2019 के पुलवामा आतंकी हमले से जुड़ा आतंकी कमांडर हमजा बुरहान उर्फ अर्जुमंद गुलजार डार की अज्ञात हमलावरों ने हत्या कर दी. पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (POK) में हत्या की गई. अब उसके जनाजे की तस्वीरों ने नया बवाल खड़ा कर दिया है. सोशल मीडिया पर सामने आए विजुअल्स में दावा किया गया कि हिजबुल मुजाहिदीन प्रमुख सैयद सलाहुद्दीन, अल-बद्र के बड़े आतंकी चेहरे और ISI से जुड़े अधिकारी उसके अंतिम संस्कार में मौजूद थे. इस तस्वीर ने फिर से पाकिस्तान को दुनिया के सामने बेनकाब कर दिया है. इसके अलावा सैयद सलाहुद्दीन के हथियारबंद आतंकियों की पूरी फोर्स चलती दिखी. यह दिखाता है कि उसे भी इस बात का डर था कि कहीं अज्ञात हमलावर न मार दें.
हमजा बुरहान को गुरुवार को मुजफ्फराबाद के गोजरा इलाके में एक कॉलेज के बाहर अज्ञात हमलावरों ने घेरकर गोली मार दी थी. उसके सिर में तीन गोलियां लगीं और मौके पर ही उसकी मौत हो गई. टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, हमजा बुरहान पाकिस्तान भागने के बाद मुजफ्फराबाद के एक स्कूल में प्रिंसिपल की आड़ में रह रहा था. कहने को तो वह स्कूल प्रिंसिपल था, लेकिन लंबे समय से आतंकी गतिविधियों को ऑपरेट कर रहा था और आतंकी संगठन अल-बद्र के कई लॉन्चपैड्स संभाल रहा था.
ISI ने लगाए थे बॉडीगार्ड
पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI को इस बात का डर था कि हमजा मार दिया जाएगा, इसलिए उसे बॉडीगार्ड भी मिले थे. रिपोर्ट के मुताबिक, घटना के वक्त वह स्कूल के बाहर दो अज्ञात लोगों से मिलने गया था. उसने अपने दोनों हथियारबंद बॉडीगार्ड पीछे छोड़ दिए थे. जैसे ही वह वापस अंदर लौट रहा था, हमलावरों ने उसे निशाना बना दिया. हमले के बाद ISI ने उसे एयरलिफ्ट कर मिलिट्री अस्पताल पहुंचाने की कोशिश की, लेकिन डॉक्टर उसे बचा नहीं सके. बताया गया कि पिछले साल ही ISI ने हमजा को दो हथियारबंद बॉडीगार्ड दिए थे, क्योंकि उसे हमले की आशंका थी.
पाकिस्तान पुलिस ने क्या कहा?
पाकिस्तानी पुलिस ने दावा किया है कि इस हमले में शामिल एक शूटर को गिरफ्तार कर लिया गया है. बताया गया कि आरोपी रावलपिंडी के नवाबाबाद इलाके का रहने वाला है और उसने पहले इलाके की रेकी की थी. आरोपी अल्लामा इकबाल मेमोरियल स्कूल के पास एक होटल में ठहरा हुआ था, जहां हमजा काम करता था.
कौन था हमजा बुरहान?
हमजा बुरहान का असली नाम अर्जुमंद गुलजार डार था. वह पुलवामा जिले के रत्नीपोरा गांव का रहने वाला था और बाद में अल-बद्र आतंकी संगठन का बड़ा कमांडर बना. बताया जाता है कि 2018 में उसने अल-बद्र को फिर से सक्रिय करने के लिए बड़े पैमाने पर भर्ती अभियान चलाया और जैश-ए-मोहम्मद के पुराने कैडरों को जोड़ने की कोशिश की.







