बरौली विधानसभा क्षेत्र, गोपालगंज जिले का एक प्रमुख निर्वाचन क्षेत्र है जो बिहार की राजनीति में खास महत्व रखता है। यह सीट सामान्य (अनारक्षित) श्रेणी की है और गोपालगंज (SC) लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है। 2025 में यहां चुनावी मुकाबला कई दलों के बीच कांटे का रहने की उम्मीद है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि व राजनीतिक समीकरण
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बरौली सीट का गठन 1951 में हुआ और अब तक यहां 17 बार चुनाव हो चुके हैं।
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शुरुआती दौर में कांग्रेस का दबदबा था – कांग्रेस के वरिष्ठ नेता व बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री अब्दुल गफूर यहां से चार बार विधायक रहे।
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पिछले दो दशकों में भाजपा ने इस सीट पर मजबूत पकड़ बनाई है। 2000 से 2020 तक हुए छह चुनावों में से पांच पर भाजपा विजयी रही है।
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2015 में राजद के मोहम्मद नेमतुल्लाह ने भाजपा के राम प्रवेश राय को मात्र 504 वोट से हराया था। लेकिन 2020 में भाजपा ने वापसी की.
पिछली चुनावी स्थिति
| वर्ष | विजेता | पार्टी | वोट | उपविजेता | पार्टी | वोट | जीत का अंतर | वोट शेयर |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| 2020 | राम प्रवेश राय | भाजपा | 81,956 | रियाजुल हक राजू | राजद | 67,801 | 14,155 | 46.55% (BJP), 38.51% (RJD) |
| 2015 | मोहम्मद नेमतुल्लाह | राजद | 61,690 | राम प्रवेश राय | भाजपा | 61,186 | 504 | 40% (दोनों) |
| 2010 | रामप्रवेश राय | भाजपा | 45,234 | एम नेमतुल्लाह | राजद | 34,820 | 10,414 | 39% (BJP), 30% (RJD) |
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2020 के चुनाव में 62.3% मतदान हुआ था। बरौली सीट पर भाजपा ने राजद को 14,155 वोट के अंतर से हराया था.
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पिछले तीन चुनावों के आंकड़ों से स्पष्ट है कि भाजपा और राजद के बीच यहां प्रतिस्पर्धा कड़ी रहती है।
प्रमुख जातीय और सामाजिक समीकरण
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बरौली क्षेत्र में यादव, भूमिहार, राजपूत, मुस्लिम, महतो, और अन्य पिछड़ी जातियों का प्रभाव है।
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जातिगत समीकरण की वजह से भाजपा और राजद दोनों को जीत के लिए अपने परंपरागत वोट बैंक के अलावा अन्य वर्गों में भी पैठ बनानी होती है।
पिछले चुनाव डेटा से उपलब्ध संकेत
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2020 का चुनाव
बरौली विधानसभा सीट पर भाजपा के रामप्रवेश राय ने रियाजुल हक (राजद) को लगभग 14,155 वोटों के अंतर से हराया था।(ray को 81,956 वोट (46.55%) मिले, जबकि राजद के हक को 67,801 वोट (38.51%) -
2024 लोकसभा चुनाव (बरौली क्षेत्र)
इस विधानसभा क्षेत्र से जुड़े लोकसभा चुनाव में, जदयू के Dr. आलोक कुमार सुमन ने राजद के सुरेंद्र राम को 28,763 वोटों के अंतर से हराया। इस जीत से एनडीए (BJP-JDU गठबंधन) की शक्ति को मजबूत माना जा रहा है
राजनीतिक माहौल और ओपिनियन पोल
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राजनीतिक रुझान
बिहार में हालिया सर्वे और राजनीतिक विश्लेषण बताते हैं कि एनडीए (BJP + JDU) की स्थिति मजबूत बनी हुई है। NDA महाराष्ट्र की तुलना में बिहार में भी फॉरवर्ड कास्ट और महिलाओं में अपेक्षाकृत समर्थन बना रहे हैं, उधर महागठबंधन—मुख्यतः राजद—भी कुछ ताकत के साथ मैदान में है -
हालिया घटनाक्रम
‘ऑपरेशन सिंदूर’ जैसे घटनाओं ने संभावना जताई है कि यदि चुनाव अभी रखा जाए, तो एनडीए को लाभ मिल सकता है
निष्कर्ष: बरौली सीट पर संभावित रुझान
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एनडीए का मजबूत पोजिशन — लगातार लोकसभा और विधानसभा में अच्छे प्रदर्शन के साथ, BJP और JDU दोनों ही इस क्षेत्र में मजबूत हैं।
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राजद का चुनौतीपूर्ण लेकिन मौजूद प्रभाव — 2020 में करीबी मुकाबला और महागठबंधन का अस्तित्व बताता है कि राजद भी पूर्णतः अनदेखा नहीं किया जा सकता।
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वोटिंग मतदाताओं का उत्साह — मतदान प्रतिशत अभी भी 60% से नीचे रह रहा है, जिससे मतदाता सक्रियता और पार्टियों की रणनीतियां महत्वपूर्ण हो जाती हैं
2025 चुनावी परिदृश्य और संभावित दल/उम्मीदवार
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2025 में बीजेपी, राजद, कांग्रेस और जन सुराज (प्रशांत किशोर की पार्टी) के बीच मुकाबला रोचक होगा.
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वर्तमान विधायक राम प्रवेश राय (भाजपा) संभवतः पुनः उम्मीदवार होंगे।
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राजद की ओर से रियाजुल हक राजू या मोहम्मद नेमतुल्लाह मैदान में आ सकते हैं।
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जदयू, कांग्रेस, जन सुराज, बीएसपी, सहित अन्य दल और कई निर्दलीय प्रत्याशी भी मैदान में उतर सकते हैं.





