राजद नेता तेजस्वी यादव यूरोप में छुट्टी मनाकर लौट आए हैं। इस सप्ताह से वो एक्टिव होंगे। प्रदेश अध्यक्ष और सीनियर नेताओं के साथ आगे की रणनीति तय करेंगे। 50 जिला अध्यक्षों और 265 प्रखंड अध्यक्षों की नियुक्ति करेंगे। तेजस्वी संगठन में बड़े बदलाव कर सकते हैं। राजद के प्रदेश अध्यक्ष मंगनी लाल मंडल को बदला जा सकता है। मकर संक्रांति के बाद वह यात्रा पर निकलने वाले हैं। राजद ने भीतरघातियों की पहचान कर ली है, अब बारी कार्रवाई की है। सामने बड़ा टारगेट पंचायत चुनाव है।
यूरोप से लौटे तेजस्वी, अब आगे क्या होगा?
तेजस्वी यादव छुट्टी मनाकर यूरोप से लौट आए हैं। जल्द पटना में प्रदेश अध्यक्ष और पार्टी के सीनियर नेताओं के साथ बैठक करने वाले हैं। इसमें आने वाले दिनों में पार्टी के लिए रणनीति तय होगी। समीक्षा बैठक की जानी है।
अब तक हुई जिला और प्रमंडल स्तरीय बैठकों में विधानसभा चुनाव में जिला-प्रखंड कमेटियों के सक्रिय नहीं होने और चुनाव में संगठन की जगह बाहरी एजेंसियों पर आश्रित होना हार का बड़ा कारण बताया गया है। तेजस्वी यादव के नेतृत्व में होने वाली बैठक में संगठन को मजबूत करने की रणनीति बनेगी। सितंबर 2025 में मंगनी लाल मंडल प्रदेश अध्यक्ष बने थे। विधानसभा चुनाव सिर पर देखते हुए प्रदेश और जिला कमेटियां नहीं बन पाईं। प्रखंड अध्यक्ष भी आधे प्रखंड में ही बनाए जा सके। तेजस्वी इस कमियों को जल्द दूर करेंगे।
315 नए पदाधिकारियों की नियुक्ति करेंगे
तेजस्वी नए 50 जिलाध्यक्षों और करीब 265 प्रखंड अध्यक्षों की नियुक्ति करेंगे। यह काम 1 महीने में किया जाना है। 14 जनवरी को मकर संक्रांति पर राबड़ी आवास 10 सर्कुलर रोड में ‘चूड़ा दही’ भोज का आयोजन किया जाए या नहीं, इस पर फैसला लेंगे।
मकर संक्रांति के दिन लालू-राबड़ी आवास पर पूरे प्रदेश से राजद के नेता-कार्यकर्ता जुटते हैं। लालू प्रसाद अभी आंख के ऑपरेशन के बाद दिल्ली में स्वास्थ्य लाभ ले रहे हैं। मकर संक्रांति पर उनके पटना लौटने की संभावना है। उनकी बड़ी बेटी डॉ. मीसा भारती भी पटना आएंगी।
बदले जा सकते हैं प्रदेश अध्यक्ष
राजद के वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष मंगनी लाल मंडल को बदला जा सकता है। विधानसभा चुनाव से पहले मंगनी लाल को बड़ी जिम्मेदारी दी गई थी। उम्मीद थी कि वह OBC समाज के गैर यादव वोट बैंक को राजद की ओर आकर्षित करेंगे। हालांकि चुनाव परिणाम में ऐसा कुछ नहीं दिखा। मंगनी लाल उम्रदराज हैं। उनके प्रदेश अध्यक्ष रहने के दौरान कई राजद नेताओं में अनुशासन की कमी देखी गई। टिकट नहीं मिलने पर बागी बन गए। कई राजद नेताओं का कहना है कि वे पूर्व अध्यक्ष जगदानंद की तरह पार्टी चला नहीं पाए।
भीतरघातियों की पहचान हुई, अब होगी कार्रवाई
राजद में कई स्तर पर 400 से अधिक भीतरघातियों की पहचान की गई है। इसके लिए पार्टी ने पंचायत स्तर के कार्यकर्ताओं से लेकर प्रखंड और जिला स्तर के नेताओं से फीड बैक मंगवाया। जिला अध्यक्षों, जिला प्रभारियों से रिपोर्ट ली। इस बात की जांच हो रही है कि किन नेताओं ने पार्टी को नुकसान पहुंचाया। राजद सूत्रों के अनुसार तेजस्वी पार्टी के खिलाफ काम करने वाले नेताओं-कार्यकर्ताओं को बाहर निकालेंगे।
मकर संक्रांति के बाद यात्रा पर निकलेंगे तेजस्वी
तेजस्वी यादव मकर संक्रांति के बाद बिहार में यात्रा पर निकलेंगे। अभी ठंड अधिक है। यात्रा की तारीख मौसम की स्थिति को देखते हुए तय किए जाने पर विचार चल रहा है। तेजस्वी यात्रा पर निकलेंगे और जनता को बताएंगे कि कैसे अदृश्य शक्ति ने चुनाव हरा दिया। वह पहले भी चुनाव हारने के लिए अदृश्य शक्ति को जिम्मेदार बता चुके हैं। 2020 में जब तेजस्वी यादव सरकार नहीं बना पाए थे, तब धन्यवाद यात्रा की थी। इस बार भी तेजस्वी यादव के सामने संघर्ष का ही रास्ता है। वरिष्ठ नेता शिवानंद तिवारी ने तेजस्वी के विदेश जाने पर नसीहत दी थी कि उन्हें संघर्ष करना चाहिए। जनता के बीच जाना चाहिए।
तेजस्वी का अगला टारगेट पंचायत चुनाव
इसी साल बिहार में पंचायत चुनाव होने हैं। यहां पंचायत चुनाव दलीय आधार पर नहीं होते, लेकिन पार्टियों की कोशिश अपने कैडर को जिताना है। निचले स्तर पर आरजेडी को मजबूत करने के लिए पंचायत चुनाव तेजस्वी यादव का अगला टारगेट है। केंद्र और राज्य में एनडीए की सरकार है। बीजेपी चाहती है कि पंचायत चुनाव में अधिक से अधिक उसके कार्यकर्ताओं की जीत हो। तेजस्वी पंचायत चुनाव में ताकत नहीं दिखा पाते हैं तो उनके लिए प्रदेश की राजनीति और कठिन हो जाएगी। राज्य में 8000 से अधिक पंचायतें हैं। छह पदों (मुखिया, वार्ड सदस्य, सरपंच, पंच, पंचायत समिति सदस्य और जिला परिषद सदस्य) के लिए चुनाव होंगे।
चुनाव हारने के बाद राजद में अब तक क्या हुआ?
विधानसभा चुनाव में जहां NDA ने 202 सीटें (कुल सीट 243) जीत ली। वहीं, महागठबंधन 35 से आगे नहीं बढ़ सका। राजद को सिर्फ 25 सीट मिले। रिजल्ट आने के बाद तेजस्वी यादव ने हार पर मंथन के लिए विधायकों, सांसदों और उम्मीदवारों की बैठक बुलाई थी। बैठक में बनी रणनीति के अनुसार प्रदेश अध्यक्ष मंगनी लाल मंडल ने निचले स्तर से जानकारी जुटाकर 400 से अधिक भीतरघातियों की पहचान की।
बगावत करने वालों को हटाया
राजद ने बागी प्रत्याशी बनकर चुनाव लड़ने वालों को हटाया है। परिहार से राजद ने रितु जायसवाल की जगह रामचंद्र पूर्वे की बहू स्मिता पूर्वे को टिकट दिया। रितु ने बगावत कर दी। निर्दलीय चुनाव लड़ी। पार्टी ने रितु जायसवाल सहित परिहार प्रखंड के युवा अध्यक्ष अजहरूल हैदरी, प्रखंड अध्यक्ष कैलाश यादव, राज्य परिषद सदस्य अशफान आलम अंसारी और सोनबरसा प्रखंड अध्यक्ष अनिल कुमार चक्रेश को 6 साल के लिए बाहर कर दिया।
बिहार में एजेंडा की कमी नहीं, तेजस्वी नई ऊर्जा के साथ लौटेंगे
‘तेजस्वी रिचार्ज होकर नई ऊर्जा के साथ लौटेंगे। उनके पास नया प्लान होगा। तेजस्वी मैदान नहीं छोडे़ंगे। लालू यादव भी चुनाव हारे थे, फिर वापस आए। नीतीश कुमार भी हारे थे, फिर लौटे। राजनीति में हार-जीत होती रहती है।’
अपने आलसीपन से तेजस्वी फेल हुए तो मुश्किल में पड़ेंगे
लोगों को वेतन-पेंशन समय पर नहीं मिल पा रहा है। अपराध बेकाबू है। अतिक्रमण के नाम पर घर तोड़े जा रहे हैं। बड़े माफिया अब तक बचे हुए हैं। तेजस्वी चाहें तो कई मुद्दों पर आंदोलन खड़ा कर सकते हैं।’







