2025 के बिहार विधानसभा चुनाव के बाद लगातार कांग्रेस में कलह वाली तस्वीर दिख रही है. पार्टी के छह विधायक ही चुनाव जीते हैं. इस बीच एक बार फिर नेताओं में नाराजगी देखने को मिली है. मंगलवार (03 फरवरी, 2026) को पटना के बोरिंग कैनाल रोड स्थित राधा कृष्ण मैरिज हॉल में कांग्रेस नेता नागेंद्र पासवान विकल की अध्यक्षता में बैठक हुई. इसमें बिहार कांग्रेस को उसकी दुर्दशा से उबारने के लिए भविष्य की रूपरेखा एवं कार्यक्रम तय किया गया.
इस संदर्भ में पूर्व विधायक छत्रपति यादव ने पटना में एक महासम्मेलन का प्रस्ताव दिया. साथ ही साथ उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इसके लिए जिलेवार बैठक करने की जरूरत है. उन्होंने कहा कि बिहार कांग्रेस को बचाने का एक मात्र उपाय है कि हम जिले स्तर पर संगठित हों.
‘जिन लोगों ने टिकट बेचा वो अध्यक्ष पद बेचेंगे’
अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सदस्य आनंद माधव ने कहा कि पहले टिकट बंटवारे में लूट हुई थी, अब संगठन सृजन के नाम पर लूट मचेगी. दलालों की फौज आ चुकी है. उन्होंने कहा कि आलाकमान को यह समझना होगा कि विश्वसनीयता खो देने वाली टीम के नेतृत्व में किया गया कोई भी कार्य सफल नहीं हो सकता है. जिन लोगों ने टिकट बेचा है आज वो अध्यक्ष पद बेचेंगे, इसलिए बिना विलंब के कृष्णा अल्लावरू एवं राजेश राम को हटाना होगा.
बिहार के सभी जिलों का दौरा करेंगे नेता
बैठक में सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि आगामी 17 मार्च को पटना में एक बिहार कांग्रेस बचाओ महासम्मेलन का आयोजन किया जाएगा. उसके पहले 7 फरवरी से ही समर्पित कांग्रेसियों की टीम बिहार के सभी जिलों का दौरा कर वहां बैठक करेगी. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राजकुमार राजन ने कहा कि ना पद की चिंता है और ना चुनाव की, बस चिंता है तो कांग्रेस को बचाने की, इसके लिए जो भी होगा करेंगे.
बिहार कांग्रेस ने अब तक नहीं चुना विधायक दल का नेता
सोमवार (2 फरवरी) देर रात पटना में बिहार कांग्रेस की एक अहम बैठक हुई. इस बैठक में प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम, बिहार प्रभारी कृष्णा अल्लावरु रूस के साथ कांग्रेस के सभी 6 विधायक मौजूद रहे. बैठक का मुख्य एजेंडा विधायक दल के नेता और उपनेता का चयन था, लेकिन लंबी चर्चा के बावजूद इस पर कोई सहमति नहीं बन सकी.
बैठक में यह साफ हो गया कि विधायक दल के नेता को लेकर विधायकों के बीच राय एक जैसी नहीं है. इसी वजह से पार्टी कोई भी फैसला लेने से पीछे हटती नजर आई. पार्टी नेतृत्व इस बात से वाकिफ है कि अगर बिना सहमति के नाम घोषित किया गया तो अंदरूनी नाराजगी खुलकर सामने आ सकती है, जो आगे चलकर टूट का कारण भी बन सकती है.
चुनाव नतीजों के ढाई महीने बाद भी फैसला नहीं
बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजे आए हुए ढाई महीने से ज्यादा वक्त हो चुका है, लेकिन अब तक कांग्रेस विधायक दल का नेता और उपनेता तय नहीं हो पाया है. यह स्थिति खुद पार्टी के लिए भी असहज मानी जा रही है, खासकर तब जब विधानसभा का बजट सत्र शुरू हो चुका है.
सूत्रों के मुताबिक पार्टी इस मसले पर जल्द ही एक और बैठक बुला सकती है. कोशिश यही है कि सभी विधायकों की सहमति से ही नेतृत्व तय हो, ताकि भविष्य में कोई असंतोष न उभरे. पार्टी नेतृत्व फिलहाल हर कदम बेहद संभलकर उठाना चाह रहा है.
टूट की अटकलों के बीच हुई बैठक
बैठक ऐसे समय पर हुई है जब कांग्रेस में टूट की अटकलें लगातार तेज हैं. बीते कुछ दिनों से पटना स्थित कांग्रेस दफ्तर में प्रदेश अध्यक्ष द्वारा बुलाई गई बैठकों में विधायक नहीं पहुंच रहे थे. इसी बीच NDA की ओर से दावा किया जा रहा है कि कांग्रेस के सभी 6 विधायक पाला बदलकर उनके साथ जा सकते हैं.
बिहार में कांग्रेस के कुल 6 विधायक हैं, मनोहर प्रसाद सिंह (मनिहारी), सुरेंद्र प्रसाद (वाल्मीकिनगर), आबिदुर रहमान (अररिया), अभिषेक रंजन (चनपटिया), मो. कमरूल होदा (किशनगंज) और मनोज विश्वास (फारबिसगंज). बताया जाता है कि 23 जनवरी को कांग्रेस की टॉप लीडरशिप ने इन विधायकों से दिल्ली में भी मुलाकात की थी, ताकि किसी तरह टूट को रोका जा सके.
अब जबकि बिहार विधानमंडल का बजट सत्र शुरू हो चुका है, सियासी गलियारों में सवाल उठने लगे हैं, क्या सत्र के दौरान कोई बड़ा राजनीतिक ‘खेला’ हो सकता है? क्या कांग्रेस के विधायक सच में पाला बदलेंगे या पार्टी अंदरूनी सहमति बनाकर संकट टाल लेगी? फिलहाल जवाब भविष्य की बैठकों और फैसलों पर टिका है.







