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एसआईआर कराना चुनाव आयोग का अधिकार’, मतदाता सूची पुनरीक्षण की वैधता पर सुप्रीम कोर्ट की मुहर……………

UB India News by UB India News
May 28, 2026
in बिहार, राष्ट्रीय
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बिहार में SIR वोटर्स के खिलाफ कैसे? सुप्रीम कोर्ट में SIR पर बड़ी सुनवाई………..
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सुप्रीम कोर्ट ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर अहम फैसला सुनाते हुए कहा कि एसआईआर कराना चुनाव आयोग के अधिकार क्षेत्र में आता है। सुप्रीम कोर्ट ने ये भी कहा कि मुक्त और निष्पक्ष चुनाव के लिए एसआईआर जरूरी है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने इस साल की शुरुआत में लंबी सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था और आज यानी बुधवार को अपना फैसला सुनाया।

एसआईआर पर सीजेआई सूर्यकांत की पीठ ने क्या कहा?
पीठ ने अपने फैसले में कहा कि मतदाता सूची का गहन पुनरीक्षण कराना चुनाव आयोग का अधिकार है। एसआईआर प्रक्रिया सांविधानिक है। पीठ ने कहा, चुनाव आयोग ने शक्तियों का दुरुपयोग नहीं किया। एसआईआर के दौरान नियमों के खिलाफ जाकर मतदाताओं के नाम नहीं काटे गए।

याचिका में उठाए गए थे ये सवाल
याचिकाओं में चुनाव आयोग द्वारा कराए जा रहे एसआईआर अभियान की वैधता पर सवाल उठाए गए थे। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि यह प्रक्रिया संविधान के अनुच्छेद 326, जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 और उससे जुड़े नियमों के तहत चुनाव आयोग को मिले अधिकारों के तहत नहीं आती है। विवाद का मुख्य मुद्दा चुनाव आयोग की वह शर्त है, जिसके तहत जिन मतदाताओं का नाम 2002 या कुछ राज्यों में 2003 की मतदाता सूची में नहीं था, उन्हें ऐसे व्यक्ति से पारिवारिक संबंध साबित करना होगा, जिसका नाम उन सूचियों में दर्ज था।

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गरीब और प्रवासियों के मताधिकार पर खतरे का दावा
याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट में दलील दी कि यह शर्त गरीब, प्रवासी और हाशिए पर रहने वाले लोगों को मतदान अधिकार से वंचित कर सकती है, क्योंकि उनके पास पुराने रिकॉर्ड से जुड़ा दस्तावेजी प्रमाण मिलना मुश्किल है। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में प्रभावित मतदाताओं को राहत देने और प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए अंतरिम निर्देश भी जारी किए थे। शुरुआत में चुनाव आयोग ने सत्यापन के लिए 11 दस्तावेज तय किए थे, लेकिन बाद में सुप्रीम कोर्ट ने आधार कार्ड को भी एसआईआर प्रक्रिया में शामिल करने का निर्देश दिया था। सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद सीजेआई सूर्यकांत की अगुवाई वाली पीठ ने 29 जनवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था।

चुनाव आयोग मानता है एसआईआर को जरूरी

एसआईआर के खिलाफ अधिकांश याचिकाएं पिछले साल जून में दाखिल की गई थीं, जब चुनाव आयोग ने बिहार में एसआईआर अभियान शुरू करने का फैसला लिया था। इसके बाद यह प्रक्रिया पश्चिम बंगाल, केरल और तमिलनाडु समेत कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों तक बढ़ा दी गई। सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में दलील दी कि मतदाता सूची को शुद्ध और त्रुटिरहित बनाए रखने तथा फर्जी या अयोग्य मतदाताओं को हटाने के लिए यह अभियान जरूरी है।

चुनाव आयोग के लिए कितनी बड़ी राहत?

सीजेआई ने कहा कि चुनाव आयोग का उद्देश्य चुनावी प्रक्रिया की अखंडता को सुरक्षित रखना और स्वतंत्र व निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करना है. इसी संवैधानिक दायित्व के तहत आयोग ने बिहार से राष्ट्रव्यापी विशेष पुनरीक्षण अभियान शुरू करने का फैसला किया.
अदालत ने यह भी कहा कि SIR प्रक्रिया चुनावी व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में उठाया गया कदम है और यह संविधान के मूल ढांचे के खिलाफ नहीं जाता. कोर्ट के मुताबिक मतदाता सूची की शुद्धता लोकतंत्र की बुनियादी शर्त है और चुनाव आयोग इस दिशा में कार्रवाई करने के लिए अधिकृत है.
इस मामले में याचिकाकर्ताओं ने दलील दी थी कि इतने बड़े स्तर पर SIR कराना जन प्रतिनिधित्व अधिनियम के खिलाफ है और इससे मतदाताओं के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं. हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने इन तर्कों को खारिज करते हुए कहा कि चुनाव आयोग की प्रक्रिया कानून के दायरे में है और उसका उद्देश्य वैध है.
इस फैसले को बिहार में विधानसभा चुनाव 2025 से पहले कराए गए वोटर लिस्ट सुधार अभियान पर चुनाव आयोग के लिए बड़ी कानूनी जीत माना जा रहा है. साथ ही यह निर्णय भविष्य में देशभर में मतदाता सूची पुनरीक्षण और चुनावी प्रक्रियाओं से जुड़े मामलों में महत्वपूर्ण मिसाल बन सकता है.

सुप्रीम कोर्ट ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर अहम फैसला सुनाते हुए कहा कि एसआईआर कराना चुनाव आयोग के अधिकार क्षेत्र में आता है। सुप्रीम कोर्ट ने ये भी कहा कि मुक्त और निष्पक्ष चुनाव के लिए एसआईआर जरूरी है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने इस साल की शुरुआत में लंबी सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था और आज यानी बुधवार को अपना फैसला सुनाया।

एसआईआर पर सीजेआई सूर्यकांत की पीठ ने क्या कहा?
पीठ ने अपने फैसले में कहा कि मतदाता सूची का गहन पुनरीक्षण कराना चुनाव आयोग का अधिकार है। एसआईआर प्रक्रिया सांविधानिक है। पीठ ने कहा, चुनाव आयोग ने शक्तियों का दुरुपयोग नहीं किया। एसआईआर के दौरान नियमों के खिलाफ जाकर मतदाताओं के नाम नहीं काटे गए।

याचिका में उठाए गए थे ये सवाल
याचिकाओं में चुनाव आयोग द्वारा कराए जा रहे एसआईआर अभियान की वैधता पर सवाल उठाए गए थे। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि यह प्रक्रिया संविधान के अनुच्छेद 326, जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 और उससे जुड़े नियमों के तहत चुनाव आयोग को मिले अधिकारों के तहत नहीं आती है। विवाद का मुख्य मुद्दा चुनाव आयोग की वह शर्त है, जिसके तहत जिन मतदाताओं का नाम 2002 या कुछ राज्यों में 2003 की मतदाता सूची में नहीं था, उन्हें ऐसे व्यक्ति से पारिवारिक संबंध साबित करना होगा, जिसका नाम उन सूचियों में दर्ज था।

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चुनाव आयोग मानता है एसआईआर को जरूरी

एसआईआर के खिलाफ अधिकांश याचिकाएं पिछले साल जून में दाखिल की गई थीं, जब चुनाव आयोग ने बिहार में एसआईआर अभियान शुरू करने का फैसला लिया था। इसके बाद यह प्रक्रिया पश्चिम बंगाल, केरल और तमिलनाडु समेत कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों तक बढ़ा दी गई। सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में दलील दी कि मतदाता सूची को शुद्ध और त्रुटिरहित बनाए रखने तथा फर्जी या अयोग्य मतदाताओं को हटाने के लिए यह अभियान जरूरी है।

चुनाव आयोग के लिए कितनी बड़ी राहत?

सीजेआई ने कहा कि चुनाव आयोग का उद्देश्य चुनावी प्रक्रिया की अखंडता को सुरक्षित रखना और स्वतंत्र व निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करना है. इसी संवैधानिक दायित्व के तहत आयोग ने बिहार से राष्ट्रव्यापी विशेष पुनरीक्षण अभियान शुरू करने का फैसला किया.
अदालत ने यह भी कहा कि SIR प्रक्रिया चुनावी व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में उठाया गया कदम है और यह संविधान के मूल ढांचे के खिलाफ नहीं जाता. कोर्ट के मुताबिक मतदाता सूची की शुद्धता लोकतंत्र की बुनियादी शर्त है और चुनाव आयोग इस दिशा में कार्रवाई करने के लिए अधिकृत है.
इस मामले में याचिकाकर्ताओं ने दलील दी थी कि इतने बड़े स्तर पर SIR कराना जन प्रतिनिधित्व अधिनियम के खिलाफ है और इससे मतदाताओं के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं. हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने इन तर्कों को खारिज करते हुए कहा कि चुनाव आयोग की प्रक्रिया कानून के दायरे में है और उसका उद्देश्य वैध है.
इस फैसले को बिहार में विधानसभा चुनाव 2025 से पहले कराए गए वोटर लिस्ट सुधार अभियान पर चुनाव आयोग के लिए बड़ी कानूनी जीत माना जा रहा है. साथ ही यह निर्णय भविष्य में देशभर में मतदाता सूची पुनरीक्षण और चुनावी प्रक्रियाओं से जुड़े मामलों में महत्वपूर्ण मिसाल बन सकता है.
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