पश्चिम बंगाल में जब चुनाव आयोग ने मतदाता सूची के गहन पुनरीक्षण का काम शुरू किया था तो राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने धमकी दी थी कि यह बंगाल है बिहार नहीं। राज्य में SIR यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन के पहले चरण के आंकड़े सामने आ गए हैं। इसके अनुसार राज्य में 58 लाख से अधिक वोटर्स के नाम काटे गए हैं। खुद ममता बनर्जी की अपनी सीट भवानीपुर में 44 हजार नाम डिलीट किए गए हैं। बिहार में SIR की प्रक्रिया के मतदाता सूची से कुल 47 लाख नाम डिलीट किए गए थे। ममता बनर्जी जब बार-बार यह कह रही हैं कि यह बंगाल है बिहार नहीं। तब डिलीट हुए नामों का आंकड़ा बिहार से काफी ज्यादा है। अभी इस आंकड़े में और बढ़ोतरी होने की उम्मीद जताई जा रही है। चुनाव आयोग का दावा है कि पश्चिम बंगाल में नाम हटाने से पहले 31.39 लाख से अधिक मतदाताओं से फेस टू फेस सुनवाई भी गई।
टॉप-5 विधानसभा क्षेत्र: जहां सबसे ज्यादा कम हुए वोट
| क्र. सं. | विधानसभा क्षेत्र | कितने वोट कम हुए | किस पार्टी के पास है सीट | विधायक |
| 1 | चौरंगी | 74,553 | तृणमूल कांग्रेस | नयना बंधोपाध्याय |
| 2 | बालीगंज | 65,171 | तृणमूल कांग्रेस | बाबुल सुप्रियो |
| 3 | कोलकाता पोर्ट | 63,730 | तृणमूल कांग्रेस | फिरहाद हकीम |
| 4 | भवानीपुर | 44,787 | तृणमूल कांग्रेस | ममता बनर्जी |
| 5 | श्यामपुर | 42,303 | तृणमूल कांग्रेस | कालीदास मंडल |
7.6 फीसदी वोटर हुए कम
चुनाव आयोग ने स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन के तहत 58 लाख नाम काटे हैं। यह बंगाल के कुल मतदताओं का 7.6 फीसद है। बंगाल में एसआईआर के बाद ड्राफ्ट वोटर लिस्ट का 16 दिसंबर को जारी होगी। बंगाल में 7.66 करोड़ कुल मतदाता हैं। ऐसा सामने आया है कि बांग्लादेश से लगी सीमा वाले जिलों में काफी बड़ी तादाद में वोट कम हुए हैं। पश्चिम बंगाल की अगर मोटे तौर पर तुलना करें तो दोनों राज्यों की विधानसभा सीटों में काफी बड़ा अंतर है। बिहार में विधानसभा की कुल सीटें की संख्या 243 और बंगाल में 294 सीटें हैं। लोकसभा सीटों में बिहार के पास 40 और बंगाल के पास 42 हैं। राज्य की विधानसभा में बहुमत का आंकड़ा 148 विधायकों का है। बंगाल में बिहार की तुलना में 11 लाख अधिक वोट कम हुए हैं।
नाम काटने के पीछे के कारण
चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि हटाए गए नामों को मौत, स्थान परिवर्तन, पता न मिलना और डुप्लीकेट एंट्री जैसी मानक श्रेणियों में रखा गया है और पूरी प्रक्रिया में राज्यभर में समान मानदंड अपनाए गए। चुनाव आयोग मंगलवार को ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी करेगा, जिसके बाद आपत्तियों और दावों की प्रक्रिया शुरू होगी। इन आंकड़ों पर प्रतिक्रिया देते हुए तृणमूल कांग्रेस के प्रवक्ता कृषाणु मित्रा ने कहा कि पार्टी डेटा की गहन समीक्षा करेगी। उन्होंने कहा कि यदि मृत या स्थानांतरित हो चुके मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं तो इसमें कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन यदि किसी वास्तविक मतदाता का नाम गलत तरीके से हटाया गया तो पार्टी लोकतांत्रिक तरीके से इसका विरोध करेगी।







