प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के वार्षिक शिखर सम्मेलन में कहा कि पहलगाम में हुआ भयावह आतंकवादी हमला न केवल भारत के लिए एक झटका है, बल्कि मानवता में विश्वास रखने वाले हर देश के लिए एक खुली चुनौती है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मौजूदगी में पीएम मोदी ने यह भी कहा कि एससीओ को आतंकवाद पर दोहरे मानदंडों को स्पष्ट रूप से और सर्वसम्मति से खारिज करना चाहिए।
उन्होंने कहा, ‘यह मानवता के प्रति हमारा कर्तव्य है।’ पाकिस्तान का नाम लिए बिना पीएम मोदी ने कहा कि यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या कुछ देशों की ओर से आतंकवाद का खुला समर्थन हमें स्वीकार्य हो सकता है?’ प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत पिछले चार दशकों से आतंकवाद का दंश झेल रहा है। कई माताओं ने अपने बच्चों को खो दिया और कई बच्चे अनाथ हो गए। हाल ही में हमने पहलगाम में आतंकवाद का एक बेहद घिनौना रूप देखा।
एससीओ के संयुक्त घोषणापत्र में पहलगाम आतंकी हमले का जिक्र
चीन की तियानजिन में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के सदस्य देशों के संयुक्त घोषणापत्र में पहलगाम आतंकवादी हमले की निंदा की गई। घोषणा में कहा गया है, ‘सदस्य देशों ने 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले की कड़ी निंदा की। उन्होंने मृतकों और घायलों के परिवारों के प्रति गहरी संवेदना और सहानुभूति प्रकट की। साथ ही, उन्होंने कहा कि ऐसे हमलों के दोषियों, योजनाकारों और मददगारों को न्याय के कटघरे में लाया जाना चाहिए।’
शंघाई सहयोग संगठन के सदस्य देशों ने 22 अप्रैल, 2025 को पहलगाम में हुए आतंकी हमले की कड़ी निंदा की है. उन्होंने हमले में मारे गए लोगों और घायलों के परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की और जोर देकर कहा कि हमले के दोषियों, योजनाकारों और प्रायोजकों को न्याय के कटघरे में लाया जाना चाहिए.
भारत की बड़ी कूटनीतिक जीत
सदस्य देशों ने आतंकवाद, अलगाववाद और उग्रवाद के खिलाफ अपने दृढ़ संकल्प को दोहराया और कहा कि इन समूहों का उपयोग अपने फायद के लिए किया जाना स्वीकार्य नहीं है. उन्होंने इस बात को भी रेखांकित किया कि आतंकवाद और उग्रवाद से निपटने में संप्रभु देशों और उनकी सक्षम संस्थाओं की भूमिका सबसे ऊपर है. सभी सदस्य देशों ने आतंकवाद के सभी रूपों और अभिव्यक्तियों की स्पष्ट निंदा की और कहा कि आतंक के खिलाफ दोहरे मानदंड अस्वीकार्य हैं. उन्होंने सीमा पार आतंकवाद सहित आतंक के हर रूप के खिलाफ एकजुट होकर लड़ने की अपील की.
भारत के लिए ये बात अहम इसलिए हो जाती है क्योंकि पहलगाम हमले को चीन एससीओ के घोषणा पत्र में शामिल नहीं कर रहा था. जून में हुई रक्षा मंत्रियों की बैठक में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सिर्फ इसी वजह से घोषणा पत्र पर साइन करने से इनकार कर दिया था. ऐसे में सभी देशों का पहलगाम हमले की निंदा करना और आतंकवाद पर एकजुट होना भारत की बड़ी कूटनीतिक जीत की ओर इशारा करता है.
भारत ने जो कहा, SCO ने माना
‘वन अर्थ, वन फैमिली, वन फ्यूचर’ की थीम को SCO घोषणा में समर्थन मिला है, जो भारत के वैश्विक दृष्टिकोण को दर्शाता है. 3 से 5 अप्रैल के बीच नई दिल्ली में हुई 5वीं एससीओ स्टार्टअप फोरम के सफल आयोजन की भी सराहना की गई. SCO थिंक टैंक फोरम की 20वीं बैठक के आयोजन को भी महत्वपूर्ण माना, जिसने विचार-विमर्श को नई दिशा दी. सदस्य देशों ने भारतीय विश्व मामलों की परिषद में स्थित SCO अध्ययन केंद्र की सांस्कृतिक और मानवतावादी सहयोग को मजबूत करने में भूमिका को भी सराहा. इस संयुक्त घोषणा से यह स्पष्ट है कि SCO मंच पर भारत की भूमिका लगातार बढ़ रही है और सदस्य देश भारत के नेतृत्व और योगदान को एक सकारात्मक दिशा में देख रहे हैं.
घोषणापत्र में आतंकवाद के सभी रूपों की निंदा
तियानजिन घोषणा में आगे कहा गया, सदस्य देशों ने आतंकवाद, अलगाववाद और उग्रवाद के खिलाफ अपनी मजबूत प्रतिबद्धता को दोहराया और इस बात पर जोर दिया कि किसी भी तरह से आतंकवादी, अलगाववादी या उग्रवादी समूहों का निजी स्वार्थों के लिए इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। सदस्य देशों ने आतंकवाद के सभी रूपों की कड़ी निंदा की और यह भी कहा कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में दोहरे मापदंड अस्वीकार्य हैं। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की कि वह सीमा पार आतंकवाद सहित सभी रूपों में आतंकवाद से मिलकर लड़ें।
दोहराया गया ‘एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य’ के संदेश
इसमें आगे कहा गया, घोषणा ‘एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य’ के संदेश को दोहराती है। सदस्य देशों ने 3 से 5 अप्रैल 2025 को नई दिल्ली में आयोजित 5वें एससीओ स्टार्टअप मंच के परिणामों का स्वागत किया, जिससे विज्ञान, तकनीकी प्रगति और नवाचार के क्षेत्र में सहयोग और गहरा हुआ है। सदस्य देशों ने 21-22 मई 2025 को नई दिल्ली में हुई 20वीं एससीओ थिंक टैंक मंच की बैठक को भी महत्वपूर्ण बताया। साथ ही, उन्होंने विश्व मामलों की भारतीय परिषद (आईसीडब्ल्यूए) के तहत काम करने वाले एससीओ अध्ययन केंद्र की सराहना की, जिसने सांस्कृतिक और मानवीय आदान-प्रदान को मजबूत किया है।