पटना के श्रीकृष्ण मेमोरियल हॉल में सोमवार को दिवंगत सुशील कुमार मोदी की जयंती के अवसर पर विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया. जयंती समारोह में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सुशील मोदी की तस्वीर पर पुष्प अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी और उनके साथ बिताए राजनीतिक सफर को याद किया. इस दौरान दिवंगत भाजपा नेता सुशील कुमार मोदी की पत्नी जेसी मोदी ने अपनी भावनाओं को शेयर किया. जेसी मोदी ने अपने भावुक संबोधन में सुशील मोदी के राजनीतिक जीवन, कार्यशैली और नीतीश कुमार के एनडीए में लौटने से जुड़े एक अहम किस्से को साझा किया. उन्होंने कहा कि वह नेताओं की तरह भाषण नहीं दे सकतीं, लेकिन सुशील मोदी के जीवन में क्या सबसे ज्यादा मायने रखता था, यह जरूर बताना चाहेंगी.
जेसी मोदी ने कहा कि सुशील मोदी के हर कार्य में कार्यकर्ता सबसे ऊपर होते थे. पार्टी हो या सरकार, वह हमेशा यही सोचते थे कि संगठन कैसे मजबूत हो और भाजपा कैसे आगे बढ़े. उन्होंने बताया कि सुशील मोदी किसी से भी मिलते थे, उसकी बात ध्यान से सुनते थे और जरूरी बातों को तुरंत नोट कर लेते थे. उनकी यही आदत उन्हें दूसरों से अलग बनाती थी. उन्होंने यह भी बताया कि सुशील मोदी के साथ काम करने वाले असिस्टेंट तक बैठते नहीं थे. पूरी टीम 24 घंटे काम में लगी रहती थी. पार्टी और जनहित के कामों के प्रति उनका समर्पण इतना गहरा था कि वे खुद भी आराम को तरजीह नहीं देते थे.
जेसी मोदी ने नीतीश कुमार से जुड़े एक अहम राजनीतिक दौर को याद करते हुए कहा कि जब नीतीश कुमार एनडीए छोड़कर दूसरे गठबंधन में चले गए थे, तब सुशील मोदी ने और ज्यादा सक्रिय होकर काम करना शुरू कर दिया था. उस समय वे सरकार की नीतियों और फैसलों को लगातार जनता के सामने लाते थे और तथ्यों के साथ सरकार को एक्सपोज करते थे. उन्होंने कहा कि हालात ऐसे बने कि राजनीतिक दबाव और परिस्थितियों के चलते नीतीश कुमार को दोबारा भाजपा और एनडीए के साथ आना पड़ा. जेसी मोदी के मुताबिक, उस पूरे दौर में सुशील मोदी की भूमिका बेहद अहम रही, लेकिन उन्होंने कभी इसका श्रेय खुद नहीं लिया. बता दें, बिहार में नीतीश कुमार और सुशील कुमार मोदी (Sushil Kumar Modi) की जोड़ी ने लंबे समय तक साथ में मिलकर सरकार चलाई है.
भावुक जेसी मोदी ने की यह अपील
अपने संबोधन के अंत में जेसी मोदी भावुक हो गईं. उन्होंने कहा, “सुशील मोदी अब हमारे बीच नहीं हैं, वे बहुत जल्दी चले गए. आप सब से मेरी यही अपील है कि उनके अच्छे कामों, उनकी ईमानदारी और पार्टी के लिए किए गए संघर्ष को हमेशा याद रखें.” वहीं स्वर्गीय सुशील कुमार मोदी की जयंती समारोह में विधानसभा अध्यक्ष नंद किशोर यादव ने उन्हें याद करते हुए कहा कि सुशील मोदी ने संगठन कौशल और वित्तीय प्रबंधन की जो स्पष्ट रेखा खींची है, उसे आगे बढ़ाना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है.
नंदकिशोर यादव ने भी शेयर की अपनी भावनाएं
नंदकिशोर यादव ने कहा कि सुशील मोदी न केवल एक कुशल संगठनकर्ता थे, बल्कि वित्तीय मामलों में उनकी समझ और पारदर्शिता की सोच पार्टी और सरकार दोनों के लिए मार्गदर्शक रही. नंद किशोर यादव ने कहा कि सुशील मोदी हर परिस्थिति में अपनी विचारधारा पर अडिग रहे और कभी भी सिद्धांतों से समझौता नहीं किया. उन्होंने कार्यकर्ताओं से अपील की कि सुशील मोदी के बताए रास्ते पर चलकर संगठन को और मजबूत करें.







