बिहार में बीजेपी की परंपरागत सीट रही बांकीपुर विधानसभा सीट के लिए उपचुनाव का ऐलान हो चुका है। इस सीट के लिए बीजेपी, आरजेडी और तेज प्रताप यादव के जनशक्ति जनता दल के साथ जन सुराज ने भी ताल ठोका है। चुनाव से पहले ही दावों प्रतिदावों का खेल जारी है। यहाँ से बीजेपी 30 साल से नहीं हारी है। यह नितिन नवीन का गृह क्षेत्र है। उनके इस्तीफे के बाद सीट खाली हुई है।
अब बीजेपी यहां से नितिन नवीन के करीबी को उतारने की तैयारी में है। भाजपा अध्यक्ष के पिता स्व. नवीन किशोर प्रसाद सिन्हा के पुराने सहयोगी नील रतन घोष का नाम लगभग फाइनल है। नील रतन घोष कायस्थ समाज से आते हैं। बांकीपुर में करीबी 70 हजार वोटर इसी जाति से हैं।
इधर, जन सुराज पार्टी के सूत्रधार प्रशांत किशोर ने उपचुनाव लड़ने की घोषणा कर बांकीपुर विधानसभा पर होने वाली लड़ाई को रोचक बना दिया है। पीके ने कहा था, ‘जन सुराज ने पहले ही घोषणा कर रखी है कि बांकीपुर में भाजपा को हराना है। अगर मेरे चुनाव लड़ने से भाजपा बांकीपुर जैसी मजबूत सीट हारती है तो मैं चुनाव लड़ने के लिए तैयार हूं।’ विधानसभा चुनाव 2025 में प्रशांत किशोर ने तेजस्वी यादव की सीट राघोपुर से चुनाव लड़ने का ऐलान किया था, लेकिन बाद में हट गए थे। नहीं लड़े। इसकी खूब किरकिर हुई। अब बांकीपुर से चुनाव लड़कर प्रशांत किशोर लोगों को मैसेज देंगे कि पार्टी प्रयोग के दौर से बाहर निकल गई है। बिहार छोड़कर भागे नहीं हैं। प्रशांत किशोर मजबूत फाइट देते हैं या जीतते हैं तो यह साबित होगा कि जन सुराज सिर्फ कागजी या डिजिटल पार्टी नहीं है, बल्कि जमीन पर टिकने वाली राजनीतिक ताकत है। PK पर अक्सर आरोप लगता है कि वे सिर्फ बैकस्टेज रणनीतिकार हैं और खुद चुनावी राजनीति से बचते हैं। खुद चुनाव लड़कर वे इस छवि को तोड़ेंगे और जनता के बीच अपनी गंभीरता साबित करेंगे।
इधर बिहार बीजेपी के वरिष्ठ नेता और मंत्री डॉ. दिलीप जायसवाल ने मीडिया से बातचीत में इस सीट के रिजल्ट को लेकर दावा किया है। दिलीप जायसवाल के दावे के बाद हलचल शुरू हो गई है। सियासी जानकारों की मानें, तो बीजेपी के दावे को माने लें, तो फिर पीके और तेजस्वी के लिए कोई जगह नहीं बचती।
बांकीपुर विधानसभा सीट को लेकर सियासी हलचल
बीजेपी नेता डॉ. दिलीप जायसवाल ने कहा कि राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन बांकीपुर विधानसभा से बहुत लोकप्रिय विधायक रहे, लगातार उन्होंने उस क्षेत्र में विकास का काम किया है। बांकीपुर की जनता नितिन नवीन को प्यार करती है और उसको भाजपा से भी प्यार है। आज बिहार में भाजपा-एनडीए की सरकार है। केंद्र में नरेंद्र मोदी की सरकार है। विकसित पटना और विकसित बांकीपुर के लिए जो भी उम्मीदवार होंगे उनका भाजपा को समर्थन मिलेगा।
बांकीपुर विधानसभा सीट का इतिहास
| बांकीपुर विधानसभा सीट 2008 में हुए परिसीमन के बाद अस्तित्व में आई। इसे पहले पटना पश्चिम विधानसभा सीट के नाम से जाना जाता था। |
| इस सीट पर कायस्थ जाति का बड़ा वर्चस्व माना जाता है। यहां से लगातार बीजेपी को जीत मिलते आई है। फिलहाल, ये सीट खाली है। |
| 2005 तक इस सीट से दिग्गज बीजेपी नेता नवीन किशोर सिन्हा यहां से लगातार जीतते रहे हैं। उनके निधन के बाद 2006 में नितिन नवीन विधायक बने। |
| 2006 से लेकर 2025 तक नितिन नवीन इस सीट से लगातार विधायक बने। 2020 में इन्होंने कांग्रेस के लव सिन्हा को भारी मतों से हराया। |
| नितिन नवीन के राज्यसभा के लिए चुने जाने की वजह से ये सीट खाली हुई है। इस सीट पर 30 जुलाई को वोट डाले जाएंगे। |
बिहार बीजेपी ने किया बांकीपुर सीट जीत का दावा
प्रशांत किशोर को लेकर दिलीप जायसवालने कहा कि कौन खड़ा होगा, इससे हम लोगों को कोई मतलब नहीं है। बांकीपुर भाजपा का गढ़ है और वहां के लोग भाजपा को समर्थन देंगे। उधर, प्रशांत किशोर की ओर से बांकीपुर उपचुनाव के लिए लगातार कैंपेनिंग की जा रही है। जन संपर्क अभियान चलाया जा रहा है। प्रशांत किशोर ने खुद ही कमान थाम ली है। चर्चा है कि पीके इस सीट से खुद उम्मीदवार हो सकते हैं। इस आशय की जानकारी जन सुराज के नेता किशोर कुमार मु्न्ना ने दी है।
बांकीपुर विधानसभा सीट चुनाव की जानकारी
| चुनाव प्रकिया की शुरुआत 6 जुलाई, 2026 सोमवार राजपत्र अधिसूचना जारी होने के साथ होगी। |
| नामांकन पत्र दाखिल करने की अंतिम तिथि- 13 जुलाई, 2026 तक। |
| नामांकन पत्रों की जांच- 14 जुलाई, 2026 तक। |
| उम्मीदवार अपना नामांकन वापस ले सकेंगे- 16 जुलाई, 2026 तक। |
| वोटिंग की तारीख- 30 जुलाई, 2026 |
| मतों की गणना- 3 अगस्त, 2026 |
बांकीपुर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ेंगे पीके
ध्यान रहे कि 02 अक्टूबर, 2024 को जन सुराज के गठन के बाद से प्रशांत किशोर बिहार की राजनीति में सक्रियता के साथ एक्टिव हैं। प्रशांत किशोर ने दावा भी किया है कि वे बीजेपी के इस परंपरागत सीट को इस बार जीत कर रहेंगे। उधर, तेजस्वी यादव विदेश दौरे पर जाने वाले हैं। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक महागठबंधन इस सीट को लेकर कोई खास सीरियस नहीं है। तेजस्वी यादव ने इस सीट के लिए किसी प्रकार की कोई तैयारी करना और बयान देना उचित नहीं समझा है। उनके पास महिला विकास मंच की वीणा मानवी टिकट के लिए गईं थीं, लेकिन तेजस्वी यादव ने टिकट नहीं दिया।
तेज प्रताप यादव की पार्टी भी चुनाव के लिए तैयार
बांकीपुर विधानसभा सीट के लिए तेज प्रताप यादवकी पार्टी जनशक्ति जनता दल ने वीणा मानवी को अपना उम्मीदवार बनाया है। वीणा मानवी महिला विकास मंच का नेतृत्व करती हैं। उनकी सियासत भी पटना बेस है। कहा जा रहा है कि वीणा मानवी के मैदान में आने से मुकाबला दिलचस्प हो जाएगा। उधर, बीजेपी ने रिजल्ट को लेकर पहले ही दावा कर दिया है कि जनता बीजेपी का साथ देगी और इस सीट से बीजेपी उम्मीदवार ही विजयी होंगे। कुल मिलाकर बांकीपुर उपचुनाव को लेकर सियासी गलियारों में हलचल तेज है।
BJP के गढ़ में सेंध लगाकर तीसरा विकल्प बनना मुख्य मकशद है ………….
बांकीपुर BJP का मजबूत किला है। 1995 से यहां भाजपा चुनाव नहीं हारी है। यहां जीत या अच्छा मुकाबला प्रशांत किशोर को BJP-विरोधी तीसरा विकल्प के रूप में स्थापित करेगा।
- प्रशांत किशोर जानते हैं कि अगर वे RJD या JDU के गढ़ में लड़ेंगे तो उन्हें सीधे जातिगत अभेद्य दीवारों (जैसे यादव या कुर्मी-कोइरी ब्लॉक) का सामना करना पड़ेगा, जिसे तोड़ना अभी मुश्किल है।
- बांकीपुर में BJP का वोटर ‘मोदी लहर’ और ‘राष्ट्रवाद’ के कारण बंधा है। यदि वह वोटर स्थानीय स्तर पर BJP से थोड़ा भी नाराज होगा तो वह RJD को वोट देने की बजाय प्रशांत किशोर जैसे एक पढ़े-लिखे विकल्प को चुनना पसंद कर सकता है।
- महागठबंधन (RJD-कांग्रेस) बांकीपुर में खुद को बेहद कमजोर स्थिति में पाता है। ऐसी स्थिति में भाजपा को हराने के लिए विपक्ष अंदरूनी तौर पर प्रशांत किशोर को वॉकओवर दे सकता है या अपने कैडर वोटर (अल्पसंख्यक और यादव मतदाता, जो करीब 60,000 हैं) को PK की तरफ शिफ्ट करवा सकता है।
बांकीपुर का जातीय समीकरण क्या है?
पटना की बांकीपुर विधानसभा सीट को बिहार की सबसे हाई-प्रोफाइल और ‘VIP’ शहरी सीटों में गिना जाता है। चुनाव आयोग के मुताबिक, इस विधानसभा सीट पर कुल मतदाताओं की संख्या 3,79,420 है।
आधिकारिक चुनावी विश्लेषणों और मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक…
- कायस्थ वोटर (सबसे निर्णायक): इसे पारंपरिक रूप से कायस्थ बहुल सीट माना जाता है। इस समाज के वोटरों की संख्या सबसे अधिक करीब 70,000 है। इसी कारण बीजेपी 1995 से यहां इसी समाज के उम्मीदवार (पहले नवीन किशोर सिन्हा और बाद में उनके बेटे नितिन नवीन) को उतारती आई है। और जीतती आई है।
- भूमिहार, ब्राह्मण, राजपूत: कायस्थों के अलावा यहां भूमिहार, ब्राह्मण और राजपूत मतदाताओं की भी बड़ी आबादी है। कुल मिलाकर फॉरवर्ड मतदाता यहां की राजनीति की दिशा तय करते हैं।
- यादव और OBC: कुछ पॉश सोसाइटियों और वार्डों में यादव, वैश्य और कुर्मी मतदाताओं की भी अच्छी-खासी संख्या है। स्थानीय विश्लेषकों के मुताबिक, कायस्थों के बाद संख्या बल में यादव समाज अहम भूमिका निभाता है।
- मुस्लिम मतदाता: इस सीट पर मुस्लिम मतदाताओं की संख्या करीब 30 हजार से अधिक है।
- अनुसूचित जाति (SC): दलित और महादलित मतदाताओं की संख्या करीब 31 हजार के आसपास है।
यहां भाजपा के पक्ष में समीकरण मजबूत क्यों…
शहरी और कोर वोट बैंक का मेल: यह पूरी तरह से पटना नगर निगम के शहरी वार्डों (जैसे वार्ड 4, 5, 7 से 13 और 15) के अंतर्गत आने वाली सीट है। यहां के मतदाता देश के समसामयिक मुद्दों, पीएम नरेंद्र मोदी के चेहरे और हिंदुत्व/राष्ट्रवाद की राजनीति से अत्यधिक प्रभावित रहते हैं।
सवर्णों का एकतरफा झुकाव: कायस्थ, भूमिहार, ब्राह्मण और वैश्य (व्यापारी वर्ग) का सामूहिक वोट बैंक बीजेपी के पक्ष में एकतरफा लामबंद रहता है। यही वजह है कि विपक्षी पार्टियां (RJD या कांग्रेस) यहां सोशल इंजीनियरिंग (M-Y समीकरण) के सहारे भी कभी मुख्य लड़ाई में नहीं आ पातीं।







