अमेरिकी खुफिया विभाग की चीफ तुलसी गबार्ड ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने पति की दुर्लभ बीमारी का हवाला देकर नेशनल इंटेलिजेंस के डायरेक्टर का पद छोड़ दिया है। अपने इस्तीफे में तुलसी गबार्ड ने बताया कि पति की हड्डी के कैंसर से लड़ाई में उनका साथ देने के लिए नेशनल इंटेलिजेंस के डायरेक्टर के पद से इस्तीफ़ा दे रही हैं। गबार्ड ने शुक्रवार को ओवल ऑफिस में हुई एक मीटिंग के दौरान राष्ट्रपति ट्रंप को इस बारे में बताया।
तुलसी गबार्ड ने अपने इस्तीफे में बताया कि उनके पति को ‘हड्डियों के कैंसर की बेहद दुर्लभ किस्म’ का पता चला है और इस मुश्किल दौर में वह उनके साथ रहना चाहती हैं. हालांकि दूसरी तरफ अमेरिकी मीडिया और कुछ सूत्रों का दावा है कि व्हाइट हाउस ने उन पर इस्तीफा देने का दबाव भी बनाया था. ऐसे में उनके अचानक पद छोड़ने के पीछे राजनीतिक चर्चाएं भी तेज हो गई हैं.
कौन हैं तुलसी गबार्ड?
तुलसी गबार्ड अमेरिकी राजनीति का वह नाम हैं, जिन्हें भारत और हिंदू संस्कृति से गहरे जुड़ाव के कारण अक्सर ‘भारत की बेटी’ कहा जाता है. वह अमेरिकी कांग्रेस में पहुंचने वाली पहली हिंदू सांसद थीं. हालांकि तुलसी का जन्म अमेरिकी क्षेत्र अमेरिकन समोआ में हुआ था, लेकिन उनका पालन-पोषण हवाई और फिलीपींस में हुआ. उनकी मां कैरोल पोर्टर गबार्ड बाद में हिंदू धर्म से प्रभावित हुईं और परिवार में भारतीय आध्यात्मिक परंपराओं का प्रभाव बढ़ता गया.
तुलसी खुद भी भगवद्गीता और सनातन परंपरा का कई बार सार्वजनिक रूप से जिक्र कर चुकी हैं. अमेरिका में भारतीय समुदाय के बीच तुलसी की लोकप्रियता काफी ज्यादा रही है. वह अक्सर भारतीय त्योहारों, योग, आध्यात्मिकता और हिंदू परंपराओं से जुड़ी बातें खुलकर करती रही हैं.
ट्रंप सरकार में बनीं बड़ा चेहरा
डोनाल्ड ट्रंप के सत्ता में लौटने के बाद तुलसी गबार्ड को अमेरिका की खुफिया एजेंसियों की सबसे बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी. उन्होंने लगभग डेढ़ साल तक खुफिया विभाग (ODNI) की कमान संभाली. अपने कार्यकाल के दौरान तुलसी गबार्ड ने कई बड़े फैसले लिए. उन्होंने अमेरिकी इंटेलिजेंस सिस्टम में बड़े पैमाने पर ढांचागत बदलाव किए. रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन्होंने एजेंसी का आकार छोटा किया और सालाना 700 मिलियन डॉलर से ज्यादा की लागत घटाई.
उन्होंने खुफिया तंत्र में चल रहे डायवर्सिटी, एक्विटी और इंक्लुजन (DEI) कार्यक्रमों को भी खत्म कर दिया. इसके अलावा उन्होंने पांच लाख से ज्यादा गोपनीय सरकारी दस्तावेजों को सार्वजनिक करने की प्रक्रिया शुरू की. इन दस्तावेजों में ट्रंप-रूस जांच, जॉन एफ कैनेडी और रॉबर्ट एफ कैनेडी हत्याकांड से जुड़े रिकॉर्ड और ‘क्रॉसफायर हरिकेन’ जांच से जुड़े दस्तावेज शामिल थे. तुलसी गबार्ड का दावा था कि इससे अमेरिकी खुफिया एजेंसियों के ‘राजनीतिक इस्तेमाल’ का सच सामने आया.
आखिर क्यों दिया इस्तीफा?
तुलसी गबार्ड ने राष्ट्रपति ट्रंप को लिखे अपने इस्तीफे में साफ कहा कि उनके पति अब्राहम विलियम्स गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं और उन्हें इस समय परिवार के साथ रहने की जरूरत है. उन्होंने लिखा, ‘मेरे पति हमेशा मेरी ताकत रहे हैं. सैन्य तैनाती, चुनावी अभियान और सार्वजनिक जीवन के हर मुश्किल दौर में उन्होंने मेरा साथ दिया. अब जब वह जीवन की सबसे कठिन लड़ाई लड़ रहे हैं, तो मैं उन्हें अकेला नहीं छोड़ सकती.’
तुलसी ने कहा कि वह ‘अच्छे विवेक’ के साथ इतनी जिम्मेदार और समय लेने वाली भूमिका में नहीं रह सकतीं, जबकि उनके पति को लगातार देखभाल और मदद की जरूरत है.
हालांकि रॉयटर्स की एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि व्हाइट हाउस ने उन्हें पद छोड़ने के लिए मजबूर किया. इस दावे के बाद अमेरिका की राजनीति में कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं.
तुलसी के इस्तीफे पर ट्रंप ने क्या कहा?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तुलसी गबार्ड के इस्तीफे की पुष्टि करते हुए कहा कि वह 30 जून को प्रशासन छोड़ देंगी. ट्रंप ने उनकी तारीफ करते हुए कहा, ‘तुलसी गबार्ड ने शानदार काम किया है. इस समय उनका अपने पति के साथ रहना सही फैसला है. मुझे भरोसा है कि उनके पति जल्द ठीक हो जाएंगे.’
ट्रंप ने यह भी ऐलान किया कि तुलसी के बाद प्रिंसिपल डिप्टी डायरेक्टर आरोन लुकास कार्यवाहक राष्ट्रीय खुफिया निदेशक की जिम्मेदारी संभालेंगे.
तुलसी गबार्ड ने अपने पति की बीमारी का नाम सार्वजनिक नहीं किया, लेकिन उन्होंने इसे ‘बेहद दुर्लभ बोन कैंसर’ बताया.
कौन हैं तुलसी के पति अब्राहम विलियम्स?
अब्राहम विलियम्स पेशे से सिनेमैटोग्राफर हैं. तुलसी गबार्ड से उनकी मुलाकात 2012 में हुई थी, जब वह उनके चुनाव अभियान में फोटोग्राफर के तौर पर काम कर रहे थे. धीरे-धीरे दोनों के बीच दोस्ती बढ़ी और फिर 2015 में दोनों ने शादी कर ली. अमेरिकी राजनीति में तुलसी के साथ अब्राहम हमेशा एक शांत लेकिन मजबूत सहयोगी के रूप में नजर आए.
किस बीमारी से जूझ रहे हैं अब्राहम?
तुलसी गबार्ड ने अपने पति की बीमारी का नाम सार्वजनिक नहीं किया, लेकिन उन्होंने इसे ‘बेहद दुर्लभ बोन कैंसर’ बताया. विशेषज्ञों के मुताबिक, ऐसे कैंसर बेहद कम मामलों में पाए जाते हैं. इनमें ऑस्टियोसारकोमा, ईविंग सारकोमा, कॉन्ड्रोसारकोमा और कॉर्डोमा जैसी गंभीर बीमारियां शामिल हो सकती हैं.
इन कैंसरों का इलाज लंबा और जटिल होता है. कई मामलों में सर्जरी, रेडिएशन और कीमोथेरेपी की जरूरत पड़ती है. यही वजह है कि तुलसी गबार्ड ने सार्वजनिक जीवन से दूरी बनाने का फैसला लिया.
लगातार हो रहे इस्तीफों से बढ़ी ट्रंप की मुश्किल?
तुलसी गबार्ड का इस्तीफा ऐसे समय आया है जब ट्रंप प्रशासन पहले ही कई बड़े झटके झेल चुका है. इससे पहले होमलैंड सिक्योरिटी सेक्रेटरी क्रिस्टी नोएम भी पद छोड़ चुकी हैं. वहीं अटॉर्नी जनरल पाम बॉन्डी को भी जेफ्री एपस्टीन केस से जुड़े विवादों के बीच बाहर होना पड़ा. लेबर सेक्रेटरी लॉरी चावेज-डिरेमर भी जांचों के बीच इस्तीफा दे चुकी हैं. ऐसे में तुलसी गबार्ड का जाना ट्रंप प्रशासन के लिए एक और बड़ा झटका माना जा रहा है.
कितनी संपत्ति की मालकिन हैं तुलसी?
अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, तुलसी गबार्ड की कुल संपत्ति 55 मिलियन डॉलर से लेकर 127 मिलियन डॉलर के बीच आंकी जाती है. उनकी संपत्ति का बड़ा हिस्सा टेक्सास में स्थित रियल एस्टेट निवेशों से जुड़ा है. इसके अलावा उन्होंने मीडिया, पॉडकास्ट, किताबों, शेयर बाजार और क्रिप्टोकरेंसी में भी निवेश किया हुआ है. उनके पोर्टफोलियो में टेस्ला, एप्पल, एनवीडिया और बिटकॉइन जैसी बड़ी कंपनियों और डिजिटल एसेट्स में निवेश शामिल है.
तुलसी गबार्ड के इस्तीफे के बाद अब सवाल यह है कि क्या वह पूरी तरह सार्वजनिक जीवन से दूर हो जाएंगी या फिर भविष्य में राजनीति में नई भूमिका निभाएंगी. फिलहाल उन्होंने साफ कर दिया है कि उनकी प्राथमिकता उनका परिवार है. लेकिन अमेरिकी राजनीति में उनकी लोकप्रियता, हिंदू पहचान और ट्रंप प्रशासन में निभाई गई भूमिका उन्हें आने वाले समय में भी एक बड़ा चेहरा बनाए रख सकती है.
तुलसी गबार्ड की खास बातें…
तुलसी गबार्ड ने इस्तीफा क्यों दिया?
उन्होंने अपने पति अब्राहम विलियम्स को ‘हड्डियों के बेहद दुर्लभ कैंसर’ का पता चलने के बाद परिवार को प्राथमिकता देने के लिए इस्तीफा दिया.
क्या इस्तीफे के पीछे कोई राजनीतिक वजह भी बताई जा रही है?
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, व्हाइट हाउस ने उन पर इस्तीफा देने का दबाव डाला था, हालांकि आधिकारिक तौर पर उन्होंने पारिवारिक कारण बताया है.
डोनाल्ड ट्रंप ने तुलसी गबार्ड के इस्तीफे पर क्या कहा?
ट्रंप ने कहा कि तुलसी ने शानदार काम किया है और इस मुश्किल समय में उनका पति के साथ रहना सही फैसला है.
तुलसी गबार्ड के बाद कौन संभालेगा जिम्मेदारी?
तुलसी गबार्ड के बाद उनकी जगह एरोन लुकास को राष्ट्रीय खुफिया विभाग का कार्यवाहक निदेशक बनाया जाएगा.
क्या तुलसी गबार्ड भारतीय मूल की हैं?
नहीं, उनका जन्म अमेरिकन समोआ में हुआ था, लेकिन हिंदू धर्म और भारतीय संस्कृति से जुड़ाव के कारण उन्हें भारत समर्थक नेता माना जाता है.
उनके पति अब्राहम विलियम्स कौन हैं?
अब्राहम विलियम्स पेशे से सिनेमैटोग्राफर हैं और 2012 में तुलसी के चुनाव अभियान के दौरान दोनों की मुलाकात हुई थी.
तुलसी गबार्ड की कुल संपत्ति कितनी बताई जा रही है?
रिपोर्ट्स के मुताबिक उनकी नेटवर्थ 55 मिलियन डॉलर से 127 मिलियन डॉलर के बीच आंकी गई है.
अमेरिकी खुफिया विभाग की चीफ तुलसी गबार्ड ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने पति की दुर्लभ बीमारी का हवाला देकर नेशनल इंटेलिजेंस के डायरेक्टर का पद छोड़ दिया है। अपने इस्तीफे में तुलसी गबार्ड ने बताया कि पति की हड्डी के कैंसर से लड़ाई में उनका साथ देने के लिए नेशनल इंटेलिजेंस के डायरेक्टर के पद से इस्तीफ़ा दे रही हैं। गबार्ड ने शुक्रवार को ओवल ऑफिस में हुई एक मीटिंग के दौरान राष्ट्रपति ट्रंप को इस बारे में बताया।
तुलसी गबार्ड ने अपने इस्तीफे में बताया कि उनके पति को ‘हड्डियों के कैंसर की बेहद दुर्लभ किस्म’ का पता चला है और इस मुश्किल दौर में वह उनके साथ रहना चाहती हैं. हालांकि दूसरी तरफ अमेरिकी मीडिया और कुछ सूत्रों का दावा है कि व्हाइट हाउस ने उन पर इस्तीफा देने का दबाव भी बनाया था. ऐसे में उनके अचानक पद छोड़ने के पीछे राजनीतिक चर्चाएं भी तेज हो गई हैं.
कौन हैं तुलसी गबार्ड?
तुलसी गबार्ड अमेरिकी राजनीति का वह नाम हैं, जिन्हें भारत और हिंदू संस्कृति से गहरे जुड़ाव के कारण अक्सर ‘भारत की बेटी’ कहा जाता है. वह अमेरिकी कांग्रेस में पहुंचने वाली पहली हिंदू सांसद थीं. हालांकि तुलसी का जन्म अमेरिकी क्षेत्र अमेरिकन समोआ में हुआ था, लेकिन उनका पालन-पोषण हवाई और फिलीपींस में हुआ. उनकी मां कैरोल पोर्टर गबार्ड बाद में हिंदू धर्म से प्रभावित हुईं और परिवार में भारतीय आध्यात्मिक परंपराओं का प्रभाव बढ़ता गया.
तुलसी खुद भी भगवद्गीता और सनातन परंपरा का कई बार सार्वजनिक रूप से जिक्र कर चुकी हैं. अमेरिका में भारतीय समुदाय के बीच तुलसी की लोकप्रियता काफी ज्यादा रही है. वह अक्सर भारतीय त्योहारों, योग, आध्यात्मिकता और हिंदू परंपराओं से जुड़ी बातें खुलकर करती रही हैं.
ट्रंप सरकार में बनीं बड़ा चेहरा
डोनाल्ड ट्रंप के सत्ता में लौटने के बाद तुलसी गबार्ड को अमेरिका की खुफिया एजेंसियों की सबसे बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी. उन्होंने लगभग डेढ़ साल तक खुफिया विभाग (ODNI) की कमान संभाली. अपने कार्यकाल के दौरान तुलसी गबार्ड ने कई बड़े फैसले लिए. उन्होंने अमेरिकी इंटेलिजेंस सिस्टम में बड़े पैमाने पर ढांचागत बदलाव किए. रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन्होंने एजेंसी का आकार छोटा किया और सालाना 700 मिलियन डॉलर से ज्यादा की लागत घटाई.
उन्होंने खुफिया तंत्र में चल रहे डायवर्सिटी, एक्विटी और इंक्लुजन (DEI) कार्यक्रमों को भी खत्म कर दिया. इसके अलावा उन्होंने पांच लाख से ज्यादा गोपनीय सरकारी दस्तावेजों को सार्वजनिक करने की प्रक्रिया शुरू की. इन दस्तावेजों में ट्रंप-रूस जांच, जॉन एफ कैनेडी और रॉबर्ट एफ कैनेडी हत्याकांड से जुड़े रिकॉर्ड और ‘क्रॉसफायर हरिकेन’ जांच से जुड़े दस्तावेज शामिल थे. तुलसी गबार्ड का दावा था कि इससे अमेरिकी खुफिया एजेंसियों के ‘राजनीतिक इस्तेमाल’ का सच सामने आया.
आखिर क्यों दिया इस्तीफा?
तुलसी गबार्ड ने राष्ट्रपति ट्रंप को लिखे अपने इस्तीफे में साफ कहा कि उनके पति अब्राहम विलियम्स गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं और उन्हें इस समय परिवार के साथ रहने की जरूरत है. उन्होंने लिखा, ‘मेरे पति हमेशा मेरी ताकत रहे हैं. सैन्य तैनाती, चुनावी अभियान और सार्वजनिक जीवन के हर मुश्किल दौर में उन्होंने मेरा साथ दिया. अब जब वह जीवन की सबसे कठिन लड़ाई लड़ रहे हैं, तो मैं उन्हें अकेला नहीं छोड़ सकती.’
तुलसी ने कहा कि वह ‘अच्छे विवेक’ के साथ इतनी जिम्मेदार और समय लेने वाली भूमिका में नहीं रह सकतीं, जबकि उनके पति को लगातार देखभाल और मदद की जरूरत है.
हालांकि रॉयटर्स की एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि व्हाइट हाउस ने उन्हें पद छोड़ने के लिए मजबूर किया. इस दावे के बाद अमेरिका की राजनीति में कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं.
तुलसी के इस्तीफे पर ट्रंप ने क्या कहा?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तुलसी गबार्ड के इस्तीफे की पुष्टि करते हुए कहा कि वह 30 जून को प्रशासन छोड़ देंगी. ट्रंप ने उनकी तारीफ करते हुए कहा, ‘तुलसी गबार्ड ने शानदार काम किया है. इस समय उनका अपने पति के साथ रहना सही फैसला है. मुझे भरोसा है कि उनके पति जल्द ठीक हो जाएंगे.’
ट्रंप ने यह भी ऐलान किया कि तुलसी के बाद प्रिंसिपल डिप्टी डायरेक्टर आरोन लुकास कार्यवाहक राष्ट्रीय खुफिया निदेशक की जिम्मेदारी संभालेंगे.
तुलसी गबार्ड ने अपने पति की बीमारी का नाम सार्वजनिक नहीं किया, लेकिन उन्होंने इसे ‘बेहद दुर्लभ बोन कैंसर’ बताया.
कौन हैं तुलसी के पति अब्राहम विलियम्स?
अब्राहम विलियम्स पेशे से सिनेमैटोग्राफर हैं. तुलसी गबार्ड से उनकी मुलाकात 2012 में हुई थी, जब वह उनके चुनाव अभियान में फोटोग्राफर के तौर पर काम कर रहे थे. धीरे-धीरे दोनों के बीच दोस्ती बढ़ी और फिर 2015 में दोनों ने शादी कर ली. अमेरिकी राजनीति में तुलसी के साथ अब्राहम हमेशा एक शांत लेकिन मजबूत सहयोगी के रूप में नजर आए.
किस बीमारी से जूझ रहे हैं अब्राहम?
तुलसी गबार्ड ने अपने पति की बीमारी का नाम सार्वजनिक नहीं किया, लेकिन उन्होंने इसे ‘बेहद दुर्लभ बोन कैंसर’ बताया. विशेषज्ञों के मुताबिक, ऐसे कैंसर बेहद कम मामलों में पाए जाते हैं. इनमें ऑस्टियोसारकोमा, ईविंग सारकोमा, कॉन्ड्रोसारकोमा और कॉर्डोमा जैसी गंभीर बीमारियां शामिल हो सकती हैं.
इन कैंसरों का इलाज लंबा और जटिल होता है. कई मामलों में सर्जरी, रेडिएशन और कीमोथेरेपी की जरूरत पड़ती है. यही वजह है कि तुलसी गबार्ड ने सार्वजनिक जीवन से दूरी बनाने का फैसला लिया.
लगातार हो रहे इस्तीफों से बढ़ी ट्रंप की मुश्किल?
तुलसी गबार्ड का इस्तीफा ऐसे समय आया है जब ट्रंप प्रशासन पहले ही कई बड़े झटके झेल चुका है. इससे पहले होमलैंड सिक्योरिटी सेक्रेटरी क्रिस्टी नोएम भी पद छोड़ चुकी हैं. वहीं अटॉर्नी जनरल पाम बॉन्डी को भी जेफ्री एपस्टीन केस से जुड़े विवादों के बीच बाहर होना पड़ा. लेबर सेक्रेटरी लॉरी चावेज-डिरेमर भी जांचों के बीच इस्तीफा दे चुकी हैं. ऐसे में तुलसी गबार्ड का जाना ट्रंप प्रशासन के लिए एक और बड़ा झटका माना जा रहा है.
कितनी संपत्ति की मालकिन हैं तुलसी?
अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, तुलसी गबार्ड की कुल संपत्ति 55 मिलियन डॉलर से लेकर 127 मिलियन डॉलर के बीच आंकी जाती है. उनकी संपत्ति का बड़ा हिस्सा टेक्सास में स्थित रियल एस्टेट निवेशों से जुड़ा है. इसके अलावा उन्होंने मीडिया, पॉडकास्ट, किताबों, शेयर बाजार और क्रिप्टोकरेंसी में भी निवेश किया हुआ है. उनके पोर्टफोलियो में टेस्ला, एप्पल, एनवीडिया और बिटकॉइन जैसी बड़ी कंपनियों और डिजिटल एसेट्स में निवेश शामिल है.
तुलसी गबार्ड के इस्तीफे के बाद अब सवाल यह है कि क्या वह पूरी तरह सार्वजनिक जीवन से दूर हो जाएंगी या फिर भविष्य में राजनीति में नई भूमिका निभाएंगी. फिलहाल उन्होंने साफ कर दिया है कि उनकी प्राथमिकता उनका परिवार है. लेकिन अमेरिकी राजनीति में उनकी लोकप्रियता, हिंदू पहचान और ट्रंप प्रशासन में निभाई गई भूमिका उन्हें आने वाले समय में भी एक बड़ा चेहरा बनाए रख सकती है.
तुलसी गबार्ड की खास बातें…
तुलसी गबार्ड ने इस्तीफा क्यों दिया?
उन्होंने अपने पति अब्राहम विलियम्स को ‘हड्डियों के बेहद दुर्लभ कैंसर’ का पता चलने के बाद परिवार को प्राथमिकता देने के लिए इस्तीफा दिया.
क्या इस्तीफे के पीछे कोई राजनीतिक वजह भी बताई जा रही है?
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, व्हाइट हाउस ने उन पर इस्तीफा देने का दबाव डाला था, हालांकि आधिकारिक तौर पर उन्होंने पारिवारिक कारण बताया है.
डोनाल्ड ट्रंप ने तुलसी गबार्ड के इस्तीफे पर क्या कहा?
ट्रंप ने कहा कि तुलसी ने शानदार काम किया है और इस मुश्किल समय में उनका पति के साथ रहना सही फैसला है.
तुलसी गबार्ड के बाद कौन संभालेगा जिम्मेदारी?
तुलसी गबार्ड के बाद उनकी जगह एरोन लुकास को राष्ट्रीय खुफिया विभाग का कार्यवाहक निदेशक बनाया जाएगा.
क्या तुलसी गबार्ड भारतीय मूल की हैं?
नहीं, उनका जन्म अमेरिकन समोआ में हुआ था, लेकिन हिंदू धर्म और भारतीय संस्कृति से जुड़ाव के कारण उन्हें भारत समर्थक नेता माना जाता है.
उनके पति अब्राहम विलियम्स कौन हैं?
अब्राहम विलियम्स पेशे से सिनेमैटोग्राफर हैं और 2012 में तुलसी के चुनाव अभियान के दौरान दोनों की मुलाकात हुई थी.
तुलसी गबार्ड की कुल संपत्ति कितनी बताई जा रही है?
रिपोर्ट्स के मुताबिक उनकी नेटवर्थ 55 मिलियन डॉलर से 127 मिलियन डॉलर के बीच आंकी गई है.