बैकुण्ठपुर विधानसभा क्षेत्र, बिहार के गोपालगंज जिले में स्थित एक महत्वपूर्ण विधानसभा सीट है। यह क्षेत्र गोपालगंज लोकसभा (SC) का हिस्सा है और सामान्य (अनारक्षित) वर्ग की सीट है। 2025 के विधानसभा चुनाव में यहां मुकाबला रोचक रहने की संभावना है।
सामान्य जानकारी
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जिला: गोपालगंज
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विधानसभा क्षेत्र संख्या: 99
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लोकसभा क्षेत्र: गोपालगंज (SC)
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प्रमुख पार्टी: RJD, BJP, JDU, कांग्रेस, अन्य
पिछला चुनावी प्रदर्शन (2020)
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विजेता: प्रेम शंकर प्रसाद (राजद – RJD)
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वोट: 67,807
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वोट शेयर: 37.01%
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निकटतम प्रतिद्वंदी: मिथिलेश तिवारी (भाजपा – BJP)
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वोट: 56,694
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वोट शेयर: 30.95%
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जीत का अंतर: 11,113 वोट
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तीसरा स्थान: मंजीत कुमार सिंह (निर्दलीय) – 43,354 वोट (23.67%)
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कुल वोटिंग प्रतिशत: 59% के आसपास
हालिया राजनीतिक समीकरण
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इस सीट पर बीते दो चुनाव में RJD और BJP के बीच मुख्य मुकाबला रहा है।
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2015 में मिथिलेश तिवारी (BJP) ने जीत दर्ज की थी; 2010 में जदयू के मंजीत सिंह ने बड़ी जीत हासिल की थी।
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जातिगत समीकरण में यादव, भूमिहार, ब्राह्मण, कुर्मी, दलित और मुस्लिम वोट निर्णायक भूमिका निभाते हैं।
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स्थानीय स्तर पर विकास, पूल, सड़क व नौजवानों के लिए नौकरी जैसे मुद्दे भी हावी रहते हैं।
प्रमुख उम्मीदवार (संभावित)
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राजद (RJD): प्रेम शंकर प्रसाद (वर्तमान विधायक, दोबारा टिकट का प्रबल दावा)
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भाजपा (BJP): मिथिलेश तिवारी (2015 के विजेता, 2020 उपविजेता, फिर प्रबल दावेदार)
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जदयू/अन्य: पुराने उपविजेता मंजीत सिंह, या अन्य क्षेत्रीय नेता भी दावेदारी में हो सकते हैं
2020 और 2015 के चुनावी आंकड़े
| साल | विजेता | पार्टी | वोट | उपविजेता | पार्टी | वोट | जीत का अंतर |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| 2020 | प्रेम शंकर प्रसाद | RJD | 67,807 | मिथिलेश तिवारी | BJP | 56,694 | 11,113 |
| 2015 | मिथिलेश तिवारी | BJP | 56,162 | मंजीत कुमार सिंह | JDU | 42,047 | 14,115 |
| 2010 | मंजीत कुमार सिंह | JDU | 70,105 | देवदत्त प्रसाद | RJD | 33,581 | 36,524 |
जनसांख्यिकीय एवं आर्थिक स्थिति
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भू-भूमि और अर्थव्यवस्था: यह क्षेत्र गंडक बेसिन में स्थित है और कृषि-प्रधान है—यहां मुख्य फसलें हैं धान, गेहूं और गन्ना ।
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मूल्य-समर्थन और रोजगार: युवा वर्ग रोजगार की तलाश में पंजाब, गुजरात और दिल्ली जैसे राज्यों में पलायन करता है, तथा घर में रेमिटेंस की बड़ी भूमिका होती है
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विकास अवसंरचना: सड़क संपर्क सीमित है, उच्च शिक्षा संस्थानों की पहुँच कमजोर है
राजनीतिक इतिहास और पिछले चुनाव परिणाम
महत्वपूर्ण इतिहास
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1952–1990: प्रारंभिक दशकों में कांग्रेस, जनसंघ/जनता पार्टी जैसे दलों का प्रभाव देखा गया। उदाहरण: Braj Kishor Narain Singh जप या कांग्रेस से लगातार चार चुनाव जीते; 1995 में Lal Babu Yadav (JD) जीते ।
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2000–2010: इस अवधि में Manjeet Kumar Singh (Samata Party, बाद में JD(U)) और Deo Dutt Prasad Yadav (RJD) के बीच प्रतिस्पर्धा बढ़ी
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2015: BJP के Mithilesh Tiwari ने जीत हासिल की
2020 का चुनाव
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विजेता: RJD के Prem Shankar Prasad ने 67,807 वोट (37.01%) पाकर सीट जीती
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मुख्य प्रतिद्वंद्वी: BJP के Mithilesh Tiwari—56,694 वोट (30.95%) ।
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इंडिपेंडेंट उम्मीदवार: Manjeet Kumar Singh—43,354 वोट (23.67%) ।
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वोटिंग विवरण: RJD ने करीब 11,113 वोटों से जीत हासिल की
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मतदाता विवरण: 2020 में कुल रजिस्टर्ड मतदाता—317,459; जिनमें SC ≈9.72%, ST ≈0.32%, मुस्लिम ≈17.94%; 2024 लोकसभा चुनाव तक यह संख्या बढ़कर 335,737 हुई, जबकि 3,881 मतदाता पलायन कर गए थे
2024 लोकसभा चुनाव का प्रभाव
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लोकसभा में स्थिति: 2024 में Gopalganj लोकसभा क्षेत्र में JD(U), जो NDA की घटक है, ने 16,964 वोटों से बढ़त बनाई—जिससे Baikunthpur विधानसभा क्षेत्र में अगले विधानसभा चुनाव (2025) को लेकर संभावित रोमांचक मुकाबले के संकेत मिले
2025 विधानसभा चुनाव के लिए राजनीतिक परिदृश्य
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पूर्व मतदाता रुझान: यह क्षेत्र हमेशा से परिवर्तनशील रहा है—यहां उम्मीदवारों की वफादारी और पक्ष दोनों समय के साथ बदलते रहे हैं
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संभावित मुकाबला: NDA (BJP + JD(U)) और RJD के बीच तीव्र मुकाबले की संभावना है—विशेष रूप से यदि JD(U) लोकसभा स्तर पर बढ़त बना पाई है तो यह विधानसभा क्षेत्र में उनके लिए संकेत माना जा सकता है, लेकिन RJD की पकड़ भी मजबूत रही है
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घरेलू अर्थव्यवस्था और विकास मुद्दे: पलायन, कम सड़क नेटवर्क, शिक्षा और आर्थिक विकास जैसी स्थानीय चुनौतियां 2025 में चुनावी मुद्दों में शामिल हो सकती हैं।
2025 के लिए समीकरण
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यहां मुख्य मुकाबला RJD और BJP के बीच ही देखा जा रहा है।
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JDU और अन्य दलों के प्रत्याशी भी “किंगमेकर” की भूमिका में हो सकते हैं।
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टिकट घोषणा के बाद समीकरण और स्पष्ट हो जाएंगे।
बैकुण्ठपुर विधानसभा क्षेत्र का चुनावी मैजाज जातीय, विकास और पार्टी संगठन पर टिका होगा। पुराने परिणामों के अनुसार, बढ़िया टक्कर देखने को मिल सकती है, और जनता बदलते राजनीतिक समीकरणों के आधार पर चुनावी फैसला लेगी।
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