सिवान विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र बिहार के 243 विधानसभा सीटों में से एक है। यह विधानसभा सीट एक सामान्य श्रेणी की विधानसभा सीट है। यह विधानसभा सीट सिवान जिले में स्थित है और सिवान संसदीय सीट के 6 विधानसभा सीटों में से एक है। गौरतलब है कि इस चुनाव में प्रशांत किशोर की जनसुराज पार्टी भी चुनावी मैदान में है। जनसुराज पार्टी बिहार की 243 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ने वाली है। ऐसे में बिहार का विधानसभा चुनाव इस बार और भी ज्यादा दिलचस्प होने वाला है। ऐसे में चलिए आपको बताते हैं सिवान विधानसभा सीट का चुनावी इतिहास।
जातीय समीकरण और मतदाता
साल 2020 में हुए विधानसभा चुनाव के मद्देनजर भोरे विधानसभा सीट पर अगर कुल मतदाताओं की बात करें तो उनकी संख्या 311523 है। इस सीट पर कुछ जातियों की आबादी अच्छी खासी है, खासकर मुस्लिम आबादी निर्णायक भूमिका में है। इस सीट पर मुस्लिम वोटरों की संख्या 80372 है जो कि कुल 25.8 फीसदी हैं। इसके अगर जातियों में भी उपनामों के आधार पर वोटरों की बात करें तो प्रसाद जाति के वोटरों की संख्या 30529 है जो कि 9.8 फीसदी है। इसके अलावा शाह, यादव, चौधरी, टक्कर उपनामों को वोटरों की संख्या भी काफी अच्छी खासी है।
पिछले चुनावों में क्या-क्या हुआ?
इस सीट पर साल 2020 में हुए विधानसभा चुनाव में राजद के उम्मीदवार अवध विहारी चौधरी ने जीत दर्ज की थी, जिन्हें 76785 वोट मिले थे। इसके अलावा दूसरे स्थान पर थे भाजपा के उम्मीदवार ओम प्रकाश यादव और तीसरे स्थान पर निर्दलीय उम्मीदवार विनोद कुमार श्रीवास्तव थे। वहीं साल 2015 के विधानसभा चुनाव की अगर बात करें तो इस सीट पर भाजपा के उम्मीदवार व्यासदेव प्रसाद ने जीत दर्ज की थी, जिन्हें 55156 वोट्स मिले थे। इसके अलावा जदयू के बबलू प्रसाद दूसरे स्थान पर थे और अवध विहारी चौधरी निर्दलीय उम्मीदवार तीसरे स्थान पर थें। बता दें कि इस सीट पर साल 2005 से 2015 तक भाजपा का कब्जा था। हालांकि साल 2020 के चुनाव में इस सीट पर राजद के उम्मीदवार ने जीत दर्ज की थी।
सिवान विधानसभा चुनाव 2025 राजनीतिक प्रतिस्पर्धा तेज रहने की संभावना है। वर्तमान में यह सीट राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के अवध बिहारी चौधरी के कब्जे में है, जिन्होंने 2020 के चुनाव में भाजपा के ओम प्रकाश यादव को मामूली वोट अंतर से हराया था।
इस विधानसभा क्षेत्र में कुल लगभग 3,11,000 से 3,20,000 मतदाता हैं, जिनमें से लगभग 25.8% मुस्लिम मतदाता हैं जो चुनावी नतीजों में निर्णायक भूमिका निभाते हैं। इसके अलावा यादव, भूमिहार और दलित वोटर भी महत्वपूर्ण जातीय समूह हैं। सिवान विधानसभा क्षेत्र में आमतौर पर मतदान प्रतिशत 54% से 57% के बीच रहता है, जो चुनाव परिणाम को प्रभावित कर सकता है।
2025 चुनाव में प्रमुख मुकाबला राजद, भाजपा, जदयू, और कांग्रेस समेत कुछ अन्य गठबंधनों और पार्टियों के बीच होने की संभावना है, साथ ही जनसुराज पार्टी जैसी नई राजनीतिक ताकतें भी मैदान में हैं। चुनावी मुद्दों में स्थानीय विकास, रोजगार, सामाजिक न्याय, जातीय समीकरण, महिला सशक्तिकरण और आधारभूत सुविधाएं प्रमुख रहेंगे।
पिछले चुनावों के परिणाम देखें तो 2010, 2015 तक भाजपा का प्रभुत्व रहा, लेकिन 2020 में राजद ने इस सीट पर वापसी की थी। इस बार का चुनाव भी इसी कड़ी में बेहद प्रतिस्पर्धात्मक माना जा रहा है।
सारांश में, सिवान विधानसभा चुनाव 2025 एक जबरदस्त मुकाबले वाला चुनाव होगा, जिसमें जातीय समीकरण, मतदान प्रतिशत, और स्थानीय विकास के मुद्दे निर्णायक भूमिका निभाएंगे। वर्तमान विधायक अवध बिहारी चौधरी की वापसी और विभिन्न पार्टियों के गठबंधन इस क्षेत्र की राजनैतिक तस्वीर को और भी दिलचस्प बनाएंगे।
प्रमुख वर्तमान राजनीतिक खिलाड़ी और कड़ी टक्कर
| पार्टी/प्रत्याशी | स्थिति और प्रभाव |
|---|---|
| अवध बिहारी चौधरी (RJD) | पांच बार विधायक, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष; क्षेत्र में मजबूत आधार |
| NDA (BJP–JDU) | पिछले चुनाव में कड़ी टक्कर में रही; सियासी गठबंधन रणनीतियाँ उभर रही हैं |
| जनसुराज पार्टी (P.K.‑led) | इस बार 243 में चुनाव लड़ने की घोषणा; सिवान में मुकाबले की संभावना बढ़ी |
| तीसरा मोर्चा (SBSP‑ले) | मुकेश सहनी (VIP) और ओम प्रकाश राजभर (SBSP) जैसी पार्टियां संभावित OBC वोट विभाजन कर सकती हैं |
चुनावी माहौल और रणनीतिक रुझान
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मतदान प्रतिशत आमतौर पर 54–57% के बीच रहता है—जिसमें 2025 के लिए थोड़ा बदलाव भी निर्णायक हो सकता है
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INDIA ब्लॉक (मुख्यतः RJD–कांग्रेस–VIP) सीट शेयरिंग पर सहमति बनाने की प्रक्रिया में है, जिससे गठबंधन का रुख और प्रत्याशियों की भूमिका स्पष्ट हो रही है
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एक जोखिम यह भी है कि वोटर सूची (मतदाता संशोधन) से जुड़े विवाद—जिनका राजनीतिक दलों ने विरोध किया है—चुनाव के निष्पक्षता और स्वीकृति को चुनौती दे सकते हैं
निष्कर्ष: इस चुनाव में क्या दृष्टिकोण मायने रखेंगे?
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RJD का मजबूत पकड़: अवध बिहारी चौधरी का क्षेत्र में गहरा जनाधार और पिछली जीत उन्हें शीर्ष दावेदार बनाती है।
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NDA की चुनौती: JDU/BJP गठबंधन पिछली बार सीधी मुकाबले में रहा है—इस बार सीट बंटवारे और अभियान रणनीतियाँ सफलता तय कर सकती हैं।
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तीसरे मोर्चे का प्रभाव: जनसुराज पार्टी और ऑब्सी वोटर्स को विभाजित करने की संभावनाएं, डाउन-पंडल उम्मीदवारों को मौका दे सकती हैं।
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मतदाता सूची विवाद: चुनावी निष्पक्षता और भरोसे की हवा को यह मुद्दा हवा देगा—जिसका असर बाजी को पलटने में भी हो सकता है।
सिवान चुनाव 2025 में कौन सा दल सबसे मजबूत माना जा रहा है
सिवान विधानसभा चुनाव 2025 में सबसे मजबूत दल के रूप में वर्तमान में राजद (राष्ट्रीय जनता दल) को माना जा रहा है, क्योंकि इस सीट पर 2020 के चुनाव में राजद के अवध बिहारी चौधरी ने बीजेपी के ओम प्रकाश यादव को कम अंतर से हराया था और इसकी मजबूत पकड़ बनाए हुए हैं। सिवान में मुस्लिम मतदाता, जो कुल मतदाता का लगभग 25.8% हैं, राजद के पक्ष में निर्णायक भूमिका निभाते हैं, जबकि यादव व भूमिहार जाति के वोट भी इस चुनाव के समीकरण को प्रभावित करते हैं।
हालांकि, बीजेपी को भी इस सीट पर मजबूत माना जाता है क्योंकि सिवान सीट उसके लिए एक गढ़ रही है और भाजपा के पास कई दावेदार हैं। एनडीए गठबंधन में जदयू और भाजपा की भागीदारी इस बार भी महत्वपूर्ण है। चुनावी माहौल में बीजेपी की वापसी की उम्मीद भी जमीनी स्तर पर पाई जाती है, खासकर 2024 के लोकसभा चुनाव में जदयू की बढ़त को देखते हुए।
इसके अलावा, प्रशांत किशोर की जनसुराज पार्टी भी चुनाव में उतरेगी, जिससे समीकरण और भी पेचीदा हो सकते हैं।
संक्षेप में, इस चुनाव में राजद को अग्रणी और मजबूत प्रत्याशी माना जाता है, लेकिन बीजेपी के मजबूत दावेदारों और गठबंधन के कारण मुकाबला कड़ा रहेगा, जिससे सिवान विधानसभा चुनाव 2025 में राजद और भाजपा के बीच मुख्य टक्कर की संभावना सबसे अधिक है।






