केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह तीन दिवसीय बिहार दौरे पर हैं। इस दौरान वे सीमांचल के तीन अलग-अलग जिलों में कई राउंड की बैठक कर रहे हैं। सबसे पहले 25 फरवरी को किशनगंज में सेना के अधिकारी और पार्टी के पदाधिकारियों के साथ बैठक की। इसके बाद अररिया में नेपाल सीमा पर स्थित लेटी (Letti) सीमा चौकी (BOP) के नए परिसर का उद्घाटन किया।गृह मंत्री अररिया के बाद पूर्णिया में उस इलाके के डीएम, गृह विभाग के अधिकारी और बड़े पदाधिकारियों के साथ बैठक करेंगे। सीमांचल आकर गृह मंत्री ने घुसपैठियों को भारत की जमीन से हटाने के केंद्र सरकार की दृढ़ इच्छा शक्ति को दोहराया है। क्या बिहार दौरे के बहाने अमित शाह बंगाल को साध रहे हैं? क्या किशनगंज से नॉर्थ बंगाल में आसानी से पैठ बनाई जा सकती है? क्या घुसपैठ का मुद्दा उठ भले ही बिहार में रहा है, लेकिन निशाना बंगाल है? क्या केंद्र सरकार सीमांचल और बंगाल के कुछ इलाकों को मिलाकर केंद्र शासित राज्य बनाने की तैयारी कर रही है?
क्या बिहार से बंगाल चुनाव को प्रभावित किया जा सकता है?
सीमांचल में पिछले 25 सालों से पत्रकारिता कर रहे सीनियर जर्नलिस्ट पंकज भारतीय बताते हैं…
- किशनगंज से नॉर्थ बंगाल के इलाके में बिना किसी रोक-टोक के मूवमेंट किया जा सकता है।
- यहां के कई इलाके ऐसे हैं जहां सड़क के एक साइड बंगाल तो दूसरे साइड बिहार है।
- बिहार-बंगाल के लोग आसानी से यहां आ-जा सकते हैं। ऐसे में बीजेपी के लिए बंगाल चुनाव से पहले ये इलाका भौगोलिक और रणनीतिक रूप से अहम साबित हो सकता है।
किशनगंज के ही एक सीनियर जर्नलिस्ट ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया, ‘बीजेपी इस बात को अच्छी तरह समझती है कि बंगाल की सीएम ममता बनर्जी आसानी से उनके एजेंडे को लागू नहीं करने देंगी।’
ऐसे में किशनगंज को बेस बनाकर नॉर्थ बंगाल के 8 जिलों दार्जिलिंग, मालदा, दक्षिण दिनाजपुर, उत्तर दिनाजपुर, कूचबिहार, अलीपुरद्वार, जलपाईगुड़ी और कालिम्पोंग में आसानी से मूवमेंट किया जा सकता है। अमित शाह के इस दौरे को इस रणनीति के हिसाब से भी देखा जा रहा है।
घुसपैठ के मुद्दे से ममता सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहीं, ऐसे में बिहार से बंगाल पर निशाना
जिस घुसपैठ को ममता बनर्जी 2005 में सबसे बड़ा मुद्दा बताती रही थीं, अब वह लगातार इसका बचाव कर रही हैं। ममता बनर्जी पश्चिम बंगाल में SIR का सबसे अक्रामक तरीके से विरोध कर रही हैं। वोटर लिस्ट से 1.20 करोड़ वोटर्स का नाम काटने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट गईं। खुद पश्चिम बंगाल सरकार का पक्ष रखा।
अब बीजेपी आक्रामक तरीके से घुसपैठ के मुद्दे को उठा रही है। बांग्लादेश से सटे तीन सीमाई राज्यों बिहार, बंगाल और झारखंड में बीजेपी लगातार घुसपैठ के मुद्दे को हर चुनाव से पहले एग्रेसिव तरीके से उठाती रही है। इन तीनों राज्यों में घुसपैठिए का सीधा संबंध बंगलादेशी मुसलमानों से होता है। हालांकि इसका बहुत ज्यादा लाभ बीजेपी को मिल नहीं पा रहा है।
‘बिहार में SIR के दौरान भी घुसपैठिए की बात बीजेपी की तरफ से उठाई गई थी, लेकिन SIR के दौरान एक भी घुसपैठिया चिन्हित नहीं हो पाया।’
क्या यूनियन टेरिटरी बनाने की तैयारी कर रही केंद्र सरकार?
जिस तरीके की बैठक केंद्रीय गृह मंत्री सीमांचल में कर रहे हैं, इसे सामान्य नहीं माना जा सकता है। गृह विभाग के आला अधिकारियों के साथ राज्य के बड़े अधिकारियों और जिले के हर पदाधिकारी को बैठक में शामिल करना किसी बड़ी एक्टिविटी का संकेत भी हो सकता है।
सीनियर जर्नलिस्ट अमरनाथ तिवारी बताते हैं, ‘बिहार से एक तरीके से नक्सलवाद का मुद्दा समाप्त होने का दावा किया जा रहा है। ऐसे में अब केंद्र सरकार सीमा सुरक्षा और सीमा विवाद की दिशा में कुछ बड़े निर्णय ले सकती है।’
उन्होंने कहा, ‘इस इलाके में सिलिगुड़ी का चिकन नेक, इंडो-नेपाल का ओपन बॉर्डर और किशनगंज से सटा बांग्लादेश का बॉर्डर भी है। सिक्योरिटी के लिहाज से इसे काफी अहम माना जा रहा है। पिछले कुछ वर्षों से इन इलाकों को लेकर दो तरह की चर्चाएं चल रही हैं।’
- बिहार के सीमांचल, पश्चिम बंगाल और झारखंड के कुछ हिस्से को जोड़कर यूनियन टेरिटरी का गठन कर सकती है।
- बॉर्डर इलाके के 100 KM के जोन को सीधे SSB के कमांड में दिया जा सकता है।
क्या सीमांचल की सोशल डेमोग्राफी बदल रही है?
सीमांचल के 4 जिलों में पिछले 10 साल में 35 से 37% की दर से वोटर्स बढ़े हैं। अगर जिलावार बात करें तो अररिया में 2010 से 2020 विधानसभा चुनाव के बीच वोटर लिस्ट में लगभग 35% वोटर्स की बढ़ोतरी हुई है। कटिहार में ये इजाफा 30%, पूर्णिया में 34% और किशनगंज में सबसे अधिक 37% है।
क्या ये रफ्तार सिर्फ सीमांचल में ही है?
इसे समझने के लिए हमने सीमांचल के दो पड़ोसी जिले मिथिलांचल के दरभंगा और कोसी के सुपौल के आंकड़ों का अध्ययन किया। दरभंगा में 10 साल में 24% तो सुपौल में 20% वोटर्स बढ़े हैं। बिहार के लगभग सभी जिलों में वोटर्स की संख्या बढ़ने की औसत रफ्तार 20-25% है। केवल सीमांचल ही ऐसा इलाका है, जहां वोटर्स 35% बढ़े हैं।
मुस्लिम बहुल इलाकों की बात करें तो सबसे ज्यादा किशनगंज में 68% आबादी मुस्लिम समुदाय की है। कटिहार में 43%, अररिया में 42%, पूर्णिया में 38% और दरभंगा में 25% मुस्लिम आबादी है।
सीमांचल में अमित शाह ने की क्या घोषणाएं?
केंद्रीय गृह मंत्री का पूरा फोकस सीमांचल में घुसपैठियों पर रहा है। उन्होंने बताया कि वे एक डिटेल्ड वर्क प्लान तैयार कर रहे हैं कि कैसे सीमांचल से घुसपैठियों को बाहर निकाला जाए।
उन्होंने बताया, ‘इसकी शुरुआत बॉर्डर के 10 KM एरिया में अतिक्रमण हटाने से होगी। भारत की भूमि से घुसपैठियों को हटाने को लेकर केंद्र सरकार ने दृढ़ निश्चय है। केंद्र सरकार चुन-चुन कर एक-एक घुसपैठिया को यहां से बाहर फेंकेगी।’
घुसपैठ मुक्त भारत: अमित शाह
बिहार में सीमांचल की राजनीति को एक नए अंदाज में साधने के लिए गृह मंत्री अमित शाह ने आज बिगुल फूंक दिया। वैसे भी सीमांचल और अमित शाह की गतिविधियों पर गौर करें तो यह पूरी भाजपा के लिए केवल चुनावी मुद्दा नहीं बल्कि पूरे देश की सुरक्षा मिशन का केंद्र बिंदु बन गया है। बीजेपी की राजनीति की इस सोच में सीमांचल की बदलती डेमोग्राफी और अवैध तरीके से घुसपैठ के विरुद्ध मुक्ति का अभियान है। इसे आज के परिप्रेक्ष्य में गृह मंत्री अमित शाह के उदबोधन से भी समझा जा सकता है। पहले जानिए की अमित शाह ने कहां-कहां और किस किस निशाने पर शब्दभेदी वाण चलाया है।
घुसपैठ मुक्त भारत: अमित शाह
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने आज सीमा सुरक्षा बल को संबोधित करते कहा है कि हम पूरे सीमांचल को घुसपैठियों से मुक्त करेंगे। यह घुसपैठिए की ओर से हमारे देश के गरीबों के अनाज की हकमारी ही नहीं बल्कि यह राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जरूरी भी है। जब तक इनको देश से बाहर नहीं किया जाएगा तब तक ये देश की सुरक्षा को भेदते रहेंगे। इतना भर ही नहीं बल्कि एक्शन प्लान के प्रथम स्टेज में सीमा से 10 किमी अंदर जितने भी अवैध अतिक्रमण हैं उसे हटाने के निर्देश भी दिया है।
अमित शाह ने आज दूसरा संकल्प लेते कहा कि यह सरकार डेमोग्राफी परिवर्तन को लेकर भी संकल्पित है। इस संदर्भ में एक उच्च स्तरीय समिति सिर्फ सीमांचल ही नहीं बल्कि पूरे देश की बदली डेमोग्राफी का गहराई से अध्ययन कर रिपोर्ट करेगी। इसके बाद घुसपैठिये को देश से बाहर निकालने की कवायद को अंजाम दिया जाएगा। और इस कार्य की शुरुआत बिहार से होगी।
राजनीति के निशाने पर अमित शाह का बिहार आगमन
सीमांचल पर अमित शाह का फोकस सिर्फ इसलिए नहीं है कि वे चुनावी जीत का इसे आधार बनाना चाहते हैं। बल्कि वे सीमांचल में राजद की राजनीति का सफाया करना चाहते हैं। अमित शाह का यह प्लान राजद की जड़ में मठ्ठा डालने के समान है। अमित शाह इसके जरिए सीमांचल में 24 विधानसभा सीटों पर स्थाई जीत की नींव रखना चाहते हैं। दरअसल अमित शाह पीएम मोदी के उस की गारंटी को पूरा करना चाहते हैं जिसे उन्होंने बिहार की भूमि पर ली थी। वह संकल्प था घुसपैठिया को बाहर जाना ही होगा ।
अमित शाह के निशाने पर इसलिए भी सीमांचल है कि यहां अधिकर यात्रा के दौरान राजद नेता तेजस्वी यादव ने वोटर अधिकार यात्रा निकाली थी। यह यात्रा सीमांचल के 8 विधानसभा क्षेत्रों से होकर गुजरी थी। इसमें कटिहार जिले का बरारी, कोढ़ा, कटिहार और कदवा, पूर्णिया जिले का पूर्णिया सदर और कसबा तथा अररिया जिले का अररिया और नरपतगंज शामिल था। उस यात्रा में सहयोगी घुसपैठियों की वकालत कर उन्हें बचाने में लगे थे।
अररिया से शंखनाद क्यों?
अमित शाह का यह दो दिवसीय यात्रा मिशन बिहार का ही एक हिस्सा है। सीमांचल में कुल 24 विधानसभा हैं। इसमें से 12 सीटें ऐसी हैं जिसमें 50 फीसदी से अधिक आबादी अल्पसंख्यकों की है। पहले तो यह राजद का गढ़ माना जाता था।पर इन दिनों एआईएमआईएम
ने सीमांचल में बड़ी पैठ बना ली है। वर्ष 2020 के विधान सभा चुनाव और वर्ष 2025 के चुनाव में एआईएमआईएम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 5 सीटों पर जीत दर्ज की थी। अब तो बढ़ती शक्ति का एहसास इस बार राज्य सभा उम्मीदवार के चयन को ले कर भी बिहार के राजनीतिज्ञों ने देख ली
घुसपैठ भाजपा का राजनीतिक अस्त्र
अमित शाह का बार बार सीमांचल के किसी जिले में आने को भविष्य की चुनावी राजनीत के रूप में देखा जा सकता है। ऐसा नहीं कि घुसपैठ के मुद्दे से वोटों का ध्रुवीकरण नहीं हुआ। वर्ष 2015 में सीमांचल में भाजपा को अपने बूते 5 सीट मिली थी, जबकि वर्ष 2020 में जेडीयू के साथ रहकर उसे 8 सीटें हासिल हुई। वर्ष दिसंबर 2025 के विधानसभा चुनाव में सीमांचल के 24 विधानसभा सीटों पर 14 सीटें एनडीए और पांच-पांच सीटें एआईएमआईएम और महागठबंधन को मिली थी।
क्या है रणनीति ?
भाजपा सूत्रों की माने तो बीजेपी के रणनीतिकारों की नजर सीमांचल के उन सीटों पर हैं जहां मुस्लिम आबादी 50 प्रतिशत या इस से कम हो। किशनगंज में अल्पसंख्यकों की आबादी 68 फीसदी है। सीमांचल में इस बार वोट पुनरीक्षण के बाद वोटर की संख्या में काफी कमी आई थी। चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार 7.62 लाख वोटरों की छटनी हुई।
इसमें सर्वाधिक पूर्णिया में 2.73 लाख, कटिहार में 2.44 लाख, अररिया में 1.58 लाख और किशनगंज में 1.45 लाख मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से बाहर हुए हैं। अब इस नए मिशन से अमित शाह घुसपैठिया विहीन वोटर लिस्ट देखना चाहते हैं। ऐसा इसलिए भी कि विपक्ष लगातार यह प्रश्न उठा रहा है कि कितने घुसपैठिये मिले और कहां?







