NCERT की 8वीं कक्षा की किताब में न्यायपालिका से जुड़े चैप्टर में भ्रष्टाचार को लेकर आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. इस दौरान चीफ जस्टिस सूर्यकांत काफी नाराज दिखे. उन्होंने सुनवाई के दौरान कई सख्त टिप्पणियां कीं. कोर्ट ने कहा कि ये कैलकुलेटिव मूव है. चीफ जस्टिस ने कहा कि बच्चों को ये पढ़ाया जाएगा कि न्यायपालिका भ्रष्ट है? सुनवाई के दौरान काफी नाराज दिख रहे चीफ जस्टिस के सामने सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि जो 32 किताबें बिकी थीं, उसे वापस ले लिया गया है. इसके अलावा बाकी किताबों को भी वापस ले लिया गया है. तब चीफ जस्टिस ने कहा कि उन्होंने पहले वाले को निकाल दिया और आज न्यायपालिका खून बहा रही है. यह हर जगह मीडिया में है. जानिए कोर्ट ने क्या-क्या कहा…
न्यायपालिका भ्रष्ट है, क्या संदेश जाएगा?
चीफ जस्टिस ने कहा कि मैंने एजुकेशन सेक्रेटरी का भेजा हुआ कम्युनिकेशन पढ़ा है. जब हम पर हमला होता है तो हम जानते हैं कि कैसे जवाब देना है. उन्होंने कहा कि आप कहते हैं कि पब्लिकेशन वापस ले लिया गया है. यह मार्केट में है, यह सोशल मीडिया में है..! मुझे भी किताब की एक कॉपी मिली! अगर आप पूरी टीचिंग कम्युनिटी और स्टूडेंट्स को सिखा रहे हैं कि ज्यूडिशियरी करप्ट है तो क्या मैसेज जाएगा? टीचर्स इसे सीखेंगे! पेरेंट्स इसे सीखेंगे.
इसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए
चीफ जस्टिस ने कहा कि इस मामले में जवाबदेही तय होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि हल्की सजा देकर नहीं छोड़ा जा सकता. चीफ जस्टिस ने कहा कि ये 8 वी क्लास के बच्चों की बात नहीं हैं. ये कैलकुलेटिव मूव है. बच्चों को ये पढ़ाया जाएगा कि ज्यूडिशियरी करप्ट है ? जो भी इसके पीछे है उसका पता लगाएंगे. उन्होंने गोली चलाई है और ज्यूडिशियरी खून बहा रही है
यह गहरी साजिश है
CJI ने कहा कि यह एक सोचा-समझा कदम है. पूरी टीचिंग कम्युनिटी को बताया जाएगा कि इंडियन ज्यूडिशियरी करप्ट है और केस पेंडिंग हैं. फिर स्टूडेंट्स और फिर पेरेंट्स. यह एक गहरी साजिश है! CJI ने कहा कि हम और गहरी जांच चाहते हैं. हमें पता लगाना है कि कौन जिम्मेदार है और हम देखेंगे कि कौन-कौन हैं. उसकी सजा मिलनी चाहिए! हम केस बंद नहीं करेंगे.
एनसीईआरटी के निदेशक को कारण बताना होगा
- सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकारों को इस किताब की सभी कॉपियों को जब्त करने का आदेश दिया है और साथ ही इसके डिजिटल प्रिंट को भी हटाने को कहा है। सुप्रीम कोर्ट ने चेतावनी दी कि अगर उसके इस आदेश के पालन में कोताही बरती गई तो गंभीर कार्रवाई की जाएगी।
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- सर्वोच्च अदालत ने एनसीईआरटी के निदेशक, स्कूली शिक्षा सचिव को भी कारण बताओ नोटिस जारी किया है और ये पूछा है कि इसके लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई क्यों न की जाए। मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि यह न्यायपालिका की गरिमा को ठेस पहुंचाने के लिए जानबूझकर किया गया कृत्य लगता है।
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- सुनवाई के दौरान एनसीईआरटी ने कहा कि वे बिना शर्त माफी मांगने को तैयार हैं। किताब से विवादित अंश को भी हटा दिया जाएगा। इस पर चीफ जस्टिस ने कहा कि केवल माफी मांगना और किताब से आपत्तिजनक अंशों को हटाना पर्याप्त नहीं है। एनसीईआरटी के निदेशक को कारण बताना होगा। ये सोच-समझकर उठाया गया कदम है। अदालत ने सवाल किया कि इस मामले को अवमानना क्यों न माना जाए?
सीजेआई ने जताई नाराजगी, कहा- किसी को भी न्यायपालिका को बदनाम करने की इजाजत नहीं
- गौरतलब है कि बुधवार को वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल, अभिषेक मनु सिंघवी और मुकुल रोहतगी ने सीजेआई के सामने यह मामला उठाया था। इसके बाद, मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने एनसीईआरटी किताब में ‘न्यायपालिका में भ्रष्टाचार’ चैप्टर पर कड़ी नाराजगी जताई। सीजेआई ने कहा कि किसी को भी न्यायपालिका को बदनाम करने की इजाजत नहीं दी जाएगी।
- नाराजगी जाहिर करते हुए सीजेआई ने कहा, ‘संस्था का प्रमुख होने के नाते मैंने हमेशा अपने दायित्व को निभाया है। मैं किसी को इस बात की इजाजत नहीं दूंगा कि वो न्यायपालिका को बदनाम करें। किसी कीमत पर मैं इसकी इजाजत नहीं दूंगा, कोई कितना भी बड़ा क्यों न हो। कानून अपना काम करेगा। मैं जानता हूं कि इससे कैसे निपटा जाए। मैं स्वतः संज्ञान ले रहा हूं।’
- दरअसल, एनसीईआरटी ने 24 फरवरी को कक्षा 8 की सामाजिक विज्ञान की नई किताब जारी की, लेकिन किताब के एक अध्याय में ‘न्यायपालिका में भ्रष्टाचार’ का एक सेक्शन था। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी के बाद एनसीईआरटी (राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद) ने माफी मांगी है और विवादित चैप्टर वाली कक्षा 8 की किताब के वितरण पर रोक लगाई है।
- मामला सामने आने के बाद स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग ने तुरंत निर्देश दिया कि अगली सूचना तक इस किताब का वितरण रोक दिया जाए। एनसीईआरटी ने आदेश मानते हुए किताब की आपूर्ति पर रोक लगा दी है।
- एक बयान में एनसीईआरटी ने माना कि गलती अनजाने में हुई है। किसी भी संस्था की गरिमा कम करने का कोई इरादा नहीं था। अब इस अध्याय को दोबारा लिखा जाएगा। इसके लिए संबंधित अधिकारियों से सलाह ली जाएगी। सुधारी गई किताब शैक्षणिक सत्र 2026-27 की शुरुआत में विद्यार्थियों को दे दी जाएगी। एनसीईआरटी ने इस गलती पर खेद जताते हुए माफी मांगी है और कहा है कि आगे से ऐसी गलती न हो, इसका पूरा ध्यान रखा जाएगा।
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