बिहार में राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम के गायन का विरोध शुरू हो गया है। AIMIM ने सभी सरकारी कार्यक्रमों और शैक्षणिक संस्थानों (स्कूल-कॉलेज) में वंदे मातरम का गायन करने के फैसले का विरोध किया है।
वहीं, केंद्र की मोदी सरकार ने एक संशोधन को मंजूरी दी, जिसके तहत वंदे मातरम का अपमान अब दंडनीय अपराध माना जाएगा।
वंदे मातरम का बिहार में विरोध क्यों। नहीं गाने पर क्या सजा होगी। कहां-कहां गाना अनिवार्य।
सवाल-1ः बिहार में वंदे मातरम का विरोध कौन कर रहा है?
ईमान ने कहा, ‘मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और संबंधित मंत्रालय को ज्ञापन सौंपकर आपत्ति दर्ज कराएंगे। वंदे मातरम का गायन हमारी धार्मिक मान्यताओं के खिलाफ है, क्योंकि हम लोग एक ही ईश्वर को पूजते हैं। हम मूर्ति पूजा नहीं करते।’
सरकार के आदेश को सेकुलरिज्म के खिलाफ बताते हुए उन्होंने कहा कि हमारी आस्था का आदर होना चाहिए। सरकार अपने फैसले पर रोक लगाए।
सवाल-2ः AIMIM वंदे मातरम का विरोध क्यों कर रही?
जवाबः राज्य में 17.7% मुस्लिम आबादी है। AIMIM की पैठ सीमांचल एरिया में बढ़ रही है। मुस्लिमों का भरोसा बढ़ रहा है।
वंदे मातरम के गायन के फैसले का खुलकर विरोध विपक्षी दल कांग्रेस-RJD करने से बचेगी। उसको राज्य में हिन्दू-मुस्लिम होने का डर सताएगा। जबकि, इन दोनों पार्टियां ही राज्य में मुस्लिमों का वोट लेती हैं।
RJD-कांग्रेस वाली स्थिति AIMIM के साथ नहीं है। उसका पूरा जनाधार ही मुस्लिम समाज का है। ऐसे में वह खुलकर विरोध कर अपनी पार्टी का विस्तार सीमांचल से बाहर उत्तर-दक्षिण बिहार में करना चाहती है। चूंकि काफी समय से मुस्लिमों की वंदे मातरम पर आपत्ति रही है।

मुस्लिम वंदे मातरम का विरोध क्यों करते हैं?
आजादी के आंदोलन से लेकर अब तक मुस्लिम नेताओं ने इसका विरोध किया, खासकर मुस्लिम लीग ने। उन्हें वंदे मातरम से 2 दिक्कतें हैं…
- पहली: इसमें हिंदू देवी, देवताओं का जिक्र है और मूर्ति पूजन को बढ़ावा दिया जा रहा है, जो इस्लाम में अस्वीकार है और धर्मनिरपेक्ष नहीं है।
- दूसरी: जिस आनंदमठ उपन्यास से यह लिया गया है, उसमें मुसलमानों को देश का दुश्मन बताकर मारा गया है।
इतिहासकार आर. सी. मजूमदार वंदे मातरम को एंटी मुस्लिम तो नहीं बताते, लेकिन वो कहते हैं, ‘आनंदमठ में बंकिम चंद्र ने जिस तरह देवी काली का चित्रण किया है, उससे यह तो साफ है कि उनका राष्ट्रवाद हिंदू था भारतीय नहीं।’
इतिहासकार राम पुनियानी बताते हैं, ‘मुसलमानों के एक धड़े को वंदे मातरम से परेशानी उसके बाद के 4 छंदों की वजह से है, जिसमें हिंदू देवी-देवताओं का जिक्र है। इसके अलावा आनंदमठ में मुसलमानों के प्रति जिस तरह की हिंसा के भाव लिखे हैं, वो परेशान करने वाले हैं।’
सवाल-3ः वंदे मातरम का अपमान किया तो क्या होगा?
जवाबः राष्ट्रीय गौरव के अपमान की रोकथाम अधिनियम, 1971 की सेक्शन 3 में राष्ट्रगान ‘जन-गण-मन’ के अपमान या इसे गाने में रूकावट पैदा करने पर 3 साल तक की सजा या जुर्माना लगता है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 5 मई 2026 को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने राष्ट्रीय गौरव के अपमान की रोकथाम अधिनियम, 1971 में संशोधन करने की मंजूरी दे दी है। इसके तहत वंदे मातरम को इस अधिनिमयम शामिल किया जाएगा।
इसका मतलब कि अब सरकार वंदे मातरम को जन-गण-मन के समकक्ष दर्जा देने वाली है। इसलिए माना जा रहा है कि सजा और जुर्माने के प्रावधान भी एक जैसे होंगे।
यानी वंदे मातरम का अपमान या उसे गाने में बाधा डालने पर 3 साल तक की सजा या जुर्माना लग सकता है।
सवाल-4ः तो क्या अब मुस्लिमों को भी वंदे मातरम गाना पड़ेगा?
जवाबः जरूरी नहीं है। इसके लिए आपको 1986 के ‘बिजो इमैनुएल बनाम केरल राज्य’ मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले को समझना होगा।
- दरअसल, बिजो इमैनुएल, ईसाई के ‘यहोवा के साक्षी’ पंथ को मानते थे। इस पंथ को मानने वाले सिर्फ अपने ईश्वर के प्रति निष्ठा रखते हैं, न कि किसी अन्य धार्मिक या राष्ट्रीय प्रतीक के लिए। इसी के चलते बिजो के 3 बच्चों ने स्कूल में जन-गण-मन नहीं गाया, तो उन्हें स्कूल से निकाल दिया गया।
- इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि किसी भी व्यक्ति को राष्ट्रगान गाने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता, अगर उसके धार्मिक विश्वास इसकी इजाजत नहीं देते। अगर कोई राष्ट्रगान नहीं गाता, लेकिन उसके सम्मान में शांतिपूर्वक खड़ा रहता है, तो इसे अपराध नहीं माना जाएगा।
- ऐसे में जब राष्ट्रगीत को राष्ट्रगान के समकक्ष किया जा रहा है तो दोनों के लिए एक जैसे नियम लागू हो सकते हैं। यानी मुस्लिमों को राष्ट्रगीत गाना जरूरी नहीं होगा, लेकिन इसके सम्मान में उन्हें शांतिपूर्वक खड़ा होना पड़ेगा। ऐसा न करने पर राष्ट्रगीत का अनादर माना जाएगा।
सवाल-5ः वंदे मातरम को कब और कहां गाना अनिवार्य है?
जवाबः सम्राट सरकार ने 26 अप्रैल 2026 को एक आदेश जारी किया। इसके मुताबिक…
- राज्य के सभी शैक्षणिक संस्थानों मतलब यूनिवर्सिटी, स्कूल, कॉलेज, मदरसों में दिन की शुरुआत ‘वंदे मातरम’ के सामूहिक गायन से होगी। उसके बाद राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ का गायन होगा। फिर क्लास शुरू होगी।
- राज्य सरकार के सभी सरकारी कार्यक्रमों की शुरुआत वंदे मातरम के गाने से होगी। फिर जन गण मन होगा। उसके बाद कार्यक्रम का समापन बिहार गीत ‘मेरे भारत के कंठहार’ से होगा।
- बिहार सरकार ने अपने आदेश में केंद्र सरकार की राष्ट्रीय गीत से जुड़ी गाइडलाइन को फॉलो करने का निर्देश दिया है। इसका मतलब हुआ कि वंदे मातरम के पूरे 6 स्टैंजा गाना अनिवार्य है।
फरवरी में केंद्रीय गृह मंत्रालय ने वंदे मातरम को लेकर गाइडलाइन जारी की थी। इसमें बताया गया था कि…
- जब राष्ट्रीय ध्वज को परेड में लाया जाएगा, तब वंदे मातरम गाना या बजाना होगा।
- राष्ट्रीय ध्वज ‘तिरंगा’ फहराते वक्त राष्ट्रगीत का 6 पैराग्राफ वाला वर्जन गाया जाएगा। इसे बदला नहीं जा सकता।
- सरकार के किसी भी आधिकारिक कार्यक्रम में राष्ट्रपति के आते-जाते वक्त यह बजाया जाएगा।
- दूरदर्शन, आकाशवाणी जैसे सरकारी मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर राष्ट्रपति के राष्ट्रीय संबोधन से पहले और बाद इसे बजाया जाएगा।
- राज्यपाल या उपराज्यपाल, जब राज्य या केंद्र शासित प्रदेश के फॉर्मल इवेंट्स में आएंगे और जाएंगे, तब राष्ट्रगीत बजाया जाएगा।
- भारत रत्न, पद्म पुरस्कार जैसे सम्मान समारोहों में वंदे मातरम बजाया जाएगा।
- अगर केंद्र सरकार किसी खास कार्यक्रम के लिए अलग से आदेश जारी करती है, तो वहां भी यह नियम लागू होगा।
- अगर राष्ट्रगीत बैंड द्वारा बजाया गया, तो उसकी शुरुआत में पहले ड्रम रोल किया जाएगा यानी ढोल, मृदंग, बिगुल या तुरही जैसे वाद्य यंत्र से संकेत दिया जाएगा।
- अगर किसी मार्चिंग ड्रिल के दौरान राष्ट्रगीत बजाया जाएगा, तो उसके शुरू होने से पहले 7 कदम की चाल होगी, फिर राष्ट्रगीत शुरू होगा।
- स्कूलों में दिन की शुरुआत के दौरान ‘वंदे मातरम’ का सामूहिक गायन कराया जाएगा।
- ऐसे कल्चरल या फॉर्मल इवेंट्स, जहां तिरंगा फहराया जाएगा, वहां राष्ट्रगीत सामूहिक रूप से गाया जाएगा।
- जनप्रतिनिधियों या सम्मानित लोगों के मौजूदगी वाले सामान्य कार्यक्रमों में भी वंदे मातरम गया जा सकता है, लेकिन पूरे सम्मान और शिष्टाचार के साथ।
ये नियम कहां लागू नहीं होंगे?
- सिनेमा हॉल में फिल्म शुरू होने से पहले वंदे मातरम बजाना और खड़ा रहना अनिवार्य नहीं होगा।
- अगर किसी न्यूजरील या डॉक्यूमेंट्री फिल्म में राष्ट्रगीत बजाया जाता है, तो दर्शकों को खड़ा होना जरूरी नहीं होगा।






