बिहार के मुजफ्फरपुर में कांग्रेस नेता राहुल गांधी की रैली ने एक बार फिर सियासी तूफान खड़ा कर दिया है। राहुल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला बोलते हुए ऐसी भाषा का इस्तेमाल किया, जिसे बीजेपी ने ‘सड़क छाप’ करार दिया। इस रैली में तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन भी मौजूद थे, जिनके बिहार आने पर बीजेपी और जेडीयू ने बिहारियों के अपमान का मुद्दा उठाकर पलटवार किया। साल के अंत में होने जा रहे विधानसभा चुनावों के नजदीक आने के साथ ही दोनों ही गठबंधनों के नेताओं में बयानबाजी तेज हो गई है।
राहुल गांधी ने पीएम मोदी पर साधा निशाना
राहुल गांधी ने मुजफ्फरपुर की रैली में पीएम मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि वह और गृह मंत्री अमित शाह पिछले 20 साल से चुनाव आयोग की मदद से ‘वोट चोरी’ करके चुनाव जीत रहे हैं। उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया बयान का जिक्र किया, जिसमें ट्रंप ने युद्ध रुकवाने की बात कही थी। राहुल ने गुजरात मॉडल पर भी सवाल उठाए और कहा कि मोदी की लोकप्रियता नहीं, बल्कि ‘चुनावी चालबाजियां’ उनकी जीत का राज हैं।
सीधे EC पर सवाल उठा रहे हैं राहुल
राहुल ने पहले भी ED, CBI और इनकम टैक्स जैसी एजेंसियों पर बीजेपी को जिताने का इल्जाम लगाया था, लेकिन अब वह सीधे चुनाव आयोग पर सवाल उठा रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘मोदी और शाह वोट घटाकर या बढ़ाकर चुनाव जीतते हैं।’ हालांकि, उनका ये दावा कई लोगों को तर्कसंगत नहीं लगा, क्योंकि चुनाव प्रक्रिया में हजारों अधिकारी, शिक्षक और राजनीतिक कार्यकर्ता शामिल होते हैं, जिससे ‘वोट चोरी’ जैसी बात को छिपाना मुश्किल है।
‘राहुल का बयान कांग्रेस का असली DNA’
राहुल के बयानों पर बीजेपी के प्रवक्ता गौरव भाटिया ने कड़ा जवाब दिया। उन्होंने कहा, ‘राहुल गांधी ने जिस तरह पीएम मोदी के लिए शब्दों का इस्तेमाल किया, वही कांग्रेस का असली DNA है। देश की जनता अब समझ चुकी है कि विपक्ष का नेता कितना अपरिपक्व है।’ भाटिया ने ये भी कहा कि राहुल के नेतृत्व में कांग्रेस पिछले 11 साल में 3 बार लोकसभा चुनाव हार चुकी है, लेकिन वह अपनी हार का ठीकरा दूसरों पर फोड़ते हैं। उन्होंने राहुल के ‘वोट चोरी’ के दावे को खारिज करते हुए कहा कि अगर ऐसा होता, तो कांग्रेस कर्नाटक, तेलंगाना और हिमाचल प्रदेश में सरकारें कैसे बनाती और बीजेपी राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के विधानसभा चुनाव कैसे हारती?
स्टालिन के बयान ने बढ़ाया विवाद
रैली में तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने भी चुनाव आयोग पर हमला बोला। उन्होंने बिहार में वोटर लिस्ट के रिवीजन को ‘लोकतंत्र की हत्या’ करार दिया और कहा, ’65 लाख लोगों के नाम वोटर लिस्ट से काटना आतंकवाद से कम नहीं है।’ स्टालिन ने दावा किया कि बीजेपी को लगता है कि वह राहुल गांधी और तेजस्वी यादव को नहीं रोक पाएगी, इसलिए वोटर लिस्ट में हेरफेर की साजिश रची जा रही है।
BJP-JDU नेताओं ने दी तीखी प्रतिक्रिया
स्टालिन के बिहार दौरे पर बीजेपी और जेडीयू ने तीखी प्रतिक्रिया दी। बिहार के डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी ने कहा, ‘जो लोग बिहारियों को गाली देते हैं, उन्हें बिहार बुलाकर राहुल और तेजस्वी बिहारियों के जख्मों पर नमक छिड़क रहे हैं। जनता इसका जवाब जरूर देगी।’ जेडीयू नेता और केंद्रीय मंत्री ललन सिंह ने स्टालिन और तेलंगाना के सीएम रेवंत रेड्डी पर निशाना साधते हुए कहा, ‘हैरानी इस बात की नहीं कि स्टालिन और रेवंत बिहार आए। हैरानी इस बात की है कि बिहारियों का सम्मान करने की बात करने वाले तेजस्वी ने बिहारियों को गाली देने वालों को गले क्यों लगाया?’
स्टालिन और DMK नेताओं के पुराने बयान बने मुद्दा
दरअसल, स्टालिन की पार्टी डीएमके के नेताओं के कुछ पुराने बयानों ने इस विवाद को और हवा दी। डीएमके नेता दयानिधि मारन का एक पुराना वीडियो सामने आया, जिसमें वह कहते हैं कि बिहार और उत्तर प्रदेश के हिंदी भाषी लोग तमिलनाडु में ‘घर बनाते हैं’ और ‘शौचालय साफ करते हैं।’ वहीं, स्टालिन के बेटे उदयनिधि स्टालिन ने सनातन धर्म को डेंगू और मलेरिया से तुलना करते हुए इसे ‘जड़ से मिटाने’ की बात कही थी। इन बयानों को बीजेपी और जेडीयू ने बिहारियों का अपमान बताया।







