी में फ्री में एक आवास दिया जाता है, जिसमें स्टाफ क्वार्टर और बगीचा भी होता है। इसके रख-रखाव से लेकर साज-सज्जा भी सरकारी पैसे से होता है।
- बिजली, पानी फ्री रहता है। मंत्री इस आवास को मंत्री पद जाने के 30 दिन तक कर सकते हैं। उसके बाद उन्हें खाली करना पड़ता है।
- राबड़ी देवी को 39, हॉर्डिंग रोड स्थित बंगला दिया गया है, उसमें पहले मंत्री रहते थे। वह कुछ समय से खाली था। नई सरकार में यह आवास राबड़ी देवी के नाम अलॉट कर दिया गया है। इस कारण 10, सर्कुलर रोड वाले बंगले को खाली करने का नोटिस दिया गया है।
…तो क्या राबड़ी देवी नहीं खाली करेंगी बंगला
इसकी संभावना कम है। सरकार की सख्ती के बाद राबड़ी देवी अगर पटना हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाती हैं तो उनको राहत मिल सकती है। हालांकि, 100% ऐसा हो, जरूरी नहीं।
पटना हाईकोर्ट के सीनियर एडवोकेट सर्वदेव सिंह कहते हैं, ‘अगर राबड़ी देवी कोर्ट को बताती हैं कि कई तरह की बीमारियां हैं और पति लालू प्रसाद का किडनी ट्रांसप्लांट हुआ है। तब कोर्ट सरकार से कह सकता है कि राबड़ी देवी नेता प्रतिपक्ष हैं, इसलिए मानवीय आधार पर विचार करें। यह कहकर कोर्ट स्टे लगा सकता है। ऐसा 2024 में पशुपति पारस की पार्टी राष्ट्रीय लोजपा को पटना के व्हीलकर रोड स्थित पार्टी कार्यालय के मामले में हो चुका है।’







