बांकीपुर उपचुनाव के प्रचार के दौरान दरभंगा के अलीनगर से बीजेपी विधायक मैथिली ठाकुर ने अपने राजनीतिक अनुभवों को साझा किया। उम्मीदवार नीरज कुमार सिन्हा के लिए वोट मांगते हुए उन्होंने विपक्ष के तंज पर दर्द बयां किया। मैथिली ठाकुर ने कहा कि जब वे राजनीति में आई थीं, तब विरोधियों ने उनके लिए काफी ‘अशोभनीय’ भाषा का इस्तेमाल किया और तंज कसा।
‘अरे, ये तो गवैया को बुला दिया’
पटना के बांकीपुर में हो रहे चुनाव प्रचार के दौरान बीजेपी से अलीनगर (दरभंगा) की विधायक मैथिली ठाकुर ने अपना किस्सा सुनाया। पॉलिटिकल एक्सपीरियंस को महिलाओं के सामने शेयर किया। साथ ही नीरज कुमार सिन्हा के लिए वोट मांगा। उन्होंने कहा, ‘दूसरे पार्टी के जो लोग हैं, वो बोलेंगे…अरे, मैथिली तो गा-गाकर वोट मांग रही है। फिर बोलेंगे…अरे ये तो गवैया को बुला दिया क्योंकि उनके शब्दों की मर्यादा नहीं है। मैं जब चुनाव लड़ने आई थी तो इतना गंदा-गंदा बोल रहे थे। शर्म आ रही थी कि भगवान आपने मुझे गाना क्यों सिखाया…क्यों ये विद्या दी। सबसे ज्यादा तोड़-मरोड़ दिया था मुझे मानसिक रूप से। लेकिन जब आप सबके सामने आती हूं तो लगता है कि यही तो एक चीज है, जिससे आप सभी लोगों के साथ खुद को जोड़ पाती हूं। आप सभी लोगों का आशीर्वाद यूं हीं मेरे ऊपर बना रहे।’
बांकीपुर के गोलघर एरिया में प्रचार
मैथिली ठाकुर ने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा, ‘बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र (गोलघर मंडल) में जनसंपर्क अभियान के दौरान मातृशक्ति से आत्मीय संवाद करने का सौभाग्य मिला। माताओं और बहनों का अपार स्नेह, विश्वास और उत्साह यह दर्शाता है कि उन्होंने अपना मन बना लिया है। उन्हें पूर्ण विश्वास है कि विकास, सुशासन और जनसेवा के संकल्प के साथ एक बार फिर बांकीपुर में भारतीय जनता पार्टी का कमल खिलेगा। आदरणीय नीरज सिन्हा जी को हार्दिक शुभकामनाएं। जनता के विश्वास और आशीर्वाद के साथ हम सब मिलकर बांकीपुर के उज्ज्वल भविष्य के लिए निरंतर कार्य करते रहेंगे।’
BJP और प्रशांत अहम क्यों बांकीपुर?
दरअसल, बांकीपुर उपचुनाव प्रशांत किशोर और बीजेपी के लिए की साख और राजनीतिक भविष्य के लिहाज से बेहद निर्णायक है। बीजेपी ने अपने 40 स्टार प्राचरकों को एक-एक गली मथ डालने की जिम्मेदारी सौंपी है। बांकीपुर सीट 1995 से लगातार नौ बार जीतकर भाजपा का अभेद्य गढ़ रही है। पार्टी अध्यक्ष नितिन नवीन की खाली की गई इस सीट को बचाना बीजेपी के लिए साख का सवाल है, ताकि शहरी और कायस्थ कोर-वोटबैंक पर उसकी पकड़ साबित हो सके।
वहीं, चुनावी राजनीति में डेब्यू कर रहे प्रशांत किशोर के लिए यह उनके ‘जन सुराज’ मॉडल की पहली अग्निपरीक्षा है। अगर वे भाजपा के इस मजबूत किले में सेंध लगाते हैं या कड़ा मुकाबला देते हैं, तो इससे वे खुद को राज्य में एक बड़े और मुख्य राजनीतिक विकल्प के रूप में स्थापित कर पाएंगे।







