भाषण के कुछ हिस्से हटाने की मांग
भाजपा राहुल के भाषण कुछ हिस्सों को लेकर आपत्ति जता रही है। पार्टी के चीफ व्हिप संजय जायसवाल ने बजट चर्चा के दौरान राहुल गांधी द्वारा कही गई कुछ बातों को लोकसभा की कार्यवाही से हटाने का औपचारिक नोटिस दिया है। भाजपा का कहना है कि उनके कुछ बयान आपत्तिजनक और तथ्यों से परे हैं।
निशिकांत दुबे का अलग प्रस्ताव, समझिए
भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने राहुल गांधी के खिलाफ एक अलग मूल प्रस्ताव दायर किया है। यह सामान्य नोटिस से अलग प्रक्रिया होती है। अगर लोकसभा अध्यक्ष इसे स्वीकार करते हैं, तो इस पर सदन में चर्चा और मतदान हो सकता है। ऐसे में प्रस्ताव पारित होने पर राहुल गांधी की संसद सदस्यता जा सकती है।
लोकसभा अध्यक्ष को लिखा पत्र
बता दें कि इस पूरे मामले में निशिकांत दुबे ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर मांग की है कि राहुल गांधी के कथित ‘अनैतिक आचरण’ की जांच के लिए एक संसदीय समिति बनाई जाए। उन्होंने यह भी कहा है कि जरूरत पड़ने पर राहुल गांधी की सदस्यता खत्म करने पर विचार किया जाए। दुबे का आरोप है कि राहुल गांधी ने संसद के अंदर और बाहर ऐसे बयान दिए हैं, जिससे देश की एकता और संस्थाओं की गरिमा को ठेस पहुंची है।
राहुल गांधी पर ‘आजीवन प्रतिबंध’ की तैयारी?
- केंद्रीय श्रम मंत्री मनसुख मंडाविया ने संशोधित औद्योगिक संबंध संहिता बिल पर जवाब देते हुए कहा, ‘वामपंथी दलों की आलोचना करते हुए केंद्रीय श्रम मंत्री ने कहा कि केरल की एलडीएफ सरकार ने राज्य में मेडिकल कॉलेज की स्थापना के लिए आवश्यक प्रमाण पत्र नहीं दिया. उन्होंने विधेयक के लाभों पर प्रकाश डालते हुए समय पर वेतन भुगतान, औद्योगीकरण को बढ़ावा देने वाले प्रावधान और न्यूनतम वेतन की गारंटी का उल्लेख किया.’
- लोकसभा में केंद्रीय श्रम मंत्री मनसुख मंडाविया की ओर से पेश औद्योगिक संबंध संहिता (संशोधन) विधेयक, 2026 पर चर्चा जारी है. वहीं, केंद्रीय बजट 2026-27 पर राज्यसभा में चल रही सामान्य चर्चा का जवाब थोड़ी देर में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण देंगी.
- संसद का विवाद केवल सदस्यता तक सीमित नहीं है. बीजेपी सांसद संजय जायसवाल ने लोकसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर राहुल गांधी के भाषण से ‘आपत्तिजनक’ शब्दों को हटाने की मांग की है. जायसवाल के मुताबिक, बजट चर्चा के दौरान राहुल गांधी ने ‘आपने भारत माता को बेच दिया’ और ‘यूएस ट्रेड डील शर्मनाक है’ जैसे शब्दों का प्रयोग किया. उन्होंने नियम 380 का हवाला देते हुए कहा कि ये शब्द असंसदीय हैं और बिना किसी प्रमाण के लगाए गए हैं. जायसवाल का तर्क है कि यदि इन शब्दों को रिकॉर्ड से नहीं हटाया गया, तो ये संसदीय इतिहास का हिस्सा बन जाएंगे, जो लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं है.
- संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने एक सनसनीखेज आरोप लगाते हुए कहा कि कांग्रेस के 20-25 सांसद जबरन स्पीकर ओम बिरला के चैंबर में घुस गए. रिजिजू के अनुसार, वहां प्रियंका गांधी वाड्रा और केसी वेणुगोपाल की मौजूदगी में सांसदों ने न केवल अपशब्द कहे, बल्कि प्रधानमंत्री को लेकर धमकी भी दी. रिजिजू ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर करते हुए इसे ‘गैर-कानूनी रिकॉर्डिंग’ बताया और कहा कि कांग्रेस की सोच पूरी तरह बिखर चुकी है. उन्होंने एनडीए सांसदों की सहनशीलता की तारीफ करते हुए कहा कि अगर वे प्रतिक्रिया देते, तो संसद में स्थिति अनियंत्रित हो सकती थी.
लोकसभा में गुरुवार को अमेरिका के साथ हुए व्यापार समझौते (US Trade Deal) को लेकर भी जमकर नारेबाजी हुई. प्रश्नकाल शुरू होते ही विपक्षी सदस्य तख्तियां लेकर आसन के पास पहुंच गए. पीठासीन सभापति कृष्णा प्रसाद तेन्नेटी ने सदस्यों को समझाने की कोशिश की कि महिला सांसदों के सवालों का जवाब देने दिया जाए, लेकिन हंगामा नहीं थमा. नतीजतन, कार्यवाही शुरू होने के मात्र सात मिनट के भीतर ही सदन को स्थगित करना पड़ा.
सदन के शोर-शराबे के बीच राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने एक संवेदनशील मुद्दा उठाया. उन्होंने कार्यस्थलों और आंगनवाड़ी केंद्रों में हो रहे जातिगत भेदभाव पर गहरी चिंता जताई. खरगे ने ओडिशा और मध्य प्रदेश की घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि जाति आधारित भेदभाव संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 17 का सीधा उल्लंघन है. उन्होंने सरकार से इन मामलों की समयबद्ध जांच सुनिश्चित करने का आग्रह किया ताकि दलित और पिछड़ों की गरिमा की रक्षा हो सके.







