विशेष निगरानी इकाई (SVU) ने ठेकेदार रिशु श्री को टेंडर हेराफेरी और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार कर लिया है। एसवीयू की टीम देर रात उनके मीठापुर स्थित आवास पहुंची और उन्हें अपने साथ ले गई। इसके बाद उनसे एसवीयू कार्यालय में देर रात तक पूछताछ की गई। जांच एजेंसियों के सूत्रों का कहना है कि मिले साक्ष्यों के आधार पर उनसे पूछताछ जारी है।
निगरानी कोर्ट में पेश किया
गिरफ्तारी के बाद रिशु श्री को गिरफ्तार कर 28 मई 2026 को निगरानी के विशेष न्यायालय में पेश किया गया। अदालत के निर्देश पर उन्हें 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में बेउर जेल, पटना भेज दिया गया है।
SVU अब मामले में टेंडर प्रक्रिया, विभागीय अधिकारियों की भूमिका और वित्तीय लेनदेन की गहन जांच कर रही है। संभावना जताई जा रही है कि आने वाले दिनों में मामले में कई और खुलासे हो सकते हैं।
SVU के जांच में सामने आया कि आरोपी ने जल संसाधन विभाग में अपने प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए कमीशन के आधार पर अहमदाबाद की कंपनी Chevrox Constructions Private Limited को टेंडर दिलवाया था। इसके अलावा रिशु श्री ने जल संसाधन विभाग, भवन निर्माण विभाग, नगर विकास एवं आवास विभाग तथा BMSICL में अपनी कंपनियों के पक्ष में टेंडर लेने के लिए सरकारी कर्मियों और अधिकारियों को रिश्वत देता था।

बिहार के ‘बड़े साहबों’ की बढ़ेगी मुसीबत
एसवीयू के एक अधिकारी ने बताया कि जब्त दस्तावेजों की गहन जांच की जा रही है और इनके आधार पर कथित घोटाले के नेटवर्क से जुड़े अन्य अहम खुलासे हो सकते हैं। जांच एजेंसियों का आरोप है कि ठेकेदार ने लंबे समय तक विभिन्न सरकारी विभागों में टेंडर प्रक्रिया को प्रभावित कर अनुचित तरीके से ठेके हासिल किए। एसवीयू सूत्रों के मुताबिक, पक्षपात और मिलीभगत के जरिए सरकारी अनुबंध प्राप्त किए गए। एसवीयू के एडीजी पंकज कुमार दाराद ने बताया कि अभियुक्त रिशु श्री कांड से संबंधित अभिलेख लेकर विदेश भागने की योजना बना रहे थे। इनके द्वारा अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर साक्ष्यों से छेड़छाड़ और गवाहों को डराने की आशंका को देखते हुए इनकी गिरफ्तारी की गई।
जांच में यह भी आरोप सामने आया है कि कुछ वरिष्ठ अधिकारियों ने टेंडर आवंटन को प्रभावित किया और बदले में कुछ अधिकारियों और उनके परिजनों की विदेश यात्राओं का खर्च उठाया गया। अब जांच का दायरा बढ़ाकर उन विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की भी पड़ताल की जा रही है, जिनके ठेकेदार से संबंध होने की आशंका है। एक समय में सत्ता के गलियारे में रिशु श्री काफी पावरफुल माना जाता था।
अभियुक्त रिशु श्री कांड से संबंधित अभिलेख लेकर विदेश भागने की योजना बना रहे थे। इनके द्वारा अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर साक्ष्यों से छेड़छाड़ और गवाहों को डराने की आशंका को देखते हुए इनकी गिरफ्तारी की गई।
एसवीयू के एडीजी पंकज कुमार दाराद
रिशु के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का भी मामला
वहीं, ईडी भी पीएमएलए कानून के तहत मामले की जांच कर रही है। ईडी पहले ही आरोपी ठेकेदार के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज कर चुकी है। सूत्रों का कहना है कि पूछताछ और जब्त साक्ष्यों की पुष्टि होने पर आने वाले दिनों में कई सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है।
इस बीच आरोपी ठेकेदार रिशु श्री ने राहत की मांग को लेकर गुरुवार को पटना हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। हालांकि, अदालत ने चल रही जांच में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया, जिससे जांच एजेंसियों का पक्ष और मजबूत हो गया है। हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद जांच एजेंसियों ने विभिन्न विभागों में टेंडर आवंटन प्रक्रिया की जांच और तेज कर दी है।
वरिष्ठ अधिकारियों और नेताओं साथ उठना-बैठना
रिशु श्री ने अफसरों से सांठगांठ कर सरकारी ठेकों की बदौलत सिर्फ पांच से सात वर्षों में अकूत संपत्ति बनाई। ईडी ने उसके पास बरामद 61 सेल डीड प्रॉपर्टी की सर्किल रेट वैल्यू 58 करोड़ रुपये लगाई थी। उसके द्वारा पटना, हाजीपुर में दो पेट्रोल पंप, दिल्ली में प्रॉपर्टी में भारी निवेश का पता चला है। साथ ही उसके पास पोर्श, बीएमडब्लू, लैंड क्रूजर सहित कई महंगी गाड़ियां भी हैं।
बिहार के कई वरिष्ठ नेताओं और अधिकारियों से रिशु के गहरे संबंध रहे हैं। ऐसे में उसकी गिरफ्तारी के बाद प्रशासनिक महकमे में खलबली मची है। । एसवीयू ने रिशु श्री के पटना के मीठापुर स्थित आवासीय परिसर की जांच के बाद बुधवार को देर रात उससे लंबी पूछताछ के बाद गिरफ्तारी की।
IAS संजीव हंस समेत कई अफसरों को घूस देने का आरोप
रिशु श्री के खिलाफ सबसे पहले ईडी ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लांड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) के तहत मामला दर्ज किया था। इस कांड की जांच मे उजागर हुआ कि रिशु श्री ने सरकारी ठेके हासिल करने के लिए आईएएस संजीव हंस के साथ ही जल संसाधन, नगर विकास और भवन निर्माण विभाग के तत्कालीन अधिकारियों को रिश्वत दी थी।
एसवीयू ने अप्रैल 2026 में नगर विकास एवं आवास विभाग के कार्यपालक अभियंता उमेश कुमार सिंह के विरुद्ध आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने की प्राथमिकी दर्ज की थी। उन पर रिशु श्री की कंपनी मेसर्स रिलायबल इंफ्रा सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड और अन्य को अपने सरकारी पद का दुरुपयोग करते हुए लाभ पहुंचाने का आरोप है।
ठेका मैनेज करने में कैसे होता कमीशन का खेल?
एसवीयू की एफआईआर में ईडी रिपोर्ट के हवाले से बताया गया है कि रिशु श्री कई वरिष्ठ अधिकारियों और निजी कर्मियों के साथ मिलकर भ्रष्ट कार्यों में लगा था। भ्रष्ट आचरण का सहारा लेकर उसने संपत्ति अर्जित की। सरकारी विभागों की कई परियोजनाओं के भुगतान के विश्लेषण में पाया गया कि इनसे जुड़े ठेकेदारों को एडवांस में और बिल भुगतान के समय अन्य खर्चों के तौर पर भारी भुगतान किया गया। जांच एजेंसी का मानना है कि यह राशि टेंडर से जुड़े संबंधित विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से लेकर निचले स्तर के कर्मियों को रिश्वत देने में इस्तेमाल की गई।
नवंबर 2025 में ईडी ने रिशु श्री के देशभर में नौ ठिकानों पर छापेमारी की थी। इस दौरान 33 लाख रुपये नकद, कई डिजिटल उपकरण, डायरियां और आपत्तिजनक दस्तावेज बरामद हुए थे। इस जांच के दौरान ही उसके कई अधिकारियों के साथ संबंध उजागर हुए थे। आरोप है कि अधिकारियों को रिश्वत देकर ठेकों में हेरफेर करता और गोपनीय सूचनाओं का गलत इस्तेमाल करता था।
मार्च 2025 और जून 2025 में भी रिशु श्री से संबंधित ठिकानों पर छापेमारी अभियान चलाया था। इस दौरान कई ट्रैवल एजेंटों और पटना में कुछ सरकारी अधिकारियों के आवासीय परिसरों की तलाशी ली गयी। इन तलाशियों में कुल 11.64 करोड़ रुपये नकद, विभिन्न आपत्तिजनक दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य जब्त किये गये। 27 मार्च 2025 की ईडी छापेमारी में कार्यपालक अभियंता उमेश कुमार सिंह के आवास से एक करोड़ रुपये नकद जब्त किया गया था।
फ्रांस, दुबई, स्विट्जरलैंड में 12 IAS अफसरों की प्रॉपर्टी बनवाई
नाम रिशु श्री, पूरा नाम रिशु रंजन सिन्हा। उम्र 39 साल। कबाड़ ठेकेदार के रूप में काम शुरू करने वाले रिशु श्री को सचिवालय के लोग रिशु बाबू के नाम से जानते थे।
अधिकारियों के साथ उठने-बैठने वाले लोगों के बीच रिशु की पहचान ऐसे जादूगर के रूप में थी, जो बड़े-बड़े अधिकारियों से काम करा दे, चाहे टेंडर पास कराना हो या ट्रांसफर-पोस्टिंग। यही, वजह है कि ठेकेदार से लेकर अधिकारी-कर्मचारी तक अपना काम निकालने के लिए उसके पास पहुंचते थे।
बुधवार को बिहार पुलिस की इकाई SVU (Special Vigilance Unit) ने पटना में रिशु श्री के ठिकाने पर छापेमारी की। गुरुवार को रिशु श्री को गिरफ्तार कर विशेष निगरानी कोर्ट में पेश किया। वहां से उसे 14 दिनों के न्यायिक हिरासत में बेउर जेल भेज दिया गया है।
छापेमारी के दौरान रिशु श्री के घर से करोड़ों रुपए के जेवरात और लाखों रुपए कैश मिले हैं। SVU की टीम दस्तावेजों, बैंक लेनदेन और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की जांच में जुटी है।
कौन है रिशु श्री?
रिशु श्री मूल रूप से बिहार के सारण जिले का निवासी है। सीनियर IAS अधिकारी संजीव हंस और अन्य IAS अधिकारियों के खिलाफ चल रहे भ्रष्टाचार और मनी लॉन्ड्रिंग केस में आरोपी है। उसके खिलाफ SVU ने मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किया है। ED की रिपोर्ट के मुताबिक, रिशु ने सरकारी कर्मचारियों/अधिकारियों को फायदा पहुंचाया। इसके बदले उसे सरकारी टेंडरों से जुड़ी अहम जानकारी पहले ही मिल जाती थी।
रिशु अधिकारियों के साथ सांठगांठ कर टेंडर में फेरबदल करा लेता था। मनचाहे ठेकेदार को टेंडर दिलाता था। इसके बदले कमीशन लेता था। कमीशन का हिस्सा संबंधित अधिकारी तक भी पहुंचता था।
हजारों करोड़ के कॉन्ट्रैक्ट्स में दलाली करता था रिशु श्री?
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ED की जांच में पता चला है कि रिशु कुछ अहम सरकारी विभागों में हजारों करोड़ रुपए के कॉन्ट्रैक्ट्स के लिए बिचौलिए की भूमिका निभाता था।
ठेकेदार, दलाल और यहां तक कि अच्छी पोस्टिंग चाहने वाले अधिकारी-कर्मचारी भी उसे ऐसा जादूगर मानते थे जो बड़े-बड़े अधिकारियों से चुटकियों में काम करा दे।
रिपोर्ट्स के अनुसार रिशु श्री बिहार के कुछ IAS अधिकारियों की संपत्ति मैनेज करता था। उसे विदेशों में सुरक्षित ठिकानों में जमा कराने में भी मदद करता था।
उसने 12 IAS अफसरों की प्रॉपर्टी फ्रांस, UAE और स्विट्जरलैंड जैसे देशों में बनवाई। पिछले 6 साल में उसने तुर्की, स्विट्जरलैंड, फ्रांस, दुबई, बहरीन, अबू धाबी, भूटान, थाईलैंड, जेद्दा, शारजाह आदि देशों की कई बार यात्राएं की हैं।
रिशु ने अधिकारियों के नाम पर देश और विदेश में निवेश किया है। वह अधिकारियों को काम करने के बदले देश या विदेश जहां चाहे पैसे पहुंचाने या संपत्ति दिलाने का वादा कर लुभाता था।
रिपोर्ट्स की मानें तो ED के अधिकारियों ने पता किया कि बिहार की नौकरशाही व्यवस्था में रिशु की बेहद मजबूत पकड़ थी। सचिवालय में उसे साहबों की तरह ट्रीट किया जाता था। स्थिति यह थी कि कुछ विभागों में बड़े ठेकों से जुड़ी बड़ी फाइल उसकी सहमति के बिना आगे नहीं बढ़ती थी।
कबाड़ ठेकेदार से सबसे बड़ा दलाल बना रिशु
रिशु श्री पहले कबाड़ ठेकेदार था। कबाड़ खरीदने का ठेका लेने के लिए उसका सरकारी ऑफिस में आना जाना शुरू हुआ। उसने जल्द सरकारी बोर्डों, संगठनों और विभागों में पैठ बना ली। जैसे-जैसे रसूख बढ़ा बड़े-बड़े ठेकों से जुड़ गया। 2021 में उसे स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में सलाहकार नियुक्त किया गया था।
देखते-देखते रिशु शहरी विकास, आवास, जल संसाधन और स्वास्थ्य जैसे विभागों में ठेकेदारों और अधिकारियों के लिए ऐसा व्यक्ति बन गया, जिसकी मदद के बिना सौदा नहीं हो। आरोप है कि उसने कई ‘शेल कंपनियां’ बनाई। इनमें IAS अधिकारियों का निवेश था।
कैसे काम करता था रिशु श्री?
रिशु मीठी जुबान में बात कर सकता था। वह बड़े अधिकारियों के करीब पहुंच जाता था। उनके काम कराता। धीरे-धीरे, उसने कई अधिकारियों का भरोसा जीता। उनके साथ अच्छे संबंध बनाए। महंगे तोहफे दिए।
अधिकारियों और उनके परिवार के लोगों के घूमने-फिरने का इंतजाम किया। अधिकारियों की पत्नियों और बच्चों के जन्मदिन पर बधाई देता था। उनके लिए शानदार पार्टियों का इंतजाम करता था। इन सबके बदले उसे अधिकारियों से मनचाहे ठेकेदार को टेंडर दिलाने और दूसरे काम कराने में मदद मिलती थी।
कैसी है रिशु श्री की लाइफ स्टाइल?
ठेकेदारी और दलाली से अकूत कमाई करने वाला रिशु लैविश लाइफ जीता है। महंगे कपड़े और घड़ियां पहनता है। पटना से बाहर जाने पर वह महंगे होटलों में ठहरता था। आरोप है कि रिशु ने पिछले 7-8 साल में 58 करोड़ रुपए से ज्यादा की 61 संपत्तियां खरीदी हैं।
2018 में सुपौल जिले के बीरपुर में फिजिकल मॉडलिंग सेंटर बनाने के लिए टेंडर जारी हुआ था। उस वक्त संजीव हंस जल संसाधन विभाग में सचिव थे। करीब 125 करोड़ रुपए खर्च कर सेंटर तैयार होना था। यह कोसी और बिहार की दूसरी नदियों के प्रवाह के अध्ययन का केंद्र बनने वाला था।
रिपोर्ट्स के अनुसार टेंडर में रिशु ने ऐसी शर्तें रखवाईं, जिससे उसके क्लाइंट अहमदाबाद की सेवरोक्स कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड को ठेका मिल गया। रिशु ने मातृसेवा कंस्ट्रक्शन नाम की कंपनी को इस प्रोजेक्ट सब-कॉन्ट्रैक्ट दिलाया। मातृसेवा कंस्ट्रक्शन कंपनी रिशु के स्टाफ संतोष कुमार के नाम पर थी।
संतोष रिशु की कंपनी रिलायबल इंफ्रा सर्विस प्राइवेट लिमिटेड में काम करता था। मातृसेवा कंस्ट्रक्शन को मिले सब-कॉन्ट्रैक्ट के जरिए रिशु को फिजिकल मॉडलिंग सेंटर बनाने का ठेका दिलाने के बदले 8 से 10% कमीशन दिया गया। बाद में पता चला कि मातृसेवा कंपनी की तरफ से सचिव संजीव हंस को 67 लाख रुपए दिए गए।
रिशु श्री के ठिकानों पर कब-कब हुई छापेमारी
13 जून 2025: ईडी ने देश भर में रिशु श्री के नौ ठिकानों पर दबिश दी। पटना, मुजफ्फरपुर, पानीपत और सूरत के ठिकानों पर एक साथ कार्रवाई हुई। पटना में गोला रोड स्थित सामान्य प्रशासन विभाग के अंडर सेक्रेटरी विनोद कुमार सिंह के आवास पर भी दिन भर छापेमारी चली।
विनोद कुमार सिंह रिशु श्री के इशारे पर सामान्य प्रशासन के माध्यम से छोटे कर्मचारियों का ट्रांसफर पोस्टिंग करवाने का काम देखते थे। ईडी को संदेह है कि रिशु श्री की ट्रांसफर-पोस्टिंग सिंडिकेट में मजबूत पकड़ थी और वह कई जिलों में अपने नेटवर्क के जरिए अधिकारियों-कर्मचारियों की पोस्टिंग तय करता था।
26 नवंबर 2025: प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने रिशु श्री से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में अहमदाबाद, सूरत, गुड़गांव और नई दिल्ली में 9 ठिकानों पर छापेमारी की। करीब 33 लाख नकद, कई डिजिटल उपकरण और कई आपत्तिजनक दस्तावेज जब्त किए।
27 मई 2026: SVU ने पटना के मीठापुर स्थित रिशु श्री के ठिकाने कांताराम सखी एंक्लेव में छापेमारी की। जेवरात और कैश मिले।







